Azolla cultivation कम जगह, कम पानी और सीमित निवेश में किया जाने वाला एक उपयोगी कृषि और पशुपालन आधारित कार्य है। एजोला पानी की सतह पर तैरने वाला एक छोटा जलीय फर्न है, जो अनुकूल वातावरण में तेजी से बढ़ता है। इसका उपयोग मुख्य रूप से गाय, भैंस, बकरी, भेड़, मुर्गी, सूअर और मछलियों के पूरक आहार के रूप में किया जाता है। इसके अलावा, धान के खेतों में इसका उपयोग जैविक नाइट्रोजन स्रोत और हरी खाद के रूप में भी किया जाता है। उचित तापमान, हल्की छाया, स्वच्छ पानी, गोबर, मिट्टी और फॉस्फोरस की संतुलित मात्रा उपलब्ध होने पर किसान नियमित रूप से एजोला का उत्पादन कर सकते हैं।
पशुपालन में कुल खर्च का एक बड़ा हिस्सा चारा और दाना खरीदने में जाता है। हरे चारे की मौसमी कमी, दाना मिश्रण की बढ़ती कीमत और सीमित कृषि भूमि के कारण छोटे एवं सीमांत पशुपालकों के लिए संतुलित पशु आहार उपलब्ध कराना कठिन हो जाता है। ऐसी स्थिति में Azolla cultivation किसानों को अपने ही फार्म पर कम जगह में ताजा पूरक चारा तैयार करने का अवसर देता है। हालांकि, एजोला को पशु के संपूर्ण आहार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। इसे हरे चारे, सूखे चारे, संतुलित दाना और खनिज मिश्रण के साथ सीमित तथा संतुलित मात्रा में देना चाहिए।
एजोला की पत्तियां बहुत छोटी होती हैं और यह पानी की सतह पर हरे रंग की घनी परत जैसा दिखाई देता है। इसके भीतर एनाबीना नामक नील-हरित शैवाल सहजीवी रूप में पाया जाता है, जो वायुमंडलीय नाइट्रोजन स्थिर करने में सहायता करता है। इसी गुण के कारण एजोला पशु आहार के साथ-साथ धान की खेती में भी उपयोगी माना जाता है। भारत में Azolla cultivation मुख्य रूप से डेयरी फार्मिंग, मुर्गीपालन, बकरीपालन, मछलीपालन और एकीकृत कृषि प्रणाली से जुड़े किसानों द्वारा अपनाया जा रहा है।
Azolla Cultivation के फायदे
Azolla cultivation का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसके लिए बड़े खेत या महंगे ढांचे की आवश्यकता नहीं होती। किसान एक वर्गमीटर के छोटे बेड से भी शुरुआत कर सकता है। पशुशाला के पास, घर के पीछे, बगीचे के किसी छायादार हिस्से, पॉलीहाउस के किनारे या खाली भूमि पर प्लास्टिक लाइन वाला उथला बेड बनाकर एजोला उगाया जा सकता है। एक बार बेड सही तरीके से स्थापित हो जाने के बाद नियमित प्रबंधन द्वारा प्रतिदिन ताजा एजोला प्राप्त किया जा सकता है।
एजोला तेजी से बढ़ने वाला जलीय पौधा है। अच्छा कल्चर, संतुलित पोषण, उपयुक्त तापमान और पर्याप्त छाया मिलने पर बेड लगभग 10 से 15 दिनों में भर सकता है। इसके बाद किसान रोजाना या एक दिन छोड़कर कटाई कर सकता है। इसके लिए गहरे तालाब की आवश्यकता नहीं होती और सामान्यतः 5 से 10 सेंटीमीटर पानी की गहराई पर्याप्त रहती है।
अपने पशुओं के लिए एजोला उत्पादन करने से किसान बाजार से खरीदे जाने वाले कुछ पूरक आहार पर निर्भरता कम कर सकता है। यह दाना मिश्रण का सीधा विकल्प नहीं है, लेकिन संतुलित पशु आहार में प्रोटीन, खनिज और विटामिन के अतिरिक्त स्रोत के रूप में उपयोगी हो सकता है। उचित सुरक्षा और तापमान प्रबंधन के साथ इसे वर्ष के अधिकांश समय उगाया जा सकता है। पुराने बेड की मिट्टी, गोबर और जैविक अवशेषों को बाद में खाद के रूप में खेत में इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे यह पर्यावरण के अनुकूल तकनीक भी बनती है।
एजोला का पोषण मूल्य
