NCDC Yojana: भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सहकारी समितियों की भूमिका हमेशा से मजबूत रही है। गांव में किसान को बीज, खाद, ऋण, विपणन, भंडारण, डेयरी, पशुपालन और सामूहिक व्यापार जैसी सुविधाएं अक्सर सहकारी ढांचे के माध्यम से मिलती हैं। इसी सोच को आगे बढ़ाने के लिए सहकार से समृद्धि अभियान को एक व्यापक दिशा के रूप में देखा जा रहा है।
इस अभियान का मूल उद्देश्य है कि किसान, ग्रामीण युवा, महिलाएं, डेयरी उत्पादक, मत्स्य पालक, छोटे उद्यमी और सहकारी समितियां मिलकर आर्थिक रूप से मजबूत बनें। सहकारिता मंत्रालय और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम यानी NCDC की योजनाएं इसमें अहम भूमिका निभा रही हैं।
NCDC, सहकारिता मंत्रालय के अधीन एक वैधानिक संस्था है, जो सहकारी समितियों को अलग-अलग क्षेत्रों में वित्तीय सहायता उपलब्ध कराती है। PIB के अनुसार, NCDC युवा सहकार और स्वयं शक्ति सहकार जैसी योजनाओं को लागू कर रहा है, जिन्हें NCDC द्वारा पूरी तरह समर्थन दिया जाता है।
सहकार से समृद्धि अभियान क्या है?
सहकार से समृद्धि अभियान का मतलब है सहकारिता के माध्यम से आर्थिक विकास। इसमें अकेले व्यक्ति के बजाय सामूहिक संगठन को मजबूत किया जाता है। जब किसान या ग्रामीण उद्यमी मिलकर सहकारी समिति बनाते हैं, तो उनकी खरीद क्षमता, उत्पादन क्षमता, बाजार तक पहुंच और वित्तीय स्थिति बेहतर हो सकती है।
इस अभियान के तहत मुख्य रूप से इन बातों पर ध्यान दिया जाता है:
- प्राथमिक कृषि ऋण समितियों यानी PACS को मजबूत बनाना
- सहकारी समितियों को डिजिटल और आधुनिक बनाना
- ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर बनाना
- महिला सहकारी समितियों को वित्तीय मदद देना
- डेयरी, मत्स्य, कृषि, खाद्य प्रसंस्करण और स्वास्थ्य क्षेत्र में सहकारी मॉडल को बढ़ावा देना
- किसानों को सामूहिक विपणन, भंडारण और मूल्य संवर्धन से जोड़ना
सरल शब्दों में कहें, तो सहकार से समृद्धि अभियान गांव की आर्थिक ताकत को संगठित करने का मॉडल है।
राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम योजनाएँ: अभियान की मजबूत नींव
राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम योजनाएँ सहकारी समितियों को वित्त, परियोजना सहायता, तकनीकी सहयोग और उद्यम विकास का आधार देती हैं। NCDC कृषि, डेयरी, मत्स्य, पशुपालन, चीनी, खाद्य प्रसंस्करण, भंडारण, कोल्ड चेन, महिला सहकारिता और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में सहायता उपलब्ध कराता है।
PIB के अनुसार, NCDC भारत सरकार की कई केंद्रीय और केंद्र प्रायोजित योजनाओं को लागू करने में भी भूमिका निभाता है, जिनमें कृषि, बागवानी, मत्स्य पालन, डेयरी, पशुधन, खाद्य प्रसंस्करण, विपणन, भंडारण और कोल्ड चेन जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
सहकार से समृद्धि अभियान के प्रमुख उद्देश्य
1. किसानों की आय बढ़ाना
किसान अगर अकेले बाजार में जाता है, तो उसे कई बार सही दाम, सही भंडारण और सही खरीदार नहीं मिल पाते। सहकारी समिति के माध्यम से किसान सामूहिक रूप से उत्पादन बेच सकता है। इससे लागत घटती है और मोलभाव की क्षमता बढ़ती है।
2. PACS को बहुउद्देशीय बनाना
PACS यानी प्राथमिक कृषि ऋण समितियां ग्रामीण अर्थव्यवस्था की सबसे निचली लेकिन मजबूत इकाई हैं। सहकार से समृद्धि अभियान में PACS को केवल ऋण देने वाली संस्था नहीं, बल्कि बहुउद्देशीय सेवा केंद्र बनाने पर जोर है।
