• About
  • Advertise
  • Privacy & Policy
  • Contact
Fasal Kranti Agriculture News
  • Home
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry
  • Login
No Result
View All Result
  • Home
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry
No Result
View All Result
Fasal Kranti Agriculture News
No Result
View All Result
Home कृषि समाचार

Urad Dal Farming: कम लागत में ज्यादा कमाई का आसान तरीका

Urad Dal Farming: Easy Way to Earn More at Low Cost

Taniyaa Alhawat by Taniyaa Alhawat
June 25, 2026
in कृषि समाचार, लेख
0
#urad dal farming
0
SHARES
4
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

खेती में आज सबसे बड़ी चुनौती लागत को कम रखना और कम समय में बेहतर कमाई करना है। ऐसे में Urad Dal Farming किसानों के लिए एक समझदारी भरा विकल्प बनकर सामने आती है। उड़द यानी Black Gram ऐसी दलहनी फसल है, जिसे कम पानी, कम खाद और कम खर्च में उगाया जा सकता है। इसकी मांग घरों, होटलों, दाल मिलों और फूड इंडस्ट्री में पूरे साल बनी रहती है। उड़द की खास बात यह है कि यह केवल किसान की जेब नहीं भरती, बल्कि खेत की सेहत भी सुधारती है। इसकी जड़ें मिट्टी में नाइट्रोजन जोड़ने में मदद करती हैं, जिससे अगली फसल को भी फायदा मिलता है। इसलिए Urad Dal Farming को कम लागत वाली लाभकारी खेती के साथ-साथ मिट्टी सुधारने वाली खेती भी कहा जा सकता है।

Urad Dal Farming किसानों के लिए क्यों फायदेमंद है?

उड़द की खेती छोटे, मध्यम और बड़े सभी किसानों के लिए उपयोगी है। यह फसल लगभग 70 से 90 दिनों में तैयार हो जाती है, इसलिए किसान कम समय में अपनी लागत निकाल सकते हैं। धान, गेहूं या कई सब्जी फसलों की तुलना में उड़द में पानी और पोषण की जरूरत कम होती है। किसान इसे मुख्य फसल के रूप में भी लगा सकते हैं और खाली खेतों में अतिरिक्त फसल के रूप में भी। कई क्षेत्रों में किसान धान या गेहूं के बीच खाली समय का उपयोग करने के लिए उड़द की खेती करते हैं। इससे खेत खाली नहीं रहता और अतिरिक्त आय का रास्ता खुलता है।

उड़द की खेती के लिए सही मौसम

उड़द गर्म मौसम की फसल है। इसके लिए 25 से 35 डिग्री सेल्सियस तापमान अच्छा माना जाता है। भारत में इसकी खेती मुख्य रूप से खरीफ सीजन में की जाती है। मानसून शुरू होने के बाद जून के आखिरी सप्ताह से जुलाई तक इसकी बुवाई बेहतर रहती है। जहां सिंचाई की सुविधा उपलब्ध हो, वहां जायद सीजन में फरवरी से मार्च के दौरान भी Urad Dal Farming की जा सकती है। दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में रबी मौसम में भी इसकी खेती की जाती है। किसान अपने क्षेत्र के मौसम और कृषि विभाग की सलाह के अनुसार बुवाई का समय तय करें।

मिट्टी और खेत की तैयारी

Urad Dal Farming  के लिए दोमट, बलुई दोमट और हल्की काली मिट्टी अच्छी रहती है। खेत में जल निकासी अच्छी होनी चाहिए, क्योंकि पानी भरने से जड़ सड़न और पौधों की बढ़वार में रुकावट आ सकती है। बुवाई से पहले खेत की 1 से 2 बार अच्छी जुताई करें। मिट्टी को भुरभुरा और समतल बनाएं। आखिरी जुताई के समय अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद या कम्पोस्ट मिलाने से मिट्टी की ताकत बढ़ती है। समतल खेत में बीज समान गहराई पर गिरते हैं, जिससे अंकुरण अच्छा मिलता है।

