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Bahu Rajya Sahkari Samiti Sanshodhan Niti: सहकारिता क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही की नई दिशा

Bahu Rajya Sahkari Samiti Sanshodhan Niti: New direction of transparency and accountability in cooperative sector

Fiza by Fiza
July 8, 2026
in योजना
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Bahu Rajya Sahkari Samiti Sanshodhan Niti

Bahu Rajya Sahkari Samiti Sanshodhan Niti

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Bahu Rajya Sahkari Samiti Sanshodhan Niti: भारत में सहकारिता आंदोलन ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कृषि, डेयरी, बैंकिंग, बीज, खाद, विपणन और उपभोक्ता सेवाओं से गहराई से जुड़ा हुआ है। खासकर जब कोई सहकारी समिति एक से अधिक राज्यों में काम करती है, तब उसके संचालन, चुनाव, वित्तीय अनुशासन और सदस्य हितों की सुरक्षा के लिए मजबूत कानूनी व्यवस्था की जरूरत होती है। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए बहु-राज्य सहकारी समिति संशोधन नीति को महत्वपूर्ण सुधार के रूप में देखा जा रहा है।

भारत सरकार ने बहु-राज्य सहकारी समितियों के लिए Multi-State Co-operative Societies Act, 2002 में संशोधन किया। इसके तहत Multi-State Cooperative Societies (Amendment) Act, 2023 और संबंधित नियमों को अधिसूचित किया गया। PIB के अनुसार, MSCS Amendment Act और Rules, 2023 को क्रमशः 03 अगस्त 2023 और 04 अगस्त 2023 को अधिसूचित किया गया, जिनका उद्देश्य शासन व्यवस्था को मजबूत करना, पारदर्शिता बढ़ाना, जवाबदेही सुनिश्चित करना और चुनाव प्रक्रिया में सुधार करना है।

बहु-राज्य सहकारी समिति क्या होती है?

बहु-राज्य सहकारी समिति वह सहकारी संस्था होती है, जिसका कार्यक्षेत्र एक से अधिक राज्यों में फैला होता है। उदाहरण के लिए, यदि कोई सहकारी संस्था दिल्ली और उत्तर प्रदेश दोनों राज्यों में किसानों, उपभोक्ताओं या सदस्यों को सेवा देती है, तो वह बहु-राज्य सहकारी समिति के दायरे में आ सकती है।

ऐसी समितियां आमतौर पर कृषि विपणन, डेयरी, उर्वरक, बीज, उपभोक्ता सामग्री, आवास, क्रेडिट, प्रसंस्करण और ग्रामीण उद्यमिता से जुड़ी होती हैं। इनका उद्देश्य केवल लाभ कमाना नहीं, बल्कि सदस्यों के आर्थिक और सामाजिक हितों की रक्षा करना भी होता है।

बहु-राज्य सहकारी समिति संशोधन नीति की जरूरत क्यों पड़ी?

सहकारी संस्थाओं में लोकतांत्रिक प्रबंधन, समय पर चुनाव, निष्पक्ष प्रशासन, वित्तीय पारदर्शिता और सदस्यों की शिकायतों का समाधान बहुत जरूरी है। लेकिन समय के साथ बहु-राज्य सहकारी समितियों में कई व्यावहारिक चुनौतियां सामने आईं।

कई जगह चुनाव समय पर नहीं होते थे। कुछ समितियों में बोर्ड और प्रबंधन के बीच जवाबदेही कमजोर थी। सदस्यों की शिकायतों के समाधान के लिए स्वतंत्र व्यवस्था की कमी थी। वित्तीय लेन-देन और ऑडिट में पारदर्शिता बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही थी। इसी पृष्ठभूमि में बहु-राज्य सहकारी समिति संशोधन नीति को लागू किया गया।

इस नीति का बड़ा उद्देश्य सहकारी समितियों को अधिक लोकतांत्रिक, आधुनिक, जवाबदेह और सदस्य-केंद्रित बनाना है।