PACS के माध्यम से खाद, बीज, कृषि उपकरण, बैंकिंग सुविधा, CSC सेवाएं, भंडारण, डेयरी और अन्य ग्रामीण सेवाएं दी जा सकती हैं।
3. ग्रामीण युवाओं को उद्यमिता से जोड़ना
युवा सहकार जैसी योजनाओं का उद्देश्य नई और नवाचार आधारित सहकारी समितियों को प्रोत्साहित करना है। इससे ग्रामीण युवा खेती, एग्री-स्टार्टअप, प्रोसेसिंग, लॉजिस्टिक्स, डिजिटल सेवाओं और स्थानीय व्यापार से जुड़ सकते हैं।
4. महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना
महिला स्वयं सहायता समूह और महिला सहकारी समितियां ग्रामीण अर्थव्यवस्था की बड़ी ताकत हैं। स्वयं शक्ति सहकार और नंदिनी सहकार जैसी योजनाएं महिलाओं को ऋण, क्षमता निर्माण और उद्यम विकास से जोड़ती हैं।
5. ग्रामीण बुनियादी ढांचा मजबूत करना
डेयरी प्लांट, कोल्ड स्टोरेज, गोदाम, प्रोसेसिंग यूनिट, स्वास्थ्य सेवा केंद्र और डिजिटल सिस्टम जैसे बुनियादी ढांचे के लिए सहकारी समितियों को वित्तीय सहायता दी जाती है।
प्रमुख राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम योजनाएँ
नीचे कुछ महत्वपूर्ण NCDC योजनाओं की जानकारी दी गई है, जो सहकार से समृद्धि अभियान को मजबूत बनाती हैं।
| योजना का नाम | मुख्य उद्देश्य | लाभार्थी |
|---|---|---|
| युवा सहकार योजना | नई और नवाचार आधारित सहकारी समितियों को बढ़ावा | युवा उद्यमी, नई सहकारी समितियां |
| स्वयं शक्ति सहकार | महिला SHG और सहकारी समितियों को वित्तीय सहायता | महिला समूह, PACS, DCCB, STCB |
| नंदिनी सहकार | महिला नेतृत्व वाली सहकारी समितियों का विकास | महिला सहकारी समितियां |
| डेयरी सहकार | डेयरी क्षेत्र में उत्पादन, प्रोसेसिंग और मार्केटिंग | डेयरी सहकारी समितियां |
| आयुष्मान सहकार | स्वास्थ्य और हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर | स्वास्थ्य क्षेत्र की सहकारी समितियां |
| डिजिटल सहकार | सहकारी समितियों का डिजिटल सशक्तिकरण | पंजीकृत सहकारी समितियां |
| दीर्घावधि कृषक पूंजी सहकार | कृषि और ग्रामीण पूंजी निर्माण | PACS, DCCB, STCB, कृषि ऋण सहकारी संस्थाएं |
युवा सहकार योजना
युवा सहकार योजना उन नई सहकारी समितियों के लिए महत्वपूर्ण है, जो नए विचारों और नवाचार के साथ काम करना चाहती हैं। इसका उद्देश्य युवाओं को सहकारी मॉडल के माध्यम से उद्यमिता से जोड़ना है।
ग्रामीण भारत में कई युवा खेती के साथ एग्री-बिजनेस, प्रोसेसिंग, ड्रोन सेवा, डिजिटल मार्केटिंग, पशुपालन, डेयरी, जैविक उत्पाद और स्थानीय ब्रांडिंग जैसे क्षेत्रों में काम करना चाहते हैं। ऐसे युवाओं के लिए सहकारी मॉडल सुरक्षित और सामूहिक विकास का रास्ता दे सकता है।
PIB के अनुसार, युवा सहकार योजना नई सहकारी समितियों को नए या नवाचार आधारित विचारों के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से लागू की जा रही है।
स्वयं शक्ति सहकार योजना
स्वयं शक्ति सहकार योजना महिला स्वयं सहायता समूहों और महिला आधारित ग्रामीण आर्थिक गतिविधियों को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण है। यह योजना कृषि ऋण सहकारी समितियों के माध्यम से महिला SHG को ऋण और अग्रिम राशि उपलब्ध कराने में मदद करती है।
इस योजना के तहत PACS, जिला केंद्रीय सहकारी बैंक, राज्य सहकारी बैंक और SHG संघ से जुड़ी सहकारी समितियां पात्र हो सकती हैं। PIB के अनुसार, यह योजना वित्त वर्ष 2022-23 में शुरू की गई थी और ग्रामीण आर्थिक गतिविधियों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
नंदिनी सहकार योजना
