गर्मी का मौसम दुधारू पशुओं के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण समय माना जाता है। तापमान बढ़ने के साथ गाय और भैंसों में हीट स्ट्रेस (Heat Stress) की समस्या बढ़ जाती है, जिसका सीधा असर उनके स्वास्थ्य, प्रजनन क्षमता और दूध उत्पादन पर पड़ता है। कई बार अत्यधिक गर्मी के कारण पशु चारा कम खाने लगते हैं, अधिक पानी पीते हैं और दूध उत्पादन में 10 से 30 प्रतिशत तक की गिरावट देखने को मिलती है।
ऐसे में पशुपालकों के लिए यह जरूरी हो जाता है कि वे गर्मियों के दौरान अपने दुधारू पशुओं की विशेष देखभाल करें। यदि वैज्ञानिक तरीकों को अपनाया जाए तो गर्मी के मौसम में भी पशुओं को स्वस्थ रखा जा सकता है और दूध उत्पादन को बनाए रखा जा सकता है।
हीट स्ट्रेस क्या है और इसका क्या प्रभाव पड़ता है?
जब वातावरण का तापमान और आर्द्रता पशुओं की सहन क्षमता से अधिक हो जाती है, तब पशु हीट स्ट्रेस का शिकार हो जाते हैं। इस स्थिति में पशु अपने शरीर का तापमान नियंत्रित नहीं कर पाते।
हीट स्ट्रेस के प्रमुख लक्षण हैं:
- पशु का तेजी से सांस लेना
- अधिक लार टपकना
- भूख कम लगना
- पानी की खपत बढ़ना
- सुस्ती और कमजोरी
- दूध उत्पादन में कमी
- प्रजनन क्षमता प्रभावित होना
भैंसों में यह समस्या गायों की तुलना में अधिक देखने को मिलती है क्योंकि उनके शरीर में पसीना निकालने वाली ग्रंथियां कम होती हैं।
पशुशाला में पर्याप्त छाया की व्यवस्था करें
गर्मियों में पशुओं को सीधी धूप से बचाना सबसे जरूरी है। पशुशाला की छत ऐसी होनी चाहिए जो गर्मी को कम अवशोषित करे। यदि संभव हो तो टीन की छत पर घास-फूस, पुआल या सफेद पेंट का उपयोग किया जा सकता है।
पशुशाला के आसपास छायादार पेड़ लगाना भी लाभकारी होता है। पशुओं को दोपहर के समय खुले मैदान में बांधने से बचना चाहिए।
पर्याप्त वेंटिलेशन रखें
गर्मियों में पशुशाला में हवा का आवागमन अच्छा होना चाहिए। बंद और गर्म वातावरण पशुओं में तनाव बढ़ा सकता है।
पशुशाला में:
- बड़ी खिड़कियां रखें
- पर्याप्त ऊंचाई वाली छत बनाएं
- एग्जॉस्ट फैन या पंखों का उपयोग करें
- प्राकृतिक वेंटिलेशन को बढ़ावा दें
अच्छा वायु संचार पशुओं के शरीर का तापमान नियंत्रित रखने में मदद करता है।
भैंसों को नियमित रूप से पानी में बैठाएं
भैंसें गर्मी को कम सहन कर पाती हैं, इसलिए उन्हें ठंडक पहुंचाने के लिए विशेष व्यवस्था करनी चाहिए।
यदि संभव हो तो:
- दिन में एक या दो बार नहलाएं
- पानी के टैंक या पोखर में बैठने दें
- शरीर पर ठंडे पानी का छिड़काव करें
इससे शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है और दूध उत्पादन पर नकारात्मक प्रभाव कम पड़ता है।
स्वच्छ और ठंडा पानी भरपूर मात्रा में दें
दूध का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा पानी होता है। गर्मी के मौसम में पशुओं की पानी की आवश्यकता काफी बढ़ जाती है।
एक दुधारू गाय या भैंस को प्रतिदिन 60 से 100 लीटर तक पानी की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए पशुओं को हमेशा साफ, ताजा और ठंडा पानी उपलब्ध कराना चाहिए।