बहु-राज्य सहकारी समिति संशोधन नीति के प्रमुख उद्देश्य

बहु-राज्य सहकारी समिति संशोधन नीति का लक्ष्य केवल कानून में बदलाव करना नहीं है, बल्कि सहकारिता क्षेत्र की विश्वसनीयता को मजबूत करना है। इसके मुख्य उद्देश्य इस प्रकार हैं:

  1. बहु-राज्य सहकारी समितियों में पारदर्शिता बढ़ाना।
  2. चुनाव प्रक्रिया को स्वतंत्र और निष्पक्ष बनाना।
  3. सदस्यों के अधिकारों की रक्षा करना।
  4. वित्तीय अनुशासन और ऑडिट व्यवस्था को मजबूत करना।
  5. महिलाओं, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की भागीदारी बढ़ाना।
  6. डिजिटल और ऑनलाइन प्रक्रियाओं को बढ़ावा देना।
  7. शिकायत निवारण व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना।
  8. सहकारी संस्थाओं में जवाबदेही और सुशासन को बढ़ावा देना।

बहु-राज्य सहकारी समिति संशोधन नीति 2023 की मुख्य विशेषताएं

1. सहकारी चुनाव प्राधिकरण की व्यवस्था

इस संशोधन का सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान सहकारी चुनाव प्राधिकरण से जुड़ा है। पहले कई बहु-राज्य सहकारी समितियों में चुनाव की प्रक्रिया पर मौजूदा बोर्ड का प्रभाव रहता था। इससे निष्पक्षता को लेकर सवाल उठते थे।

संशोधन के बाद केंद्र सरकार द्वारा Co-operative Election Authority स्थापित करने का प्रावधान किया गया है। PRS के अनुसार, यह प्राधिकरण बोर्ड सदस्यों के चुनाव कराने, मतदाता सूची की तैयारी की निगरानी करने और चुनाव प्रक्रिया को नियंत्रित करने जैसे कार्य करेगा।

इससे चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और सदस्यों को लोकतांत्रिक अधिकारों का बेहतर उपयोग करने का अवसर मिलेगा।

2. सहकारी लोकपाल का प्रावधान

सदस्यों की शिकायतों के समाधान के लिए Cooperative Ombudsman यानी सहकारी लोकपाल की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण बदलाव है। यदि किसी सदस्य को समिति के कामकाज, सेवा, वित्तीय प्रक्रिया या प्रबंधन से शिकायत है, तो वह लोकपाल के समक्ष मामला रख सकता है।

CRCS पोर्टल के अनुसार, MSCS Act में संशोधन के बाद धारा 85A के तहत सहकारी लोकपाल की नियुक्ति की गई है।

यह व्यवस्था सदस्यों को न्याय दिलाने और समितियों को जवाबदेह बनाने में सहायक है।

3. बोर्ड में महिलाओं और सामाजिक वर्गों का प्रतिनिधित्व

सहकारिता क्षेत्र में समावेशी भागीदारी जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए बहु-राज्य सहकारी समितियों के बोर्ड में महिलाओं और सामाजिक रूप से वंचित वर्गों के प्रतिनिधित्व को बढ़ावा दिया गया है।

PIB के अनुसार, संशोधित अधिनियम में बहु-राज्य सहकारी समितियों के बोर्ड में महिलाओं के लिए दो सीटों और अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति के लिए एक-एक सीट के आरक्षण का प्रावधान किया गया है।

इससे सहकारिता में निर्णय लेने की प्रक्रिया अधिक समावेशी बनेगी।

4. ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया

डिजिटल इंडिया के दौर में सरकारी प्रक्रियाओं को ऑनलाइन करना जरूरी है। बहु-राज्य सहकारी समितियों के पंजीकरण में भी ऑनलाइन प्रक्रिया को बढ़ावा दिया गया है।

PIB के अनुसार, 2023 के संशोधन के बाद बहु-राज्य सहकारी समितियों की रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को CRCS पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन किया गया है।

