आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और कर्नाटक के लाखों तोतापुरी आम उत्पादक किसानों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने व्यापक सुधारों की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों की शिकायतों पर गठित उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट की समीक्षा करते हुए स्पष्ट किया कि सरकार केवल समस्याओं का अध्ययन कर फाइल बंद नहीं करेगी, बल्कि खेती, प्रसंस्करण, विपणन और निर्यात से जुड़ी पूरी मूल्य श्रृंखला (वैल्यू चेन) को मजबूत करने के लिए ठोस कदम उठाएगी।
कृषि भवन, नई दिल्ली में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में मंत्री ने विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों पर विस्तार से चर्चा की। बैठक में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट, वरिष्ठ अधिकारी तथा विशेषज्ञ शामिल हुए। समिति की अध्यक्षता आईसीएआर–केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान (सीआईएसएच), लखनऊ के निदेशक डॉ. दामोदरन टी. ने की, जिन्होंने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की।
यह समिति 2 जुलाई 2026 को गठित की गई थी। इसमें आईसीएआर–सीआईएसएच, आईसीएआर–भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान (आईआईएचआर), डॉ. वाईएसआर उद्यानिकी विश्वविद्यालय, आंध्र प्रदेश तथा संबंधित राज्य सरकारों के उद्यानिकी विभाग के विशेषज्ञ शामिल थे। केंद्रीय मंत्री के निर्देश पर समिति ने 8 से 10 जुलाई के बीच आंध्र प्रदेश के तिरुपति और चित्तूर जिलों का दौरा किया। इस दौरान किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), मंडी प्रतिनिधियों, पल्प निर्माण इकाइयों, निर्यातकों और जिला प्रशासन से बातचीत कर वास्तविक परिस्थितियों का अध्ययन किया गया।
समिति ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि इस वर्ष तोतापुरी आम की कीमतों में भारी गिरावट के पीछे कई कारण जिम्मेदार रहे। इनमें सबसे प्रमुख कारण प्रसंस्करण इकाइयों द्वारा समय पर खरीद नहीं करना, घरेलू बाजार में आम आधारित पेयों में वास्तविक आम गूदे (पल्प) की कम मात्रा का उपयोग और अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग में उतार-चढ़ाव शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कई स्थानों पर किसानों की पूरी उपज एक साथ मंडियों और फैक्ट्रियों में पहुंच जाती है, लेकिन खरीद की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से कीमतें अचानक गिर जाती हैं और किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है।
इस स्थिति को सुधारने के लिए विशेषज्ञ समिति ने एक महत्वपूर्ण सुझाव दिया है। समिति ने सिफारिश की कि आम आधारित पेयों में कम से कम 22 से 25 प्रतिशत वास्तविक आम का गूदा अनिवार्य किया जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पेय पदार्थों में अधिक प्राकृतिक गूदे का उपयोग अनिवार्य होगा, तो तोतापुरी आम की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इससे किसानों को बेहतर कीमत मिलेगी और उपभोक्ताओं को भी अधिक पौष्टिक एवं वास्तविक फल आधारित पेय उपलब्ध होंगे।
समिति ने यह भी सुझाव दिया कि जिन पेयों में निर्धारित मात्रा से अधिक आम का गूदा होगा, केवल उन्हीं को 5 प्रतिशत की रियायती जीएसटी दर का लाभ मिले। जबकि कम गूदे वाले उत्पादों पर अधिक जीएसटी लगाया जाए। इस प्रस्ताव पर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने संबंधित मंत्रालयों के बीच समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई), जीएसटी परिषद, वित्त मंत्रालय, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय, कृषि मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय की संयुक्त बैठक बुलाने को कहा, ताकि इस विषय पर व्यापक सहमति बनाई जा सके।
बैठक में तोतापुरी आम की पूरी मूल्य श्रृंखला को व्यवस्थित करने के लिए केंद्रीय समन्वय एवं मूल्य स्थिरीकरण समिति के गठन का भी प्रस्ताव रखा गया। यह समिति आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों के लिए एक शीर्ष संस्थागत तंत्र के रूप में कार्य करेगी। इसका उद्देश्य हर वर्ष आम के मौसम से पहले उत्पादन का अनुमान, प्रसंस्करण क्षमता, निर्यात की मांग, उत्पादन लागत और बाजार की स्थिति का आकलन कर किसानों के लिए लाभकारी संकेतात्मक खरीद मूल्य तय करना होगा। साथ ही मैंगो पल्प के लिए भी एक संदर्भ मूल्य निर्धारित किया जाएगा, ताकि किसानों और उद्योग दोनों को पहले से स्पष्ट संकेत मिल सकें।
