पश्चिम एशिया में हाल के भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आई चुनौतियों के बीच भारत सरकार ने किसानों के हितों की रक्षा करते हुए उर्वरकों की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। भारत के लिए उर्वरक और कच्चा माल लेकर आने वाले 15 जहाज़ सुरक्षित रूप से हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं, जिससे देश में उर्वरकों का भंडार और मजबूत होगा तथा आगामी कृषि सीजन में किसानों को खाद की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने समय रहते प्रभावी रणनीति, अंतरराष्ट्रीय समन्वय और घरेलू उत्पादन को मजबूत बनाकर यह सुनिश्चित किया कि वैश्विक संकट का असर भारतीय किसानों पर न पड़े। उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्यों को उनकी मांग के अनुसार समय पर उर्वरकों की आपूर्ति निरंतर जारी रहेगी।
वैश्विक संकट के बीच भारत की मजबूत रणनीति
पश्चिम एशिया में उत्पन्न संघर्ष के कारण दुनिया भर में समुद्री व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई। विशेष रूप से हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य, जो वैश्विक ऊर्जा और उर्वरक आपूर्ति का महत्वपूर्ण मार्ग है, वहां बढ़े तनाव ने अनेक देशों की चिंता बढ़ा दी थी। इसके चलते उर्वरकों की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेजी आई और आपूर्ति में देरी की आशंका भी पैदा हुई।
हालांकि भारत सरकार ने संभावित संकट को पहले ही भांपते हुए समयबद्ध रणनीति अपनाई। उर्वरक विभाग ने विदेश मंत्रालय और दुनिया भर में स्थित भारतीय दूतावासों के साथ समन्वय स्थापित कर वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों की तलाश शुरू कर दी। यही कारण रहा कि चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद देश में उर्वरकों की उपलब्धता प्रभावित नहीं हुई।
15 जहाज़ों से बढ़ेगा उर्वरकों का भंडार
सरकार के अनुसार भारत के लिए उर्वरक और कच्चा माल लेकर आने वाले कुल 15 जहाज़ सुरक्षित रूप से हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं और निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार भारतीय बंदरगाहों की ओर बढ़ रहे हैं।
इनमें—
- 8 जहाज़ों में लगभग 3.32 लाख मीट्रिक टन यूरिया,
- 4 जहाज़ों में 2.57 लाख मीट्रिक टन डीएपी (डाय-अमोनियम फॉस्फेट),
- तथा 3 जहाज़ों में 1.11 लाख मीट्रिक टन सल्फर भारत पहुंच रहा है।
इसके अलावा भारत के लिए 5 अन्य जहाज़ भी निर्धारित हैं। इनमें एक जहाज़ 0.25 लाख मीट्रिक टन अमोनिया, दूसरा 0.45 लाख मीट्रिक टन यूरिया लेकर आ रहा है, जबकि शेष जहाज़ों में यूरिया और सल्फर की लोडिंग जारी है। इनके भी जल्द भारत पहुंचने की संभावना है।
इन सभी खेपों के आने से देश के उर्वरक भंडार में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और खरीफ सीजन के दौरान किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध हो सकेगी।
भारतीय दूतावासों ने निभाई अहम भूमिका
उर्वरकों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने में विदेशों में स्थित 28 भारतीय मिशनों—जिनमें दूतावास और उच्चायोग शामिल हैं—ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इन मिशनों ने संभावित उत्पादक देशों और आपूर्तिकर्ताओं के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा तथा उर्वरक विभाग को नए स्रोतों से आपूर्ति सुनिश्चित करने में सक्रिय सहयोग दिया। परिणामस्वरूप भारत ने पारंपरिक स्रोतों के साथ-साथ कई नए देशों से भी उर्वरकों की खरीद सुनिश्चित कर अपनी आपूर्ति श्रृंखला को पहले से अधिक मजबूत बना लिया।
कई देशों से सुनिश्चित हुई उर्वरक आपूर्ति
यूरिया की उपलब्धता बनाए रखने के लिए भारत ने ओमान, मलेशिया, वियतनाम, जॉर्जिया, नाइजीरिया, रूस, फिनलैंड, मिस्र, अल्जीरिया, तुर्की और नीदरलैंड सहित अनेक देशों से आपूर्ति सुनिश्चित की।
वहीं डीएपी और एनपीके उर्वरकों के लिए रूस, मोरक्को, मिस्र, अमेरिका, जॉर्डन, दक्षिण कोरिया, ट्यूनीशिया और सऊदी अरब जैसे देशों से लाल सागर समुद्री मार्ग के माध्यम से आवश्यक आपूर्ति की व्यवस्था की गई।