इससे आवेदकों को कम समय में, अधिक पारदर्शी तरीके से प्रक्रिया पूरी करने में सुविधा मिलती है।

5. ऑडिट और वित्तीय पारदर्शिता

सहकारी समिति की विश्वसनीयता उसके वित्तीय अनुशासन पर निर्भर करती है। यदि खातों का सही ऑडिट नहीं होता या सदस्यों को वित्तीय जानकारी नहीं मिलती, तो विवाद और अविश्वास बढ़ते हैं।

बहु-राज्य सहकारी समिति संशोधन नीति के तहत वित्तीय पारदर्शिता, ऑडिट व्यवस्था और जवाबदेही पर अधिक जोर दिया गया है। इससे समिति के फंड, सदस्य अंशदान, लाभ वितरण और खर्चों की निगरानी मजबूत होती है।

6. सदस्य हितों की सुरक्षा

सहकारी समिति का आधार सदस्य होते हैं। इसलिए इस नीति में सदस्यों के अधिकार, शिकायत निवारण, सूचना तक पहुंच और लोकतांत्रिक भागीदारी को मजबूत किया गया है।

यदि कोई समिति सदस्य हितों की अनदेखी करती है या पारदर्शिता नहीं रखती, तो संशोधित व्यवस्था के तहत सदस्यों के पास शिकायत और समाधान के अधिक विकल्प उपलब्ध होते हैं।

बहु-राज्य सहकारी समिति संशोधन नीति: प्रमुख प्रावधानों की तालिका

प्रावधानक्या बदलासंभावित लाभ
सहकारी चुनाव प्राधिकरणचुनाव प्रक्रिया स्वतंत्र संस्था के नियंत्रण मेंनिष्पक्ष और समय पर चुनाव
सहकारी लोकपालसदस्य शिकायतों के समाधान की व्यवस्थासदस्यों को न्याय और जवाबदेही
बोर्ड में आरक्षणमहिलाओं, SC और ST को प्रतिनिधित्वसमावेशी प्रबंधन
ऑनलाइन रजिस्ट्रेशनCRCS पोर्टल के माध्यम से प्रक्रियासमय की बचत और पारदर्शिता
ऑडिट सुधारवित्तीय निगरानी मजबूतभ्रष्टाचार और गड़बड़ी पर नियंत्रण
सदस्य अधिकारशिकायत, जानकारी और भागीदारी पर जोरसदस्य-केंद्रित सहकारिता

किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए महत्व

भारत में कई सहकारी संस्थाएं सीधे किसानों से जुड़ी हैं। बीज, खाद, डेयरी, कृषि मशीनरी, फसल विपणन, कृषि प्रसंस्करण और ग्रामीण वित्त में सहकारी संस्थाओं की बड़ी भूमिका है।

जब बहु-राज्य सहकारी समितियों में पारदर्शिता बढ़ती है, तो किसानों को भी लाभ मिलता है। उन्हें बेहतर सेवाएं, सही भुगतान, समय पर निर्णय और बाजार से जुड़ने के अवसर मिलते हैं।

उदाहरण के लिए, यदि कोई बहु-राज्य कृषि सहकारी संस्था किसानों से उपज खरीदती है, तो पारदर्शी प्रबंधन से किसानों को भुगतान में देरी कम हो सकती है। इसी तरह, डेयरी सहकारी समितियों में बेहतर प्रशासन से दूध उत्पादकों को उचित मूल्य और नियमित भुगतान मिल सकता है।

सहकारिता क्षेत्र में सुशासन की नई शुरुआत

बहु-राज्य सहकारी समिति संशोधन नीति को सहकारिता क्षेत्र में सुशासन की दिशा में बड़ा कदम माना जा सकता है। सुशासन का मतलब केवल नियम बनाना नहीं, बल्कि उन्हें सही तरीके से लागू करना भी है।

इस नीति से समितियों में निम्नलिखित सुधार हो सकते हैं:

