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UP News: हरे चारे की होगी भरपूर उपलब्धता! 39 हजार हेक्टेयर से अधिक गोचर भूमि हुई अतिक्रमण मुक्त, पशुपालकों को मिलेगा बड़ा लाभ

UP News: Abundant green fodder availability in UP! Over 39,000 hectares of grazing land freed from encroachment; livestock rearers to benefit significantly.

Fiza by Fiza
July 27, 2026
in कृषि समाचार
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UP News

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UP News: उत्तर प्रदेश में पशुपालन करने वाले किसानों और पशुपालकों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने गोचर भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के अभियान में बड़ी सफलता हासिल करते हुए 39 हजार हेक्टेयर से अधिक भूमि को मुक्त कराया है। इससे आने वाले समय में प्रदेश के लाखों पशुपालकों को हरे चारे की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा। यह कदम न केवल पशुधन संरक्षण बल्कि दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पशुपालन आज ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था का एक अहम हिस्सा है। उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक राज्य है, ऐसे में पशुओं के लिए पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करना बेहद आवश्यक हो जाता है। लंबे समय से गोचर भूमि पर अतिक्रमण के कारण पशुपालकों को चारे की समस्या से जूझना पड़ रहा था। अब सरकार द्वारा की गई कार्रवाई से इस समस्या के समाधान की उम्मीद बढ़ गई है।

क्या होती है गोचर भूमि?

गोचर भूमि वह सार्वजनिक भूमि होती है जिसे पशुओं के चरने और चारे के उत्पादन के लिए सुरक्षित रखा जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह भूमि पशुपालन की रीढ़ मानी जाती है। समय के साथ कई स्थानों पर इन जमीनों पर अवैध कब्जे हो गए, जिससे पशुपालकों को अपने पशुओं के लिए पर्याप्त चारा उपलब्ध कराने में कठिनाई होने लगी।

प्रदेश सरकार ने राजस्व विभाग और जिला प्रशासन के सहयोग से विशेष अभियान चलाकर ऐसी भूमि को चिह्नित किया और उसे अतिक्रमण मुक्त कराया है। इससे अब इन क्षेत्रों को दोबारा पशुपालन और चारा उत्पादन के लिए विकसित किया जाएगा।

39 हजार हेक्टेयर से अधिक भूमि हुई मुक्त

सरकारी आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में 39 हजार हेक्टेयर से अधिक गोचर भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया गया है। यह उपलब्धि राज्य के विभिन्न जिलों में चलाए गए व्यापक अभियान का परिणाम है।

भूमि को मुक्त कराने के बाद अब सरकार का फोकस इन क्षेत्रों में हरे चारे की खेती को बढ़ावा देने और इन्हें संरक्षित रखने पर रहेगा। इसके लिए स्थानीय निकायों और ग्राम पंचायतों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी।

पशुपालकों को कैसे होगा फायदा?

गोचर भूमि मुक्त होने से पशुपालकों को कई तरह के लाभ मिलेंगे। इनमें प्रमुख हैं—

  • हरे चारे की उपलब्धता बढ़ेगी।
  • पशुओं के पोषण स्तर में सुधार होगा।
  • दूध उत्पादन में वृद्धि होगी।
  • पशुपालकों की चारा खरीदने पर होने वाली लागत कम होगी।
  • छोटे और सीमांत किसानों को अधिक लाभ मिलेगा।
  • पशुओं के स्वास्थ्य में सुधार आएगा।
  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पशुओं को संतुलित और पौष्टिक हरा चारा नियमित रूप से उपलब्ध कराया जाए तो दुग्ध उत्पादन में 20 से 30 प्रतिशत तक वृद्धि संभव है।

हरे चारे की कमी क्यों बन रही थी समस्या?

उत्तर प्रदेश सहित देश के कई राज्यों में पशुपालकों के सामने हरे चारे की कमी एक गंभीर समस्या बनती जा रही है। इसके पीछे कई कारण हैं—

  • कृषि भूमि का आकार लगातार कम होना।
  • नकदी फसलों की ओर किसानों का बढ़ता रुझान।
  • गोचर भूमि पर अवैध कब्जे।
  • जलवायु परिवर्तन के कारण चारा उत्पादन में कमी।
  • पशुधन की संख्या में वृद्धि।

कई पशुपालकों को बाजार से महंगे दामों पर चारा खरीदना पड़ता है, जिससे उनकी आय प्रभावित होती है। खासतौर पर छोटे किसानों के लिए यह अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन जाता है।

दुग्ध उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा

उत्तर प्रदेश देश के कुल दुग्ध उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान देता है। राज्य में लाखों परिवार अपनी आजीविका के लिए पशुपालन पर निर्भर हैं। हरे चारे की पर्याप्त उपलब्धता से पशुओं की उत्पादक क्षमता बढ़ेगी। विशेषज्ञों के अनुसार—

  • हरा चारा पशुओं को आवश्यक प्रोटीन, विटामिन और खनिज प्रदान करता है।
  • इससे पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
  • दूध की गुणवत्ता में सुधार होता है।
  • पशुओं की प्रजनन क्षमता बेहतर होती है।

इस पहल का सीधा असर दुग्ध उत्पादन और किसानों की आय दोनों पर दिखाई दे सकता है।

ग्राम पंचायतों की होगी अहम भूमिका

गोचर भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के बाद सबसे बड़ी चुनौती उसका संरक्षण है। इसके लिए ग्राम पंचायतों को जिम्मेदारी दी जा सकती है। पंचायत स्तर पर कई महत्वपूर्ण कार्य किए जा सकते हैं—