नंदिनी सहकार योजना महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देने वाली एक महत्वपूर्ण पहल है। इसका उद्देश्य महिला नेतृत्व वाली सहकारी समितियों को व्यवसाय योजना, उद्यम विकास, क्षमता निर्माण और वित्तीय पहुंच में सहायता देना है।
PIB के अनुसार, किसी भी राज्य या बहु-राज्य सहकारी समिति अधिनियम के अंतर्गत पंजीकृत महिला सहकारी समिति इस योजना के लिए पात्र हो सकती है। साथ ही, ऐसी सहकारी समिति जिसमें प्राथमिक स्तर पर महिलाओं की संख्या कम से कम 50 प्रतिशत हो, वह भी पात्र हो सकती है।
डेयरी सहकार योजना
भारत में डेयरी ग्रामीण आय का मजबूत स्रोत है। छोटे किसान और पशुपालक दूध उत्पादन से नियमित आय प्राप्त करते हैं। लेकिन दूध का सही संग्रह, प्रसंस्करण, गुणवत्ता जांच, ब्रांडिंग और मार्केटिंग न हो, तो किसान को सीमित लाभ मिलता है।
डेयरी सहकार योजना इसी समस्या का समाधान देती है। PIB के अनुसार, वित्त वर्ष 2021-22 में शुरू की गई डेयरी सहकार योजना का उद्देश्य नई परियोजनाओं और मौजूदा डेयरी ढांचे के आधुनिकीकरण या विस्तार के लिए वित्तीय सहायता देना है। यह योजना दूध खरीद, प्रसंस्करण, गुणवत्ता आश्वासन, मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग, पैकेजिंग, मार्केटिंग, परिवहन और भंडारण जैसी गतिविधियों को समर्थन देती है।
आयुष्मान सहकार योजना
ग्रामीण भारत में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी एक बड़ी चुनौती है। कई गांवों में बेहतर अस्पताल, डायग्नोस्टिक सेंटर, हेल्थ एजुकेशन और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध नहीं होतीं। आयुष्मान सहकार योजना स्वास्थ्य क्षेत्र में सहकारी संस्थाओं की भूमिका बढ़ाने का प्रयास करती है।
PIB के अनुसार, NCDC आयुष्मान सहकार योजना के तहत पात्र सहकारी समितियों को स्वास्थ्य क्षेत्र में परियोजना की तकनीकी और वित्तीय जांच के बाद वित्तीय सहायता देता है। इस योजना में अस्पताल, स्वास्थ्य सेवा या स्वास्थ्य शिक्षा से संबंधित कार्य करने वाली पंजीकृत सहकारी समितियां पात्र हो सकती हैं।
डिजिटल सहकार योजना
आज के समय में सहकारी समितियों का डिजिटल होना बहुत जरूरी है। डिजिटल रिकॉर्ड, ऑनलाइन भुगतान, पारदर्शी लेन-देन, सदस्य डेटा, ऋण प्रक्रिया और सरकारी योजनाओं से जुड़ाव सहकारी समितियों को अधिक भरोसेमंद बनाते हैं।
डिजिटल सहकार योजना का उद्देश्य सहकारी समितियों को तकनीकी रूप से मजबूत बनाना है। इससे समितियों को डिजिटल इंडिया के लक्ष्य से जोड़ा जाता है। PIB के अनुसार, यह योजना 2021-22 से संचालित है और डिजिटल रूप से सशक्त सहकारी समितियों को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान करती है।
दीर्घावधि कृषक पूंजी सहकार योजना
कृषि में दीर्घकालिक निवेश की जरूरत लगातार बढ़ रही है। किसानों को सिंचाई, मशीनरी, भंडारण, पशुपालन, प्रोसेसिंग और अन्य ग्रामीण उद्यमों के लिए पूंजी चाहिए। दीर्घावधि कृषक पूंजी सहकार योजना कृषि ऋण सहकारी समितियों को लंबे समय की वित्तीय सहायता देती है।
PIB के अनुसार, यह योजना 2022-23 में शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य सहकारी समितियों और उनके सदस्यों को बेहतर ऋण प्रवाह देना, कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में पूंजी निर्माण को बढ़ावा देना और ग्रामीण व अर्ध-शहरी क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाना है।
सहकार से समृद्धि अभियान से किसानों को कैसे लाभ मिलेगा?