  • बोर्ड और प्रबंधन की जवाबदेही बढ़ेगी।
  • चुनावी प्रक्रिया पर भरोसा मजबूत होगा।
  • सदस्य शिकायतों का समाधान तेज होगा।
  • वित्तीय लेन-देन अधिक पारदर्शी होंगे।
  • महिलाओं और वंचित वर्गों की भागीदारी बढ़ेगी।
  • डिजिटल प्रक्रिया से भ्रष्टाचार और देरी कम हो सकती है।

बहु-राज्य सहकारी समिति संशोधन नीति और 97वां संविधान संशोधन

PIB के अनुसार, MSCS Amendment Act और Rules, 2023 को 97वें संविधान संशोधन के प्रावधानों को शामिल करते हुए शासन व्यवस्था, पारदर्शिता, जवाबदेही और चुनावी सुधारों को मजबूत करने के लिए लागू किया गया है।

97वें संविधान संशोधन ने सहकारी समितियों को लोकतांत्रिक, स्वायत्त और पेशेवर रूप से मजबूत बनाने पर जोर दिया था। इस दृष्टि से बहु-राज्य सहकारी समितियों में सुधार देश के सहकारी ढांचे को आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

पुरानी व्यवस्था और नई व्यवस्था में अंतर

विषयपुरानी स्थितिसंशोधन के बाद स्थिति
चुनावकई मामलों में समिति बोर्ड की भूमिका अधिकस्वतंत्र चुनाव प्राधिकरण की व्यवस्था
शिकायत समाधानस्पष्ट और मजबूत मंच की कमीसहकारी लोकपाल की व्यवस्था
प्रतिनिधित्वसमावेशी भागीदारी सीमितमहिलाओं, SC/ST के लिए आरक्षण
पंजीकरणप्रक्रिया अपेक्षाकृत जटिलऑनलाइन CRCS पोर्टल आधारित प्रक्रिया
पारदर्शितासुधार की जरूरतऑडिट और जवाबदेही पर अधिक जोर

सहकारी समितियों के लिए अनुपालन क्यों जरूरी है?

किसी भी बहु-राज्य सहकारी समिति के लिए संशोधित नियमों का पालन करना जरूरी है। अनुपालन से समिति की कानूनी स्थिति मजबूत रहती है और सदस्यों का भरोसा बना रहता है।

समिति को समय पर चुनाव कराना, रिकॉर्ड अपडेट रखना, वित्तीय ऑडिट पूरा करना, सदस्य शिकायतों को गंभीरता से लेना और बोर्ड संरचना में कानूनी प्रावधानों का पालन करना चाहिए।

यदि कोई समिति नियमों की अनदेखी करती है, तो इससे सदस्यों का विश्वास टूटता है और कानूनी कार्रवाई का जोखिम भी बढ़ सकता है।

बहु-राज्य सहकारी समिति संशोधन नीति से संभावित लाभ

1. पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया

स्वतंत्र चुनाव प्राधिकरण से चुनाव में पक्षपात की आशंका कम होगी। इससे सदस्यों को सही प्रतिनिधि चुनने का अवसर मिलेगा।

2. सदस्यों को बेहतर अधिकार

सदस्य अब अपनी शिकायतों को अधिक प्रभावी मंच तक पहुंचा सकते हैं। इससे सदस्य हितों की सुरक्षा मजबूत होगी।

3. वित्तीय अनुशासन

ऑडिट और जवाबदेही से समिति के धन का सही उपयोग सुनिश्चित किया जा सकता है। इससे भ्रष्टाचार, अनियमितता और गलत खर्चों पर रोक लग सकती है।

4. डिजिटल सुविधा

ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और डिजिटल प्रक्रिया से समय की बचत होगी। इससे दस्तावेजी प्रक्रिया भी अधिक साफ और ट्रैक करने योग्य बनेगी।