एजोला की पोषण संरचना उसकी प्रजाति, पानी की गुणवत्ता, तापमान, खाद प्रबंधन और कटाई अवस्था पर निर्भर करती है। सूखे पदार्थ के आधार पर एजोला में लगभग 20 से 30 प्रतिशत तक प्रोटीन पाया जा सकता है। इसके अलावा इसमें लगभग 3 से 5 प्रतिशत वसा, 10 से 15 प्रतिशत खनिज तत्व और लगभग 10 से 15 प्रतिशत रेशा हो सकता है। इसमें कैल्शियम, फॉस्फोरस, आयरन, मैग्नीशियम, पोटैशियम, बीटा कैरोटीन, कुछ विटामिन और आवश्यक अमीनो एसिड भी पाए जाते हैं।
ताजे एजोला में लगभग 90 प्रतिशत या उससे अधिक नमी हो सकती है। इसलिए एक किलोग्राम ताजा एजोला को एक किलोग्राम सूखे दाने या खली के बराबर नहीं माना जा सकता। पशुपालकों को एजोला की मात्रा तय करते समय उसकी अधिक नमी और कम सूखे पदार्थ को समझना चाहिए। इसे एक पूरक हरे आहार के रूप में उपयोग करना अधिक उपयुक्त है।
Azolla Cultivation के लिए उपयुक्त जलवायु
एजोला को हल्की गर्म, नम और आंशिक छाया वाली जलवायु पसंद होती है। सामान्यतः 20 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान इसकी अच्छी वृद्धि के लिए उपयुक्त माना जाता है। अत्यधिक गर्मी, बहुत कम तापमान, तेज सीधी धूप और गर्म हवाएं उत्पादन को प्रभावित कर सकती हैं। गर्मियों में शेड नेट और पानी की पर्याप्त गहराई बनाए रखना जरूरी होता है, जबकि सर्दियों में बेड को ठंडी हवा और पाले से बचाना चाहिए।
एजोला को हल्की या छनकर आने वाली धूप की आवश्यकता होती है। पूरे दिन तेज सीधी धूप पड़ने पर इसकी पत्तियां लाल, भूरी या झुलसी हुई दिखाई दे सकती हैं। इस समस्या से बचने के लिए बेड के ऊपर लगभग 50 प्रतिशत छाया देने वाला शेड नेट लगाया जा सकता है। पानी का पीएच लगभग 5.5 से 7.5 के बीच रहना बेहतर माना जाता है। बहुत अधिक अम्लीय या क्षारीय पानी एजोला की वृद्धि को धीमा कर सकता है।
Azolla Cultivation के लिए स्थान का चयन
एजोला बेड के लिए समतल, साफ और हल्की छाया वाला स्थान चुनना चाहिए। स्थान पशुशाला और पानी के स्रोत के पास हो तो रोजाना पानी देने, कटाई करने और पशुओं को खिलाने में सुविधा रहती है। बेड ऐसी जगह नहीं बनाना चाहिए जहां वर्षा का गंदा पानी, नाली का पानी, कीटनाशक मिला पानी या अन्य दूषित पानी प्रवेश कर सके। पेड़ों के ठीक नीचे बेड बनाने से बहुत अधिक पत्तियां गिर सकती हैं, इसलिए हल्की छाया वाली खुली जगह अधिक उपयुक्त होती है।
बेड को मुर्गियों, बत्तखों, कुत्तों, बकरियों और अन्य पशुओं से बचाने के लिए जाली या हल्का घेरा लगाया जा सकता है। पानी निकालने की व्यवस्था भी होनी चाहिए, ताकि जरूरत पड़ने पर बेड का पानी बदला जा सके। बड़े किसान एक बहुत बड़ा बेड बनाने के बजाय कई छोटे बेड बना सकते हैं। इससे कटाई, सफाई, पोषण प्रबंधन और खराब बेड को अलग करने में सुविधा होती है।
एजोला की प्रमुख प्रजातियां
एजोला की कई प्रजातियां उपलब्ध हैं, लेकिन भारत में Azolla pinnata और Azolla microphylla का उपयोग अधिक देखा जाता है। इनके अलावा Azolla caroliniana और Azolla filiculoides जैसी प्रजातियां भी विभिन्न क्षेत्रों में पाई जाती हैं। किसान को स्थानीय जलवायु के अनुकूल स्वस्थ और शुद्ध कल्चर का चयन करना चाहिए। कल्चर कृषि विज्ञान केंद्र, कृषि विश्वविद्यालय, पशुपालन विभाग, विश्वसनीय किसान उत्पादक संगठन या प्रमाणित विक्रेता से लेना बेहतर रहता है।
