जम्मू-कश्मीर के शोपियां जिले में किसानों और बागवानों को नकली कृषि उत्पादों से बचाने के लिए कृषि विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए संदिग्ध नकली जैव-उर्वरक की भारी मात्रा जब्त की है। कृषि विभाग के प्रवर्तन विंग (एनफोर्समेंट विंग) ने विशेष सूचना के आधार पर शोपियां के ऋषिपोरा-हरमेन क्षेत्र सहित अन्य स्थानों पर छापेमारी कर एक ऐसे उत्पाद को अपने कब्जे में लिया, जिसे जैव-उर्वरक के रूप में बाजार में बेचा जा रहा था, जबकि प्रारंभिक जांच में इसके वैधानिक दस्तावेज और आवश्यक अनुमतियां नहीं मिलीं।
कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार जब्त किए गए उत्पाद को ‘हिस’ ब्रांड के नाम से बाजार में बेचा जा रहा था। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि इसे बागवानों को कीटनाशक के रूप में उपयोग करने की सलाह दी जा रही थी। हालांकि, संबंधित उत्पाद के पास कीटनाशक या जैव-उर्वरक के रूप में बिक्री और उपयोग के लिए आवश्यक वैधानिक स्वीकृतियां, पंजीकरण, गुणवत्ता प्रमाणन तथा अधिकृत प्रयोगशाला की रिपोर्ट उपलब्ध नहीं थी।
प्रारंभिक जांच में सामने आई गंभीर अनियमितताएं
अधिकारियों ने बताया कि शुरुआती जांच में पाया गया कि उत्पाद को निर्धारित नियमों का पालन किए बिना बाजार में उतारा गया था। कृषि क्षेत्र में किसी भी उर्वरक, जैव-उर्वरक या कीटनाशक की बिक्री से पहले संबंधित विभागों से पंजीकरण, गुणवत्ता परीक्षण और नियामक मंजूरी आवश्यक होती है। इन औपचारिकताओं के अभाव में ऐसे उत्पाद किसानों की फसलों और बागवानी उत्पादन के लिए जोखिम पैदा कर सकते हैं।
इसी को ध्यान में रखते हुए विभाग ने मौके से बड़ी मात्रा में संदिग्ध उत्पाद जब्त कर आगे की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि उत्पाद के नमूनों की जांच कराई जाएगी और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
दूसरे डीलर तक पहुंची सप्लाई, फिर हुई कार्रवाई
प्रवर्तन विंग को जांच के दौरान सूचना मिली कि ऋषिपोरा स्थित एक डीलर ने यही उत्पाद शोपियां-कुलगाम सीमा क्षेत्र में स्थित दूसरे कृषि उत्पाद विक्रेता को भी उपलब्ध कराया है। सूचना मिलते ही विभाग की टीम ने वहां भी छापेमारी की, जहां से संदिग्ध नकली जैव-उर्वरक की एक और बड़ी खेप बरामद हुई।
जांच में यह भी पाया गया कि इस उत्पाद को किसानों और बागवानों को कीटनाशक के रूप में बेचने का प्रयास किया जा रहा था। विभाग ने दोनों स्थानों से बरामद सामग्री को जब्त कर जांच प्रक्रिया में शामिल कर लिया है।
किसानों के हितों की रक्षा के लिए अभियान तेज
कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसानों और बागवानों को गुणवत्तापूर्ण कृषि आदान उपलब्ध कराना उसकी प्राथमिकता है। विभाग ने बिना अनुमति, बिना पंजीकरण और संदिग्ध गुणवत्ता वाले कृषि उत्पादों की बिक्री के खिलाफ विशेष अभियान शुरू किया है।
अधिकारियों का कहना है कि हाल के दिनों में विभिन्न जिलों में लगातार निरीक्षण और छापेमारी की जा रही है, जिसके दौरान बड़ी मात्रा में अवैध और संदिग्ध कृषि उत्पाद जब्त किए गए हैं। ऐसे मामलों में संबंधित डीलरों और आपूर्तिकर्ताओं के खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।
नकली कृषि उत्पाद किसानों के लिए बड़ा खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि नकली या अप्रमाणित जैव-उर्वरक और कीटनाशकों के उपयोग से फसलों की वृद्धि प्रभावित हो सकती है, उत्पादन में कमी आ सकती है और बागवानी फसलों की गुणवत्ता भी खराब हो सकती है। इसके अलावा किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है और मिट्टी की उर्वरता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
इसी कारण कृषि वैज्ञानिक किसानों को हमेशा सलाह देते हैं कि वे केवल पंजीकृत विक्रेताओं से ही प्रमाणित और अधिकृत कृषि उत्पाद खरीदें तथा किसी भी उत्पाद का उपयोग करने से पहले उसका पंजीकरण, निर्माण कंपनी और गुणवत्ता संबंधी जानकारी अवश्य जांच लें।
संदिग्ध गतिविधियों की सूचना देने की अपील
कृषि विभाग ने किसानों और बागवानों से अपील की है कि यदि उन्हें किसी भी कृषि उत्पाद की गुणवत्ता या उसकी वैधता पर संदेह हो, तो वे तुरंत संबंधित कृषि अधिकारी या विभाग को इसकी जानकारी दें। विभाग का कहना है कि किसानों की सतर्कता और प्रशासन की नियमित निगरानी से नकली कृषि उत्पादों की बिक्री पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है।
विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि कृषि आदानों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए भविष्य में भी निरीक्षण अभियान जारी रहेगा और नियमों का उल्लंघन करने वाले किसी भी डीलर या वितरक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसका उद्देश्य किसानों और बागवानों के हितों की रक्षा करना तथा कृषि क्षेत्र में केवल प्रमाणित और सुरक्षित उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।

