• About
  • Advertise
  • Privacy & Policy
  • Contact
Fasal Kranti Agriculture News
  • Home
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry
  • Login
No Result
View All Result
  • Home
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry
No Result
View All Result
Fasal Kranti Agriculture News
No Result
View All Result
Home योजना

Mera Gaon Mera Gaurav: वैज्ञानिकों से सीधे जुड़कर खेती को मिलेगा नया रास्ता

Mera Gaon Mera Gaurav: Farming to find a new path through direct engagement with scientists

Fiza by Fiza
June 11, 2026
in योजना
0
Mera Gaon Mera Gaurav

Mera Gaon Mera Gaurav

0
SHARES
3
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

Mera Gaon Mera Gaurav: भारत की खेती लंबे समय से मेहनत, अनुभव और मौसम पर आधारित रही है। किसान अपने खेत में दिन-रात मेहनत करता है, लेकिन कई बार सही समय पर सही जानकारी न मिलने के कारण उत्पादन, लागत और मुनाफे पर असर पड़ता है। कभी बीज की सही किस्म चुनने में दिक्कत होती है, कभी खाद और दवा का संतुलित उपयोग समझ नहीं आता, तो कभी मौसम, बाजार और नई तकनीक की जानकारी समय पर नहीं मिलती। इसी दूरी को कम करने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद यानी ICAR ने “मेरा गांव मेरा गौरव” कार्यक्रम शुरू किया।

मेरा गांव मेरा गौरव कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कृषि वैज्ञानिकों को सीधे किसानों और गांवों से जोड़ना है। इस कार्यक्रम में वैज्ञानिक केवल प्रयोगशाला या संस्थान तक सीमित नहीं रहते, बल्कि गांवों में जाकर किसानों की समस्याओं को समझते हैं और उनके खेत, मौसम, मिट्टी, फसल और संसाधनों के अनुसार समाधान बताते हैं। आसान भाषा में कहें तो यह कार्यक्रम किसान और वैज्ञानिक के बीच एक सीधा पुल है।

मेरा गांव मेरा गौरव कार्यक्रम क्या है?

मेरा गांव मेरा गौरव, जिसे MGMG भी कहा जाता है, ICAR की एक कृषि विस्तार पहल है। इस कार्यक्रम के तहत ICAR संस्थानों, कृषि विश्वविद्यालयों और कृषि विज्ञान केंद्रों से जुड़े वैज्ञानिक गांवों को अपनाते हैं। वैज्ञानिकों की टीम किसानों से नियमित संपर्क रखती है और उन्हें खेती से जुड़ी तकनीकी सलाह देती है।

इस कार्यक्रम की खास बात यह है कि इसमें किसानों को सिर्फ सामान्य जानकारी नहीं दी जाती, बल्कि उनके गांव की स्थिति के अनुसार सलाह दी जाती है। जैसे किसी गांव में मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी है, तो वहां मृदा परीक्षण और संतुलित उर्वरक उपयोग पर जोर दिया जाता है। जहां पानी की कमी है, वहां जल संरक्षण, ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग और कम पानी वाली फसलों की सलाह दी जाती है। जहां कीट और रोग की समस्या अधिक है, वहां वैज्ञानिक फसल सुरक्षा और समेकित कीट प्रबंधन की जानकारी देते हैं।

कार्यक्रम की शुरुआत और उद्देश्य

मेरा गांव मेरा गौरव कार्यक्रम की शुरुआत किसानों तक वैज्ञानिक जानकारी सीधे पहुंचाने के उद्देश्य से की गई थी। इसका लक्ष्य कृषि अनुसंधान को खेत तक ले जाना है। अक्सर नई किस्में, नई तकनीक और खेती के बेहतर तरीके कृषि संस्थानों में विकसित होते हैं, लेकिन उनका लाभ हर किसान तक समय पर नहीं पहुंच पाता। यह कार्यक्रम इसी कमी को दूर करने की कोशिश करता है।

इसका उद्देश्य किसानों को समय-समय पर खेती की सलाह देना, गांवों में कृषि जागरूकता बढ़ाना, किसानों की समस्याओं को वैज्ञानिक तरीके से समझना और खेती को अधिक लाभकारी बनाना है। इसके साथ ही कार्यक्रम किसानों को सरकारी योजनाओं, कृषि इनपुट, मौसम आधारित सलाह, बाजार जानकारी, मृदा स्वास्थ्य, जल संरक्षण और जलवायु परिवर्तन जैसे विषयों पर भी जागरूक करता है।

किसानों के लिए यह कार्यक्रम कैसे काम करता है?