5. समावेशी सहकारिता

महिलाओं और सामाजिक वर्गों का प्रतिनिधित्व बढ़ने से निर्णय प्रक्रिया में विविधता आएगी। इससे सहकारी समितियां अधिक संतुलित और जन-केंद्रित बनेंगी।

संभावित चुनौतियां

हालांकि बहु-राज्य सहकारी समिति संशोधन नीति कई मायनों में उपयोगी है, लेकिन इसके प्रभावी क्रियान्वयन में कुछ चुनौतियां भी हो सकती हैं।

सबसे पहली चुनौती है जागरूकता। कई सदस्यों और छोटे स्तर के सहकारी संगठनों को नई व्यवस्था की पूरी जानकारी नहीं होती। दूसरी चुनौती डिजिटल साक्षरता की है। ऑनलाइन प्रक्रिया तभी सफल होगी, जब समिति के पदाधिकारी और सदस्य डिजिटल साधनों का सही उपयोग कर सकें।

तीसरी चुनौती समय पर अनुपालन की है। यदि समितियां रिकॉर्ड, ऑडिट, चुनाव और सदस्य डेटा को अपडेट नहीं रखेंगी, तो सुधारों का पूरा लाभ नहीं मिल पाएगा।

बहु-राज्य सहकारी समिति के सदस्यों को क्या ध्यान रखना चाहिए?

सदस्यों को केवल नाममात्र की सदस्यता तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्हें समिति की बैठकों, चुनावों, वित्तीय रिपोर्टों और निर्णय प्रक्रिया में भाग लेना चाहिए।

सदस्यों को यह ध्यान रखना चाहिए:

  • समिति की वार्षिक रिपोर्ट पढ़ें।
  • चुनाव प्रक्रिया की जानकारी रखें।
  • ऑडिट रिपोर्ट और वित्तीय स्थिति समझें।
  • यदि कोई शिकायत है, तो लिखित रूप में दर्ज करें।
  • समिति के नियम और उपनियमों की जानकारी रखें।
  • अपने अधिकार और जिम्मेदारियां दोनों समझें।

बहु-राज्य सहकारी समिति संशोधन नीति का कृषि क्षेत्र पर असर

कृषि क्षेत्र में सहकारी समितियों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। उर्वरक वितरण, बीज उत्पादन, डेयरी, कृषि प्रसंस्करण, फसल विपणन और किसान उत्पादक संगठनों से जुड़े कई मॉडल सहकारिता से प्रेरित हैं।

जब सहकारी समितियों में प्रशासन मजबूत होगा, तो किसानों को सीधा लाभ मिल सकता है। बेहतर प्रबंधन से लागत कम करने, बाजार पहुंच बढ़ाने, सामूहिक खरीद-बिक्री को मजबूत करने और ग्रामीण रोजगार बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

इसलिए बहु-राज्य सहकारी समिति संशोधन नीति को केवल कानूनी बदलाव नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने वाला कदम भी माना जा सकता है।

सहकारिता क्षेत्र में डिजिटल बदलाव

CRCS पोर्टल, ऑनलाइन पंजीकरण और डिजिटल रिकॉर्ड जैसी व्यवस्थाएं सहकारिता क्षेत्र को आधुनिक बना रही हैं। इससे समितियों के दस्तावेज, आवेदन, अनुमोदन और रिकॉर्ड अधिक व्यवस्थित हो सकते हैं।

डिजिटल बदलाव का फायदा यह है कि प्रक्रिया में मानवीय हस्तक्षेप कम होता है। इससे पारदर्शिता बढ़ती है और सदस्यों को जानकारी आसानी से मिल सकती है।

क्या यह नीति सहकारी संस्थाओं को मजबूत बनाएगी?

यदि बहु-राज्य सहकारी समिति संशोधन नीति को सही तरीके से लागू किया जाए, तो यह सहकारी संस्थाओं की विश्वसनीयता बढ़ा सकती है। इससे सदस्यों का भरोसा मजबूत होगा और सहकारी संस्थाएं अधिक पेशेवर ढंग से काम कर पाएंगी।

हालांकि किसी भी नीति की सफलता केवल कानून से तय नहीं होती। इसके लिए समिति प्रबंधन, सदस्य जागरूकता, सरकारी निगरानी और डिजिटल क्षमता भी जरूरी है।

FAQ: बहु-राज्य सहकारी समिति संशोधन नीति

1. बहु-राज्य सहकारी समिति संशोधन नीति क्या है?

