भाकृअनुप-केन्द्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान (सीएसडब्ल्यूआरआई), अविकानगर द्वारा एक दिवसीय मीडिया कार्यशाला सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में राजस्थान सरकार के पीएचईडी कैबिनेट मंत्री कन्हैयालाल चौधरी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के निदेशक डॉ. अरुण कुमार तोमर ने की। कार्यशाला का आयोजन अविकानगर स्थित अतिथि गृह के मीटिंग रूम में किया गया, जिसमें लगभग 25 मीडिया प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
इस अवसर पर कृषि, पर्यावरण संरक्षण, मिट्टी के स्वास्थ्य और किसानों की आय बढ़ाने से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही, देशभर में चलाए जा रहे “खेत बचाओ अभियान” को सफल बनाने में मीडिया की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया।
मीडिया सरकार, संस्थान और आमजन के बीच महत्वपूर्ण कड़ी
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि कन्हैयालाल चौधरी ने कहा कि मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ होने के साथ-साथ सरकार, अनुसंधान संस्थानों और आम जनता के बीच एक मजबूत सेतु का कार्य करता है। उन्होंने कहा कि कृषि और पर्यावरण से जुड़े विषयों की जानकारी किसानों तक पहुंचाने में मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने विशेष रूप से खेत बचाओ अभियान का उल्लेख करते हुए मीडिया प्रतिनिधियों से अपील की कि वे इस अभियान के उद्देश्यों को किसानों और ग्रामीण समुदायों तक पहुंचाने में सहयोग करें। उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा शुरू किया गया यह अभियान कृषि भूमि की उर्वरता बनाए रखने, मिट्टी के स्वास्थ्य को सुधारने और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
डॉ. अरुण कुमार तोमर ने मीडिया का जताया आभार
सीएसडब्ल्यूआरआई के निदेशक डॉ. अरुण कुमार तोमर ने कार्यशाला में उपस्थित सभी पत्रकारों और मीडिया प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए संस्थान की गतिविधियों को देशभर में प्रचारित करने के लिए उनका आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक डॉ. मंगीलाल जाट के मार्गदर्शन में पूरे देश में “खेत बचाओ अभियान” चलाया जा रहा है। यह अभियान वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुका है क्योंकि लगातार बढ़ते रासायनिक उर्वरकों के उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
डॉ. तोमर ने कहा कि मीडिया के माध्यम से इस अभियान की जानकारी देश के प्रत्येक किसान तक पहुंचाई जा सकती है, जिससे कृषि भूमि को सुरक्षित रखने और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।
मिट्टी परीक्षण आधारित उर्वरक उपयोग पर दिया जोर
मीडिया कार्यशाला के दौरान डॉ. तोमर ने किसानों को मिट्टी परीक्षण के आधार पर ही रासायनिक उर्वरकों का उपयोग करने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि बिना जांच के अत्यधिक रासायनिक खाद का उपयोग न केवल मिट्टी की उर्वरता को कम करता है बल्कि उत्पादन लागत भी बढ़ाता है।
उन्होंने कहा कि यदि किसान मिट्टी की जांच रिपोर्ट के अनुसार उर्वरकों का प्रयोग करें तो फसल उत्पादन बेहतर होगा और लागत में भी कमी आएगी। इससे मिट्टी का स्वास्थ्य लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकेगा।
उन्होंने मीडिया से आग्रह किया कि वे इस संदेश को अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाएं ताकि वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा मिल सके।
जैविक खाद और प्राकृतिक खेती को बताया बेहतर विकल्प