इस कार्यक्रम के तहत वैज्ञानिकों की टीम बनाई जाती है। सामान्य तौर पर एक टीम में अलग-अलग विषयों के वैज्ञानिक शामिल होते हैं, जैसे फसल विज्ञान, मृदा विज्ञान, कृषि विस्तार, पौध संरक्षण, पशुपालन, बागवानी, मत्स्य पालन या कृषि अभियांत्रिकी। यह टीम कुछ गांवों को चुनती है और वहां किसानों से संपर्क करती है।

वैज्ञानिक गांव का दौरा करते हैं, किसानों के खेत देखते हैं, फसल की स्थिति समझते हैं और फिर समाधान बताते हैं। कई बार किसानों के साथ बैठक, किसान गोष्ठी, प्रशिक्षण शिविर, खेत प्रदर्शन और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। वैज्ञानिक फोन, मोबाइल संदेश और स्थानीय संपर्क के माध्यम से भी किसानों को सलाह देते हैं।

इस कार्यक्रम में सलाह केवल एक बार नहीं दी जाती। वैज्ञानिक समय-समय पर किसानों से संपर्क रखते हैं। बुवाई से पहले बीज और किस्म की जानकारी, फसल के दौरान खाद, सिंचाई और रोग नियंत्रण की सलाह, कटाई के समय उत्पादन और भंडारण की जानकारी तथा बाजार से जुड़ी जागरूकता भी दी जाती है।

किसानों को कौन-कौन सी जानकारी मिलती है?

मेरा गांव मेरा गौरव कार्यक्रम के तहत किसानों को कई तरह की जानकारी दी जाती है। इसमें फसल की उन्नत किस्में, बीज उपचार, संतुलित खाद प्रबंधन, जैव उर्वरक, वर्मी कम्पोस्ट, फसल चक्र, मृदा परीक्षण, जल संरक्षण, कीट और रोग नियंत्रण, पशुपालन, बागवानी, मत्स्य पालन, कृषि यंत्र, मौसम आधारित खेती और बाजार संबंधी जानकारी शामिल है।

किसानों को यह भी बताया जाता है कि केवल अधिक खाद डालने से उत्पादन नहीं बढ़ता। सही मात्रा में नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश और सूक्ष्म पोषक तत्वों का उपयोग जरूरी है। इसी तरह रोग आने के बाद दवा छिड़कने के बजाय शुरुआत से ही निगरानी और रोकथाम पर ध्यान देना चाहिए।

वैज्ञानिक किसानों को यह समझाते हैं कि खेती में लागत कम करने के लिए स्थानीय संसाधनों का सही उपयोग करें। फसल अवशेष को जलाने के बजाय खाद में बदलें, जैविक पदार्थों का उपयोग बढ़ाएं, पानी की बचत करें और मौसम के अनुसार फसल योजना बनाएं।

छोटे और सीमांत किसानों के लिए क्यों जरूरी है?

भारत में बड़ी संख्या में किसान छोटे और सीमांत हैं। इनके पास जमीन कम होती है और संसाधन भी सीमित होते हैं। ऐसे किसानों के लिए गलत निर्णय बहुत महंगा पड़ सकता है। गलत बीज, गलत खाद, गलत दवा या गलत समय पर सिंचाई से फसल खराब हो सकती है और लागत बढ़ सकती है।

मेरा गांव मेरा गौरव कार्यक्रम ऐसे किसानों के लिए मददगार है, क्योंकि इसमें वैज्ञानिक सीधे गांव में जाकर उन्हें व्यवहारिक सलाह देते हैं। किसान अपनी समस्या खुलकर बता सकता है और वैज्ञानिक खेत की स्थिति देखकर समाधान दे सकता है। इससे किसान को भरोसेमंद जानकारी मिलती है और वह अनावश्यक खर्च से बच सकता है।

किन राज्यों में यह कार्यक्रम चल रहा है?

