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Home कृषि समाचार

खरीफ 2026: उर्वरकों की उपलब्धता पर सरकार सख्त, किसानों को मिलेगी राहत

खरीफ 2026 में किसानों को उर्वरकों की उपलब्धता के लिए केंद्र सरकार ने राज्यों को निर्देश दिए हैं। कालाबाजारी रोकने और खाद की पर्याप्त आपूर्ति पर विशेष जोर।

Vipin Mishra by Vipin Mishra
July 13, 2026
in कृषि समाचार
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खरीफ सीजन में उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार सक्रिय
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खरीफ सीजन 2026 के दौरान किसानों को उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने अपनी तैयारियां और निगरानी दोनों तेज कर दी हैं। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हाल ही में आयोजित खरीफ समीक्षा बैठक में सभी राज्यों और संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसानों को किसी भी परिस्थिति में उर्वरकों की कमी का सामना नहीं करना पड़े। उन्होंने कहा कि खाद की कृत्रिम कमी पैदा करने, जमाखोरी और कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए ताकि किसानों को निर्धारित मूल्य पर पर्याप्त मात्रा में उर्वरक मिल सके।

बैठक में खरीफ फसलों की बुआई, मानसून की स्थिति, उर्वरकों की उपलब्धता, बीज वितरण और कृषि संबंधी अन्य तैयारियों की विस्तार से समीक्षा की गई। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि खरीफ सीजन देश की खाद्य सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए उर्वरकों की निर्बाध आपूर्ति सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता

शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों से कहा कि किसानों को यूरिया, डीएपी, एनपीके और अन्य आवश्यक उर्वरकों की उपलब्धता समय पर सुनिश्चित की जाए। उन्होंने राज्यों से जिला स्तर तक उर्वरक स्टॉक की नियमित निगरानी करने और मांग के अनुसार आपूर्ति बनाए रखने को कहा।

उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि जहां किसी जिले में उर्वरकों की मांग अधिक हो, वहां अतिरिक्त स्टॉक तुरंत भेजा जाए ताकि किसानों को लंबी कतारों या अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

मंत्री ने कहा कि यदि किसी क्षेत्र में कृत्रिम कमी पैदा करने या अधिक कीमत वसूलने की शिकायत मिलती है तो संबंधित अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए। ऐसे मामलों में दोषी विक्रेताओं के लाइसेंस निलंबित करने सहित कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।

कालाबाजारी और जमाखोरी पर रहेगा सख्त नियंत्रण

हर खरीफ सीजन में उर्वरकों की बढ़ती मांग के दौरान कुछ स्थानों पर जमाखोरी और कालाबाजारी की शिकायतें सामने आती हैं। इसे देखते हुए केंद्र सरकार ने राज्यों को विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं।

बैठक में कहा गया कि उर्वरकों का वितरण पूरी तरह पारदर्शी तरीके से किया जाए। खुदरा विक्रेताओं, सहकारी समितियों और सरकारी वितरण केंद्रों पर उपलब्ध स्टॉक की नियमित जांच की जाए। यदि कहीं भी निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत वसूली जाती है या कृत्रिम कमी पैदा की जाती है तो तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

सरकार चाहती है कि किसानों को सब्सिडी वाले उर्वरक बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के उपलब्ध हों और वितरण प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता न रहे।

राज्यों को स्टॉक की लगातार समीक्षा करने के निर्देश

केंद्रीय कृषि मंत्री ने सभी राज्यों को निर्देश दिए कि वे प्रतिदिन उर्वरकों की उपलब्धता और वितरण की समीक्षा करें। जिला स्तर पर अधिकारियों को जिम्मेदारी दी जाए कि वे मांग और आपूर्ति का संतुलन बनाए रखें।

उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में बुआई तेजी से चल रही है, वहां अतिरिक्त स्टॉक पहले से उपलब्ध रखा जाए ताकि अचानक मांग बढ़ने पर भी आपूर्ति प्रभावित न हो।

राज्यों से यह भी कहा गया कि उर्वरक कंपनियों, परिवहन एजेंसियों और जिला प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए ताकि किसी भी स्तर पर आपूर्ति बाधित न हो।

