• About
  • Advertise
  • Privacy & Policy
  • Contact
Fasal Kranti Agriculture News
  • Home
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry
  • Login
No Result
View All Result
  • Home
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry
No Result
View All Result
Fasal Kranti Agriculture News
No Result
View All Result
Home पशुपालन

गाय और भैंस का दूध उत्पादन बढ़ाने के वैज्ञानिक उपाय

Scientific methods to increase milk production of cow and buffalo

Emran Khan by Emran Khan
June 23, 2026
in पशुपालन, समाचार
0
गाय और भैंस का दूध उत्पादन बढ़ाने के वैज्ञानिक उपाय
0
SHARES
1
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

भारत दुनिया के सबसे बड़े दुग्ध उत्पादक देशों में शामिल है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पशुपालन का महत्वपूर्ण योगदान है और लाखों किसान गाय एवं भैंस पालन के माध्यम से अपनी आय बढ़ा रहे हैं। हालांकि कई पशुपालक यह शिकायत करते हैं कि उनके पशु अपेक्षित मात्रा में दूध नहीं दे रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैज्ञानिक तरीके से पशुओं का प्रबंधन किया जाए तो दूध उत्पादन में 20 से 40 प्रतिशत तक वृद्धि की जा सकती है।

संतुलित आहार है सबसे महत्वपूर्ण

दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए सबसे पहले पशुओं को संतुलित आहार देना जरूरी है। केवल हरा चारा या भूसा खिलाने से पशुओं की पोषण संबंधी जरूरतें पूरी नहीं होतीं। पशुओं को ऊर्जा, प्रोटीन, खनिज लवण और विटामिन की उचित मात्रा मिलनी चाहिए।

दूध देने वाली गाय और भैंस को प्रतिदिन पर्याप्त मात्रा में हरा चारा, सूखा चारा और दाना मिश्रण देना चाहिए। सामान्यतः प्रत्येक 2 से 2.5 लीटर दूध उत्पादन पर एक किलोग्राम संतुलित दाना देना लाभकारी माना जाता है।

हरे चारे का नियमित उपयोग करें

हरे चारे में विटामिन, खनिज और पाचन में सहायक तत्व प्रचुर मात्रा में होते हैं। बरसीम, ज्वार, बाजरा, मक्का, लोबिया और नेपियर घास जैसे चारे पशुओं के लिए अत्यंत लाभकारी होते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार पशुओं के कुल आहार का कम से कम 40 से 50 प्रतिशत हिस्सा हरे चारे का होना चाहिए। इससे दूध उत्पादन बढ़ने के साथ-साथ पशुओं का स्वास्थ्य भी बेहतर रहता है।

मिनरल मिक्सचर और नमक अवश्य दें

कई बार पशुओं में दूध उत्पादन कम होने का कारण खनिज तत्वों की कमी होती है। कैल्शियम, फॉस्फोरस, जिंक, कॉपर और अन्य सूक्ष्म खनिजों की कमी से दूध उत्पादन प्रभावित होता है।

पशुओं को प्रतिदिन 50 से 60 ग्राम मिनरल मिक्सचर तथा 30 से 40 ग्राम सामान्य नमक देना चाहिए। इससे प्रजनन क्षमता में सुधार होता है और दूध उत्पादन भी बढ़ता है।

स्वच्छ पानी की पर्याप्त व्यवस्था

दूध का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा पानी होता है। इसलिए यदि पशु को पर्याप्त पानी नहीं मिलेगा तो दूध उत्पादन प्रभावित होना स्वाभाविक है।

एक दुग्ध देने वाली गाय या भैंस को प्रतिदिन 60 से 100 लीटर तक स्वच्छ और ताजा पानी उपलब्ध कराना चाहिए। गर्मियों में पानी की आवश्यकता और अधिक बढ़ जाती है। पानी की कमी से दूध उत्पादन में तुरंत गिरावट देखी जा सकती है।

पशुओं को हीट स्ट्रेस से बचाएं

गर्मी के मौसम में तापमान बढ़ने पर पशु हीट स्ट्रेस का शिकार हो जाते हैं, जिससे उनका दूध उत्पादन कम हो जाता है। विशेष रूप से भैंसों पर गर्मी का अधिक प्रभाव पड़ता है।

गर्मी से बचाव के लिए पशुशाला में पर्याप्त वेंटिलेशन, पंखे, फॉगर्स और छायादार व्यवस्था करनी चाहिए। भैंसों के लिए दिन में एक-दो बार पानी में बैठने या नहलाने की व्यवस्था लाभदायक रहती है।

समय पर टीकाकरण और रोग नियंत्रण

बीमार पशु कभी भी अधिक दूध नहीं दे सकते। इसलिए पशुओं को विभिन्न संक्रामक रोगों से बचाने के लिए समय पर टीकाकरण कराना जरूरी है।

खुरपका-मुंहपका, गलघोटू, लंगड़ा बुखार और ब्रूसेलोसिस जैसी बीमारियों से बचाव के लिए पशु चिकित्सक की सलाह के अनुसार टीके लगवाने चाहिए। इसके अलावा नियमित कृमिनाशक दवाएं देने से भी पशुओं का स्वास्थ्य बेहतर बना रहता है।

दुग्ध दोहन की वैज्ञानिक विधि अपनाएं

दूध निकालने का तरीका भी उत्पादन को प्रभावित करता है। पशुओं का दूध प्रतिदिन निश्चित समय पर निकालना चाहिए। दूध निकालने से पहले थनों की अच्छी तरह सफाई करनी चाहिए।