मेरा गांव मेरा गौरव कोई एक राज्य तक सीमित योजना नहीं है। यह ICAR की राष्ट्रीय पहल है, इसलिए इसे देश के अलग-अलग राज्यों में ICAR संस्थानों, कृषि विश्वविद्यालयों और कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से चलाया जाता है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, केरल, मणिपुर, असम, झारखंड, कर्नाटक, हरियाणा, पंजाब, बिहार, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों में ICAR से जुड़े संस्थान अपने-अपने क्षेत्र के गांवों में इस तरह की गतिविधियां करते रहे हैं।

उदाहरण के तौर पर उत्तर प्रदेश के हापुड़ में संतुलित उर्वरक उपयोग पर किसान संगोष्ठी आयोजित की गई। झांसी क्षेत्र में कृषि वानिकी से जुड़े गांवों में किसानों को जागरूक किया गया। महाराष्ट्र में प्याज और अनार उत्पादक क्षेत्रों में किसानों से संवाद किया गया। तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में बारानी खेती, तेल पाम, मौसम आधारित सलाह और फसल प्रबंधन पर कार्यक्रम हुए। केरल में मत्स्य और प्रसंस्करण से जुड़े विषयों पर किसानों और ग्रामीण समुदायों से संपर्क किया गया।

इसका मतलब है कि किसान को यह देखना होगा कि उसके जिले या नजदीकी क्षेत्र में कौन सा ICAR संस्थान, कृषि विश्वविद्यालय या KVK इस कार्यक्रम से जुड़ी गतिविधियां चला रहा है।

किसान इस कार्यक्रम के लिए कैसे अप्लाई करें?

मेरा गांव मेरा गौरव पारंपरिक सब्सिडी योजना की तरह नहीं है, जिसमें किसान ऑनलाइन फॉर्म भरकर पैसे या अनुदान के लिए आवेदन करता है। यह मुख्य रूप से कृषि वैज्ञानिकों और किसानों के बीच ज्ञान और तकनीक पहुंचाने वाला कार्यक्रम है। इसलिए इसमें जुड़ने का तरीका थोड़ा अलग है।

किसान अपने जिले के कृषि विज्ञान केंद्र यानी KVK से संपर्क कर सकते हैं। KVK में जाकर किसान पूछ सकते हैं कि उनके क्षेत्र में मेरा गांव मेरा गौरव कार्यक्रम के तहत कौन-कौन से गांव शामिल हैं और आगामी प्रशिक्षण, किसान गोष्ठी या खेत प्रदर्शन कब होंगे। किसान अपने गांव के ग्राम प्रधान, किसान उत्पादक संगठन, सहकारी समिति या कृषि विभाग के अधिकारी के माध्यम से भी जानकारी ले सकते हैं।

यदि किसी गांव के किसान सामूहिक रूप से इस कार्यक्रम से जुड़ना चाहते हैं, तो वे नजदीकी KVK या ICAR संस्थान को लिखित आवेदन दे सकते हैं। आवेदन में गांव का नाम, किसानों की संख्या, मुख्य फसलें, प्रमुख समस्याएं, सिंचाई की स्थिति और संपर्क व्यक्ति की जानकारी देनी चाहिए। इसके बाद संबंधित संस्थान उपलब्धता और क्षेत्रीय प्राथमिकता के आधार पर गांव में कार्यक्रम आयोजित कर सकता है।

किसानों को किन दस्तावेजों की जरूरत पड़ सकती है?

इस कार्यक्रम में सामान्य तौर पर भारी दस्तावेजी प्रक्रिया नहीं होती, क्योंकि यह अनुदान देने वाली योजना नहीं है। फिर भी KVK या संस्थान से जुड़ते समय किसान के पास आधार कार्ड, मोबाइल नंबर, गांव और खेत की जानकारी, फसल की जानकारी, भूमि से जुड़ा सामान्य विवरण और बैंक विवरण जैसी बुनियादी जानकारी रखना उपयोगी हो सकता है। यदि किसान किसी प्रशिक्षण, प्रदर्शन या अन्य सरकारी योजना से भी जुड़ना चाहता है, तो अलग से दस्तावेज मांगे जा सकते हैं।

इस कार्यक्रम से किसानों को क्या लाभ मिलते हैं?