बहु-राज्य सहकारी समिति संशोधन नीति बहु-राज्य सहकारी समितियों में पारदर्शिता, जवाबदेही, निष्पक्ष चुनाव, सदस्य अधिकार और वित्तीय अनुशासन को मजबूत करने वाली सुधारात्मक व्यवस्था है।

2. Multi-State Cooperative Societies Amendment Act, 2023 कब अधिसूचित हुआ?

PIB के अनुसार, MSCS Amendment Act, 2023 को 03 अगस्त 2023 और संबंधित Rules, 2023 को 04 अगस्त 2023 को अधिसूचित किया गया।

3. सहकारी चुनाव प्राधिकरण का क्या काम है?

सहकारी चुनाव प्राधिकरण बहु-राज्य सहकारी समितियों के बोर्ड चुनावों को निष्पक्ष, पारदर्शी और समय पर कराने के लिए जिम्मेदार है।

4. सहकारी लोकपाल क्यों जरूरी है?

सहकारी लोकपाल सदस्यों की शिकायतों के समाधान के लिए एक स्वतंत्र मंच देता है। इससे सदस्यों को न्याय और समिति पर जवाबदेही दोनों मिलती है।

5. क्या इस नीति से किसानों को लाभ होगा?

हां, यदि कोई बहु-राज्य सहकारी समिति कृषि, डेयरी, बीज, खाद या फसल विपणन से जुड़ी है, तो बेहतर प्रबंधन और पारदर्शिता से किसानों को सीधा लाभ मिल सकता है।

6. क्या बहु-राज्य सहकारी समिति का पंजीकरण ऑनलाइन हो सकता है?

हां, 2023 के संशोधन के बाद रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को CRCS पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन किया गया है।

7. बोर्ड में महिलाओं और SC/ST के लिए क्या प्रावधान है?

संशोधित व्यवस्था में बोर्ड में महिलाओं के लिए दो सीटें और अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति के लिए एक-एक सीट आरक्षित करने का प्रावधान है।

8. इस नीति का सबसे बड़ा फायदा क्या है?

इसका सबसे बड़ा फायदा सहकारी समितियों में पारदर्शिता, लोकतांत्रिक चुनाव, सदस्य सुरक्षा और वित्तीय अनुशासन को बढ़ावा देना है।

निष्कर्ष

बहु-राज्य सहकारी समिति संशोधन नीति भारत के सहकारिता क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सुधार है। यह नीति बहु-राज्य सहकारी समितियों को अधिक पारदर्शी, लोकतांत्रिक, जवाबदेह और सदस्य-केंद्रित बनाने की दिशा में काम करती है।

सहकारी चुनाव प्राधिकरण, सहकारी लोकपाल, ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन, बोर्ड में आरक्षण और वित्तीय पारदर्शिता जैसे प्रावधान इस नीति को मजबूत बनाते हैं। खासकर कृषि, डेयरी, ग्रामीण वित्त और किसान हित से जुड़ी सहकारी संस्थाओं के लिए यह बदलाव बेहद महत्वपूर्ण है।

यदि समितियां इन नियमों का सही पालन करें और सदस्य भी जागरूक होकर अपनी भूमिका निभाएं, तो सहकारिता क्षेत्र ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दे सकता है। इसलिए बहु-राज्य सहकारी समिति संशोधन नीति को केवल कानूनी बदलाव नहीं, बल्कि सहकारिता आंदोलन को आधुनिक और विश्वसनीय बनाने वाला कदम माना जाना चाहिए।

Tags: Bahu Rajya Sahkari Samiti Sanshodhan Niti
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