बेहतर बाजार पहुंच
सहकारी समिति के माध्यम से किसान सामूहिक रूप से अपनी उपज बेच सकते हैं। इससे बिचौलियों पर निर्भरता घट सकती है और बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बढ़ती है।
कम लागत पर सेवाएं
बीज, खाद, मशीनरी, भंडारण और परिवहन जैसी सेवाएं अगर समिति के माध्यम से मिलें, तो लागत कम हो सकती है। इससे छोटे किसानों को भी बड़ी सुविधाएं मिलती हैं।
ऋण और वित्तीय सहायता
PACS और सहकारी बैंकों के माध्यम से किसानों को ऋण, कार्यशील पूंजी और परियोजना सहायता मिल सकती है। इससे किसान केवल खेती तक सीमित नहीं रहते, बल्कि प्रोसेसिंग और मार्केटिंग में भी आगे बढ़ सकते हैं।
मूल्य संवर्धन का अवसर
दूध से पनीर, दही, घी; अनाज से आटा; फल-सब्जी से प्रोसेस्ड उत्पाद; और मोटे अनाज से हेल्थ फूड बनाकर किसान अधिक आय कमा सकते हैं। सहकारी मॉडल इसमें मददगार हो सकता है।
सहकारी समितियों के लिए पात्रता
अलग-अलग NCDC योजनाओं में पात्रता अलग हो सकती है, लेकिन सामान्य रूप से ये संस्थाएं पात्र हो सकती हैं:
- राज्य सहकारी समिति अधिनियम के तहत पंजीकृत सहकारी समिति
- बहु-राज्य सहकारी समिति अधिनियम के तहत पंजीकृत समिति
- PACS यानी प्राथमिक कृषि ऋण समिति
- जिला केंद्रीय सहकारी बैंक
- राज्य सहकारी बैंक
- महिला सहकारी समिति
- डेयरी, मत्स्य, स्वास्थ्य, कृषि, प्रोसेसिंग या भंडारण क्षेत्र की सहकारी समिति
- SHG संघ से जुड़ी सहकारी संस्था
योजना के अनुसार उपनियमों में संबंधित गतिविधि का प्रावधान होना जरूरी हो सकता है। इसलिए आवेदन से पहले समिति को अपनी पात्रता, पंजीकरण दस्तावेज और परियोजना रिपोर्ट तैयार करनी चाहिए।
आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज
सहकारी समितियों को NCDC या संबंधित विभाग के माध्यम से आवेदन करते समय सामान्य रूप से नीचे दिए गए दस्तावेजों की जरूरत पड़ सकती है:
| दस्तावेज | क्यों जरूरी है |
|---|---|
| सहकारी समिति पंजीकरण प्रमाणपत्र | समिति की वैधता साबित करने के लिए |
| उपनियम की प्रति | समिति के कार्यक्षेत्र की पुष्टि के लिए |
| परियोजना रिपोर्ट | योजना, लागत और लाभ का आकलन |
| ऑडिट रिपोर्ट | वित्तीय स्थिति दिखाने के लिए |
| सदस्य सूची | लाभार्थियों की जानकारी |
| भूमि या भवन दस्तावेज | परियोजना स्थान की पुष्टि |
| बैंक खाता विवरण | वित्तीय लेन-देन के लिए |
| बोर्ड प्रस्ताव | समिति की आधिकारिक स्वीकृति |
आवेदन प्रक्रिया कैसे हो सकती है?
