भारत सरकार देश में Inland Fisheries और Aquaculture Sector को आधुनिक बनाने के लिए लगातार निवेश बढ़ा रही है। मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के Department of Fisheries द्वारा वर्ष 2020-21 से प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) लागू की जा रही है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत तालाबों के विकास, हैचरी, फीड मिल, कोल्ड चेन, जलाशय, आधुनिक मत्स्य पालन तकनीकों और बाजार अवसंरचना को मजबूत किया जा रहा है, ताकि मछुआरों और मत्स्य किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सके।
लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने बताया कि PMMSY के माध्यम से उत्तर प्रदेश सहित सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मत्स्य क्षेत्र के समग्र विकास के लिए बड़े पैमाने पर परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं।
₹20,750 करोड़ की योजना से मिल रहा मत्स्य क्षेत्र को नया आधार
सरकार के अनुसार PMMSY वर्ष 2020-21 से कुल ₹20,750 करोड़ की लागत से लागू की जा रही है। योजना का उद्देश्य केवल मछली उत्पादन बढ़ाना नहीं बल्कि Fish Value Chain को मजबूत करना, आधुनिक अवसंरचना विकसित करना, रोजगार सृजन करना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति देना है।
योजना के अंतर्गत निम्न क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है—
- Fish Ponds का विकास
- Reservoir Fisheries
- Hatchery Infrastructure
- Feed Mills
- Cold Chain Network
- Fish Processing
- Modern Aquaculture Systems
- Market Linkages
- Value Addition
इन पहलों से मत्स्य उत्पादन के साथ-साथ किसानों और मछुआरों की आय बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।
उत्तर प्रदेश को ₹1,294 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं की मंजूरी
सरकार ने बताया कि उत्तर प्रदेश के लिए PMMSY के अंतर्गत ₹1,294.32 करोड़ लागत की विभिन्न परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है। इनमें ₹412.30 करोड़ का केंद्रीय अंश शामिल है।
अब तक केंद्र सरकार द्वारा राज्य को ₹336.61 करोड़ जारी किए जा चुके हैं, जिनमें से ₹316.61 करोड़ की राशि विभिन्न परियोजनाओं पर खर्च की जा चुकी है।
राज्य सरकार की आवश्यकताओं के अनुसार यह योजना उत्तर प्रदेश के सभी जिलों, विशेष रूप से पूर्वांचल (Eastern Uttar Pradesh) में प्रभावी रूप से लागू की जा रही है।
पूर्वी उत्तर प्रदेश में मिलेगा आधुनिक Fisheries Infrastructure
सरकार ने बताया कि पूर्वी उत्तर प्रदेश में मत्स्य उत्पादन बढ़ाने के लिए कई आधुनिक परियोजनाओं पर कार्य किया जा रहा है।
इनमें प्रमुख हैं—
- Scientific Aquaculture को बढ़ावा
- Integrated Fish Farming
- Pond Development
- Hatchery Establishment
- Reservoir Development
- Feed Mill निर्माण
- Cold Chain Infrastructure
- Biofloc Technology
- Recirculatory Aquaculture System (RAS)
- Cage Culture
- आधुनिक मत्स्य पालन तकनीकों का विस्तार
इन तकनीकों से कम लागत में अधिक उत्पादन, बेहतर गुणवत्ता और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।
चंदौली में बना अत्याधुनिक Wholesale Fish Market
पूर्वी उत्तर प्रदेश में Fish Marketing को मजबूत बनाने के लिए चंदौली जिले में अत्याधुनिक Wholesale Fish Market का निर्माण किया गया है।
इस बाजार के शुरू होने से मछुआरों को बेहतर बाजार उपलब्ध होगा, परिवहन लागत कम होगी और उन्हें अपनी उपज का उचित मूल्य मिलने की संभावना बढ़ेगी।
इसके अलावा सरकार ने सिद्धार्थनगर जिले को Pangasius Fish Cluster के रूप में विकसित करने की पहचान की है। इससे पूर्वांचल में वैज्ञानिक मत्स्य पालन को नई गति मिलने की उम्मीद है।
आधुनिक तकनीकों से बढ़ेगा उत्पादन
सरकार का कहना है कि PMMSY के तहत आधुनिक तकनीकों को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है।
योजना के माध्यम से—
- Aquaculture Expansion
- Infrastructure Development
- Cold Chain Facilities
- Post-Harvest Management
- Value Addition
- Market Connectivity
जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ाया जा रहा है ताकि मछली उत्पादन और किसानों की आमदनी दोनों में वृद्धि हो सके।
देश में रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ा Fish Production
सरकार ने बताया कि PMMSY के प्रभाव से देश के मत्स्य क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार—
- Fish Production वर्ष 2019-20 के 141.64 लाख टन से बढ़कर 2024-25 में 197.97 लाख टन हो गया है।
- Fish Export वर्ष 2019-20 के ₹46,662.85 करोड़ से बढ़कर 2025-26 में ₹73,890 करोड़ तक पहुंच गया।
- Per Capita Fish Consumption लगभग 5-6 किलोग्राम से बढ़कर 12-13 किलोग्राम हो गई है।
- Aquaculture Productivity 3 टन प्रति हेक्टेयर से बढ़कर 4.7 टन प्रति हेक्टेयर हो गई है।
ये उपलब्धियां भारत के मत्स्य क्षेत्र में तेजी से हो रहे विकास को दर्शाती हैं।
सभी राज्यों को मिल रहा लाभ
सरकार द्वारा जारी राज्यवार आंकड़ों के अनुसार PMMSY के अंतर्गत लगभग सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बड़े पैमाने पर निवेश किया गया है। उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, केरल, तमिलनाडु, ओडिशा, कर्नाटक और गुजरात जैसे राज्यों में हजारों करोड़ रुपये की परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। इन परियोजनाओं का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर मत्स्य उत्पादन बढ़ाने, रोजगार सृजित करने और आधुनिक अवसंरचना विकसित करने के साथ-साथ निर्यात क्षमता को भी मजबूत करना है।
मछुआरों और किसानों की आय बढ़ाने पर सरकार का फोकस
सरकार का कहना है कि PMMSY केवल एक विकास योजना नहीं बल्कि Blue Economy को मजबूत करने की राष्ट्रीय रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। आधुनिक मत्स्य पालन तकनीकों, कोल्ड चेन, वैज्ञानिक उत्पादन, बेहतर बाजार संपर्क और मूल्य संवर्धन के माध्यम से मछुआरों तथा छोटे किसानों की आय बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
विशेष रूप से पूर्वी उत्तर प्रदेश में विकसित की जा रही नई परियोजनाओं से स्थानीय युवाओं को रोजगार, किसानों को अतिरिक्त आय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। सरकार का लक्ष्य भारत को वैश्विक मत्स्य उत्पादन और निर्यात के क्षेत्र में और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना है, ताकि मत्स्य पालन देश की कृषि अर्थव्यवस्था का एक मजबूत और टिकाऊ आधार बन सके।