डिजिटल निगरानी प्रणाली पर भी जोर

बैठक के दौरान उर्वरक वितरण की डिजिटल मॉनिटरिंग पर भी विशेष जोर दिया गया। सरकार चाहती है कि राज्यों द्वारा उपलब्ध डिजिटल प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन स्टॉक मॉनिटरिंग सिस्टम का प्रभावी उपयोग किया जाए।

डिजिटल निगरानी से यह पता लगाया जा सकता है कि किस जिले में कितना स्टॉक उपलब्ध है, कितनी मांग है और कहां अतिरिक्त आपूर्ति भेजने की आवश्यकता है। इससे समय रहते निर्णय लेना आसान होगा और किसानों को उर्वरकों की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

खरीफ सीजन में बढ़ जाती है उर्वरकों की मांग

भारत में खरीफ सीजन के दौरान धान, मक्का, कपास, सोयाबीन, बाजरा, दालें और अन्य प्रमुख फसलों की बड़े पैमाने पर बुआई होती है। इसी अवधि में यूरिया, डीएपी, एनपीके और पोटाश जैसे उर्वरकों की मांग भी काफी बढ़ जाती है।

सरकार का मानना है कि यदि शुरुआती चरण में किसानों को पर्याप्त उर्वरक मिल जाएं तो फसल की वृद्धि बेहतर होती है और उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलती है। इसलिए खरीफ सीजन शुरू होने से पहले ही राज्यों में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध कराने की रणनीति अपनाई गई है।

संतुलित उर्वरक उपयोग पर भी दिया गया जोर

बैठक में केवल उर्वरकों की उपलब्धता ही नहीं बल्कि उनके संतुलित उपयोग पर भी विशेष बल दिया गया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि किसानों को केवल यूरिया पर निर्भर रहने के बजाय मृदा स्वास्थ्य कार्ड की सिफारिशों के अनुसार संतुलित पोषक तत्वों का उपयोग करना चाहिए।

उन्होंने कृषि विभाग के अधिकारियों से कहा कि किसानों को जागरूक किया जाए ताकि वे आवश्यकतानुसार डीएपी, एनपीके, पोटाश, सल्फर और सूक्ष्म पोषक तत्वों का भी उचित मात्रा में उपयोग करें। इससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहेगी और फसल की गुणवत्ता तथा उत्पादकता दोनों में सुधार होगा।

कृषि विभाग और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय

केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि खरीफ सीजन के दौरान राज्यों के साथ नियमित समीक्षा बैठकें जारी रहेंगी। आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त उर्वरकों का आवंटन भी किया जाएगा ताकि किसी भी राज्य में कमी की स्थिति उत्पन्न न हो।

राज्यों को यह भी निर्देश दिया गया कि किसानों की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए हेल्पलाइन और नियंत्रण कक्ष सक्रिय रखें। जिला प्रशासन, कृषि विभाग और उर्वरक कंपनियों के बीच लगातार समन्वय बनाए रखा जाए।

किसानों के हित में सरकार की तैयारी

विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर उर्वरकों की उपलब्धता खरीफ उत्पादन बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यदि बुआई के समय किसानों को पर्याप्त खाद मिल जाती है तो फसल की शुरुआती वृद्धि बेहतर होती है, जिससे उपज और आय दोनों में सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

केंद्र सरकार की लगातार निगरानी, राज्यों को दिए गए स्पष्ट निर्देश और वितरण व्यवस्था को मजबूत बनाने के प्रयासों से इस वर्ष किसानों को उर्वरकों की उपलब्धता पहले की तुलना में अधिक व्यवस्थित रहने की उम्मीद है।

निष्कर्ष

खरीफ सीजन देश की कृषि अर्थव्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण दौर माना जाता है। ऐसे समय में उर्वरकों की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करना सरकार की बड़ी जिम्मेदारी है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा राज्यों को समय पर खाद उपलब्ध कराने, कृत्रिम कमी रोकने और कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई के दिए गए निर्देश इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। यदि इन निर्देशों का प्रभावी ढंग से पालन किया जाता है, तो किसानों को समय पर आवश्यक उर्वरक मिलेंगे, खेती की लागत और परेशानियां कम होंगी तथा खरीफ फसलों के बेहतर उत्पादन के साथ देश की खाद्य सुरक्षा भी मजबूत होगी।

 

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