  • भूमि की नियमित निगरानी।
  • चारा विकास कार्यक्रम चलाना।
  • पशुपालकों के लिए चराई की व्यवस्था करना।
  • पौधारोपण और घास उत्पादन को बढ़ावा देना।
  • दोबारा अतिक्रमण रोकने के लिए स्थानीय स्तर पर निगरानी तंत्र विकसित करना।

यदि पंचायतें सक्रिय भूमिका निभाती हैं तो यह पहल लंबे समय तक सफल साबित हो सकती है।

चारा उत्पादन के लिए अपनाई जा सकती हैं आधुनिक तकनीकें

अतिक्रमण मुक्त कराई गई गोचर भूमि पर वैज्ञानिक तरीके से चारा उत्पादन किया जाए तो इसका लाभ कई गुना बढ़ सकता है। कृषि वैज्ञानिक निम्नलिखित तकनीकों को अपनाने की सलाह देते हैं—

  • मल्टी कट नेपियर घास की खेती।
  • बरसीम और जई का उत्पादन।
  • मक्का आधारित हरा चारा उत्पादन।
  • बाजरा और ज्वार चारा फसलें।
  • साइलेज निर्माण तकनीक।
  • हाइड्रोपोनिक ग्रीन फोडर तकनीक।

इन तकनीकों से कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।

पशुपालन क्षेत्र को मिलेगा नया आधार

उत्तर प्रदेश सरकार पिछले कुछ वर्षों में पशुपालन क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए कई योजनाएं संचालित कर रही है। इनमें दुग्ध उत्पादन बढ़ाने, पशु स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, नस्ल सुधार और पशुपालकों की आय बढ़ाने से जुड़े कार्यक्रम शामिल हैं। गोचर भूमि का संरक्षण इन सभी प्रयासों को मजबूत आधार प्रदान करेगा क्योंकि पशुपालन की सफलता का सबसे महत्वपूर्ण पहलू पशुओं के लिए पौष्टिक आहार की उपलब्धता ही है।

पर्यावरण संरक्षण में भी होगा लाभ

गोचर भूमि केवल पशुओं के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं होती बल्कि इसका पर्यावरणीय महत्व भी काफी अधिक है। इससे कई सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलते हैं—

  • हरित क्षेत्र में वृद्धि होती है।
  • भूमि क्षरण कम होता है।
  • जैव विविधता को संरक्षण मिलता है।
  • भूजल संरक्षण में मदद मिलती है।
  • स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र मजबूत होता है।

इस प्रकार गोचर भूमि का संरक्षण पर्यावरण और कृषि दोनों के लिए लाभकारी साबित होता है।

किसानों की लागत होगी कम

पशुपालकों के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक पशुओं के लिए चारे की बढ़ती लागत है। वर्तमान समय में पशु आहार और हरे चारे की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। यदि गांवों में ही पर्याप्त मात्रा में हरा चारा उपलब्ध हो जाता है तो किसानों को—

  • बाजार से महंगा चारा नहीं खरीदना पड़ेगा।
  • परिवहन लागत कम होगी।
  • पशुपालन का लाभ बढ़ेगा।
  • दूध उत्पादन से होने वाली आय में वृद्धि होगी।

इससे छोटे किसानों और महिला पशुपालकों को विशेष लाभ मिलने की संभावना है।

क्या भविष्य में बढ़ेगा चारा बैंक का दायरा?

विशेषज्ञों का मानना है कि गोचर भूमि को चारा बैंक के रूप में विकसित किया जा सकता है। कई राज्यों में सामुदायिक चारा बैंक की अवधारणा सफल रही है। उत्तर प्रदेश में भी यदि ग्राम स्तर पर चारा बैंक स्थापित किए जाएं तो सूखा, बाढ़ या अन्य प्राकृतिक आपदाओं के समय पशुपालकों को राहत मिल सकती है। इसके लिए निम्नलिखित कदम उठाए जा सकते हैं

  • सामुदायिक चारा भंडारण।
  • साइलेज निर्माण इकाइयों की स्थापना।
  • स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी।
  • किसान उत्पादक संगठनों को जोड़ना।
  • कृषि एवं पशुपालन विभाग के संयुक्त कार्यक्रम।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा लाभ

उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन लाखों परिवारों की अतिरिक्त आय का प्रमुख स्रोत है। गोचर भूमि के संरक्षण और चारा उत्पादन में वृद्धि से—

  • दूध उत्पादन बढ़ेगा।
  • पशुपालन लाभकारी बनेगा।
  • रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
  • महिलाओं की आर्थिक भागीदारी मजबूत होगी।
  • किसानों की आय में सुधार होगा।

यह पहल राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

निष्कर्ष

उत्तर प्रदेश में 39 हजार हेक्टेयर से अधिक गोचर भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया जाना पशुपालकों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। इससे न केवल हरे चारे की उपलब्धता बढ़ेगी बल्कि पशुधन के बेहतर पोषण, दुग्ध उत्पादन में वृद्धि और किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। यदि इस भूमि का वैज्ञानिक तरीके से उपयोग और संरक्षण सुनिश्चित किया जाता है तो यह पहल राज्य के पशुपालन क्षेत्र में एक सकारात्मक बदलाव ला सकती है।

 

Tags: Animal Husbandry IndiaDairy Farmers UPFodder Farming NewsGochar Land Uttar PradeshGreen Fodder in UPGreen Fodder SchemeLivestock Development Uttar PradeshUttar Pradesh Agriculture NewsUttar Pradesh Animal HusbandryUttar Pradesh Livestock News
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