Bhopal CM House March: मध्य प्रदेश में मूंग की 100 फीसदी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदी की मांग को लेकर किसानों का आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। नर्मदापुरम संभाग से हजारों किसान राजधानी भोपाल पहुंच चुके हैं और सावरकर सेतु के पास डेरा डाले हुए हैं। किसान संगठनों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस फैसला नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। अब किसानों ने मुख्यमंत्री आवास तक मार्च निकालने की तैयारी शुरू कर दी है, जिससे प्रदेश की सियासत और प्रशासन दोनों पर दबाव बढ़ गया है।
दूसरी ओर, मध्य प्रदेश सरकार ने भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है। केंद्रीय कृषि मंत्री को पत्र लिखकर राज्य सरकार ने मूंग खरीदी से जुड़े मुद्दों पर तत्काल समाधान की मांग की है। ऐसे में यह आंदोलन अब केवल किसानों और राज्य सरकार के बीच का मामला नहीं रह गया है, बल्कि केंद्र सरकार की भूमिका भी अहम हो गई है।
क्या है पूरा मामला?
मध्य प्रदेश देश के प्रमुख दलहन उत्पादक राज्यों में शामिल है। इस वर्ष प्रदेश के कई जिलों में किसानों ने बड़े पैमाने पर मूंग की खेती की है। किसानों का आरोप है कि सरकार द्वारा घोषित खरीदी प्रक्रिया और पंजीकरण की शर्तों के कारण बड़ी संख्या में किसान MSP पर अपनी उपज बेचने से वंचित हो रहे हैं।
किसानों की सबसे बड़ी मांग है कि प्रदेश में उत्पादित मूंग की 100 फीसदी खरीदी MSP पर की जाए। उनका कहना है कि सरकार सीमित मात्रा में खरीदी कर रही है, जिससे किसानों को मजबूरन अपनी उपज खुले बाजार में कम कीमतों पर बेचनी पड़ रही है।
नर्मदापुरम से भोपाल तक किसानों का मार्च
किसानों का यह आंदोलन नर्मदापुरम क्षेत्र से शुरू हुआ था। आंदोलन में शामिल किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और अन्य वाहनों के जरिए भोपाल पहुंचे हैं। राजधानी पहुंचने के बाद उन्होंने सावरकर सेतु के पास अपना पड़ाव डाल दिया है। प्रदर्शनकारी किसानों का कहना है कि उन्होंने पहले भी प्रशासन और सरकार के समक्ष अपनी मांगें रखी थीं, लेकिन समाधान नहीं निकला। इसी वजह से उन्हें राजधानी तक मार्च करने के लिए मजबूर होना पड़ा।
किसानों की प्रमुख मांगें
आंदोलनकारी किसानों की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं—
- मूंग की 100 फीसदी खरीदी MSP पर की जाए।
- सभी पात्र किसानों को खरीदी प्रक्रिया में शामिल किया जाए।
- खरीदी केंद्रों की संख्या बढ़ाई जाए।
- पंजीकरण से जुड़ी तकनीकी और प्रशासनिक समस्याओं को समाप्त किया जाए।
- खरीदी की समय सीमा को बढ़ाया जाए।
- किसानों को भुगतान समय पर किया जाए।
- भविष्य में दलहन उत्पादकों के लिए स्थायी नीति बनाई जाए।
क्यों बढ़ रहा है किसानों का आक्रोश?
