Sonam Wangchuk Hunger Strike: देश के प्रसिद्ध शिक्षाविद्, पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रही उनकी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल अब राष्ट्रीय बहस का विषय बन चुकी है। लगातार कई दिनों से भोजन त्यागने के कारण उनका वजन तेजी से घटा है और स्वास्थ्य को लेकर डॉक्टरों ने भी चिंता जताई है। इसके बावजूद वांगचुक का कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस पहल नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
कौन हैं सोनम वांगचुक?
सोनम वांगचुक लद्दाख के जाने-माने इंजीनियर, शिक्षाविद् और पर्यावरण कार्यकर्ता हैं। उन्होंने SECMOL (Students’ Educational and Cultural Movement of Ladakh) की स्थापना की और शिक्षा के क्षेत्र में कई नवाचार किए। उनकी पहचान केवल भारत ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी है।
लोकप्रिय फिल्म ‘3 Idiots’ में आमिर खान द्वारा निभाए गए ‘फुंसुख वांगड़ू’ के किरदार की प्रेरणा भी सोनम वांगचुक को माना जाता है। इसके अलावा उन्होंने आइस स्तूप (Ice Stupa) जैसी अभिनव तकनीक विकसित की, जिससे पहाड़ी क्षेत्रों में जल संरक्षण को बढ़ावा मिला।
इस बार भूख हड़ताल क्यों शुरू की?
सोनम वांगचुक ने इस बार अपनी भूख हड़ताल दो प्रमुख मुद्दों को लेकर शुरू की है।
1. शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग
वांगचुक ने आरोप लगाया है कि हाल के समय में प्रतियोगी परीक्षाओं में सामने आए कथित पेपर लीक और अनियमितताओं ने लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित किया है। उनका कहना है कि परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय होनी चाहिए तथा दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। इसी संदर्भ में उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की भी मांग उठाई है।
2. लद्दाख के लंबित संवैधानिक मुद्दे
शिक्षा के अलावा वांगचुक लगातार लद्दाख के संवैधानिक अधिकारों की भी बात करते रहे हैं। उनका कहना है कि क्षेत्र की संस्कृति, पर्यावरण और स्थानीय पहचान की रक्षा के लिए केंद्र सरकार को अपने पुराने आश्वासनों पर आगे बढ़ना चाहिए।
लद्दाख से जुड़ी प्रमुख मांगें क्या हैं?
सोनम वांगचुक और विभिन्न स्थानीय संगठनों द्वारा लंबे समय से चार प्रमुख मांगें उठाई जाती रही हैं।
1. लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा
2019 में जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन के बाद लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया। स्थानीय संगठनों का मानना है कि राज्य का दर्जा मिलने से जनता की लोकतांत्रिक भागीदारी मजबूत होगी।
2. संविधान की छठी अनुसूची (Sixth Schedule) में शामिल करना
इससे स्थानीय जनजातीय समुदायों, भूमि और प्राकृतिक संसाधनों को विशेष संवैधानिक संरक्षण मिल सकता है।
3. स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार सुरक्षा
स्थानीय लोगों के लिए सरकारी नौकरियों में पर्याप्त आरक्षण और रोजगार सुरक्षा की मांग भी आंदोलन का हिस्सा रही है।
4. राजनीतिक प्रतिनिधित्व
लद्दाख के लिए बेहतर राजनीतिक प्रतिनिधित्व और स्थानीय स्तर पर अधिक अधिकार देने की मांग भी लंबे समय से उठाई जा रही है।
स्वास्थ्य को लेकर बढ़ी चिंता
लगातार कई दिनों की भूख हड़ताल के चलते सोनम वांगचुक का वजन लगभग 8.5 किलोग्राम तक घटने की खबरें सामने आई हैं। डॉक्टरों के अनुसार लंबे समय तक उपवास शरीर के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है। विभिन्न सामाजिक संगठनों और विपक्षी नेताओं ने उनसे स्वास्थ्य का ध्यान रखने की अपील की है, जबकि समर्थक उनकी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे हैं।
सरकार की प्रतिक्रिया
हाल के महीनों में केंद्र सरकार और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है। इसी बीच लद्दाख प्रशासन ने सभी सात जिलों में स्वायत्त हिल डेवलपमेंट काउंसिल बनाने की दिशा में कदम बढ़ाने की घोषणा की है, जिसे कुछ लोग सकारात्मक पहल मान रहे हैं। हालांकि आंदोलनकारी संगठनों का कहना है कि उनकी मूल संवैधानिक मांगों पर अभी भी स्पष्ट निर्णय नहीं हुआ है।
देशभर में बढ़ रहा समर्थन
सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल को कई सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षकों, छात्रों और सार्वजनिक हस्तियों का समर्थन मिल रहा है। सोशल मीडिया पर भी उनके समर्थन में अभियान चल रहे हैं। कई लोगों का मानना है कि सरकार और आंदोलनकारियों के बीच जल्द संवाद होना चाहिए ताकि समाधान निकल सके।
पहले भी कर चुके हैं आंदोलन
यह पहली बार नहीं है जब सोनम वांगचुक ने भूख हड़ताल का रास्ता अपनाया हो। पिछले कुछ वर्षों में भी उन्होंने लद्दाख के पर्यावरण संरक्षण, संवैधानिक सुरक्षा और लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर कई आंदोलन किए हैं। वे जलवायु परिवर्तन और हिमालयी पारिस्थितिकी के संरक्षण को लेकर लगातार आवाज उठाते रहे हैं।
आंदोलन का व्यापक प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि यह आंदोलन केवल एक व्यक्ति की भूख हड़ताल नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, युवाओं के भविष्य, पर्यावरण संरक्षण और लद्दाख के प्रशासनिक ढांचे से जुड़े व्यापक सवालों को सामने ला रहा है। आने वाले दिनों में सरकार और आंदोलनकारियों के बीच होने वाली बातचीत इस पूरे घटनाक्रम की दिशा तय कर सकती है।
निष्कर्ष
सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल ने एक बार फिर देश का ध्यान शिक्षा व्यवस्था, लद्दाख के संवैधानिक अधिकारों और पर्यावरण संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों की ओर आकर्षित किया है। एक ओर उनका स्वास्थ्य चिंता का विषय बना हुआ है, वहीं दूसरी ओर समर्थकों का मानना है कि उनकी मांगों पर गंभीर और रचनात्मक संवाद होना चाहिए। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि सरकार और आंदोलनकारी पक्ष बातचीत के जरिए इस गतिरोध का समाधान कैसे निकालते हैं।