पुराना, दुर्गंधयुक्त, सड़ा हुआ या शैवाल से भरा कल्चर इस्तेमाल करने से बेड की स्थापना प्रभावित हो सकती है। स्वस्थ कल्चर का रंग सामान्यतः हरा होता है और उसमें सड़न या खराब गंध नहीं होती। नया कल्चर खरीदते समय किसान को उसकी प्रजाति, उत्पादन क्षमता और उपयोग विधि की जानकारी भी लेनी चाहिए।
एजोला बेड बनाने की विधि
Azolla cultivation के लिए ईंट से बना बेड, सीमेंट टैंक, प्लास्टिक शीट वाला गड्ढा, तिरपाल, फाइबर टैंक या पुरानी पानी की टंकी इस्तेमाल की जा सकती है। छोटे डेयरी फार्म के लिए लगभग 2 मीटर लंबा, 1 मीटर चौड़ा और 15 से 20 सेंटीमीटर गहरा बेड उपयोगी माना जाता है। इससे लगभग 2 वर्गमीटर उत्पादन क्षेत्र मिलता है।
बेड तैयार करने से पहले जमीन से पत्थर, कांटे, कांच, लकड़ी और अन्य नुकीली वस्तुएं हटा देनी चाहिए। जमीन को समतल करने के बाद ईंट, मिट्टी, बांस या लकड़ी से लगभग 15 से 20 सेंटीमीटर ऊंची सीमा बनाई जाती है। इसके बाद मोटी और अच्छी गुणवत्ता वाली प्लास्टिक या सिलपॉलिन शीट बिछाई जाती है। शीट के किनारों को ईंट या मिट्टी से दबाना चाहिए, ताकि पानी बाहर न निकले और हवा से प्लास्टिक न हटे।
लगभग 2 वर्गमीटर के बेड में 10 से 15 किलोग्राम साफ और छनी हुई मिट्टी की पतली परत बिछाई जा सकती है। इसके बाद लगभग 2 किलोग्राम अच्छी तरह सड़ा हुआ गोबर पानी में घोलकर बेड में डालना चाहिए। बहुत अधिक ताजा गोबर डालने से पानी सड़ सकता है, दुर्गंध उत्पन्न हो सकती है और एजोला की वृद्धि प्रभावित हो सकती है। फॉस्फोरस की पूर्ति के लिए लगभग 20 से 30 ग्राम सिंगल सुपर फॉस्फेट मिलाया जा सकता है। इसकी सही मात्रा स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार तय करना बेहतर होता है।
मिट्टी और गोबर का घोल डालने के बाद बेड में 5 से 10 सेंटीमीटर तक साफ पानी भरना चाहिए। इसके बाद प्रति 2 वर्गमीटर लगभग 500 ग्राम से 1 किलोग्राम स्वस्थ एजोला कल्चर समान रूप से पानी की सतह पर फैला देना चाहिए। बेड के ऊपर शेड नेट लगाना चाहिए, लेकिन हवा का आवागमन बंद नहीं होना चाहिए। पहले 7 से 10 दिनों तक पानी की गहराई, रंग, गंध और एजोला की वृद्धि की नियमित जांच करनी चाहिए। सामान्यतः 10 से 15 दिनों में बेड की सतह अच्छी तरह भरने लगती है।
प्रति वर्गमीटर Azolla Cultivation की गणना
एक वर्गमीटर का एजोला बेड छोटे पशुपालक, प्रशिक्षण इकाई या घरेलू उपयोग के लिए उपयुक्त हो सकता है। एक वर्गमीटर क्षेत्र के लिए लगभग 5 से 7 किलोग्राम मिट्टी, 750 ग्राम से 1 किलोग्राम सड़ा हुआ गोबर, 250 से 500 ग्राम स्वस्थ एजोला कल्चर, 50 से 100 लीटर पानी और लगभग 10 से 15 ग्राम सिंगल सुपर फॉस्फेट की आवश्यकता हो सकती है। बेड की गहराई लगभग 15 से 20 सेंटीमीटर रखी जा सकती है, जबकि पानी की वास्तविक गहराई 5 से 10 सेंटीमीटर पर्याप्त होती है।
अच्छे प्रबंधन में एक वर्गमीटर से लगभग 300 से 500 ग्राम ताजा एजोला प्रतिदिन प्राप्त हो सकता है। यदि औसतन 400 ग्राम प्रतिदिन उत्पादन मानें, तो एक महीने में लगभग 12 किलोग्राम ताजा एजोला तैयार हो सकता है। यह उत्पादन तापमान, पानी की गुणवत्ता, प्रजाति, खाद प्रबंधन और कटाई की नियमितता के अनुसार कम या अधिक हो सकता है।
100 वर्गफुट में Azolla Cultivation
100 वर्गफुट लगभग 9.29 वर्गमीटर के बराबर होता है। व्यावहारिक रूप से किसान इस क्षेत्र को चार या पांच छोटे बेड में बांट सकता है। पांच बेड बनाते समय प्रत्येक बेड लगभग 2 वर्गमीटर का रखा जा सकता है। अलग-अलग बेड होने से नियमित कटाई, बेड नवीनीकरण और संक्रमण नियंत्रण आसान होता है।