- सबसे पहले समिति अपने क्षेत्र और जरूरत के अनुसार योजना चुने।
- समिति की बैठक में परियोजना पर प्रस्ताव पारित करे।
- विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी DPR तैयार करे।
- राज्य सहकारिता विभाग, NCDC क्षेत्रीय कार्यालय या संबंधित पोर्टल से मार्गदर्शन ले।
- पात्रता, वित्तीय स्थिति और तकनीकी क्षमता की जांच पूरी करे।
- आवेदन जमा करे और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त दस्तावेज उपलब्ध कराए।
- स्वीकृति के बाद परियोजना के अनुसार सहायता प्राप्त करे।
सहकार से समृद्धि अभियान और PACS की नई भूमिका
PACS पहले मुख्य रूप से कृषि ऋण और खाद-बीज वितरण से जुड़ी थीं। अब इन्हें बहुउद्देशीय ग्रामीण सेवा केंद्र बनाने पर जोर है। PACS ग्रामीण बैंकिंग, कॉमन सर्विस सेंटर, कृषि इनपुट, भंडारण, डेयरी, LPG वितरण, पेट्रोल-डीजल डीलरशिप, माइक्रो ATM और डिजिटल सेवाओं से जुड़ सकती हैं।
इससे गांव में रोजगार भी बढ़ेगा और किसान को एक ही जगह कई सेवाएं मिल सकेंगी। सहकार से समृद्धि अभियान में PACS को गांव की आर्थिक रीढ़ बनाने की क्षमता है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
सहकार से समृद्धि अभियान का असर केवल किसानों तक सीमित नहीं है। इसका प्रभाव पूरे ग्रामीण समाज पर पड़ सकता है।
रोजगार में वृद्धि
डेयरी, प्रोसेसिंग, भंडारण, परिवहन, डिजिटल सेवा और मार्केटिंग में स्थानीय रोजगार बन सकता है।
महिला सशक्तिकरण
महिला सहकारी समितियां अगर मजबूत हों, तो ग्रामीण महिलाओं को आय, नेतृत्व और वित्तीय स्वतंत्रता मिल सकती है।
स्थानीय उत्पादों को बाजार
सहकारी समिति गांव के उत्पादों को ब्रांड बनाकर बेच सकती है। इससे स्थानीय पहचान और आय दोनों बढ़ सकती हैं।
ग्रामीण पलायन में कमी
जब गांव में रोजगार और व्यापार के अवसर मिलेंगे, तो युवाओं का शहरों की ओर पलायन कम हो सकता है।
सहकारी समितियों के लिए सफलता के जरूरी सुझाव
- समिति का रिकॉर्ड पारदर्शी रखें।
- सदस्यों को नियमित प्रशिक्षण दें।
- डिजिटल भुगतान और डिजिटल रजिस्टर अपनाएं।
- परियोजना शुरू करने से पहले बाजार अध्ययन करें।
- केवल ऋण लेने पर ध्यान न दें, बल्कि लाभदायक बिजनेस मॉडल बनाएं।
- महिला और युवा सदस्यों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें।
- ब्रांडिंग, पैकेजिंग और ऑनलाइन मार्केटिंग पर भी ध्यान दें।
- सरकारी योजनाओं और NCDC सहायता की जानकारी नियमित रूप से अपडेट करें।
सहकार से समृद्धि अभियान की चुनौतियां
हर योजना की तरह इस अभियान के सामने भी कुछ चुनौतियां हैं। कई सहकारी समितियों में जागरूकता की कमी है। कुछ समितियों का रिकॉर्ड अपडेट नहीं होता। कई जगह पेशेवर प्रबंधन की कमी भी दिखती है। इसके अलावा, परियोजना रिपोर्ट बनाने और वित्तीय अनुशासन बनाए रखने में भी दिक्कत आती है।
इन चुनौतियों का समाधान प्रशिक्षण, डिजिटल सिस्टम, पारदर्शी लेखा-जोखा, अनुभवी प्रबंधन और नियमित निगरानी से किया जा सकता है।
भविष्य की संभावना
भारत में कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था तेजी से बदल रही है। अब केवल उत्पादन काफी नहीं है। किसानों को प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग, स्टोरेज, डिजिटल मार्केटिंग और निर्यात से जोड़ना जरूरी है। सहकार से समृद्धि अभियान इसी दिशा में बड़ा कदम है।