इस विविधीकृत आयात नीति ने भारत को किसी एक क्षेत्र पर निर्भर रहने से बचाया और वैश्विक संकट के बीच भी उर्वरकों की उपलब्धता बनाए रखी।
जेपी नड्डा बोले—किसानों पर नहीं आने दी कोई आंच
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण पूरी दुनिया की सप्लाई चेन प्रभावित हुई, उर्वरकों की कीमतें बढ़ीं और माल पहुंचने में अधिक समय लगने लगा। भारत भी इस वैश्विक परिस्थिति से अछूता नहीं था, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार शुरू से ही पूरी तरह तैयार थी।
उन्होंने कहा कि वैकल्पिक आयात मार्ग अपनाए गए, नए देशों से संपर्क स्थापित किया गया और घरेलू उत्पादन को भी तेजी से बढ़ाया गया। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि अंतरराष्ट्रीय बाजार की अस्थिरता का कोई नकारात्मक प्रभाव भारतीय किसानों पर न पड़े और उन्हें समय पर किफायती दरों पर पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध हो।
प्राकृतिक गैस की 100 प्रतिशत आपूर्ति से बढ़ा घरेलू उत्पादन
सरकार की एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि उर्वरक उद्योग के लिए प्राकृतिक गैस की 100 प्रतिशत उपलब्धता सुनिश्चित करना रही। कुछ समय पहले तक गैस आपूर्ति लगभग 65 प्रतिशत तक सीमित हो गई थी, जिससे उत्पादन प्रभावित होने की आशंका थी।
अब गैस की पूर्ण आपूर्ति बहाल होने के बाद देश के सभी यूरिया संयंत्र पूरी क्षमता से कार्य कर रहे हैं। इसका परिणाम यह हुआ कि घरेलू उर्वरक उत्पादन लगातार लक्ष्य से अधिक रहा।
यूरिया उत्पादन में रिकॉर्ड उपलब्धि
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में—
- लक्ष्य था 67.86 लाख मीट्रिक टन,
- जबकि वास्तविक उत्पादन 71.55 लाख मीट्रिक टन दर्ज किया गया।
अर्थात् निर्धारित लक्ष्य से 3.69 लाख मीट्रिक टन अधिक उत्पादन हुआ।
विशेष रूप से मई 2026 में 22.55 लाख मीट्रिक टन के लक्ष्य के मुकाबले 25.19 लाख मीट्रिक टन का रिकॉर्ड उत्पादन दर्ज किया गया।
डीएपी उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि
डीएपी उत्पादन के क्षेत्र में भी भारत ने उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की।
पहली तिमाही में—
- लक्ष्य था 8.61 लाख मीट्रिक टन,
- जबकि वास्तविक उत्पादन 9.84 लाख मीट्रिक टन रहा।
इस प्रकार लक्ष्य से 1.23 लाख मीट्रिक टन अधिक डीएपी का उत्पादन किया गया।
इसके अलावा अप्रैल से जून के दौरान 20.77 लाख मीट्रिक टन एनपीके तथा 13.50 लाख मीट्रिक टन एसएसपी का भी घरेलू उत्पादन हुआ।
देश में उपलब्ध है पर्याप्त उर्वरक भंडार
आयात और घरेलू उत्पादन में हुई बढ़ोतरी का सकारात्मक असर देश के उर्वरक भंडार पर भी दिखाई दे रहा है।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा पूरे वर्ष के लिए अनुमानित 383.9 लाख मीट्रिक टन उर्वरक आवश्यकता के मुकाबले अब तक 197.56 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों की व्यवस्था सुनिश्चित कर ली गई है। यानी कुल वार्षिक आवश्यकता का 51 प्रतिशत से अधिक भंडार पहले ही सुरक्षित कर लिया गया है।
वर्तमान में देश में उपलब्ध प्रमुख उर्वरकों का भंडार इस प्रकार है—
- यूरिया – 69.08 लाख मीट्रिक टन
- डीएपी – 16.64 लाख मीट्रिक टन
- एमओपी – 8.90 लाख मीट्रिक टन
- एनपीके – 45.64 लाख मीट्रिक टन
- एसएसपी – 23.09 लाख मीट्रिक टन
कुल मिलाकर देश में 163.35 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है।
किसानों के हित सर्वोपरि
सरकार का कहना है कि आयात, घरेलू उत्पादन और भंडारण—इन तीनों मोर्चों पर समन्वित प्रयासों के कारण भारत में उर्वरकों की उपलब्धता पूरी तरह संतोषजनक बनी हुई है। वैश्विक परिस्थितियां चाहे जितनी चुनौतीपूर्ण हों, सरकार किसानों को समय पर और पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से सुरक्षित पहुंचे जहाज़, वैकल्पिक आयात स्रोतों की व्यवस्था, प्राकृतिक गैस की पूर्ण उपलब्धता और रिकॉर्ड घरेलू उत्पादन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत ने वैश्विक संकट के बीच भी अपनी उर्वरक आपूर्ति प्रणाली को मजबूत बनाए रखा है। इससे आगामी खरीफ और रबी सीजन में किसानों को खाद की कमी की आशंका काफी हद तक समाप्त हो गई है तथा कृषि उत्पादन को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