100 वर्गफुट Azolla cultivation इकाई के लिए लगभग 50 से 70 किलोग्राम साफ मिट्टी, 8 से 10 किलोग्राम सड़ा गोबर, 3 से 5 किलोग्राम स्वस्थ एजोला कल्चर, लगभग 500 से 1,000 लीटर पानी, 100 से 150 ग्राम सिंगल सुपर फॉस्फेट और लगभग 120 वर्गफुट शेड नेट की आवश्यकता हो सकती है। पानी की वास्तविक मात्रा बेड की गहराई और संरचना के अनुसार बदल सकती है।
यदि एक वर्गमीटर से 300 से 500 ग्राम ताजा एजोला प्रतिदिन मिलता है, तो 9.29 वर्गमीटर क्षेत्र से लगभग 2.8 से 4.6 किलोग्राम उत्पादन हो सकता है। शुरुआती किसान व्यावहारिक रूप से 2.5 से 4 किलोग्राम प्रतिदिन उत्पादन का लक्ष्य रख सकते हैं। यदि औसतन 3.5 किलोग्राम प्रतिदिन उत्पादन प्राप्त होता है, तो एक महीने में लगभग 105 किलोग्राम ताजा एजोला तैयार किया जा सकता है।
Azolla Cultivation में पोषण प्रबंधन
लगातार उत्पादन के लिए एजोला को नियमित पोषण देना जरूरी है। छोटे 2 वर्गमीटर बेड में प्रत्येक 5 से 7 दिन के अंतर पर लगभग 500 ग्राम से 1 किलोग्राम अच्छी तरह सड़े गोबर का पतला घोल दिया जा सकता है। गोबर की मात्रा बेड के रंग, गंध और एजोला की वृद्धि देखकर समायोजित करनी चाहिए। यदि पानी से दुर्गंध आने लगे या एजोला सड़ने लगे, तो गोबर की मात्रा कम कर देनी चाहिए।
फॉस्फोरस एजोला की वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। प्रत्येक 7 से 10 दिन में लगभग 10 से 20 ग्राम सिंगल सुपर फॉस्फेट प्रति 2 वर्गमीटर दिया जा सकता है। अधिक मात्रा में फॉस्फोरस या अन्य पोषक तत्व डालने से शैवाल बढ़ सकता है और पानी का संतुलन बिगड़ सकता है। यदि एजोला पीला पड़ रहा हो या वृद्धि धीमी हो, तो पानी का पीएच, मिट्टी की गुणवत्ता और पोषक तत्वों की जांच करनी चाहिए। किसी भी सूक्ष्म पोषक मिश्रण का उपयोग स्थानीय विशेषज्ञ की सलाह से ही करना चाहिए।
हर 20 से 30 दिन में बेड की कुछ पुरानी मिट्टी निकालकर नई मिट्टी मिलाना लाभकारी हो सकता है। इससे बेड में जमा जैविक पदार्थ और सड़न कम होती है। नियमित कटाई भी पोषण प्रबंधन का हिस्सा है, क्योंकि बहुत घना एजोला नीचे की परत तक प्रकाश और हवा नहीं पहुंचने देता।
एजोला की कटाई और सफाई
बेड की सतह एजोला से भरने के बाद नियमित कटाई शुरू की जा सकती है। कटाई के लिए प्लास्टिक की जाली, छलनी या छेद वाली टोकरी का उपयोग किया जा सकता है। एक बार में पूरे बेड का एजोला नहीं निकालना चाहिए। लगभग 20 से 30 प्रतिशत स्वस्थ एजोला बेड में छोड़ देना चाहिए, ताकि वह दोबारा तेजी से बढ़ सके।
कटाई के बाद एजोला को साफ पानी से दो या तीन बार अच्छी तरह धोना जरूरी है। इससे गोबर, मिट्टी, अतिरिक्त खनिज और खराब गंध कम हो जाती है। धुले हुए एजोला को उसी दिन पशुओं को देना बेहतर होता है। लंबे समय तक बंद पैकिंग या गर्म स्थान पर रखने से यह खराब हो सकता है। यदि एजोला काला पड़ गया हो, सड़ रहा हो या उससे तेज दुर्गंध आ रही हो, तो उसे पशुओं को नहीं खिलाना चाहिए।
गाय और भैंस को एजोला खिलाने की विधि
गाय और भैंस को एजोला धीरे-धीरे देना चाहिए। शुरुआत में लगभग 100 से 200 ग्राम धुला हुआ ताजा एजोला प्रतिदिन दिया जा सकता है। पशु के इसे स्वीकार करने और पाचन सामान्य रहने पर मात्रा धीरे-धीरे बढ़ाई जा सकती है। सामान्य रूप से वयस्क गाय या भैंस को लगभग 1 से 1.5 किलोग्राम ताजा एजोला प्रतिदिन पूरक आहार के रूप में दिया जा सकता है। वास्तविक मात्रा पशु के वजन, नस्ल, दूध उत्पादन, स्वास्थ्य और कुल आहार पर निर्भर करेगी।
