NADCP Scheme : भारत एक कृषि प्रधान देश है और पशुपालन लाखों किसानों की आय का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पशुपालन में रोग नियंत्रण और पशुओं का स्वास्थ्य सबसे बड़ी चिंता होती है। इन परेशानियों को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम (National Animal Disease Control Programme – NADCP) शुरू किया है। यह योजना पशुधन को गंभीर रोगों से बचाने, उनके स्वास्थ्य को मजबूत करने और पशु उत्पादकता बढ़ाने के लिए डिज़ाइन की गई है।
राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम क्या है?
राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम (NADCP) को सितंबर 2019 में भारत के प्रधानमंत्री द्वारा शुरू किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य दो गंभीर पशु रोगों का व्यापक नियंत्रण और अंततः उन्मूलन करना है:
- Foot and Mouth Disease (FMD) – खुरपका या मुंहपका रोग
- Brucellosis – ब्रुसेलोसिस रोग
ये दोनों रोग पशुओं की दूध देने की क्षमता में भारी गिरावट, प्रजनन समस्याएं, उत्पादन में कमी और पशु व्यापार पर रोक जैसी समस्याएं पैदा करते हैं। इन रोगों के कारण किसानों को आर्थिक नुकसान होता है। NADCP का लक्ष्य इन रोगों को नियंत्रित करके 2025 तक कम करना और 2030 तक पूरी तरह से खत्म करना है।यह योजना केंद्र सरकारी क्षेत्रीय योजना (Central Sector Scheme) के तहत आती है और 100 प्रतिशत धनराशि केंद्र सरकार द्वारा राज्यों और संघ शासित प्रदेशों को प्रदान की जाती है।
योजना की मुख्य गतिविधियाँ
NADCP के अंतर्गत कई गतिविधियों को लागू किया जाता है, जिनका सीधा असर किसानों और उनके पशुपालन व्यवसाय पर होता है:
1. व्यापक टीकाकरण अभियान
पशुओं को रोगों से बचाने के लिए बड़े पैमाने पर और नियमित टीकाकरण किया जाता है:
- सभी प्रकार के गोवंश, भैंस, भेड़, बकरी और सूअर का Foot and Mouth Disease के खिलाफ छमाही टीकाकरण कराया जाता है।
- 4 से 8 महीने आयु की महिला बोवाइन (गाय व भैंस) बछियों का ब्रुसेलोसिस के लिए प्राथमिक टीकाकरण किया जाता है।
- टीकाकरण से पहले पशुओं का डि-वॉर्मिंग (कीड़ों का उपचार) किया जाता है।
- टीकाकरण और अन्य कार्यों की नियमित रिकॉर्डिंग के लिए पशुओं की पहचान का कार्य किया जाता है।
2. पहचान और रिकॉर्डिंग
हर पशु को यूनिक ईयर टैग (पहचान टैग) दिया जाता है और उसकी जानकारी INAPH (Information Network for Animal Productivity and Health) सिस्टम में दर्ज की जाती है। इससे सरकार को और किसानों को यह पता चलता है कि किस पशु को कब टीका मिला और उसकी स्वास्थ्य स्थिति क्या है।
3. जागरूकता और प्रचार
ग्राम, ब्लॉक, जिला और राज्य स्तर पर जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं ताकि किसान जान सकें कि यह टीकाकरण क्यों जरूरी है और इसके क्या फायदे हैं।
4. निगरानी और डेटा संग्रह
सरकार टीकाकरण के प्रभाव को आंकने के लिए पशु आबादी का निगरानी (सिरोमॉनिटरिंग) करती है और डेटा का विश्लेषण करती है।
यह योजना किसानों के लिए कैसे मददगार है?