मेरा गांव मेरा गौरव कार्यक्रम का सबसे बड़ा लाभ यह है कि किसान को भरोसेमंद वैज्ञानिक सलाह मिलती है। कई बार किसान बाजार में उपलब्ध दवा या खाद विक्रेता की सलाह पर निर्भर हो जाता है, लेकिन हर सलाह खेत की जरूरत के अनुसार सही हो, यह जरूरी नहीं। वैज्ञानिक खेत और फसल की स्थिति देखकर सुझाव देते हैं, जिससे किसान सही फैसला ले सकता है।

इस कार्यक्रम से किसानों को उन्नत कृषि तकनीक अपनाने में मदद मिलती है। फसल प्रदर्शन देखकर किसान खुद समझता है कि नई किस्म, लाइन बुवाई, बीज उपचार, संतुलित खाद, जैविक उपाय या सिंचाई प्रबंधन से कितना फर्क पड़ सकता है। इससे किसानों में नई तकनीक अपनाने का विश्वास बढ़ता है।

इससे खेती की लागत कम हो सकती है, उत्पादन बढ़ सकता है और फसल की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है। मृदा स्वास्थ्य सुधारने, पानी बचाने, जैविक और प्राकृतिक उपाय अपनाने तथा फसल विविधीकरण से खेती अधिक टिकाऊ बनती है।

जलवायु परिवर्तन के दौर में कार्यक्रम की भूमिका

आज किसान जलवायु परिवर्तन की चुनौती से जूझ रहा है। कभी बारिश समय पर नहीं होती, कभी अचानक तेज बारिश हो जाती है, कभी गर्मी बढ़ जाती है और कभी रोग-कीट का प्रकोप बढ़ जाता है। ऐसे समय में वैज्ञानिक सलाह की जरूरत और बढ़ जाती है।

मेरा गांव मेरा गौरव कार्यक्रम किसानों को जलवायु अनुकूल खेती की दिशा में जागरूक करता है। इसमें कम पानी वाली फसलें, सूखा सहनशील किस्में, जल संरक्षण, मल्चिंग, खेत तालाब, फसल बीमा, मौसम आधारित सलाह और मृदा स्वास्थ्य पर जोर दिया जाता है। इससे किसान बदलते मौसम के अनुसार खेती की योजना बना सकता है।

महिलाओं और युवाओं के लिए अवसर

यह कार्यक्रम केवल खेत मालिक किसानों तक सीमित नहीं है। गांव की महिलाएं, युवा किसान, पशुपालक, बागवानी किसान और ग्रामीण उद्यमी भी इससे लाभ ले सकते हैं। महिलाओं को पोषण वाटिका, मशरूम उत्पादन, वर्मी कम्पोस्ट, मूल्य संवर्धन, डेयरी, बकरी पालन और छोटे कृषि उद्यमों की जानकारी मिल सकती है। युवा किसानों को आधुनिक खेती, डिजिटल कृषि, ड्रोन, कृषि यंत्र, स्टार्टअप, एफपीओ और बाजार से जुड़ने की जानकारी मिल सकती है।

कार्यक्रम की चुनौतियां

मेरा गांव मेरा गौरव कार्यक्रम की सोच बहुत अच्छी है, लेकिन इसे और प्रभावी बनाने के लिए कुछ चुनौतियों पर ध्यान देना जरूरी है। कई किसानों को अभी भी यह पता नहीं है कि यह कार्यक्रम उनके क्षेत्र में कैसे चल रहा है। कई जगह वैज्ञानिकों और किसानों के बीच नियमित संपर्क बनाए रखना कठिन होता है। कुछ गांवों में संसाधनों की कमी, किसानों की कम भागीदारी या स्थानीय समन्वय की कमी भी असर डालती है।

इसलिए जरूरी है कि KVK, पंचायत, किसान समूह, एफपीओ और कृषि विभाग मिलकर कार्यक्रम को गांव स्तर तक मजबूत बनाएं। किसानों को भी सक्रिय भूमिका निभानी होगी। अगर किसान अपनी समस्या वैज्ञानिकों तक नहीं पहुंचाएंगे, तो समाधान भी सही तरीके से नहीं मिल पाएगा।

किसानों के लिए जरूरी सलाह

किसान इस कार्यक्रम का लाभ लेना चाहते हैं तो सबसे पहले अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करें। अपने गांव के किसानों का एक छोटा समूह बनाएं और मुख्य समस्याओं की सूची तैयार करें। जैसे मिट्टी की जांच, फसल रोग, पानी की कमी, पशुपालन, बाजार, भंडारण या खाद प्रबंधन की समस्या। इसके बाद KVK या ICAR संस्थान से गांव में किसान गोष्ठी या प्रशिक्षण कराने का अनुरोध करें।

