Haryana Government Scheme: हरियाणा सरकार अब प्राकृतिक और जैविक खेती को बड़े स्तर पर बढ़ावा देने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। राज्य सरकार का लक्ष्य किसानों को रासायनिक खेती की निर्भरता से बाहर निकालकर ऐसी खेती की ओर ले जाना है, जिससे मिट्टी की सेहत सुधरे, खेती की लागत घटे और किसानों को बेहतर बाजार मिले। इसी दिशा में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कुरुक्षेत्र में आयोजित कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की “कृषि कार्यशाला” में कई बड़ी घोषणाएं कीं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में पंचायतों की जमीन पर भी प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए अगले साल एक विशेष नीति बनाई जाएगी। इसके साथ ही कृषि विभाग के पास मौजूद करीब 800 एकड़ भूमि केवल उन किसानों को पट्टे पर दी जाएगी, जो कम से कम 10 वर्षों तक प्राकृतिक और जैविक खेती करने के लिए तैयार होंगे। सरकार का मानना है कि लंबे समय तक प्राकृतिक खेती करने से भूमि की गुणवत्ता बेहतर होगी और किसानों को स्थायी आय का रास्ता मिलेगा।
किसानों को मिलेगी आर्थिक सहायता
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कार्यशाला में बताया कि सरकार प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों को आर्थिक रूप से भी मजबूत करेगी। एपीडा यानी APEDA से प्रमाणित प्राकृतिक और जैविक किसानों को पांच वर्षों तक प्रति एकड़ हर साल 10 हजार रुपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी। यह सहायता उन किसानों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है, जो प्राकृतिक खेती की शुरुआत करना चाहते हैं, लेकिन शुरुआती खर्च और बाजार की चिंता के कारण पीछे हट जाते हैं।
इसके साथ ही जैविक खेती के प्रमाणीकरण की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए हरियाणा राज्य बीज प्रमाणीकरण एजेंसी को भी इस कार्य से जोड़ा जाएगा। इससे किसानों को प्रमाणन के लिए अलग-अलग विभागों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और उनकी उपज को बाजार में अच्छी पहचान मिल सकेगी।
मंडियों में मिलेगा अलग स्थान
हरियाणा सरकार प्राकृतिक और जैविक उत्पाद बेचने वाले किसानों के लिए बाजार व्यवस्था को भी मजबूत करने जा रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि पंचकूला, यमुनानगर, करनाल, सोनीपत, रोहतक, गुरुग्राम, फरीदाबाद, हिसार, चरखी दादरी और नारनौल की मंडियों में ऐसे किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए विशेष स्थान उपलब्ध कराया जाएगा।
यह कदम किसानों के लिए बेहद अहम है, क्योंकि प्राकृतिक और जैविक उत्पादों की कीमत सामान्य उपज की तुलना में अधिक मिल सकती है। लेकिन इसके लिए उपभोक्ताओं तक सही पहचान और भरोसे के साथ उत्पाद पहुंचना जरूरी है। सरकार की ओर से मंडियों में अलग स्थान मिलने से किसानों को सीधे खरीदारों से जुड़ने का अवसर मिलेगा और उपज का बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बढ़ेगी।
सरकार उत्पादों की जांच के लिए प्रयोगशालाएं और प्रमाणन केंद्र भी स्थापित करेगी। इससे किसानों की उपज की गुणवत्ता की जांच हो सकेगी और खरीदारों का भरोसा बढ़ेगा।
कुरुक्षेत्र में शुरू होगी स्मार्ट एग्रीकल्चर योजना
हरियाणा सरकार प्राकृतिक खेती को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के सहयोग से कुरुक्षेत्र जिले में 2,000 एकड़ क्षेत्र में “स्मार्ट एग्रीकल्चर” योजना शुरू की जाएगी। इस योजना के तहत आधुनिक तकनीकों के साथ प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि यदि इस योजना के तहत खेती करने वाले किसानों को किसी प्रकार का नुकसान होता है, तो उसकी पूरी भरपाई सरकार करेगी। यह घोषणा किसानों के लिए भरोसा बढ़ाने वाली है, क्योंकि नई तकनीक या नई खेती पद्धति अपनाते समय किसान अक्सर जोखिम को लेकर चिंतित रहते हैं।
इसके अलावा मोरनी ब्लॉक को प्राकृतिक और जैविक खेती का मॉडल क्षेत्र बनाया जाएगा। इससे क्षेत्र के किसानों को प्रशिक्षण, तकनीक और बाजार से जुड़ने के बेहतर अवसर मिलेंगे।
प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ रहा हरियाणा