यदि राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम योजनाएँ सही तरीके से गांव स्तर तक पहुंचती हैं, तो छोटे किसान भी सामूहिक शक्ति के माध्यम से बड़े बाजार तक पहुंच सकते हैं। यह मॉडल आने वाले समय में ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
निष्कर्ष
सहकार से समृद्धि अभियान केवल एक नारा नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत की आर्थिक संरचना को मजबूत करने की दिशा है। इसके माध्यम से किसान, महिलाएं, युवा, डेयरी उत्पादक, मत्स्य पालक और छोटे ग्रामीण उद्यमी सहकारी मॉडल से जुड़कर बेहतर आय और स्थायी विकास की ओर बढ़ सकते हैं।
राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम योजनाएँ इस अभियान की रीढ़ हैं। युवा सहकार, स्वयं शक्ति सहकार, नंदिनी सहकार, डेयरी सहकार, आयुष्मान सहकार, डिजिटल सहकार और दीर्घावधि कृषक पूंजी सहकार जैसी योजनाएं सहकारी समितियों को वित्तीय और संस्थागत मजबूती देती हैं।
अगर सहकारी समितियां पारदर्शिता, तकनीक, प्रशिक्षण और सही व्यापार मॉडल के साथ आगे बढ़ें, तो सहकार से समृद्धि अभियान ग्रामीण भारत को नई दिशा दे सकता है।
FAQs: सहकार से समृद्धि अभियान
1. सहकार से समृद्धि अभियान क्या है?
सहकार से समृद्धि अभियान का उद्देश्य सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों, ग्रामीण युवाओं, महिलाओं और छोटे उद्यमियों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है।
2. राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम योजनाएँ किसके लिए हैं?
राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम योजनाएँ पंजीकृत सहकारी समितियों, PACS, डेयरी सहकारी समितियों, महिला सहकारी समितियों, कृषि ऋण समितियों और अन्य पात्र सहकारी संस्थाओं के लिए हैं।
3. युवा सहकार योजना का लाभ किसे मिलता है?
युवा सहकार योजना नई और नवाचार आधारित सहकारी समितियों को प्रोत्साहित करती है। इसका लाभ ग्रामीण युवाओं और नई सहकारी संस्थाओं को मिल सकता है।
4. डेयरी सहकार योजना क्या है?
डेयरी सहकार योजना डेयरी सहकारी समितियों को दूध उत्पादन, प्रसंस्करण, गुणवत्ता, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग जैसी गतिविधियों के लिए सहायता देती है।
5. क्या महिला सहकारी समितियों के लिए अलग योजना है?
हां, स्वयं शक्ति सहकार और नंदिनी सहकार जैसी योजनाएं महिला SHG और महिला नेतृत्व वाली सहकारी समितियों को सशक्त बनाने के लिए हैं।
6. आयुष्मान सहकार योजना किस क्षेत्र से जुड़ी है?
आयुष्मान सहकार योजना स्वास्थ्य सेवा, अस्पताल, स्वास्थ्य शिक्षा और हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी सहकारी समितियों के लिए है।
7. सहकारी समिति NCDC योजना के लिए कैसे आवेदन कर सकती है?
समिति को पहले पात्रता जांचनी चाहिए, परियोजना रिपोर्ट तैयार करनी चाहिए और NCDC क्षेत्रीय कार्यालय, राज्य सहकारिता विभाग या संबंधित आधिकारिक माध्यम से आवेदन प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए।

