ग्रामीण भारत को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए भारत सरकार के पंचायती राज मंत्रालय ने गुजरात सरकार के पंचायती राज विभाग के सहयोग से गांधीनगर में ‘आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम’ पर एक विशेष आउटरीच कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला में राज्यभर से वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधि, पंचायत प्रतिनिधि और विकास क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ शामिल हुए।
कार्यक्रम में 100 से अधिक प्रतिभागियों ने प्रत्यक्ष रूप से भाग लिया, जबकि 300 से अधिक लोग ऑनलाइन माध्यम से जुड़े। विशेष बात यह रही कि 78 पंचायत प्रतिनिधियों ने भी इसमें हिस्सा लिया, जिनमें वे प्रतिनिधि भी शामिल थे जिन्होंने अपनी ग्राम पंचायतों में ‘ओन सोर्स रेवेन्यू’ (OSR) बढ़ाने में उल्लेखनीय कार्य किया है।
विकसित भारत के लिए आत्मनिर्भर पंचायतों की अहम भूमिका
कार्यशाला को संबोधित करते हुए पंचायती राज मंत्रालय के सचिव विवेक भारद्वाज ने कहा कि आत्मनिर्भर पंचायतें ही विकसित भारत के निर्माण की वास्तविक आधारशिला हैं। उन्होंने कहा कि देश के गांवों को आर्थिक रूप से मजबूत और प्रशासनिक रूप से सक्षम बनाए बिना विकसित भारत का सपना साकार नहीं हो सकता।
उन्होंने कहा कि पंचायतें केवल स्थानीय प्रशासनिक इकाइयां नहीं हैं, बल्कि वे सामाजिक जागरूकता, आर्थिक विकास और सामुदायिक भागीदारी की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। यदि पंचायतें आत्मनिर्भर बनती हैं तो वे स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन, आधारभूत ढांचे के विकास और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने में सक्षम होंगी।
श्री भारद्वाज ने पंचायत प्रतिनिधियों से नवाचार और रचनात्मक सोच को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि नेतृत्व की असली पहचान उसके द्वारा छोड़ी गई सकारात्मक विरासत होती है। उन्होंने पंचायत नेताओं से अपने क्षेत्रों में स्थायी और प्रभावी बदलाव लाने के लिए नए विचारों और योजनाओं पर कार्य करने की अपील की।
आर्थिक रूप से मजबूत पंचायतें ही आत्मनिर्भर भारत का आधार
गुजरात सरकार के पंचायत, ग्रामीण आवास एवं ग्रामीण विकास विभाग के प्रधान सचिव धनंजय द्विवेदी ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा को सफल बनाने के लिए आर्थिक रूप से मजबूत ग्राम पंचायतों का निर्माण बेहद आवश्यक है।
उन्होंने पंचायतों की आय बढ़ाने के लिए अपने स्वयं के राजस्व स्रोत विकसित करने पर बल दिया। साथ ही कहा कि पंचायतों को केवल सरकारी अनुदानों पर निर्भर रहने के बजाय स्थानीय संसाधनों और नवाचार आधारित योजनाओं के माध्यम से वित्तीय आत्मनिर्भरता हासिल करनी चाहिए।
उन्होंने गुजरात की विभिन्न पंचायतों द्वारा किए गए सफल प्रयासों का उल्लेख करते हुए अन्य पंचायतों को भी उन मॉडलों से सीखने और उन्हें अपनाने की सलाह दी। उनके अनुसार, अच्छा शासन स्थानीय स्तर पर जवाबदेही, पारदर्शिता और जनभागीदारी से ही संभव है।
स्थानीय राजस्व बढ़ाने पर विशेष जोर
गुजरात सरकार के अतिरिक्त विकास आयुक्त डॉ. गौरव दहिया ने अपने स्वागत भाषण में पंचायतों की वित्तीय मजबूती के लिए स्थानीय राजस्व संग्रहण को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार गुजरात के नगर निगमों ने मजबूत वित्तीय प्रबंधन और राजस्व तंत्र विकसित किया है, उसी प्रकार पंचायतों को भी आर्थिक रूप से सक्षम संस्थाओं के रूप में विकसित होना होगा।
उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों को राजस्व बढ़ाने के लिए नए और टिकाऊ मॉडल अपनाने तथा स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग पर ध्यान देने की सलाह दी।
नाबार्ड और हुडको ने दिया सहयोग का भरोसा