एजोला को दाना मिश्रण में मिलाकर, हरे चारे के साथ या अलग बर्तन में दिया जा सकता है। केवल एजोला खिलाने से दूध उत्पादन बढ़ने की गारंटी नहीं होती। पशु को पर्याप्त हरा चारा, सूखा चारा, संतुलित दाना, खनिज मिश्रण और साफ पानी मिलना भी आवश्यक है। उच्च दूध उत्पादन वाले, गर्भित, बीमार या छोटे पशुओं के लिए पशु चिकित्सक या पशु पोषण विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर होता है।
बकरी, मुर्गी, सूअर और मछली के लिए एजोला
बकरी और भेड़ को शुरुआत में लगभग 50 से 100 ग्राम ताजा एजोला दिया जा सकता है। धीरे-धीरे मात्रा 200 से 300 ग्राम तक बढ़ाई जा सकती है। पशु के पाचन, भूख और स्वास्थ्य पर नजर रखना चाहिए। अचानक अधिक मात्रा देने से दस्त या पाचन संबंधी समस्या हो सकती है।
मुर्गियों के लिए धुले हुए एजोला को बारीक काटकर या सुखाकर आहार में सीमित मात्रा में मिलाया जा सकता है। इसकी मात्रा पक्षियों की उम्र, नस्ल, अंडा उत्पादन और कुल आहार के अनुसार तय की जानी चाहिए। सूअर पालन में भी एजोला को संतुलित दाने के साथ पूरक आहार के रूप में दिया जा सकता है। मछली तालाब में एजोला नियंत्रित मात्रा में डालना चाहिए। इसे पूरी सतह पर फैलने नहीं देना चाहिए, क्योंकि बहुत घना एजोला पानी में प्रकाश और ऑक्सीजन के संतुलन को प्रभावित कर सकता है।
पानी का सही प्रबंधन
Azolla cultivation में पानी की गुणवत्ता उत्पादन की सफलता तय करती है। बेड में लगभग 5 से 10 सेंटीमीटर पानी बनाए रखना चाहिए। गर्मियों में वाष्पीकरण अधिक होने के कारण पानी की गहराई रोज जांचनी चाहिए। बहुत कम पानी होने से एजोला सूख सकता है, जबकि आवश्यकता से अधिक गहरा पानी प्रबंधन को कठिन बना सकता है।
यदि बेड के पानी से दुर्गंध आने लगे, रंग बहुत गहरा हो जाए, मच्छर बढ़ने लगें या एजोला सड़ने लगे, तो लगभग एक-तिहाई पानी निकालकर साफ पानी भरना चाहिए। अत्यधिक खारा, कीटनाशक युक्त, नाली का या औद्योगिक प्रदूषण वाला पानी इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। बहुत अधिक क्लोरीन वाला पानी भी एजोला की वृद्धि को प्रभावित कर सकता है। ऐसे पानी को कुछ समय खुले बर्तन में रखने के बाद इस्तेमाल किया जा सकता है।
Azolla Cultivation में सामान्य समस्याएं
एजोला का लाल या भूरा होना तेज धूप, अत्यधिक तापमान, पानी की कम गहराई, फॉस्फोरस की कमी या पोषण असंतुलन का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में शेड नेट की जांच करनी चाहिए, पानी की उचित गहराई बनाए रखनी चाहिए और सीमित मात्रा में फॉस्फोरस देना चाहिए। जरूरत पड़ने पर बेड के पानी का कुछ भाग बदल देना चाहिए।
एजोला का पीला पड़ना पोषक तत्वों की कमी, खराब पानी, अनुपयुक्त पीएच या पुरानी मिट्टी के कारण हो सकता है। इस स्थिति में सीमित मात्रा में गोबर का पतला घोल दिया जा सकता है, पुरानी मिट्टी का कुछ भाग बदला जा सकता है और साफ पानी मिलाया जा सकता है। वृद्धि धीमी होने का कारण पुराना कल्चर, अत्यधिक गर्मी, कम तापमान, पोषण की कमी या बहुत घना एजोला हो सकता है। नियमित कटाई और स्वस्थ कल्चर डालने से समस्या कम हो सकती है।
बेड से दुर्गंध आना अक्सर अधिक गोबर, सड़ते एजोला, लंबे समय से पानी न बदलने या अधिक जैविक पदार्थ के कारण होता है। खराब एजोला निकालने, पानी का कुछ हिस्सा बदलने, गोबर की मात्रा कम करने और बेड की सफाई से इस समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है।
