देश में बागवानी क्षेत्र को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार समेकित बागवानी विकास मिशन (MIDH) के माध्यम से व्यापक सहायता प्रदान कर रही है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि मिशन के तहत किसानों को संरक्षित खेती (Protected Cultivation), आधुनिक बागवानी तकनीकों, प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन तथा वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे उच्च गुणवत्ता वाले फल, सब्जियां और अन्य बागवानी फसलों का उत्पादन बढ़ाया जा सके।
लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर ने बताया कि एमआईडीएच योजना के अंतर्गत किसानों को राज्य बागवानी मिशन, तकनीकी सहायता समूह (TSG), प्रिसिजन फार्मिंग डेवलपमेंट सेंटर (PFDC), उत्कृष्टता केंद्र (Centre of Excellence), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), राज्य कृषि विश्वविद्यालयों (SAU) तथा कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) के माध्यम से संस्थागत और तकनीकी सहायता प्रदान की जा रही है।
आधुनिक खेती को बढ़ावा देने पर सरकार का जोर
सरकार का कहना है कि संरक्षित खेती की तकनीक अपनाने वाले किसानों को आधुनिक कृषि पद्धतियों का लाभ दिलाने के लिए कई स्तरों पर सहायता दी जा रही है। इसके तहत पॉलीहाउस, शेडनेट हाउस, वॉक-इन टनल, प्लास्टिक एवं नॉन-वॉवन क्लॉथ टनल जैसी संरचनाओं के निर्माण पर वित्तीय और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जाती है। इन संरचनाओं के माध्यम से किसान मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों में भी गुणवत्तापूर्ण उत्पादन कर सकते हैं तथा अधिक आय अर्जित कर सकते हैं।
61 उत्कृष्टता केंद्र बन चुके हैं
सरकार ने बताया कि भारत-इजरायल सहयोग, भारत-नीदरलैंड (डच) सहयोग तथा विभिन्न अनुसंधान संस्थानों के सहयोग से देशभर में 61 फसल-विशिष्ट उत्कृष्टता केंद्र (Centres of Excellence) स्थापित किए गए हैं। ये केंद्र किसानों के लिए प्रशिक्षण, प्रदर्शन तथा उच्च गुणवत्ता वाली पौध सामग्री उपलब्ध कराने का कार्य कर रहे हैं। साथ ही किसानों को आधुनिक बागवानी तकनीकों की जानकारी देकर उत्पादन क्षमता बढ़ाने में मदद कर रहे हैं।
किसानों के प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान
एमआईडीएच योजना के मानव संसाधन विकास (HRD) घटक के तहत किसानों, कृषि अधिकारियों और फील्ड कार्यकर्ताओं के लिए नियमित प्रशिक्षण, प्रदर्शन कार्यक्रम और क्षमता निर्माण गतिविधियां संचालित की जाती हैं। इसका उद्देश्य किसानों को नई तकनीकों से जोड़ना और उन्हें आधुनिक बागवानी अपनाने के लिए सक्षम बनाना है।
राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की भी महत्वपूर्ण भूमिका
राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) भी इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। बोर्ड स्वच्छ पौध कार्यक्रम (Clean Plant Programme), हॉर्टिकल्चर क्लस्टर डेवलपमेंट प्रोग्राम तथा वाणिज्यिक स्तर पर बागवानी परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए सहायता उपलब्ध कराता है। इन परियोजनाओं में पौध सामग्री, सिंचाई व्यवस्था, उर्वरक, कृषि मशीनीकरण और प्रसंस्करण जैसी सुविधाओं को भी शामिल किया गया है।
निजी संस्थाओं के लिए अलग प्रावधान नहीं
सरकार ने स्पष्ट किया कि एमआईडीएच के परिचालन दिशानिर्देशों में गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) या निजी क्षेत्र की संस्थाओं को सीधे शामिल करने का कोई विशेष प्रावधान नहीं है। हालांकि, मिशन के प्रबंधन एवं संचालन के लिए राज्य बागवानी मिशनों को उनके वार्षिक आवंटन का 2.5 प्रतिशत प्रशासनिक एवं प्रबंधन कार्यों के लिए उपलब्ध कराया जाता है।
किसानों को मिलेगा आधुनिक तकनीक का लाभ
सरकार का मानना है कि संरक्षित खेती, उच्च गुणवत्ता वाली पौध सामग्री, आधुनिक सिंचाई तकनीक, प्रशिक्षण और वैज्ञानिक सलाह के माध्यम से देश में बागवानी क्षेत्र को नई गति मिलेगी। इससे उत्पादन बढ़ेगा, फसल की गुणवत्ता में सुधार होगा और किसानों की आय में वृद्धि होगी। विशेष रूप से छोटे और मध्यम किसानों के लिए यह योजना आधुनिक कृषि अपनाने का एक महत्वपूर्ण अवसर बनकर उभर रही है।
सरकार ने दोहराया कि समेकित बागवानी विकास मिशन (MIDH) के माध्यम से बागवानी क्षेत्र को तकनीकी रूप से मजबूत, प्रतिस्पर्धी और टिकाऊ बनाने के प्रयास लगातार जारी रहेंगे, ताकि किसानों को बेहतर उत्पादन, बेहतर बाजार और अधिक आय सुनिश्चित की जा सके।