विशेषज्ञ समिति ने यह भी पाया कि आंध्र प्रदेश के चित्तूर, तिरुपति, अन्नमय्या और कडप्पा जिलों में बड़ी संख्या में तोतापुरी के बाग पुराने हो चुके हैं, जिससे उनकी उत्पादकता और फल की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। इस समस्या के समाधान के लिए टॉप-वर्किंग तकनीक अपनाने की सिफारिश की गई है। इस तकनीक के तहत पुराने पेड़ों पर उच्च गुणवत्ता वाली किस्मों जैसे नीलम, अल्फांसो, हिम्मायत और बंगनपल्ली की कलमें लगाकर दो से तीन वर्षों में बेहतर गुणवत्ता और अधिक मूल्य वाले फल प्राप्त किए जा सकते हैं।
समिति ने गुड एग्रीकल्चर प्रैक्टिस (जीएपी) को क्लस्टर स्तर पर लागू करने, किसानों को आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण देने, प्रदर्शन उद्यान विकसित करने और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने की भी सिफारिश की है। इससे उत्पादन की गुणवत्ता बढ़ेगी और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप फल तैयार किए जा सकेंगे।
फलों की गुणवत्ता सुधारने और प्रीमियम बाजारों तक पहुंच बढ़ाने के लिए समिति ने चित्तूर, तिरुपति, अन्नमय्या और कडप्पा जिलों के लगभग 23,333 हेक्टेयर क्षेत्र में फ्रूट बैग (फल आवरण) उपलब्ध कराने का सुझाव दिया है। इन विशेष बैगों के उपयोग से फल की बाहरी गुणवत्ता बेहतर रहेगी, कीटों से सुरक्षा मिलेगी और किसानों को बेहतर बाजार मूल्य प्राप्त होगा।
बैठक में जोनल खरीद प्रणाली विकसित करने पर भी जोर दिया गया। इसके तहत उद्यानिकी विभाग, प्रसंस्करण उद्योग और किसान उत्पादक संगठन मिलकर हर वर्ष खरीद की अग्रिम योजना तैयार करेंगे, ताकि किसानों की उपज समय पर खरीदी जा सके और बाजार में कीमतों में अत्यधिक गिरावट न आए। इसके साथ ही आंध्र प्रदेश सरकार को यह सुझाव दिया गया कि सभी पंजीकृत प्रसंस्करण इकाइयों के लिए प्रत्येक वर्ष 15 मई से खरीद और पल्प निर्माण शुरू करना अनिवार्य किया जाए।
किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) की भूमिका को मजबूत करने के लिए किसान-नेतृत्व वाली प्रसंस्करण इकाइयों को बढ़ावा देने का भी प्रस्ताव रखा गया। बैठक में आईसीएआर–सीआईएसएच और आईआईएचआर द्वारा विकसित तकनीकों के माध्यम से आम के बीज के अंदर के भाग से ‘मैंगो बटर’ और अन्य मूल्य संवर्धित उत्पाद तैयार करने की संभावनाओं पर चर्चा की गई। इससे आम के उप-उत्पादों से भी किसानों को अतिरिक्त आय प्राप्त हो सकेगी।
बैठक में एपीईडीए के प्रतिनिधियों ने समुद्री मार्ग से आमों के निर्यात को बढ़ावा देने और नए अंतरराष्ट्रीय बाजार विकसित करने की योजनाओं की जानकारी दी। इस पर केंद्रीय मंत्री ने निर्देश दिया कि एपीईडीए, आईसीएआर और राज्य सरकारें मिलकर तोतापुरी आम और उससे बने उत्पादों के लिए एक समन्वित निर्यात रणनीति तैयार करें, ताकि वैश्विक बाजार में भारतीय आमों की हिस्सेदारी बढ़ाई जा सके।
शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट कहा कि केंद्र सरकार तोतापुरी आम की पूरी मूल्य श्रृंखला को किसान-केंद्रित बनाना चाहती है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें, आईसीएआर, एपीईडीए, किसान उत्पादक संगठन और प्रसंस्करण उद्योग मिलकर जिम्मेदारी साझा करेंगे। जीएसटी, खाद्य सुरक्षा मानकों और राज्यों की नीतियों में समन्वय स्थापित कर एक स्पष्ट कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समिति की सिफारिशों को प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और कर्नाटक के लाखों तोतापुरी आम उत्पादक किसानों की आय में स्थायी वृद्धि होगी। साथ ही भारतीय आमों की गुणवत्ता, प्रसंस्करण क्षमता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा भी मजबूत होगी। यह पहल किसानों की आय बढ़ाने, कृषि आधारित उद्योगों को प्रोत्साहित करने और भारत को विश्व के प्रमुख आम निर्यातक देशों में और मजबूत स्थान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

