प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को तेज गति से हासिल करने के लिए मंगलवार को अपने आवास 7, लोक कल्याण मार्ग पर सचिवों की एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में ग्रामीण विकास, कृषि, सामाजिक कल्याण और उनसे जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में हुई प्रगति की व्यापक समीक्षा की गई। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट संदेश दिया कि सरकार के हर सुधार और हर नीति के केंद्र में नागरिकों का कल्याण होना चाहिए और प्रशासनिक बदलाव केवल प्रक्रियाओं तक सीमित न रहकर लोगों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन लाने वाले होने चाहिए।
बैठक में कैबिनेट सचिव, विभिन्न मंत्रालयों के सचिवों तथा प्रधानमंत्री कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। इस दौरान विभिन्न विभागों द्वारा चलाए जा रहे कार्यक्रमों, चुनौतियों और भविष्य की रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने सचिवों से कहा कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में सभी मंत्रालयों को एक साझा लक्ष्य के साथ आगे बढ़ना होगा और विभागीय सीमाओं से ऊपर उठकर ‘समग्र सरकार’ (Whole of Government) के दृष्टिकोण को अपनाना होगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश तेजी से बदल रहा है और ऐसे समय में शासन व्यवस्था को भी समय की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करना अनिवार्य है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी, सरल और परिणामोन्मुख बनाया जाए, ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ तेजी से अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि केवल सरकारी तंत्र को आधुनिक बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सुधारों का उद्देश्य भारत की विकास यात्रा को गति देना और नागरिकों के जीवन स्तर में ठोस सुधार लाना होना चाहिए।
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने मंत्रालयों और विभागों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि कई बार अलग-अलग विभाग समान उद्देश्य पर कार्य करते हैं, लेकिन उनके बीच पर्याप्त तालमेल नहीं होने से अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पाते। इसलिए सभी मंत्रालयों को मिलकर काम करने और साझा रणनीति के साथ योजनाओं को लागू करने की आवश्यकता है। उन्होंने विभागीय बाधाओं को समाप्त करने और समन्वित कार्य संस्कृति विकसित करने का आह्वान किया।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि ‘विकसित भारत’ का सपना केवल सरकार का कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक व्यापक जन-आंदोलन बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस अभियान की सबसे मजबूत नींव देश के युवा होंगे। युवाओं की ऊर्जा, नवाचार क्षमता और भागीदारी के बिना विकसित भारत का लक्ष्य प्राप्त नहीं किया जा सकता। इसलिए सभी सरकारी योजनाओं में युवाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
युवाओं से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने नशीले पदार्थों के बढ़ते दुरुपयोग पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक और राष्ट्रीय विकास से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। इसके समाधान के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक न्याय, गृह मंत्रालय और अन्य संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की आवश्यकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि युवाओं से संबंधित सभी कार्यक्रमों को जोड़ने के लिए एक संस्थागत व्यवस्था विकसित की जाए, जिससे नशा मुक्ति, जागरूकता और युवा सशक्तीकरण के प्रयास अधिक प्रभावी बन सकें।
प्रधानमंत्री मोदी ने खेल क्षेत्र को भारत के भविष्य के विकास का एक महत्वपूर्ण आधार बताते हुए कहा कि देश को वैश्विक खेल केंद्र (Global Sports Hub) के रूप में स्थापित करने के लिए एकीकृत दृष्टिकोण अपनाना होगा। उन्होंने कहा कि खेल अब केवल प्रतियोगिता तक सीमित नहीं हैं, बल्कि खेल पर्यटन, खेल उद्योग और रोजगार का भी बड़ा माध्यम बन चुके हैं। भारत को भविष्य में बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों की मेजबानी के लिए तैयार होना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने खेल क्षेत्र में स्टार्टअप, आधुनिक तकनीक और नवाचार को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया।
बैठक में कृषि क्षेत्र पर चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने प्रधानमंत्री कुसुम योजना (पीएम-कुसुम) की परिवर्तनकारी क्षमता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि यदि किसान बड़े पैमाने पर इस योजना को अपनाते हैं तो कृषि क्षेत्र में ऊर्जा आत्मनिर्भरता और लागत में कमी जैसे बड़े बदलाव संभव हैं। उन्होंने अधिकारियों से योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और किसानों के बीच इसकी पहुंच बढ़ाने के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा।
प्रधानमंत्री ने भविष्य की वैश्विक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए कौशल विकास पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में बदलती रोजगार आवश्यकताओं का अध्ययन कर भारत के युवाओं को उसी अनुरूप प्रशिक्षित किया जाना चाहिए। वैश्विक कौशल मांग का आकलन कर नई प्रशिक्षण रणनीतियां तैयार की जाएं, ताकि भारतीय युवा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिस्पर्धी बन सकें और उन्हें रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त हों।
बैठक के दौरान विभिन्न मंत्रालयों के सचिवों ने अपने-अपने क्षेत्रों में चल रही प्रमुख योजनाओं, उपलब्धियों और चुनौतियों की जानकारी दी। उन्होंने कार्यान्वयन में आ रही व्यावहारिक समस्याओं तथा सुधार के सुझाव भी साझा किए। प्रधानमंत्री ने सभी प्रस्तुतियों पर विस्तार से चर्चा की और भविष्य की कार्ययोजना के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि योजनाओं का मूल्यांकन केवल खर्च या प्रक्रियाओं के आधार पर नहीं, बल्कि नागरिकों के जीवन में आए सकारात्मक बदलाव के आधार पर किया जाना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने अधिकारियों को परिणाम आधारित प्रशासन (Result-Oriented Governance) पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि सरकार की प्रत्येक योजना का अंतिम उद्देश्य लोगों का जीवन आसान बनाना, ग्रामीण और शहरी विकास को गति देना तथा समावेशी आर्थिक विकास सुनिश्चित करना होना चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री की यह समीक्षा बैठक केवल योजनाओं की प्रगति का आकलन भर नहीं थी, बल्कि विकसित भारत के लिए एक समन्वित प्रशासनिक रणनीति तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। बैठक में नागरिक कल्याण, कृषि, ग्रामीण विकास, खेल, कौशल विकास, युवा सशक्तीकरण और नशा मुक्ति जैसे विषयों को एक साझा राष्ट्रीय एजेंडा के रूप में देखा गया।
सरकार का मानना है कि यदि विभिन्न मंत्रालयों के बीच बेहतर समन्वय, तकनीक आधारित शासन, युवाओं की सक्रिय भागीदारी और नागरिक केंद्रित नीतियों पर समान रूप से काम किया जाए, तो विकसित भारत का लक्ष्य निर्धारित समय से पहले भी हासिल किया जा सकता है। प्रधानमंत्री ने बैठक के अंत में सभी अधिकारियों से राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए टीम भावना के साथ कार्य करने का आह्वान किया और कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा, जब सरकार और समाज मिलकर इसे जन-आंदोलन का रूप देंगे।

