उत्तर प्रदेश की मौसम पूर्वानुमान और आपदा प्रबंधन क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने लखनऊ में नए क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र (आरएमसी) का संयुक्त रूप से उद्घाटन किया। इस अवसर पर डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत के मौसम विज्ञान बुनियादी ढांचे में अभूतपूर्व विस्तार हुआ है, जिससे मौसम पूर्वानुमान अधिक सटीक, स्थानीय और प्रभाव आधारित बन पाए हैं।
उन्होंने कहा कि आधुनिक मौसम विज्ञान सेवाओं ने नागरिकों, किसानों, आपदा प्रबंधन एजेंसियों, विमानन क्षेत्र और पर्यटन उद्योग को मौसम संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने की व्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया है। अब मौसम की जानकारी केवल सामान्य पूर्वानुमान तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय स्तर पर समयबद्ध और सटीक चेतावनियां भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।
अगले दो वर्षों में देश में होंगे 100 डॉप्लर मौसम रडार
डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि वर्ष 2014 में देश में केवल 17 डॉप्लर मौसम रडार कार्यरत थे, जबकि कई राज्यों में एक भी रडार उपलब्ध नहीं था। वर्तमान में यह संख्या बढ़कर 50 हो चुकी है और ‘मिशन मौसम’ के तहत 50 अतिरिक्त डॉप्लर मौसम रडार स्थापित किए जाने की योजना है।
उन्होंने कहा कि अगले दो वर्षों में देशभर में लगभग 100 डॉप्लर मौसम रडार कार्यरत होंगे, जिससे वास्तविक समय में मौसम की निगरानी और पूर्वानुमान की क्षमता में व्यापक सुधार आएगा। इससे प्राकृतिक आपदाओं के प्रति समय रहते चेतावनी जारी करना और भी आसान हो जाएगा।
उत्तर प्रदेश में मौसम विज्ञान अवसंरचना का तेजी से विस्तार
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश भौगोलिक और जलवायु दृष्टि से बेहद संवेदनशील राज्य है, जहां बाढ़, सूखा, लू, आंधी-तूफान और बिजली गिरने जैसी घटनाएं अक्सर देखने को मिलती हैं। ऐसे में उन्नत मौसम विज्ञान सेवाएं जन सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में उत्तर प्रदेश में केवल एक डॉप्लर मौसम रडार था, जबकि अब इनकी संख्या बढ़कर तीन हो गई है और छह नए रडार जल्द ही स्थापित किए जा रहे हैं।
राज्य में स्वचालित मौसम स्टेशनों की संख्या 59 से बढ़कर 107 हो गई है। वहीं स्वचालित वर्षामापी यंत्रों की संख्या 132 से बढ़कर 140 हो गई है। बिजली गिरने की घटनाओं की निगरानी के लिए राज्य में अब सात आधुनिक सेंसर भी स्थापित किए जा चुके हैं, जबकि एक दशक पहले ऐसी कोई व्यवस्था मौजूद नहीं थी।
11 हवाई अड्डों को मिल रही मौसम संबंधी सेवाएं
डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश में विमानन क्षेत्र के विस्तार के साथ मौसम विज्ञान सेवाओं का भी तेजी से विकास हुआ है। वर्तमान में राज्य के 11 हवाई अड्डों को मौसम संबंधी सेवाएं प्रदान की जा रही हैं, जिससे उड़ान संचालन की सुरक्षा और दक्षता में सुधार हुआ है।
उन्होंने कहा कि आधुनिक विमानन प्रणाली के लिए सटीक मौसम पूर्वानुमान अत्यंत महत्वपूर्ण है और सरकार इस दिशा में लगातार निवेश कर रही है।
उत्तराखंड में भी मजबूत हुआ मौसम निगरानी तंत्र
केंद्रीय मंत्री ने उत्तराखंड में मौसम विज्ञान अवसंरचना के विस्तार का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बाढ़, बादल फटना, भूस्खलन और हिमस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं के प्रति संवेदनशील होने के बावजूद पहले राज्य में कोई डॉप्लर मौसम रडार नहीं था।
आज उत्तराखंड में तीन डॉप्लर मौसम रडार स्थापित किए जा चुके हैं और मिशन मौसम के तहत अतिरिक्त प्रणालियां विकसित की जा रही हैं। इसके साथ ही स्वचालित मौसम स्टेशनों, बिजली गिरने की चेतावनी प्रणालियों और हवाईअड्डा मौसम वेधशालाओं का भी विस्तार किया गया है।
क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र से मिलेगा बड़ा लाभ
लखनऊ में स्थापित नए क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र को उत्तर भारत के मौसम पूर्वानुमान तंत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह केंद्र उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और आसपास के क्षेत्रों में मौसम संबंधी निगरानी, पूर्वानुमान और चेतावनी प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाएगा।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार के सहयोग से यहां अत्याधुनिक डॉप्लर मौसम रडार और पवन प्रोफाइलर जैसी उन्नत प्रणालियां विकसित की जा रही हैं, जिससे मौसम की गतिविधियों पर अधिक सटीक निगरानी रखी जा सकेगी।
प्रारंभिक चेतावनी को गंभीरता से लेने की अपील
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बेहतर मौसम पूर्वानुमान प्रणालियां अचानक आने वाली बाढ़, आंधी-तूफान, बिजली गिरने, बादल फटने और अन्य चरम मौसम घटनाओं की अग्रिम चेतावनी देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
उन्होंने नागरिकों, स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियों से मौसम विभाग द्वारा जारी चेतावनियों और सलाहों को गंभीरता से लेने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि आज मौसम संबंधी सूचनाएं डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से गांवों और पंचायतों तक पहुंच रही हैं और इन्हें निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
आपदा प्रबंधन और कृषि क्षेत्र को मिलेगा लाभ
विशेषज्ञों का मानना है कि लखनऊ में क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र की स्थापना से मौसम पूर्वानुमान की सटीकता और चेतावनी प्रणाली में महत्वपूर्ण सुधार होगा। इससे किसानों को फसल प्रबंधन में सहायता मिलेगी, आपदा प्रबंधन एजेंसियों को समय रहते कार्रवाई करने का अवसर मिलेगा और विमानन क्षेत्र को भी बेहतर सेवाएं प्राप्त होंगी।
नया केंद्र मौसम एवं जलवायु सेवाओं के विकेंद्रीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है, जो उत्तर भारत में सार्वजनिक सुरक्षा, कृषि, आपदा प्रबंधन और आर्थिक गतिविधियों को मजबूत आधार प्रदान करेगा।