उन्नत किस्मों का चुनाव

Urad Dal Farming में अच्छी किस्म का चुनाव बहुत जरूरी है। सही किस्म से उत्पादन, दाने की गुणवत्ता और रोग सहनशीलता बेहतर होती है। किसान अपने क्षेत्र के लिए कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विभाग से सलाह लेकर किस्म चुनें। उड़द की प्रमुख किस्मों में PU-31, Pant U-19, IPU-94-1, T-9, Mash-114, LBG-752 और VBN-8 जैसी किस्में शामिल हैं। किस्म चुनते समय यह जरूर देखें कि वह आपके क्षेत्र के मौसम, मिट्टी और रोग स्थिति के अनुसार उपयुक्त है या नहीं।

बीज दर और बुवाई का तरीका

एक हेक्टेयर खेत के लिए लगभग 15 से 20 किलो बीज पर्याप्त माना जाता है। एक एकड़ के लिए करीब 6 से 8 किलो बीज लग सकता है। हमेशा प्रमाणित और साफ बीज का ही उपयोग करें। लाइन से बुवाई करने पर फसल की देखभाल आसान हो जाती है। कतार से कतार की दूरी लगभग 30 सेमी और पौधे से पौधे की दूरी 10 सेमी रखें। बीज को लगभग 3 से 5 सेमी गहराई पर बोएं। बहुत गहरी बुवाई करने से अंकुरण कमजोर हो सकता है।

बीज उपचार से बचाएं फसल

कई किसान बीज उपचार को छोटा काम समझकर छोड़ देते हैं, लेकिन यह उड़द की खेती में बड़ा फर्क ला सकता है। बीज उपचार से अंकुरण अच्छा होता है और शुरुआती रोगों का खतरा कम होता है। बुवाई से पहले बीज को फफूंदनाशी से उपचारित करें। इसके बाद Rhizobium और PSB कल्चर से उपचार करने पर पौधों की जड़ें मजबूत बनती हैं और मिट्टी में पोषक तत्वों का उपयोग बेहतर होता है। यह कम खर्च में उत्पादन बढ़ाने का अच्छा तरीका है।

खाद और पोषण प्रबंधन

उड़द दलहनी फसल है, इसलिए इसमें बहुत ज्यादा नाइट्रोजन की जरूरत नहीं होती। फिर भी शुरुआती बढ़वार के लिए संतुलित पोषण जरूरी है। खेत में सड़ी हुई गोबर की खाद डालना फायदेमंद रहता है। सामान्य रूप से फास्फोरस उड़द की जड़ों और दाने बनने में मदद करता है। सल्फर और जिंक की कमी वाले क्षेत्रों में इनका उपयोग भी लाभदायक हो सकता है। सही मात्रा के लिए मिट्टी जांच कराना सबसे बेहतर तरीका है। इससे किसान अनावश्यक खर्च से बचते हैं और फसल को सही पोषण मिलता है।

सिंचाई प्रबंधन

खरीफ सीजन में उड़द की खेती अधिकतर बारिश पर निर्भर रहती है। यदि बारिश ठीक से होती रहे तो अलग से सिंचाई की जरूरत कम पड़ती है। लेकिन फूल आने और फलियां बनने के समय नमी की कमी नहीं होनी चाहिए। जायद सीजन में 2 से 3 हल्की सिंचाई की जरूरत पड़ सकती है। खेत में पानी जमा न होने दें। ज्यादा पानी से पौधों की जड़ें कमजोर हो सकती हैं और रोग बढ़ सकते हैं।

खरपतवार नियंत्रण

उड़द की फसल में शुरुआती 30 दिन बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। इस समय खरपतवार पौधों से पोषण और नमी छीन लेते हैं। इससे उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है। बुवाई के 20 से 25 दिन बाद पहली निराई-गुड़ाई करें। जरूरत होने पर 35 से 40 दिन बाद दूसरी निराई करें। लाइन बुवाई करने से यह काम आसान हो जाता है। खेत साफ रहेगा तो पौधे तेजी से बढ़ेंगे और फलियां अच्छी बनेंगी।