किसान वैज्ञानिकों से मिली सलाह को खेत में छोटे स्तर पर लागू करें और परिणाम देखें। जो तकनीक सफल हो, उसे धीरे-धीरे बड़े क्षेत्र में अपनाएं। इससे जोखिम कम रहेगा और लाभ की संभावना बढ़ेगी।

निष्कर्ष

मेरा गांव मेरा गौरव कार्यक्रम किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है, क्योंकि यह खेती की समस्याओं को सीधे वैज्ञानिकों तक पहुंचाता है और वैज्ञानिक समाधान गांवों तक लाता है। आज जब खेती में लागत बढ़ रही है, मौसम बदल रहा है और बाजार की चुनौती बढ़ रही है, तब किसान को सही जानकारी की सबसे अधिक जरूरत है। यह कार्यक्रम उसी जरूरत को पूरा करने की दिशा में काम करता है।

यह योजना किसानों को पैसा देने वाली योजना नहीं, बल्कि ज्ञान, तकनीक और मार्गदर्शन देने वाली पहल है। यदि किसान, KVK, कृषि विश्वविद्यालय, ICAR संस्थान और पंचायत मिलकर इसे सही तरीके से आगे बढ़ाएं, तो गांवों में खेती अधिक वैज्ञानिक, लाभकारी और टिकाऊ बन सकती है। सच में, जब वैज्ञानिक गांव से जुड़ेंगे और किसान नई तकनीक अपनाएंगे, तभी “मेरा गांव मेरा गौरव” नाम अपने असली अर्थ में सफल होगा।

 

Tags: agriculture newsAgriculture TechnologyFarmer AdvisoryFarmer SchemeICAR ProgrammeICAR SchemeIndian FarmersKrishi Vigyan KendraKVKMera Gaon Mera GauravRural DevelopmentScientific FarmingSustainable Agriculture
Previous Post

Kapas Ki Kheti 2026: कमजोर मॉनसून के बावजूद कपास का रकबा 15% बढ़ने की उम्मीद

Next Post

इंदौर में शुरू हुआ पांच दिवसीय ब्रिक्स कृषि सम्मेलन, खाद्य सुरक्षा और किसानों के सशक्तिकरण पर रहेगा फोकस

Next Post
इंदौर में शुरू हुआ पांच दिवसीय ब्रिक्स कृषि सम्मेलन, खाद्य सुरक्षा और किसानों के सशक्तिकरण पर रहेगा फोकस

इंदौर में शुरू हुआ पांच दिवसीय ब्रिक्स कृषि सम्मेलन, खाद्य सुरक्षा और किसानों के सशक्तिकरण पर रहेगा फोकस

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent Posts

  • Nano Fertilizer: टिकाऊ कृषि (Sustainable Farming) के लिए एक संपूर्ण गाइड
  • किसानों को बड़ी सौगात: 14 जून को विदिशा में मॉडल कृषि विज्ञान केंद्र का शिलान्यास करेंगे शिवराज सिंह चौहान
  • Pineapple स्वाद, पोषण और सेहत का अनोखा खजाना
  • कृषि मानव जीवन का आधार, किसानों के सम्मान में प्रधानमंत्री ने साझा किया संस्कृत सुभाषितम्
  • Chawal Ki Kheti: रेड रिवर डेल्टा में कम उत्सर्जन

Recent Comments

No comments to show.
Fasal Kranti is a leading monthly agricultural magazine dedicated to empowering Indian farmers. Published scince 2013 in Hindi, Punjabi, Marathi, and Gujarati, it provides valuable insights, modern farming techniques, and the latest agricultural updates. With a vision to support 21st-century farmers, Fasal Kranti strives to be a trusted source of knowledge and innovation in the agricultural sector.

Category

  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes

Newsletter

Subscribe to our Newsletter. You choose the topics of your interest and we’ll send you handpicked news and latest updates based on your choice.

Subscribe Now

Contact

Promote your brand with Fasalkranti. Connect with us for advertising.
  • E-Mail: info@fasalkranti.in
  • Phone: +91 9625941688
Copyrights © 2026. Fasal Kranti, Inc. All Rights Reserved. Maintained By Fasalkranti Team .

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In

Add New Playlist

No Result
View All Result
  • Home
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry

© 2026 Fasalkranti - News and Magazine by Fasalkranti news.