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PMKSY Watershed Scheme: कैसे बदली किसानों की तस्वीर, जानिए योजना का पूरा लाभ, रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेज

PMKSY Watershed Scheme: How the picture of farmers changed, know the full benefits of the scheme, registration process and necessary documents

Fiza by Fiza
May 26, 2026
in योजना
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PMKSY Watershed Scheme

PMKSY Watershed Scheme

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PMKSY Watershed Scheme: भारत में खेती का सबसे बड़ा आधार पानी है। लेकिन लगातार घटते भूजल स्तर, अनियमित बारिश और सूखे जैसी समस्याओं ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ऐसे समय में केंद्र सरकार ने किसानों को जल संरक्षण और टिकाऊ खेती से जोड़ने के लिए “वाटरशेड विकास कार्यक्रम” को बढ़ावा दिया। यह योजना खासतौर पर उन क्षेत्रों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है जहाँ बारिश कम होती है या पानी तेजी से खत्म हो रहा है।

आज देश के कई राज्यों में इस योजना के जरिए खेतों तक पानी पहुंचा है, सूखी जमीन फिर से उपजाऊ बनी है और किसानों की आय में सुधार देखने को मिला है। यही वजह है कि अब वाटरशेड विकास कार्यक्रम ग्रामीण विकास और कृषि सुधार का बड़ा मॉडल बनता जा रहा है।

क्या है PMKSY Watershed Scheme?

वाटरशेड विकास कार्यक्रम एक ऐसी सरकारी योजना है जिसका उद्देश्य वर्षा जल को संरक्षित करना, मिट्टी का कटाव रोकना और भूजल स्तर को बढ़ाना है। इस योजना के तहत गांवों और खेती वाले क्षेत्रों में छोटे-छोटे जल स्रोत, तालाब, चेक डैम, खेत तालाब, कंटूर बंडिंग और पौधारोपण जैसे कार्य किए जाते हैं।

सरकार का मानना है कि यदि गांव स्तर पर पानी को रोका जाए तो खेती अधिक टिकाऊ और लाभदायक बन सकती है। इसी सोच के साथ देशभर में Integrated Watershed Management Programme (IWMP) और बाद में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) के तहत Watershed Development Component को आगे बढ़ाया गया।

वाटरशेड विकास कार्यक्रम की शुरुआत कैसे हुई?

भारत में वाटरशेड आधारित विकास की शुरुआत 1980 के दशक में हुई थी। उस समय देश के कई हिस्सों में सूखा और जल संकट तेजी से बढ़ रहा था। इसके बाद केंद्र सरकार ने अलग-अलग जल संरक्षण योजनाओं को एक साथ जोड़कर Integrated Watershed Management Programme शुरू किया।

बाद में वर्ष 2015 में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत Watershed Development Component को शामिल किया गया। इसका मुख्य लक्ष्य था:

  • हर खेत तक पानी पहुंचाना
  • बारिश के पानी का संरक्षण
  • भूजल स्तर बढ़ाना
  • खेती योग्य भूमि को सुधारना
  • किसानों की आय बढ़ाना

आज यह योजना देश के हजारों गांवों में लागू की जा चुकी है।

किसानों के लिए क्यों जरूरी है यह योजना?

खेती पूरी तरह पानी पर निर्भर करती है। यदि समय पर सिंचाई नहीं मिले तो उत्पादन कम हो जाता है। वाटरशेड विकास कार्यक्रम किसानों को सिर्फ पानी नहीं देता बल्कि खेती को लंबे समय तक सुरक्षित बनाने में मदद करता है। इस योजना से किसानों को कई बड़े फायदे मिलते हैं:

खेतों में पानी की उपलब्धता बढ़ती है

बारिश का पानी जमीन में रिसता है जिससे कुएं, ट्यूबवेल और तालाब दोबारा भरने लगते हैं।

मिट्टी का कटाव रुकता है

ढलान वाले क्षेत्रों में मिट्टी बहने की समस्या कम होती है जिससे जमीन उपजाऊ बनी रहती है।

सिंचाई लागत घटती है

जब भूजल स्तर बढ़ता है तो किसानों को कम गहराई से पानी मिल जाता है।

फसल उत्पादन में सुधार

नियमित पानी मिलने से गेहूं, धान, दालें, तिलहन और बागवानी फसलों का उत्पादन बढ़ता है।

पशुपालन और बागवानी को बढ़ावा

जल संरक्षण के कारण गांवों में पशुओं और पौधों के लिए भी पानी उपलब्ध रहता है।

वाटरशेड विकास कार्यक्रम के तहत कौन-कौन से काम किए जाते हैं?