रोग और कीट प्रबंधन

Urad Dal Farming में पीला मोजेक वायरस, पत्ती धब्बा, जड़ सड़न और चूर्णी फफूंदी जैसे रोग देखे जा सकते हैं। इनमें पीला मोजेक वायरस सबसे ज्यादा नुकसान कर सकता है। इस रोग में पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं और पौधे कमजोर हो जाते हैं। कीटों में सफेद मक्खी, माहू, थ्रिप्स और फली छेदक का प्रकोप हो सकता है। सफेद मक्खी पीला मोजेक वायरस फैलाने में भी भूमिका निभाती है। किसान खेत की नियमित निगरानी करें। शुरुआती अवस्था में नीम आधारित घोल का उपयोग किया जा सकता है। ज्यादा प्रकोप होने पर कृषि विशेषज्ञ की सलाह से ही दवा का प्रयोग करें।

कटाई का सही समय

उड़द की फसल 70 से 90 दिनों में तैयार हो जाती है। जब पत्तियां पीली होकर सूखने लगें और फलियां काली या भूरी दिखने लगें, तब कटाई करें। कटाई में ज्यादा देरी करने से फलियां फट सकती हैं और दाने खेत में गिर सकते हैं। कटाई के बाद पौधों को धूप में सुखाएं। फिर मड़ाई करके दाने अलग करें। भंडारण से पहले दानों को अच्छी तरह सुखा लें, क्योंकि नमी रहने पर कीट और फफूंद लगने का खतरा रहता है।

प्रति एकड़ उत्पादन और कमाई

अच्छे प्रबंधन से उड़द की खेती में प्रति एकड़ लगभग 3 से 5 क्विंटल तक उत्पादन लिया जा सकता है। उत्पादन किस्म, मौसम, मिट्टी, सिंचाई और रोग नियंत्रण पर निर्भर करता है। मुनाफा मंडी भाव और दाने की गुणवत्ता के अनुसार बदलता है। बेहतर दाना, साफ उपज और सही समय पर बिक्री से किसान अच्छी कीमत प्राप्त कर सकते हैं। किसान चाहें तो FPO, दाल मिल या स्थानीय व्यापारियों से संपर्क करके बेहतर बिक्री विकल्प भी खोज सकते हैं।

Urad Dal Farming में मुनाफा बढ़ाने के तरीके

उड़द की खेती में ज्यादा कमाई के लिए केवल बुवाई करना काफी नहीं है। सही समय पर छोटे-छोटे काम करना जरूरी है। प्रमाणित बीज चुनें, बुवाई से पहले बीज उपचार करें, लाइन से बुवाई करें और खेत में जलभराव न होने दें। शुरुआती 30 दिनों तक खरपतवार नियंत्रण पर खास ध्यान दें। खेत की नियमित निगरानी करें ताकि रोग या कीट का प्रकोप शुरुआत में ही पकड़ में आ जाए। कटाई सही समय पर करें और दानों को साफ-सुथरे तरीके से बाजार में बेचें।

उड़द की खेती में किसान कौन-सी गलतियां न करें?

बिना बीज उपचार के बुवाई करना उड़द की खेती में आम गलती है। इससे अंकुरण और रोग नियंत्रण पर असर पड़ता है। दूसरी गलती है खेत में पानी रुकने देना। उड़द जलभराव सहन नहीं कर पाती।कई किसान अधिक नाइट्रोजन डाल देते हैं, जिससे पौधों की बढ़वार तो होती है लेकिन फलियां कम बन सकती हैं। देर से बुवाई करने पर कीट और रोग का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए बुवाई सही समय पर करें और खेत की नियमित निगरानी रखें।

निष्कर्ष

Urad Dal Farming कम लागत में बेहतर कमाई चाहने वाले किसानों के लिए एक अच्छा विकल्प है। यह फसल कम समय में तैयार होती है, कम पानी में चल जाती है और मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में मदद करती है। सही किस्म, समय पर बुवाई, बीज उपचार, संतुलित खाद, खरपतवार नियंत्रण और रोग प्रबंधन अपनाकर किसान उड़द की खेती से अच्छा उत्पादन और बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं। आज के समय में जब खेती की लागत बढ़ रही है, Urad Dal Farming किसानों के लिए कम खर्च में स्थिर आय देने वाली फसल बन सकती है।

FAQs

1. Urad Dal Farming के लिए सबसे अच्छा मौसम कौन-सा है?
उड़द की खेती के लिए खरीफ मौसम सबसे अच्छा माना जाता है। जून के आखिरी सप्ताह से जुलाई तक इसकी बुवाई की जा सकती है। सिंचाई सुविधा होने पर जायद में भी खेती संभव है।