कार्यक्रम के दौरान निदेशक ने रासायनिक उर्वरकों के विकल्प के रूप में जैविक खाद, सड़ी हुई गोबर खाद, केंचुआ खाद (वर्मी कम्पोस्ट) और हरी खाद के उपयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में प्राकृतिक खेती और ऑर्गेनिक खेती किसानों के लिए एक बेहतर विकल्प बनकर उभर रही है। इससे खेती की लागत कम होती है और मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार होता है। साथ ही, किसानों को बेहतर गुणवत्ता वाली उपज प्राप्त होती है, जिसकी बाजार में अधिक मांग रहती है।
डॉ. तोमर के अनुसार, यदि किसान जैविक और प्राकृतिक खेती की ओर कदम बढ़ाते हैं तो इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ कृषि क्षेत्र की स्थिरता भी सुनिश्चित होगी।
खेत बचाओ अभियान की सफलता में मीडिया की अहम भूमिका
कार्यशाला में बार-बार इस बात पर जोर दिया गया कि खेत बचाओ अभियान की सफलता काफी हद तक जन-जागरूकता पर निर्भर करती है। मीडिया समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंच रखता है, इसलिए किसानों को सही और वैज्ञानिक जानकारी देने में इसकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
विशेषज्ञों ने कहा कि कृषि से जुड़ी योजनाओं, नई तकनीकों, उन्नत कृषि पद्धतियों और सरकारी कार्यक्रमों की जानकारी यदि समय पर किसानों तक पहुंच जाए तो वे अधिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
मीडिया प्रतिनिधियों ने भी कृषि विकास और किसान हितों से जुड़े विषयों को प्राथमिकता देने का आश्वासन दिया।
सीएसडब्ल्यूआरआई की गतिविधियों को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान
डॉ. तोमर ने कहा कि भाकृअनुप-सीएसडब्ल्यूआरआई अविकानगर देश में भेड़ पालन, ऊन उत्पादन और पशुधन अनुसंधान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है। संस्थान द्वारा किसानों, पशुपालकों और ग्रामीण समुदायों के हित में अनेक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।
उन्होंने मीडिया से अनुरोध किया कि संस्थान की विभिन्न गतिविधियों और अनुसंधान उपलब्धियों को व्यापक स्तर पर प्रकाशित और प्रसारित किया जाए ताकि अधिक से अधिक किसान और पशुपालक इनका लाभ उठा सकें।
उन्होंने यह भी बताया कि जून माह के दौरान संस्थान की विभिन्न वैज्ञानिक टीमों द्वारा कई जागरूकता कार्यक्रम और प्रशिक्षण गतिविधियां संचालित की जा रही हैं, जिनका प्रचार-प्रसार किसानों तक पहुंचना आवश्यक है।
कृषि जागरूकता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
मीडिया कार्यशाला सम्मेलन केवल एक संवाद कार्यक्रम नहीं था, बल्कि कृषि जागरूकता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ। इसमें कृषि भूमि संरक्षण, मिट्टी स्वास्थ्य सुधार, प्राकृतिक खेती, जैविक खेती और वैज्ञानिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान वैज्ञानिक सलाह के अनुसार खेती करें और प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग करें तो कृषि उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण भी सुनिश्चित किया जा सकता है।
भाकृअनुप-केन्द्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान (सीएसडब्ल्यूआरआई), अविकानगर द्वारा आयोजित यह मीडिया कार्यशाला सम्मेलन कृषि जागरूकता और खेत बचाओ अभियान को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रहा। कार्यक्रम में मीडिया को सरकार, अनुसंधान संस्थानों और किसानों के बीच एक प्रभावी कड़ी बताया गया।
मुख्य अतिथि कन्हैयालाल चौधरी और निदेशक डॉ. अरुण कुमार तोमर ने किसानों तक वैज्ञानिक खेती, मिट्टी परीक्षण, जैविक खादों के उपयोग तथा प्राकृतिक खेती का संदेश पहुंचाने में मीडिया की अहम भूमिका को रेखांकित किया। यह कार्यशाला न केवल कृषि क्षेत्र में जागरूकता बढ़ाने का माध्यम बनी, बल्कि टिकाऊ और लाभकारी खेती को प्रोत्साहित करने की दिशा में भी एक सार्थक प्रयास साबित हुई।