कीट और रोग प्रबंधन
एजोला बेड में बड़े रोग सामान्यतः कम दिखाई देते हैं, लेकिन खराब प्रबंधन से घोंघे, जलीय कीटों के लार्वा, शैवाल और सड़न की समस्या हो सकती है। घोंघों और कीट लार्वा को हाथ से निकालना बेहतर है। बेड के आसपास खरपतवार और गंदगी जमा नहीं होने देनी चाहिए। मेंढक और अन्य जीव बेड में प्रवेश कर सकते हैं, इसलिए आवश्यकता अनुसार जाली लगाई जा सकती है।
अधिक पोषण और तेज धूप के कारण बेड में हरी शैवाल बढ़ सकती है। शैवाल बढ़ने पर पानी का कुछ भाग बदलना चाहिए, गोबर और फॉस्फोरस की मात्रा कम करनी चाहिए और छाया बढ़ानी चाहिए। अत्यधिक गर्मी, दूषित पानी और बहुत घना एजोला सड़न को बढ़ा सकता है। प्रभावित एजोला तुरंत निकाल देना चाहिए। पशु आहार के लिए उगाए जा रहे एजोला में बिना विशेषज्ञ सलाह के रासायनिक कीटनाशक या फफूंदनाशक का उपयोग नहीं करना चाहिए।
एजोला बेड का नवीनीकरण
लगातार उत्पादन के बाद बेड में पुरानी मिट्टी, गोबर, मृत एजोला और अन्य जैविक पदार्थ जमा होने लगते हैं। इसलिए प्रत्येक 15 से 20 दिन में आंशिक सफाई करनी चाहिए। कुछ पुरानी मिट्टी निकालकर नई साफ मिट्टी मिलाई जा सकती है। पानी का कुछ भाग बदलना और सूखी या सड़ी सामग्री हटाना भी जरूरी है।
हर 2 से 3 महीने में या बेड की स्थिति के अनुसार पूर्ण नवीनीकरण किया जा सकता है। इसके लिए पहले स्वस्थ एजोला अलग सुरक्षित रखना चाहिए। फिर बेड का पानी निकालकर पुरानी मिट्टी हटानी चाहिए और प्लास्टिक शीट को साफ करना चाहिए। इसके बाद नई मिट्टी, गोबर घोल, पानी और आवश्यक पोषक तत्व डालकर सुरक्षित रखा गया स्वस्थ कल्चर दोबारा फैलाया जा सकता है।
Azolla Cultivation की लागत
एक वर्गमीटर Azolla cultivation बेड की शुरुआती लागत स्थानीय संसाधनों और निर्माण सामग्री पर निर्भर करती है। प्लास्टिक शीट पर लगभग 150 से 300 रुपये, ईंट या सीमा निर्माण पर 100 से 250 रुपये, शेड नेट पर 100 से 200 रुपये, मिट्टी और गोबर पर 20 से 50 रुपये, कल्चर पर 50 से 150 रुपये और पोषक सामग्री पर लगभग 20 से 50 रुपये खर्च हो सकते हैं। इस प्रकार कुल प्रारंभिक लागत लगभग 440 से 1,000 रुपये के बीच हो सकती है। यदि किसान के पास पुरानी प्लास्टिक शीट, बांस, मिट्टी और गोबर पहले से उपलब्ध हैं, तो लागत कम हो सकती है।
100 वर्गफुट इकाई के लिए प्लास्टिक या तिरपाल पर लगभग 1,500 से 3,000 रुपये, ईंट या बांस के ढांचे पर 1,000 से 2,500 रुपये, शेड नेट पर 1,000 से 2,000 रुपये, कल्चर पर 500 से 1,500 रुपये, मिट्टी, गोबर और पोषक तत्वों पर 300 से 700 रुपये, पानी और पाइप व्यवस्था पर 500 से 1,500 रुपये तथा श्रम और अन्य खर्च पर 500 से 1,000 रुपये खर्च हो सकते हैं। इस प्रकार कुल प्रारंभिक लागत लगभग 5,300 से 12,200 रुपये तक पहुंच सकती है। सीमेंट का स्थायी टैंक बनाने पर लागत अधिक होगी, लेकिन उसका उपयोग लंबे समय तक किया जा सकता है।
Azolla Cultivation से लाभ
एजोला से लाभ सीधे बिक्री और पशु आहार में बचत, दोनों रूपों में हो सकता है। एक वर्गमीटर से औसतन 12 किलोग्राम ताजा एजोला प्रति माह उत्पादन मानें। यदि स्थानीय बाजार में ताजा एजोला 5 से 15 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बिकता है, तो सकल बिक्री मूल्य लगभग 60 से 180 रुपये प्रति माह हो सकता है। छोटे बेड में बिक्री से मिलने वाली आय सीमित हो सकती है, लेकिन अपने पशुओं के लिए नियमित पूरक आहार उपलब्ध होने से वास्तविक बचत अधिक महत्वपूर्ण हो सकती है।