इस योजना के तहत गांव और खेत स्तर पर कई विकास कार्य कराए जाते हैं:

  • चेक डैम निर्माण
  • खेत तालाब
  • कंटूर ट्रेंच
  • मेड़बंदी
  • रेन वाटर हार्वेस्टिंग
  • नालों का उपचार
  • पौधारोपण
  • चारागाह विकास
  • सूक्ष्म सिंचाई को बढ़ावा
  • जल संग्रहण संरचनाएं

इन कार्यों का उद्देश्य गांव में बारिश के पानी को रोकना और जमीन में उतारना होता है।

किसान इस योजना का फायदा कैसे उठाएँ?

यदि किसी किसान का क्षेत्र वाटरशेड परियोजना में शामिल है तो वह योजना का सीधा लाभ उठा सकता है। इसके लिए किसानों को स्थानीय ग्राम पंचायत, कृषि विभाग या जिला ग्रामीण विकास एजेंसी से संपर्क करना होता है।

योजना का लाभ लेने के मुख्य तरीके

  • ग्राम सभा में भाग लें
  • वाटरशेड समिति से जुड़ें
  • खेत विकास कार्यों के लिए आवेदन करें
  • जल संरक्षण गतिविधियों में सहयोग दें
  • सामुदायिक परियोजनाओं में हिस्सा लें

कई राज्यों में किसानों को खेत तालाब, ड्रिप सिंचाई और जल संरक्षण संरचनाओं पर अनुदान भी दिया जाता है।

वाटरशेड विकास कार्यक्रम की रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया

राज्य के अनुसार आवेदन प्रक्रिया अलग हो सकती है लेकिन सामान्य तौर पर प्रक्रिया इस प्रकार होती है:

चरण 1: स्थानीय विभाग से संपर्क

किसान को ग्राम पंचायत, ब्लॉक कार्यालय या कृषि विभाग में जानकारी लेनी होती है।

चरण 2: आवेदन फॉर्म भरना

योजना के लिए आवेदन पत्र भरना होता है जिसमें किसान की जमीन और सिंचाई संबंधी जानकारी दी जाती है।

चरण 3: दस्तावेज जमा करना

आवेदन के साथ जरूरी दस्तावेज जमा करने होते हैं।

चरण 4: भूमि सत्यापन

अधिकारियों द्वारा खेत और भूमि का निरीक्षण किया जाता है।

चरण 5: योजना स्वीकृति

योग्य पाए जाने पर किसान को योजना में शामिल किया जाता है।

योजना के लिए जरूरी दस्तावेज

वाटरशेड विकास कार्यक्रम में आवेदन के लिए सामान्यतः ये दस्तावेज मांगे जाते हैं:

  • आधार कार्ड
  • निवास प्रमाण पत्र
  • भूमि रिकॉर्ड या खतौनी
  • बैंक पासबुक
  • पासपोर्ट साइज फोटो
  • मोबाइल नंबर
  • किसान पंजीकरण प्रमाण
  • जाति प्रमाण पत्र (यदि लागू हो)

कुछ राज्यों में भू-अभिलेख ऑनलाइन भी स्वीकार किए जाते हैं।

किन राज्यों में किसान उठा सकते हैं योजना का लाभ?

यह योजना देश के कई राज्यों में चलाई जा रही है। खासतौर पर सूखा प्रभावित और कम वर्षा वाले क्षेत्रों में इसे ज्यादा प्राथमिकता दी गई है।

प्रमुख राज्य

  • राजस्थान
  • मध्य प्रदेश
  • उत्तर प्रदेश
  • बिहार
  • महाराष्ट्र
  • गुजरात
  • झारखंड
  • छत्तीसगढ़
  • तेलंगाना
  • आंध्र प्रदेश
  • कर्नाटक
  • तमिलनाडु
  • ओडिशा
  • हरियाणा

इन राज्यों में लाखों हेक्टेयर भूमि को वाटरशेड परियोजनाओं से जोड़ा गया है।

पिछले 5 सालों में किसानों को कितना फायदा मिला?