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने वर्ष 2022 में प्राकृतिक खेती योजना शुरू की थी। इसके लिए एक विशेष पोर्टल भी बनाया गया है, ताकि किसान आसानी से अपना पंजीकरण करा सकें। अब तक लगभग 2 लाख किसानों ने 3 लाख एकड़ भूमि का पंजीकरण कराया है। इनमें से 23,930 किसानों का सत्यापन किया जा चुका है, जो 44 हजार एकड़ से अधिक क्षेत्र में प्राकृतिक खेती अपना रहे हैं।
वर्ष 2025-26 के दौरान प्रदेश में 20,727 एकड़ भूमि पर प्राकृतिक खेती की गई। यह आंकड़ा दिखाता है कि हरियाणा में किसान धीरे-धीरे प्राकृतिक खेती की ओर आगे बढ़ रहे हैं। सरकार की नई घोषणाओं के बाद आने वाले समय में इस क्षेत्र में और तेजी आने की उम्मीद है।
प्रशिक्षण केंद्रों से किसानों को मिल रही मदद
प्राकृतिक खेती को सफल बनाने के लिए किसानों को सही प्रशिक्षण देना बहुत जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने कुरुक्षेत्र, जींद, सिरसा और करनाल में प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए हैं। इन केंद्रों में अब तक 12 हजार से अधिक लोगों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इनमें किसान, महिलाएं, युवा और सरकारी कर्मचारी शामिल हैं।
सरकार ने हजारों सरपंचों को भी ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया है, ताकि वे गांवों में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे सकें। पंचायत स्तर पर जागरूकता बढ़ने से किसान इस खेती पद्धति को बेहतर तरीके से समझ सकेंगे और छोटे स्तर से शुरुआत कर पाएंगे।
देसी गाय खरीदने पर बढ़ी सहायता
प्राकृतिक खेती में देसी गाय की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इस खेती में गोबर और गोमूत्र का उपयोग जीवामृत, घनजीवामृत और अन्य प्राकृतिक खाद तैयार करने में किया जाता है। इसी को देखते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2025 से देसी गाय खरीदने पर मिलने वाली सब्सिडी बढ़ाकर 30 हजार रुपये कर दी गई है।
यह सहायता उन किसानों को दी जाएगी, जिनके पास कम से कम एक एकड़ भूमि है। इसके साथ ही प्राकृतिक खेती में उपयोग होने वाले कच्चे माल के भंडारण के लिए ड्रम खरीदने पर भी आर्थिक सहायता दी जा रही है। अब तक हजारों किसानों को इसका लाभ मिल चुका है।
बागवानी किसानों के लिए भी सुरक्षा
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा देश का पहला राज्य है, जिसने बागवानी किसानों को मौसम की अनिश्चितताओं से बचाने के लिए “मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना” शुरू की है। इस योजना में 21 फसलों को शामिल किया गया है। इससे बागवानी किसानों को प्राकृतिक आपदा, मौसम की मार और उत्पादन जोखिम से राहत मिलती है।
सरकार का कहना है कि खेती को लाभकारी बनाने के लिए केवल उत्पादन बढ़ाना ही काफी नहीं है, बल्कि किसानों को जोखिम से सुरक्षा देना भी जरूरी है।
प्राकृतिक खेती क्यों है जरूरी?
कार्यशाला में गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने प्राकृतिक खेती को समय की सबसे बड़ी जरूरत बताया। उन्होंने कहा कि रासायनिक खादों और कीटनाशकों के लगातार उपयोग से मिट्टी की उर्वरता कम हो रही है। जमीन धीरे-धीरे बंजर होने की ओर https://haryanacmoffice.gov.in/बढ़ रही है और जल स्रोत भी प्रदूषित हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती मिट्टी की सेहत सुधारने का बेहतर तरीका है। यह देशी गाय आधारित खेती है, जिसमें गोबर, गोमूत्र, गुड़ और बेसन जैसी साधारण चीजों का उपयोग किया जाता है। इससे खेती की लागत कम होती है और पर्यावरण भी सुरक्षित रहता है।
आचार्य देवव्रत ने किसानों से अपील की कि वे अपनी जमीन के छोटे हिस्से से ही सही, लेकिन प्राकृतिक खेती की शुरुआत जरूर करें। उनके अनुसार, अगर आज खेती के तरीके नहीं बदले गए, तो आने वाली पीढ़ियों को उपजाऊ जमीन, शुद्ध पानी और स्वस्थ जीवन देना मुश्किल हो जाएगा।
हरियाणा बन सकता है प्राकृतिक खेती का मॉडल राज्य
हरियाणा सरकार की नई घोषणाओं से साफ है कि राज्य प्राकृतिक और जैविक खेती को केवल अभियान के रूप में नहीं, बल्कि एक मजबूत कृषि मॉडल के रूप में आगे बढ़ाना चाहता है। आर्थिक सहायता, प्रशिक्षण, बाजार, प्रमाणन, प्रयोगशाला और तकनीकी सहयोग जैसे कदम किसानों को इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेंगे।
यदि सरकार की योजनाएं जमीनी स्तर पर सही तरीके से लागू होती हैं, तो हरियाणा आने वाले समय में प्राकृतिक खेती का मॉडल राज्य बन सकता है। इससे किसानों की आय बढ़ने के साथ-साथ मिट्टी, पानी और पर्यावरण की रक्षा भी होगी।