कार्यक्रम में नाबार्ड, गुजरात के महाप्रबंधक डॉ. प्रदीप पराटे ने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी पूरा होगा जब ग्रामीण समुदाय राष्ट्रीय विकास प्रक्रिया के सक्रिय भागीदार बनेंगे। उन्होंने पंचायती राज मंत्रालय द्वारा पंचायतों को सशक्त बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।
उन्होंने कहा कि नाबार्ड पंचायतों को ऐसी व्यावहारिक और राजस्व उत्पन्न करने वाली परियोजनाओं के विकास में सहयोग देगा, जो स्थानीय आर्थिक विकास और वित्तीय स्थिरता को मजबूत कर सकें।
वहीं, हुडको अहमदाबाद के क्षेत्रीय प्रमुख विमल कुमार ने पंचायतों के लिए तकनीकी सहायता, क्षमता निर्माण और आधारभूत संरचना विकास में हर संभव सहयोग देने की प्रतिबद्धता दोहराई।
आत्मनिर्भर पंचायत पोर्टल का लाइव प्रदर्शन
कार्यशाला के दौरान पंचायती राज मंत्रालय की तकनीकी टीम ने ‘आत्मनिर्भर पंचायत पोर्टल’ का विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया। प्रतिभागियों को पोर्टल के विभिन्न फीचर्स, आवेदन प्रक्रिया, डैशबोर्ड और परियोजना प्रबंधन प्रणाली की जानकारी दी गई।
लाइव डेमो के माध्यम से पंचायत प्रतिनिधियों को बताया गया कि वे किस प्रकार डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग कर अपनी परियोजनाओं को तैयार, प्रस्तुत और मॉनिटर कर सकते हैं। इससे कार्यक्रम के प्रभावी और पारदर्शी क्रियान्वयन में मदद मिलेगी।
सवाल-जवाब सत्र में साझा हुए सुझाव और अनुभव
कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा संवाद आधारित प्रश्नोत्तर सत्र रहा, जिसमें पंचायत प्रतिनिधियों और अधिकारियों ने अपनी जिज्ञासाएं और सुझाव साझा किए। सचिव विवेक भारद्वाज ने स्वयं प्रतिभागियों के प्रश्नों का उत्तर दिया और विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की।
इस दौरान गुजरात पंचायती राज विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी पंचायत प्रतिनिधियों को योजनाओं और कार्यक्रमों से संबंधित आवश्यक जानकारी प्रदान की। यह सत्र अनुभवों के आदान-प्रदान और व्यवहारिक समाधान खोजने के लिए उपयोगी साबित हुआ।
क्या है आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम?
आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम का उद्देश्य ग्राम पंचायतों और ब्लॉक पंचायतों को आर्थिक रूप से व्यवहार्य एवं टिकाऊ परियोजनाओं के विकास में सहायता प्रदान करना है। इसके तहत पंचायतों को अपने स्वयं के राजस्व स्रोत विकसित करने के लिए तकनीकी और संस्थागत सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।
कार्यक्रम के अंतर्गत चयनित पंचायतों को परियोजना की अवधारणा से लेकर वित्तीय समापन तक विशेषज्ञ सहायता दी जाएगी। इसमें पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP), कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंडिंग, बैंक वित्तपोषण और सरकारी योजनाओं के समन्वय जैसी सुविधाएं शामिल होंगी।
इस योजना की एक प्रमुख विशेषता ग्राम सभा की अनिवार्य सहमति है, जिससे स्थानीय समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित होती है। पंचायतों द्वारा प्रस्तावित परियोजनाओं को तकनीकी सहयोग के माध्यम से बैंक योग्य परियोजनाओं में परिवर्तित किया जाएगा।
ग्रामीण विकास की नई दिशा
चार वर्षों की अवधि वाले इस कार्यक्रम का लक्ष्य देशभर में आर्थिक रूप से सशक्त, नवाचारी और आत्मनिर्भर पंचायतों का एक नया मॉडल तैयार करना है। यह पहल न केवल पंचायतों की वित्तीय स्थिति मजबूत करेगी बल्कि स्थानीय शासन को भी अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पंचायतें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनती हैं तो ग्रामीण भारत में विकास की गति तेज होगी और वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।