किसानों का कहना है कि मूंग की खेती में लागत लगातार बढ़ती जा रही है। बीज, खाद, कीटनाशक, मजदूरी और सिंचाई पर भारी खर्च आता है। यदि उन्हें MSP नहीं मिलता है तो उनकी पूरी आर्थिक गणना बिगड़ जाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि दलहन उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए किसानों को भरोसेमंद बाजार और सरकारी खरीदी की आवश्यकता है। यदि MSP पर खरीदी नहीं होती है तो किसान भविष्य में मूंग जैसी फसलों से दूरी बना सकते हैं, जिसका असर देश के दलहन उत्पादन पर भी पड़ सकता है।
सावरकर सेतु बना आंदोलन का केंद्र
भोपाल का सावरकर सेतु इस समय किसान आंदोलन का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। यहां किसानों ने अस्थायी शिविर बनाए हैं और बड़ी संख्या में किसान रात-दिन डटे हुए हैं।आंदोलनकारी किसानों ने कहा है कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च किया जाएगा। इसे देखते हुए प्रशासन ने भी सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है।पुलिस और प्रशासन लगातार किसानों के नेताओं से बातचीत कर रहे हैं ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।
मुख्यमंत्री आवास तक मार्च की तैयारी
किसानों के प्रतिनिधियों ने संकेत दिए हैं कि सरकार की ओर से स्पष्ट आश्वासन नहीं मिलने पर मुख्यमंत्री आवास तक शांतिपूर्ण मार्च निकाला जाएगा।मुख्यमंत्री आवास तक मार्च को लेकर प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। राजधानी के कई हिस्सों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और यातायात व्यवस्था में भी बदलाव किए जा सकते हैं। यदि बड़ी संख्या में किसान मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच करते हैं तो इससे राजधानी में राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियां और तेज हो सकती हैं।
राज्य सरकार ने केंद्र से मांगा हस्तक्षेप
इस पूरे मामले में मध्य प्रदेश सरकार ने केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है। केंद्रीय कृषि मंत्री को भेजे गए पत्र में राज्य सरकार ने मूंग खरीदी से जुड़ी स्थिति की जानकारी दी है और किसानों के हित में आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया है। सरकार का कहना है कि किसानों की समस्याओं का समाधान केंद्र और राज्य के समन्वय से ही संभव है। MSP पर खरीदी से संबंधित कई नीतिगत फैसले केंद्र सरकार के दायरे में आते हैं, इसलिए केंद्र की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।
MSP क्या है और किसानों के लिए क्यों जरूरी है?
न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) वह मूल्य होता है जिस पर सरकार किसानों से कृषि उपज खरीदने की घोषणा करती है। इसका उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का न्यूनतम लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करना होता है। जब बाजार में फसलों की कीमतें गिर जाती हैं, तब MSP किसानों के लिए सुरक्षा कवच का काम करती है। मूंग जैसी दलहनी फसलों के लिए MSP किसानों की आय को स्थिर रखने में अहम भूमिका निभाती है। यदि सरकार घोषित MSP पर पूरी उपज की खरीदी नहीं करती है तो किसानों को खुले बाजार में कम दाम मिलने का खतरा बढ़ जाता है।
क्या मूंग उत्पादन पर पड़ेगा असर?
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसानों को MSP का लाभ नहीं मिलेगा तो वे अगले सीजन में मूंग की खेती कम कर सकते हैं। इसका असर दलहन उत्पादन और देश की खाद्य सुरक्षा दोनों पर पड़ सकता है।भारत लंबे समय से दलहन उत्पादन बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। ऐसे में किसानों को उचित मूल्य नहीं मिलने से उत्पादन बढ़ाने के प्रयासों को झटका लग सकता है।
विपक्ष ने भी उठाए सवाल
किसान आंदोलन को लेकर विपक्षी दलों ने भी सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। विपक्ष का आरोप है कि किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है और सरकार समय रहते समाधान निकालने में असफल रही है। हालांकि सरकार का कहना है कि किसानों के हित सर्वोपरि हैं और बातचीत के जरिए समस्या का समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है।
किसानों की आर्थिक स्थिति पर असर
मध्य प्रदेश के कई किसान खरीफ सीजन में मूंग को नकदी फसल के रूप में उगाते हैं। अच्छी पैदावार होने के बावजूद यदि उन्हें उचित मूल्य नहीं मिलता है तो उनकी पूरी आर्थिक योजना प्रभावित हो जाती है। विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों के लिए MSP पर खरीदी बेहद महत्वपूर्ण होती है। उनकी आय का बड़ा हिस्सा इसी फसल पर निर्भर करता है।
आगे क्या होगा?
अब सभी की नजरें राज्य सरकार और केंद्र सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई हैं। यदि किसानों और सरकार के बीच सहमति बन जाती है तो आंदोलन समाप्त हो सकता है। लेकिन यदि मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो मुख्यमंत्री आवास मार्च और बड़े आंदोलन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। भोपाल में जारी यह किसान आंदोलन केवल MSP की मांग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश में कृषि नीति, सरकारी खरीदी व्यवस्था और किसानों की आर्थिक सुरक्षा से जुड़ा बड़ा सवाल भी खड़ा कर रहा है।
निष्कर्ष
मध्य प्रदेश में मूंग की 100 फीसदी MSP खरीदी की मांग को लेकर शुरू हुआ आंदोलन अब प्रदेश की राजनीति और कृषि नीति का अहम मुद्दा बन चुका है। सावरकर सेतु पर डटे किसान अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं, जबकि सरकार समाधान की कोशिशों में जुटी है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि किसानों की मांगें किस हद तक पूरी होती हैं और यह आंदोलन किस दिशा में आगे बढ़ता है।

