देश में खरीफ 2026 सीजन के दौरान किसानों को उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार लगातार प्रयास कर रही है। इसी दिशा में एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए यूरिया, डाय-अमोनियम फॉस्फेट (DAP) और सल्फर से लदे चार मालवाहक जहाजों ने पिछले सप्ताह सफलतापूर्वक होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को पार कर लिया है। ये जहाज वर्तमान में भारत के विभिन्न बंदरगाहों की ओर बढ़ रहे हैं और उनके पहुंचते ही उर्वरकों की अतिरिक्त खेप देश के भंडार में शामिल हो जाएगी।
सरकार के अनुसार ये जहाज कृष्णापट्टनम, काकीनाडा, पारादीप और मुंद्रा बंदरगाहों पर पहुंचेंगे, जहां से उर्वरकों का वितरण विभिन्न राज्यों में किया जाएगा। इससे खरीफ फसलों के लिए आवश्यक पोषक तत्वों की आपूर्ति और मजबूत होगी।
उर्वरक आपूर्ति श्रृंखला बनी मजबूत
वैश्विक स्तर पर समुद्री व्यापार और भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच इन जहाजों का सुरक्षित रूप से भारत की ओर बढ़ना देश की उर्वरक सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बावजूद किसानों को उर्वरकों की उपलब्धता प्रभावित नहीं होने दी जाएगी।
इन नई खेपों के आगमन से पहले ही देश में उर्वरकों का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है, जो आगामी कृषि गतिविधियों को सुचारू रूप से चलाने में मदद करेगा।
पिछले वर्ष की तुलना में काफी बढ़ा उर्वरक स्टॉक
22 जून 2026 तक देश में कुल उर्वरक भंडार 196.08 लाख टन तक पहुंच गया है। यह पिछले वर्ष की समान अवधि के 168.67 लाख टन की तुलना में काफी अधिक है। इससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार ने समय रहते उत्पादन और आयात दोनों मोर्चों पर प्रभावी रणनीति अपनाई है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्तमान स्टॉक में शामिल हैं:
- यूरिया : 81.44 लाख टन
- डीएपी : 20.92 लाख टन
- एनपीके उर्वरक : 55.91 लाख टन
- एमओपी (म्यूरेट ऑफ पोटाश) : 12.68 लाख टन
- एसएसपी (सिंगल सुपर फॉस्फेट) : 25.13 लाख टन
पिछले वर्ष की तुलना में यूरिया, डीएपी, एनपीके और एमओपी के भंडार में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
खरीफ सीजन में बढ़ी उर्वरकों की मांग
देश में कृषि गतिविधियों में तेजी के कारण उर्वरकों की मांग भी बढ़ी है। 1 मार्च 2026 से 21 जून 2026 के बीच कुल उर्वरक बिक्री 153.4 लाख टन दर्ज की गई है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की 140.2 लाख टन बिक्री से 13.2 लाख टन अधिक है।
इस दौरान प्रमुख उर्वरकों की बिक्री इस प्रकार रही:
- यूरिया : 79.1 लाख टन
- एनपीके : 34.8 लाख टन
- डीएपी और टीएसपी : 19.8 लाख टन
बढ़ती बिक्री यह संकेत देती है कि देशभर में खरीफ फसलों की बुवाई तेजी से आगे बढ़ रही है और किसान पर्याप्त मात्रा में उर्वरकों का उपयोग कर रहे हैं।
घरेलू उत्पादन ने निभाई अहम भूमिका
सरकार ने केवल आयात पर निर्भर रहने के बजाय घरेलू उत्पादन को भी बढ़ावा दिया है। वैश्विक आपूर्ति संबंधी चुनौतियों के बीच देश के उर्वरक कारखानों ने उत्पादन बढ़ाकर मजबूत योगदान दिया है।
1 मार्च से 21 जून 2026 की अवधि में देश में कुल 133.12 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का उत्पादन किया गया। इसके साथ ही भारतीय बंदरगाहों पर 43.69 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का आयात भी पहुंचा।
विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू उत्पादन और आयात के बीच संतुलन बनाए रखने की यह रणनीति किसानों के हित में काफी प्रभावी साबित हो रही है।
वैश्विक बाजार से सुरक्षित की गई बड़ी मात्रा
खरीफ सीजन की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए भारत ने वैश्विक बाजार से भी बड़ी मात्रा में उर्वरकों की खरीद सुनिश्चित की है। हाल ही में हुए अंतरराष्ट्रीय टेंडर मूल्यांकन में भारत ने 17.70 लाख मीट्रिक टन यूरिया का अनुबंध किया है।
इसके साथ ही खरीफ 2026 सीजन के लिए भारत ने कुल 90 लाख मीट्रिक टन से अधिक यूरिया और पी एंड के (फॉस्फेट एवं पोटाश) उर्वरकों की व्यवस्था वैश्विक बाजार से कर ली है।
यह कदम भविष्य में संभावित आपूर्ति व्यवधानों और कीमतों में उतार-चढ़ाव से बचाव के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कई देशों से हो रही उर्वरकों की आपूर्ति
भारत सरकार ने विदेशों में स्थित 28 भारतीय मिशनों के सहयोग से विभिन्न देशों से उर्वरकों की आपूर्ति सुनिश्चित की है।
यूरिया की आपूर्ति जिन देशों से सुनिश्चित की गई है उनमें शामिल हैं:
- ओमान
- मलेशिया
- वियतनाम
- जॉर्जिया
- नाइजीरिया
- रूस
- फिनलैंड
- मिस्र
- अल्जीरिया
- तुर्किये
- नीदरलैंड्स
वहीं डीएपी और एनपीके उर्वरकों की आपूर्ति रूस, मोरक्को, मिस्र, अमेरिका, जॉर्डन, दक्षिण कोरिया, ट्यूनीशिया और सऊदी अरब सहित कई देशों से रेड सी समुद्री मार्ग के जरिए की जा रही है।
किसानों को नहीं होगी उर्वरकों की कमी
उर्वरक विभाग ने कहा है कि राज्य सरकारों, सहकारी संस्थाओं और वितरण एजेंसियों के साथ मिलकर देशभर में उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। पर्याप्त स्टॉक, बढ़े हुए घरेलू उत्पादन और सुरक्षित आयात व्यवस्था के कारण खरीफ सीजन के दौरान किसानों को उर्वरकों की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
खरीफ 2026 सीजन के दौरान भारत का उर्वरक भंडार मजबूत स्थिति में है। होर्मुज जलडमरूमध्य से सफलतापूर्वक गुजरने वाले चार जहाज, बढ़ा हुआ घरेलू उत्पादन, रिकॉर्ड आयात और पर्याप्त भंडारण क्षमता देश की कृषि सुरक्षा को मजबूत आधार प्रदान कर रहे हैं। इससे न केवल किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध होंगे, बल्कि आगामी फसल उत्पादन में भी सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है।