2. एक एकड़ में उड़द का कितना बीज लगता है?
एक एकड़ खेत के लिए लगभग 6 से 8 किलो प्रमाणित बीज पर्याप्त होता है। बीज दर किस्म और बुवाई विधि के अनुसार थोड़ी बदल सकती है।

3. उड़द की फसल कितने दिनों में तैयार होती है?
उड़द की अधिकांश किस्में 70 से 90 दिनों में तैयार हो जाती हैं। कुछ किस्में क्षेत्र और मौसम के अनुसार थोड़ा कम या ज्यादा समय ले सकती हैं।

4. उड़द की खेती में सबसे ज्यादा नुकसान कौन-सा रोग करता है?
पीला मोजेक वायरस उड़द की फसल में सबसे नुकसानदायक रोगों में से एक है। इसे रोकने के लिए रोग सहनशील किस्म, बीज उपचार और सफेद मक्खी नियंत्रण जरूरी है।

5. क्या Urad Dal Farming कम पानी में हो सकती है?
हाँ, उड़द कम पानी वाली फसल है। फिर भी फूल और फलियां बनने के समय खेत में पर्याप्त नमी होनी चाहिए। जलभराव से फसल को नुकसान हो सकता है।

6. उड़द की खेती से मिट्टी को क्या फायदा मिलता है?
उड़द दलहनी फसल है। इसकी जड़ें नाइट्रोजन स्थिरीकरण में मदद करती हैं, जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और अगली फसल को लाभ मिलता है।

7. उड़द की प्रति एकड़ पैदावार कितनी हो सकती है?
अच्छी देखभाल और सही किस्म से प्रति एकड़ लगभग 3 से 5 क्विंटल उत्पादन मिल सकता है। बेहतर प्रबंधन से उत्पादन में और सुधार हो सकता है।

Tags: Agricultureuradurad cultivationurad dalurad dal farming
Previous Post

Aloe Vera Farming Guide: खेती, लागत, सरकारी सहायता और कमाई की पूरी जानकारी

Next Post

Pineapple Farm अनानास की खेती, लाभ, उपयोग और स्वास्थ्य से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य

Next Post
pineapple-farm

Pineapple Farm अनानास की खेती, लाभ, उपयोग और स्वास्थ्य से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent Posts

  • Pineapple Farm अनानास की खेती, लाभ, उपयोग और स्वास्थ्य से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य
  • Urad Dal Farming: कम लागत में ज्यादा कमाई का आसान तरीका
  • Aloe Vera Farming Guide: खेती, लागत, सरकारी सहायता और कमाई की पूरी जानकारी
  • Haldi Powder: सेहत से बाजार तक बढ़ती लोकप्रियता
  • Livestock Marketing Act: किसानों के लिए आधुनिक मंडी सुधार और बेहतर बाजार व्यवस्था

Recent Comments

  1. vorbelutrioperbir on Papaya Farming के लिए बेहतरीन जैविक खाद तकनीकें
  2. vorbelutr ioperbir on Organic Dasheri Mango Farming स्वस्थ फल, बेहतर आमदनी
Fasal Kranti is a leading monthly agricultural magazine dedicated to empowering Indian farmers. Published scince 2013 in Hindi, Punjabi, Marathi, and Gujarati, it provides valuable insights, modern farming techniques, and the latest agricultural updates. With a vision to support 21st-century farmers, Fasal Kranti strives to be a trusted source of knowledge and innovation in the agricultural sector.

Category

  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes

Newsletter

Subscribe to our Newsletter. You choose the topics of your interest and we’ll send you handpicked news and latest updates based on your choice.

Subscribe Now

Contact

Promote your brand with Fasalkranti. Connect with us for advertising.
  • E-Mail: info@fasalkranti.in
  • Phone: +91 9625941688
Copyrights © 2026. Fasal Kranti, Inc. All Rights Reserved. Maintained By Fasalkranti Team .

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In

Add New Playlist

No Result
View All Result
  • Home
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry

© 2026 Fasalkranti - News and Magazine by Fasalkranti news.