पिछले कुछ वर्षों में जल संरक्षण और वाटरशेड परियोजनाओं का असर कई राज्यों में दिखाई दिया है। सरकारी रिपोर्टों और कृषि विशेषज्ञों के अनुसार:

  • हजारों गांवों में भूजल स्तर सुधरा
  • सूखा प्रभावित क्षेत्रों में खेती बढ़ी
  • कई इलाकों में दूसरी फसल लेना संभव हुआ
  • किसानों की सिंचाई लागत घटी
  • बागवानी और पशुपालन को बढ़ावा मिला
  • ग्रामीण रोजगार में बढ़ोतरी हुई

महाराष्ट्र, राजस्थान और कर्नाटक जैसे राज्यों में कई गांवों ने जल संकट से बाहर निकलकर बेहतर कृषि उत्पादन हासिल किया।

महिलाओं और छोटे किसानों को भी मिला फायदा

वाटरशेड विकास कार्यक्रम का असर सिर्फ बड़े किसानों तक सीमित नहीं रहा। महिला स्वयं सहायता समूहों और छोटे किसानों को भी इस योजना से लाभ मिला है।

कई गांवों में महिलाओं को पौधारोपण, नर्सरी विकास और जल संरक्षण गतिविधियों से रोजगार मिला। वहीं छोटे किसानों को सिंचाई सुविधा मिलने से उनकी खेती मजबूत हुई।

जल संरक्षण और आधुनिक खेती का नया मॉडल

आज वाटरशेड विकास कार्यक्रम सिर्फ जल संरक्षण योजना नहीं बल्कि Climate Smart Agriculture का हिस्सा बन चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में पानी बचाने वाली खेती ही टिकाऊ खेती होगी।

योजना के जरिए किसान अब इन आधुनिक तरीकों को भी अपना रहे हैं:

  • ड्रिप सिंचाई
  • स्प्रिंकलर सिंचाई
  • मल्चिंग
  • फसल विविधीकरण
  • वर्षा आधारित खेती
  • जैविक खेती

गांवों की बदली तस्वीर

देश के कई गांव ऐसे हैं जहां पहले पानी के लिए संघर्ष होता था लेकिन आज वहां खेतों में हरियाली दिखाई देती है। तालाब और चेक डैम बनने से गांवों में जल स्तर सुधरा है।

कई किसानों ने अब धान और गेहूं के साथ बागवानी फसलों की खेती भी शुरू कर दी है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है।

योजना से जुड़ी चुनौतियाँ

हालांकि योजना सफल रही है लेकिन कुछ चुनौतियाँ अभी भी मौजूद हैं:

  • कई गांवों में जागरूकता की कमी
  • परियोजनाओं का धीमा क्रियान्वयन
  • रखरखाव की समस्या
  • तकनीकी जानकारी की कमी
  • छोटे किसानों तक सीमित पहुंच

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ग्राम स्तर पर समुदाय की भागीदारी बढ़े तो योजना और सफल हो सकती है।

भविष्य में क्या हो सकता है बड़ा बदलाव?

सरकार अब वाटरशेड परियोजनाओं को डिजिटल तकनीक और GIS मैपिंग से जोड़ रही है। ड्रोन सर्वे, सैटेलाइट मैपिंग और जल निगरानी तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। भविष्य में यह योजना किसानों को जल संकट से बचाने में और बड़ी भूमिका निभा सकती है।

निष्कर्ष

वाटरशेड विकास कार्यक्रम  (PMKSY Watershed Scheme)  भारत के किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण योजना बन चुका है। यह सिर्फ पानी बचाने की योजना नहीं बल्कि खेती को भविष्य के लिए सुरक्षित बनाने का बड़ा प्रयास है। जल संरक्षण, मिट्टी सुधार और सिंचाई सुविधा के जरिए इस योजना ने लाखों किसानों को राहत दी है।

आज जब देश जल संकट और बदलते मौसम की चुनौती का सामना कर रहा है, तब वाटरशेड आधारित खेती ग्रामीण भारत को मजबूत बनाने का बड़ा रास्ता बन सकती है। यदि किसान सही जानकारी और सरकारी सहयोग के साथ इस योजना से जुड़ें तो कम पानी में भी बेहतर खेती संभव है।

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