पानी की टंकियों और बर्तनों की नियमित सफाई भी आवश्यक है ताकि किसी प्रकार का संक्रमण न फैले।
आहार में करें आवश्यक बदलाव
गर्मी के मौसम में पशु अपेक्षाकृत कम चारा खाते हैं। इसलिए उनके आहार को पौष्टिक और संतुलित बनाना जरूरी है।
पशुओं को:
- हरा चारा अधिक दें
- सूखे चारे की गुणवत्ता बनाए रखें
- संतुलित पशु आहार खिलाएं
- मिनरल मिक्सचर और नमक अवश्य दें
हरे चारे में पानी की मात्रा अधिक होती है, जिससे पशुओं को ठंडक भी मिलती है और पोषण भी मिलता है।
सुबह और शाम के समय खिलाएं चारा
दोपहर के समय तापमान अधिक होने के कारण पशु कम भोजन करते हैं। इसलिए उन्हें सुबह जल्दी और शाम को ठंडे समय में चारा देना अधिक लाभकारी होता है।
इससे पशु पर्याप्त मात्रा में भोजन ग्रहण कर पाते हैं और दूध उत्पादन प्रभावित नहीं होता।
मिनरल मिक्सचर और इलेक्ट्रोलाइट का उपयोग करें
गर्मी में पशुओं के शरीर से खनिज तत्व और लवण अधिक मात्रा में निकलते हैं। इससे कमजोरी और उत्पादन में गिरावट आ सकती है।
विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार:
- प्रतिदिन मिनरल मिक्सचर दें
- इलेक्ट्रोलाइट पाउडर का उपयोग करें
- पशु चिकित्सक की सलाह अनुसार सप्लीमेंट दें
इससे पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत होती है।
पशुशाला की साफ-सफाई का रखें विशेष ध्यान
गर्मी के मौसम में गंदगी और नमी के कारण मक्खियों तथा रोगजनक जीवाणुओं की संख्या बढ़ जाती है।
पशुशाला को:
- प्रतिदिन साफ करें
- गोबर और मूत्र की नियमित निकासी करें
- कीटाणुनाशकों का छिड़काव करें
- मक्खी और मच्छर नियंत्रण के उपाय अपनाएं
स्वच्छ वातावरण पशुओं को बीमारियों से बचाने में मदद करता है।
नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं
गर्मियों में पशुओं में कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ सकती हैं। इसलिए पशुओं की नियमित जांच करवाना जरूरी है।
यदि पशु में निम्न लक्षण दिखाई दें तो तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें:
- लगातार हांफना
- बुखार
- चारा न खाना
- दूध में अचानक कमी
- अत्यधिक कमजोरी
समय पर उपचार से गंभीर समस्याओं से बचा जा सकता है।
दूध निकालने का सही समय चुनें
गर्मियों में दूध दोहन सुबह और शाम के अपेक्षाकृत ठंडे समय में करना चाहिए। दूध निकालने से पहले पशु को आरामदायक वातावरण उपलब्ध कराएं।
तनावमुक्त पशु अधिक दूध देते हैं और उनका स्वास्थ्य भी बेहतर बना रहता है।
गर्मी का मौसम दुधारू पशुओं के लिए चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन सही प्रबंधन और वैज्ञानिक देखभाल के जरिए इसके दुष्प्रभावों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। पशुओं को पर्याप्त छाया, स्वच्छ पानी, संतुलित आहार, मिनरल मिक्सचर और ठंडा वातावरण उपलब्ध कराकर हीट स्ट्रेस से बचाया जा सकता है। यदि पशुपालक इन उपायों को अपनाते हैं तो गर्मियों में भी दूध उत्पादन को बनाए रखने के साथ-साथ पशुओं के स्वास्थ्य और उत्पादकता में सुधार कर सकते हैं।