एनएडीसीपी के प्रभाव से किसानों को अनेक लाभ मिलते हैं।
1. रोग नियंत्रण और स्वस्थ पशु
टीकाकरण से पशुओं को FMD और ब्रुसेलोसिस जैसे गंभीर रोगों से बचाया जाता है। इससे पशुओं की दूध उत्पादन क्षमता, प्रजनन शक्ति और जीवन गुणवत्ता में सुधार होता है।
2. नुकसान और आर्थिक जोखिम में कमी
इन रोगों के कारण पशु बीमार पड़ते हैं और उनकी उपज कम हो जाती है। NADCP के चलते ऐसे नुकसान कम होते हैं और किसान आर्थिक रूप से बचते हैं।
3. बेहतर पशु व्यापार और निर्यात अवसर
रोग मुक्त पशु और पशु उत्पादों से देश के उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा मिलता है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में व्यापार के अवसर बेहतर होते हैं।
4. लंबे समय की बचत और विकास
स्वस्थ पशु अधिक दूध देते हैं, बेहतर प्रजनन करते हैं और कम इलाज की जरूरत पड़ती है। इससे किसानों की आय बढ़ती है और दीर्घकालिक पशुपालन लाभ में बदलता है।
कौन-कौन से राज्यों में यह योजना चलाई जा रही है?
राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम भारत के सभी राज्यों और संघ शासित प्रदेशों में लागू है। चूंकि यह एक केंद्र सरकार की योजना है और इसके लिए 100 प्रतिशत फंडिंग केंद्र द्वारा उपलब्ध कराई जाती है, इसलिए सभी राज्यों में इसका संचालन होता है।
कुछ राज्यों में विशेष अभियान और लक्ष्य कार्यक्रमों के तहत इस योजना को और अधिक सक्रियता से लागू किया जा रहा है। उदाहरण के लिए, उत्तराखंड जैसे राज्यों ने 2030 तक FMD मुक्त राज्य बनने के लिए व्यापक टीकाकरण और नियंत्रण अभियान शुरू किया है।
किसान इस योजना के लिए कैसे अप्लाई कर सकते हैं?
योजना में शामिल होने के लिए किसानों को कहीं आवेदन फ़ॉर्म भरने की जरूरत नहीं है। NADCP एक व्यापक टीकाकरण कार्यक्रम है जिसमें सरकार स्वयं अपने स्तर पर कार्यान्वयन करती है। किसानों को निम्न तरीकों से इसका लाभ मिलता है:
1. गांवों में टीकाकरण शिविर
सरकार द्वारा गांव, ग्राम पंचायत या स्थानीय पंचायत क्षेत्रों में नियमित टीकाकरण शिविर लगाए जाते हैं। किसान को केवल अपने पशुओं को वहां ले जाना होता है या टीकाकरण दल के आने तक इंतजार करना होता है।
2. मोबाइल पशु चिकित्सा सेवा
कई जिलों और ब्लॉकों में मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयां (Mobile Veterinary Units) गांवों में जाकर टीकाकरण, बीमारी जांच और चिकित्सीय सहायता प्रदान करती हैं। किसान इन सेवाओं का लाभ फोन पर भी ले सकते हैं।
3. स्थानीय सरकारी पशु चिकित्सा केंद्र
किसान अपने नजदीकी सरकारी पशु चिकित्सा अस्पताल, पशु कल्याण केंद्र या पंचायत आधारित हेल्प सेंटर पर जाकर जानकारी ले सकते हैं और पशुओं का टीकाकरण सुनिश्चित कर सकते हैं।
4. हेल्पलाइन उपलब्ध
कई राज्यों में जानवरों के स्वास्थ्य के लिए हेल्पलाइन नंबर जैसे 1962 पर कॉल कर सदस्यता ले सकते हैं और मोबाइल पशु चिकित्सा सेवाओं के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम (NADCP) भारत सरकार की एक महत्त्वपूर्ण योजना है जो सीधे किसानों के जीवन, उनके पशुपालन व्यवसाय और पशुओं के स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव डालती है। इससे न केवल गंभीर पशु रोगों को नियंत्रित करने में मदद मिलती है, बल्कि पशुओं की उत्पादकता, किसानों की आय और भारत के पशु उत्पाद व्यापार में भी बढ़ोतरी होती है। योजनाओं का लाभ लेने के लिए किसानों को केवल अपने पशुओं का टीकाकरण समय पर कराना है और सरकार द्वारा आयोजित शिविरों एवं सेवाओं का फायदा उठाना है। अगर आप किसान हैं और आपके पास पशु हैं, तो अपने नजदीकी सरकारी पशु चिकित्सा केंद्र से संपर्क करें और टीकाकरण शिविरों और सेवाओं के बारे में जानकारी लें। इससे आपके पशु स्वस्थ रहेंगे और आपकी आय में सुधार होगा।