100 वर्गफुट इकाई से औसतन 105 किलोग्राम ताजा एजोला प्रति माह प्राप्त होने पर 5 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से 525 रुपये, 10 रुपये की दर से 1,050 रुपये और 15 रुपये की दर से 1,575 रुपये का सकल मूल्य बन सकता है। बीज कल्चर के रूप में बिक्री करने पर कीमत अधिक मिल सकती है, लेकिन इसके लिए शुद्ध कल्चर, अच्छी पैकिंग, विश्वसनीयता और स्थानीय मांग जरूरी है।
वास्तविक लाभ उत्पादन की निरंतरता, बिक्री मूल्य, पानी और श्रम की लागत, मौसम, बाजार की दूरी, पैकिंग, कल्चर की गुणवत्ता और अपने पशुओं द्वारा उपयोग की मात्रा पर निर्भर करता है। Azolla cultivation को अत्यधिक कमाई वाला व्यवसाय मानने से पहले स्थानीय बाजार का सर्वेक्षण करना चाहिए।
एजोला की मार्केटिंग
एजोला का संभावित बाजार डेयरी किसानों, गौशालाओं, बकरी फार्म, मुर्गीपालन इकाइयों, मछली किसानों, जैविक किसानों, स्वयं सहायता समूहों, किसान उत्पादक संगठनों और कृषि प्रशिक्षण केंद्रों से जुड़ा होता है। किसान ताजा एजोला, एजोला बीज कल्चर, सूखा पाउडर, प्रशिक्षण किट, बेड किट या उत्पादन प्रशिक्षण के रूप में आय प्राप्त कर सकता है।
स्थानीय स्तर पर छोटा प्रदर्शन बेड बनाना मार्केटिंग का अच्छा तरीका है। पशुपालकों को एजोला उगाने, धोने और खिलाने की सही प्रक्रिया दिखाने से विश्वास बढ़ता है। WhatsApp, Facebook, Instagram और YouTube पर छोटे वीडियो साझा किए जा सकते हैं। इन पोस्ट में उपलब्ध मात्रा, बेड का आकार, कल्चर की कीमत, उपयोग विधि, स्थान और संपर्क जानकारी दी जा सकती है।
ताजा एजोला को कम दूरी के लिए नम और हवादार पैकिंग में भेजना चाहिए। पूरी तरह बंद प्लास्टिक बैग में लंबे समय तक रखने से यह सड़ सकता है। कल्चर बेचते समय ग्राहक को बेड निर्माण, पोषण, पानी और कटाई की लिखित जानकारी देना उपयोगी रहता है।
Azolla Cultivation में होने वाली गलतियां
अधिक गोबर डालना Azolla cultivation में होने वाली सबसे सामान्य गलतियों में से एक है। इससे पानी सड़ सकता है और एजोला खराब हो सकता है। तेज धूप वाले स्थान पर बिना शेड नेट बेड बनाना भी उत्पादन को प्रभावित करता है। लंबे समय तक कटाई न करने से एजोला बहुत घना हो जाता है और नीचे की परत सड़ने लगती है।
गंदे या कीटनाशक युक्त पानी का उपयोग पशु स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। बिना धोए एजोला खिलाने से गोबर, मिट्टी और अन्य अशुद्धियां पशु के शरीर में जा सकती हैं। अचानक अधिक मात्रा में खिलाना भी उचित नहीं है। व्यावसायिक स्तर पर सबसे बड़ी गलती स्थानीय मांग की जांच किए बिना बड़ी इकाई स्थापित करना है। किसान को छोटे स्तर से शुरुआत करके उत्पादन और बाजार का अनुभव लेना चाहिए।
एजोला और धान की खेती
एजोला का उपयोग धान के खेतों में जैव उर्वरक और हरी खाद के रूप में भी किया जाता है। यह वायुमंडलीय नाइट्रोजन को स्थिर करने में मदद कर सकता है और मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ा सकता है। धान के खेत में एजोला उपयोग करते समय पानी की गहराई, खरपतवार नियंत्रण, उर्वरक प्रबंधन और कीटनाशक के चयन का ध्यान रखना चाहिए। कुछ रासायनिक कीटनाशक एजोला को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
पशु आहार के लिए बेड में किया जाने वाला Azolla cultivation और धान खेत में इसका उपयोग अलग प्रबंधन प्रणालियां हैं। इसलिए किसान को स्थानीय कृषि विभाग या कृषि विज्ञान केंद्र की सिफारिश के अनुसार ही धान में एजोला का उपयोग करना चाहिए।
