EducationMinisterResigns : देशभर में NEET-UG परीक्षा में अनियमितताओं को लेकर बढ़ते विवाद और छात्रों के लगातार प्रदर्शनों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेज दिया, जिसे पीएम ने तुरंत स्वीकार कर लिया। यह कदम ऐसे समय में आया है जब दिल्ली के जंतर-मंतर पर ‘भ्रष्टाचार मुक्त परीक्षा के लिए छात्र संघर्ष समिति’ (CJP) के नेतृत्व में छात्रों का अनिश्चितकालीन आंदोलन लगातार जारी था और विपक्षी दलों ने संसद के मानसून सत्र में इस मुद्दे को तूल दिया था।
प्रधान ने अपने इस्तीफे की घोषणा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक लंबे पोस्ट के माध्यम से की। उन्होंने इस पत्र में देश के युवाओं को संबोधित करते हुए अपने निर्णय का कारण स्पष्ट किया। उन्होंने लिखा, “मैंने यह फैसला किसी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा के लिए नहीं, बल्कि इसलिए लिया है ताकि देश के युवा किसी भ्रम और उलझन में न पड़ें। पिछले कई दिनों से देशभर में जो परिस्थितियाँ बनी हैं, विशेषकर जंतर-मंतर पर छात्रों का आंदोलन, मुझे व्यथित कर रहा था। मैंने सोचा कि अब वक्त आ गया है कि जिम्मेदारी ली जाए और रास्ता साफ किया जाए।”
NEET-UG विवाद : शुरू से अब तक का सफर
गौरतलब है कि 5 मई 2024 को आयोजित NEET-UG परीक्षा में पेपर लीक और गड़बड़ियों की शिकायतें सामने आने के बाद से ही यह मामला सुर्खियों में था। केंद्र सरकार ने तुरंत संज्ञान लेते हुए मामले की जांच CBI (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो) को सौंपी, मूल परीक्षा को रद्द कर 21 जून को पुनः परीक्षा आयोजित की गई। पुनः परीक्षा के परिणाम 16 जुलाई को घोषित किए गए। प्रधान ने अपने पत्र में इन सभी कदमों का विस्तार से जिक्र किया और बताया कि सरकार ने पारदर्शिता के साथ हर संभव प्रयास किया।
हालाँकि, छात्र संगठनों और विपक्षी दलों का आरोप था कि सरकार की कार्रवाई अपर्याप्त है और इसमें देरी की गई। विशेष रूप से, परीक्षा में टॉप करने वाले 67 छात्रों को संदिग्ध परिस्थितियों में अतिरिक्त अंक मिलने, कुछ परीक्षा केंद्रों पर समय से पहले पेपर खुलने, और OMR शीट में गड़बड़ी के मामलों ने आक्रोश को जन्म दिया। छात्रों की माँग थी कि पूरी प्रक्रिया की न्यायिक जाँच हो, दोषियों को कड़ी सजा मिले, और जिम्मेदार मंत्री को पद से हटाया जाए।
जंतर-मंतर आंदोलन बना निर्णायक मोड़
20 जून से ही CJP संगठन ने जंतर-मंतर पर धरना शुरू कर दिया था, जो धीरे-धीरे देश के कई राज्यों में फैल गया। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख माँगें थीं – शिक्षा मंत्री का इस्तीफा, 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज की घटना की जाँच, NEET पीड़ितों के परिवारों को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा, और छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी FIR को रद्द करना। 24 जुलाई को सरकार और आंदोलनकारियों के बीच दूसरे दौर की वार्ता विफल होने के बाद, आंदोलन और तीव्र हो गया।
प्रधान ने अपने इस्तीफे के पत्र में इस आंदोलन का सीधा जिक्र करते हुए कहा, “मैं देख रहा था कि कुछ ताकतें इस मुद्दे का राजनीतिक लाभ उठाने में लगी हैं। देश विरोधी तत्व भी इसमें अपनी दाल गलाना चाहते हैं। युवाओं की ऊर्जा का दुरुपयोग हो रहा है। ऐसे में मैं चाहता हूँ कि छात्र अपने भविष्य और पढ़ाई पर ध्यान दें, न कि सड़कों पर। इसीलिए मैंने यह कठिन निर्णय लिया है।”
विपक्ष की प्रतिक्रिया – ‘छात्रों की जीत’
प्रधान के इस्तीफे की खबर आते ही विपक्षी दलों में खुशी की लहर दौड़ गई। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने X पर लिखा, “यह छात्र आंदोलन की बड़ी जीत है। यह साबित होता है कि लोकतंत्र में जनता की आवाज़ को अनदेखा नहीं किया जा सकता।” राहुल गांधी ने पहले ही कहा था कि धर्मेंद्र प्रधान ‘भ्रष्टाचार और अक्षमता के प्रतीक’ हैं और उन्हें किसी अन्य विभाग में नहीं भेजा जाना चाहिए, बल्कि पूरी तरह हटाया जाना चाहिए। अन्य विपक्षी दलों ने भी इस कदम का स्वागत किया, लेकिन साथ ही कहा कि सरकार को अब NEET मामले की पूरी न्यायिक जाँच करानी चाहिए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कानून बनाना चाहिए।
छात्र संगठन का बयान – अभी और माँगें बाकी
