भारतीय कृषि क्षेत्र में फसल सुरक्षा को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए BASF एग्रीकल्चरल सॉल्यूशंस ने दो नए क्रॉप प्रोटेक्शन उत्पाद मेलिरा® (Melira®) फंगीसाइड और इनवेरिस® गोल्ड (Inveris® Gold) इंसेक्टिसाइड लॉन्च करने की घोषणा की है। कंपनी का कहना है कि इन दोनों नए समाधानों को भारतीय किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विकसित किया गया है, ताकि वे फसलों को रोगों और कीटों से बेहतर सुरक्षा प्रदान कर सकें तथा अधिक उत्पादन हासिल कर सकें।
भारत में जलवायु परिवर्तन, अनियमित मौसम और बढ़ते कीट एवं रोगों के दबाव के कारण किसानों के सामने फसल सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। ऐसे समय में नई तकनीक पर आधारित फसल सुरक्षा उत्पाद किसानों को अधिक प्रभावी और टिकाऊ समाधान उपलब्ध करा सकते हैं। BASF का मानना है कि मेलिरा® और इनवेरिस® गोल्ड इसी दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
मेलिरा® फंगीसाइड की विशेषताएं
मेलिरा® को अगली पीढ़ी का ब्रॉड-स्पेक्ट्रम फंगीसाइड बताया गया है। इसमें BASF का नया रेविसोल® (Revysol®) एक्टिव मॉलिक्यूल शामिल है, जिसे आइसोप्रोपेनॉल एज़ोल तकनीक पर विकसित किया गया है। यह तकनीक फसलों में विभिन्न प्रकार के फफूंदजनित रोगों पर प्रभावी नियंत्रण प्रदान करने के साथ-साथ फंगीसाइड रेजिस्टेंस मैनेजमेंट में भी मदद करती है।
इस उत्पाद में पाइराक्लोस्ट्रोबिन (Pyraclostrobin) का भी संयोजन किया गया है, जिससे किसानों को BASF की AgCelence® तकनीक के अतिरिक्त लाभ मिलते हैं। यह तकनीक केवल रोग नियंत्रण तक सीमित नहीं रहती, बल्कि पौधों की वृद्धि, उनकी ताकत, तनाव सहन करने की क्षमता तथा समग्र फसल प्रदर्शन को भी बेहतर बनाने में मदद करती है।
कंपनी के अनुसार मेलिरा® का उपयोग विशेष रूप से कपास, मूंगफली, सोयाबीन, मिर्च और टमाटर जैसी प्रमुख फसलों में किया जा सकता है। इन फसलों में फफूंदजनित रोग अक्सर उत्पादन और गुणवत्ता दोनों को प्रभावित करते हैं। ऐसे में यह नया फंगीसाइड किसानों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।
इनवेरिस® गोल्ड देगा कीटों पर व्यापक नियंत्रण
BASF का दूसरा नया उत्पाद इनवेरिस® गोल्ड एक आधुनिक इंसेक्टिसाइड है, जिसे दो सक्रिय तत्वों (Dual Actives) के संयोजन से तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य फसलों में छेदने और चूसने वाले कीटों पर व्यापक नियंत्रण प्रदान करना है।
यह उत्पाद एफिड्स, जैसिड्स, व्हाइटफ्लाई, थ्रिप्स, माइट्स और लीफ माइनर्स जैसे प्रमुख कीटों के प्रबंधन में प्रभावी माना जा रहा है। ये कीट विशेष रूप से सब्जी फसलों में भारी नुकसान पहुंचाते हैं और यदि समय पर नियंत्रण न किया जाए तो उत्पादन में बड़ी गिरावट आ सकती है।
इनवेरिस® गोल्ड का उपयोग मुख्य रूप से मिर्च, टमाटर, बैंगन, खीरा और भिंडी जैसी सब्जी फसलों में किया जा सकेगा। कंपनी का कहना है कि इसका फॉर्मूलेशन इस प्रकार तैयार किया गया है कि यह इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट (IPM) कार्यक्रमों का भी समर्थन करता है। इसमें लाभदायक कीड़ों और प्राकृतिक शत्रुओं को ध्यान में रखा गया है, जिससे टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा मिलता है।
किसानों की जरूरतों के अनुरूप समाधान
BASF एग्रीकल्चरल सॉल्यूशंस इंडिया के डायरेक्टर गिरिधर रानुवा ने लॉन्च के अवसर पर कहा कि कंपनी भारतीय किसानों की बदलती जरूरतों के अनुसार अपने क्रॉप प्रोटेक्शन पोर्टफोलियो का लगातार विस्तार कर रही है।
उन्होंने कहा, “मेलिरा® और इनवेरिस® गोल्ड के माध्यम से हम ऐसे समाधान लेकर आए हैं जो किसानों को रोग एवं कीटों के बढ़ते दबाव का सामना करने, रेजिस्टेंस मैनेज करने तथा अधिक टिकाऊ तरीके से उत्पादकता बढ़ाने में मदद करेंगे। यह हमारे रिसर्च एवं डेवलपमेंट में लगातार किए जा रहे निवेश का परिणाम है।“
टिकाऊ खेती को मिलेगा बढ़ावा
विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक कृषि में केवल अधिक उत्पादन ही नहीं, बल्कि टिकाऊ खेती भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो गई है। ऐसे में नई पीढ़ी के फंगीसाइड और इंसेक्टिसाइड किसानों को कम नुकसान, बेहतर गुणवत्ता और अधिक लाभ देने में सहायक हो सकते हैं। यदि इनका उपयोग वैज्ञानिक सलाह और अनुशंसित मात्रा के अनुसार किया जाए तो फसल सुरक्षा अधिक प्रभावी हो सकती है।
मेलिरा® और इनवेरिस® गोल्ड के लॉन्च के साथ BASF ने भारतीय क्रॉप प्रोटेक्शन बाजार में अपनी मौजूदगी को और मजबूत किया है। कंपनी का उद्देश्य ऐसे उन्नत कृषि समाधान उपलब्ध कराना है जो किसानों की आय बढ़ाने, फसलों की गुणवत्ता सुधारने और टिकाऊ कृषि प्रणाली को बढ़ावा देने में सहायक हों। आने वाले समय में ये दोनों नए उत्पाद भारतीय किसानों के लिए फसल सुरक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण विकल्प साबित हो सकते हैं।