दूध दोहन के दौरान पशु को तनाव नहीं होना चाहिए। शांत वातावरण में दूध निकालने से दूध का स्राव बेहतर होता है। मशीन द्वारा दुग्ध दोहन करने वाले डेयरी फार्मों में स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

उच्च गुणवत्ता वाली नस्लों का चयन

दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए अच्छी नस्ल का चयन भी महत्वपूर्ण है। गायों में गिर, साहिवाल, थारपारकर और एचएफ क्रॉसब्रीड नस्लें अधिक दूध देने के लिए जानी जाती हैं।

इसी प्रकार भैंसों में मुर्रा, मेहसाना, जाफराबादी और निली-रवि नस्लें उच्च दुग्ध उत्पादन के लिए प्रसिद्ध हैं। पशुपालकों को हमेशा स्वस्थ और उच्च आनुवंशिक क्षमता वाले पशुओं का चयन करना चाहिए।

प्रजनन प्रबंधन पर दें ध्यान

समय पर गर्भाधान और उचित प्रजनन प्रबंधन भी दूध उत्पादन बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पशुओं के हीट में आने पर सही समय पर कृत्रिम गर्भाधान कराना चाहिए।

एक स्वस्थ पशु हर 12 से 14 महीने में एक बच्चा दे तो उसका जीवनकाल दुग्ध उत्पादन बेहतर रहता है। इसलिए प्रजनन संबंधी समस्याओं को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

स्वच्छ और आरामदायक पशुशाला बनाएं

पशुओं के रहने का स्थान साफ-सुथरा और सूखा होना चाहिए। गंदी और नमी वाली जगहों पर रहने से पशु बीमार पड़ सकते हैं।

पशुशाला में पर्याप्त रोशनी, हवा और साफ फर्श होना चाहिए। नियमित सफाई से संक्रमण का खतरा कम होता है और पशु स्वस्थ रहते हैं।

गाय और भैंस का दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए किसी जादुई उपाय की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि संतुलित पोषण, उचित प्रबंधन, स्वच्छ वातावरण और नियमित स्वास्थ्य देखभाल सबसे महत्वपूर्ण कारक हैं। यदि पशुपालक वैज्ञानिक तरीके अपनाएं, मिनरल मिक्सचर का उपयोग करें, पर्याप्त हरा चारा और पानी उपलब्ध कराएं तथा समय पर टीकाकरण कराएं, तो दूध उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है। इससे न केवल पशुओं का स्वास्थ्य बेहतर रहेगा बल्कि पशुपालकों की आय में भी महत्वपूर्ण बढ़ोतरी होगी।

Tags: AgricultureBufalloCowCow MilkFarming
Previous Post

श्रीनगर में आयोजित होगी ‘सेवा से समृद्धि’ कार्यशाला, पंचायत आधारित सेवा वितरण को मिलेगा नया आयाम

Next Post

गर्मियों में दुधारू पशुओं की देखभाल कैसे करें? जानिए दूध उत्पादन बढ़ाने और हीट स्ट्रेस से बचाने के प्रभावी उपाय

Next Post
गर्मियों में दुधारू पशुओं की देखभाल कैसे करें? जानिए दूध उत्पादन बढ़ाने और हीट स्ट्रेस से बचाने के प्रभावी उपाय

गर्मियों में दुधारू पशुओं की देखभाल कैसे करें? जानिए दूध उत्पादन बढ़ाने और हीट स्ट्रेस से बचाने के प्रभावी उपाय

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent Posts

  • Interest Subvention Scheme: किसानों को सस्ता कृषि ऋण और KCC का बड़ा लाभ
  • Moringa farming और पाउडर: फायदे, उपयोग, पोषण और स्वास्थ्य लाभ
  • Agriculture Loan Waiver Schemes: किसानों के लिए पात्रता, लाभ, आवेदन प्रक्रिया और जरूरी जानकारी
  • जमुनापारी बकरी की विशेषताएं: अधिक दूध और बेहतर वजन के लिए किसानों की पहली पसंद
  • गर्मियों में दुधारू पशुओं की देखभाल कैसे करें? जानिए दूध उत्पादन बढ़ाने और हीट स्ट्रेस से बचाने के प्रभावी उपाय

Recent Comments

  1. vorbelutrioperbir on Papaya Farming के लिए बेहतरीन जैविक खाद तकनीकें
  2. vorbelutr ioperbir on Organic Dasheri Mango Farming स्वस्थ फल, बेहतर आमदनी
Fasal Kranti is a leading monthly agricultural magazine dedicated to empowering Indian farmers. Published scince 2013 in Hindi, Punjabi, Marathi, and Gujarati, it provides valuable insights, modern farming techniques, and the latest agricultural updates. With a vision to support 21st-century farmers, Fasal Kranti strives to be a trusted source of knowledge and innovation in the agricultural sector.

Category

  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes

Newsletter

Subscribe to our Newsletter. You choose the topics of your interest and we’ll send you handpicked news and latest updates based on your choice.

Subscribe Now

Contact

Promote your brand with Fasalkranti. Connect with us for advertising.
  • E-Mail: info@fasalkranti.in
  • Phone: +91 9625941688
Copyrights © 2026. Fasal Kranti, Inc. All Rights Reserved. Maintained By Fasalkranti Team .

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In

Add New Playlist

No Result
View All Result
  • Home
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry

© 2026 Fasalkranti - News and Magazine by Fasalkranti news.