हालाँकि, CJP के प्रमुख आयोजकों ने अभी तक प्रधान के इस्तीफे पर औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन उनके एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि “यह पहला कदम है, लेकिन हमारी अन्य माँगें भी पूरी होनी चाहिए। जब तक सभी FIR रद्द नहीं हो जातीं, पीड़ितों को मुआवजा नहीं मिल जाता, और NEET में सुधार के लिए स्थायी व्यवस्था नहीं बन जाती, तब तक हम आंदोलन खत्म नहीं करेंगे।” उन्होंने यह भी कहा कि वे सरकार के साथ तीसरे दौर की वार्ता के लिए तैयार हैं, लेकिन अब शर्तें उनकी होंगी।
केंद्र सरकार की चुप्पी और आगे का रास्ता
प्रधानमंत्री कार्यालय ने अभी तक इस विषय पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, हालाँकि पीएम मोदी ने प्रधान का त्यागपत्र स्वीकार कर लिया है। अब यह देखना होगा कि नए शिक्षा मंत्री के रूप में किसे नियुक्त किया जाता है। संभावना जताई जा रही है कि मौजूदा कैबिनेट में फेरबदल किया जा सकता है या फिर किसी अन्य मंत्री को अतिरिक्त प्रभार दिया जा सकता है।
प्रधान ने अपने पत्र के अंत में प्रधानमंत्री मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे अपने मूल राज्य ओडिशा और देश की सेवा करते रहेंगे। उन्होंने “भगवान जगन्नाथ” का आशीर्वाद लेते हुए लिखा, “मैं हमेशा भारत माता, ओडिशा की जनता और देश के युवाओं की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए समर्पित रहूंगा।”
NEET-UG का भविष्य – कंप्यूटर आधारित परीक्षा की घोषणा
प्रधान ने अपने इस्तीफे में यह भी घोषणा की कि अगले वर्ष से NEET-UG को कंप्यूटर आधारित (CBT) मोड में आयोजित करने का निर्णय लिया गया है, ताकि पेपर लीक जैसी घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके। उन्होंने कहा, “हमारी सरकार ने पारदर्शिता और सुधार के लिए प्रतिबद्धता दिखाई है। यद्यपि मैं अपने पद से हट रहा हूँ, लेकिन यह सुधार प्रक्रिया जारी रहेगी।”
विशेषज्ञों की राय
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह इस्तीफा भारतीय शिक्षा व्यवस्था में एक बड़ा संकेत है। वरिष्ठ पत्रकार और शिक्षा टिप्पणीकार अनिल स्वरूप ने कहा, “यह पहली बार है जब किसी केंद्रीय मंत्री को प्रवेश परीक्षा में गड़बड़ी के कारण इस्तीफा देना पड़ा है। यह छात्रों की शक्ति को दर्शाता है, लेकिन यह भी सवाल उठाता है कि क्या सरकार की कार्यप्रणाली में कोई बुनियादी खामी है। अब नए मंत्री को न केवल NEET, बल्कि पूरे शिक्षा क्षेत्र में सुधारों को गति देनी होगी।”
सोशल मीडिया पर बहस
प्रधान के इस्तीफे के बाद सोशल मीडिया पर मिश्रित प्रतिक्रियाएँ आईं। एक तरफ कई लोगों ने इसे साहसिक कदम बताया और उनकी ईमानदारी की प्रशंसा की, तो दूसरी तरफ कुछ आलोचकों ने इसे ‘देर से आया कदम’ करार दिया। कुछ यूजर्स ने कहा कि सरकार ने छात्रों के आंदोलन के आगे घुटने टेक दिए, जो एक मजबूत सरकार के लिए ठीक नहीं। वहीं कुछ ने इसे ‘जनतंत्र की जीत’ बताया।
अब क्या होगा?
इस इस्तीफे के बाद अब NEET-UG मामले की जाँच CBI जारी रखेगी। साथ ही, संसद के मानसून सत्र में विपक्ष अब भी इस मुद्दे को उठाने के लिए तैयार है, हालाँकि प्रधान के हटने से उनका मुख्य निशाना खत्म हो गया है। छात्र संगठनों के साथ होने वाली बातचीत की दिशा भी बदल सकती है, क्योंकि अब बातचीत की मेज पर नए चेहरे होंगे। फिलहाल, प्रधान ने अपने पत्र में सभी विपक्षी दलों और छात्रों से अपील की है कि वे आंदोलन समाप्त करें और देश के विकास में सहयोग करें, लेकिन CJP ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी शेष माँगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा।
संक्षेप में प्रमुख बातें:
- धर्मेंद्र प्रधान ने NEET विवाद के चलते इस्तीफा दिया।
- जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन को इसका सीधा कारण बताया।
- विपक्ष ने इसे छात्रों की जीत करार दिया।
- CJP ने अन्य माँगें पूरी न होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कही।
NEET-UG अब कंप्यूटर आधारित होगा; नए मंत्री की नियुक्ति बाकी।
यह घटनाक्रम भारतीय राजनीति और शिक्षा व्यवस्था के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है, जो यह सिद्ध करता है कि जन आंदोलन और छात्रों की आवाज़ सरकार की नीतियों को बदलने की ताकत रखती है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इस संकट से कैसे निकलती है और NEET प्रणाली में क्या स्थायी सुधार लागू होते हैं।

