केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर के माध्यम से स्पष्ट किया है कि मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के तेंदूखेड़ा विधानसभा क्षेत्र में वर्तमान में कोई भी Cooperative Sugar Mill (सहकारी चीनी मिल) संचालित नहीं है। हालांकि पूरे नरसिंहपुर जिले में कुल आठ Private Sugar Mills कार्यरत हैं, जिनमें से दो निजी चीनी मिलें तेंदूखेड़ा विधानसभा क्षेत्र में संचालित हो रही हैं।
उन्होंने बताया कि देश में नई सहकारी चीनी मिलों की स्थापना का कार्य केंद्र सरकार सीधे नहीं करती। वहीं, सहकारी चीनी मिलों के पुनरुद्धार, आधुनिकीकरण और क्षमता विस्तार के लिए सहकारिता मंत्रालय के अधीन कार्यरत National Cooperative Development Corporation (NCDC) वित्तीय सहायता उपलब्ध करा रहा है।
तेंदूखेड़ा में नहीं है कोई Cooperative Sugar Mill
मध्य प्रदेश सरकार से प्राप्त जानकारी का हवाला देते हुए अमित शाह ने बताया कि तेंदूखेड़ा विधानसभा क्षेत्र में फिलहाल कोई भी सहकारी चीनी मिल नहीं है। इसके बावजूद क्षेत्र में दो निजी चीनी मिलें किसानों से गन्ना खरीदकर उत्पादन कार्य कर रही हैं। वहीं पूरे नरसिंहपुर जिले में कुल आठ निजी चीनी मिलें संचालित हैं, जो स्थानीय गन्ना उत्पादकों को बाजार उपलब्ध करा रही हैं।
नई चीनी मिलें स्थापित नहीं करती केंद्र सरकार
लोकसभा में दिए गए उत्तर में अमित शाह ने कहा कि 31 अगस्त 1998 को खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग द्वारा जारी Press Note के बाद चीनी उद्योग को उन उद्योगों की सूची से हटा दिया गया था, जिनके लिए Industrial Licensing अनिवार्य थी। इसके बाद देश में चीनी उद्योग को अधिक उदार और प्रतिस्पर्धी ढांचे के तहत विकसित किया गया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान व्यवस्था के अनुसार केंद्र सरकार देश के किसी भी हिस्से में स्वयं सहकारी चीनी मिलों की स्थापना नहीं करती।
सहकारी चीनी मिलों के पुनरुद्धार पर सरकार का फोकस
हालांकि नई सहकारी चीनी मिलों की स्थापना केंद्र सरकार नहीं करती, लेकिन Cooperative Sugar Mills को मजबूत बनाने और उनकी वित्तीय स्थिति सुधारने के लिए सहकारिता मंत्रालय लगातार पहल कर रहा है।
मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्यरत National Cooperative Development Corporation (NCDC) सहकारी चीनी मिलों के Revival, Modernization और Infrastructure Development के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराता है।
परियोजना की व्यवहार्यता के आधार पर मिलती है सहायता
अमित शाह ने बताया कि NCDC द्वारा वित्तीय सहायता सीधे संबंधित सहकारी चीनी मिलों को या फिर राज्य सरकारों के माध्यम से उपलब्ध कराई जाती है। यह सहायता Detailed Project Appraisal, Financial Viability तथा NCDC के निर्धारित दिशा-निर्देशों के आधार पर स्वीकृत की जाती है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य सहकारी चीनी मिलों को आधुनिक तकनीक से लैस करना, उनकी उत्पादन क्षमता बढ़ाना तथा किसानों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराना है।
किसानों और सहकारी क्षेत्र को मिलेगा लाभ
विशेषज्ञों का मानना है कि सहकारी चीनी मिलों के आधुनिकीकरण से गन्ना किसानों को समय पर भुगतान, बेहतर प्रसंस्करण सुविधाएं और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। NCDC के माध्यम से दी जा रही वित्तीय सहायता भविष्य में कमजोर सहकारी चीनी मिलों को पुनर्जीवित करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
लोकसभा में दिए गए इस जवाब से यह स्पष्ट हुआ है कि केंद्र सरकार का जोर नई सहकारी चीनी मिलें स्थापित करने के बजाय मौजूदा सहकारी संस्थाओं को वित्तीय सहायता, आधुनिकीकरण और संस्थागत मजबूती प्रदान करने पर है, ताकि देश का सहकारी ढांचा अधिक सक्षम, प्रतिस्पर्धी और किसान हितैषी बन सके।