Azolla Cultivation की सीमाएं
Azolla cultivation के कई लाभ हैं, लेकिन इसकी कुछ सीमाएं भी हैं। अत्यधिक गर्मी और ठंड में उत्पादन घट सकता है। बेड का पानी और पोषण रोजाना या नियमित रूप से जांचना पड़ता है। ताजा एजोला जल्दी खराब होता है, इसलिए इसे लंबी दूरी तक भेजना कठिन हो सकता है। दूषित पानी से इसकी गुणवत्ता और पशु सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। इसे पशु आहार में सीमित मात्रा में उपयोग करना जरूरी है और बिना प्रशिक्षण के पोषण संतुलन बिगड़ सकता है। हर क्षेत्र में एजोला की बाजार मांग समान नहीं होती, इसलिए व्यावसायिक उत्पादन से पहले ग्राहकों की पहचान करना जरूरी है।
निष्कर्ष
Azolla cultivation छोटे किसानों, डेयरी पशुपालकों, बकरीपालकों, मुर्गीपालकों और एकीकृत कृषि प्रणाली अपनाने वाले लोगों के लिए उपयोगी तकनीक है। इसमें कम क्षेत्र, सीमित निवेश और स्थानीय संसाधनों की सहायता से ताजा पूरक पशु आहार तैयार किया जा सकता है। सफल उत्पादन के लिए साफ पानी, आंशिक छाया, संतुलित पोषण, स्वस्थ कल्चर, नियमित कटाई और समय पर बेड की सफाई आवश्यक है।
एक वर्गमीटर का बेड घरेलू उपयोग और प्रशिक्षण के लिए उपयुक्त हो सकता है, जबकि 100 वर्गफुट इकाई से लगभग 2.5 से 4.5 किलोग्राम ताजा एजोला प्रतिदिन प्राप्त किया जा सकता है। वास्तविक उत्पादन मौसम, प्रजाति और प्रबंधन के अनुसार बदलता है। किसानों को एजोला को पूर्ण पशु आहार का विकल्प नहीं मानना चाहिए। इसे हरे चारे, सूखे चारे, दाना मिश्रण और खनिज मिश्रण के साथ पूरक रूप में देना चाहिए। छोटे स्तर से शुरुआत, नियमित रिकॉर्ड और स्थानीय बाजार की सही जानकारी Azolla cultivation को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बना सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. Azolla cultivation क्या है?
Azolla cultivation पानी की सतह पर उगने वाले छोटे जलीय फर्न एजोला का नियंत्रित उत्पादन है। इसका उपयोग पशु आहार, मुर्गी और मछली आहार तथा धान में जैविक नाइट्रोजन स्रोत के रूप में किया जाता है।
2. एजोला कितने दिनों में तैयार होता है?
अच्छे कल्चर, उचित तापमान, स्वच्छ पानी और संतुलित पोषण मिलने पर एजोला बेड लगभग 10 से 15 दिनों में भर सकता है। इसके बाद नियमित कटाई शुरू की जा सकती है।
3. एक वर्गमीटर से कितना एजोला मिल सकता है?
उचित प्रबंधन में एक वर्गमीटर से लगभग 300 से 500 ग्राम ताजा एजोला प्रतिदिन प्राप्त किया जा सकता है। उत्पादन मौसम और प्रबंधन के अनुसार बदल सकता है।
4. 100 वर्गफुट से कितना उत्पादन हो सकता है?
100 वर्गफुट क्षेत्र से सामान्य परिस्थितियों में लगभग 2.5 से 4.5 किलोग्राम ताजा एजोला प्रतिदिन मिल सकता है।
5. क्या एजोला गाय और भैंस को दिया जा सकता है?
हां, एजोला को साफ पानी से धोकर पूरक आहार के रूप में दिया जा सकता है। शुरुआत कम मात्रा से करनी चाहिए और धीरे-धीरे लगभग 1 से 1.5 किलोग्राम प्रतिदिन तक मात्रा बढ़ाई जा सकती है।
6. क्या एजोला दाने का पूरा विकल्प है?
नहीं, एजोला दाना, हरा चारा, सूखा चारा और खनिज मिश्रण का पूर्ण विकल्प नहीं है। इसे संतुलित पशु आहार के साथ पूरक रूप में देना चाहिए।
7. एजोला लाल या भूरा क्यों हो जाता है?
तेज धूप, अधिक या कम तापमान, पानी की कमी, फॉस्फोरस की कमी और पोषण असंतुलन के कारण एजोला लाल या भूरा हो सकता है।

