किसानों को गुणवत्तापूर्ण उर्वरक और कीटनाशक उपलब्ध कराने तथा नकली एवं अवैध कृषि आदानों की बिक्री पर रोक लगाने के उद्देश्य से बिहार कृषि विभाग ने मोतिहारी जिले में विशेष जांच अभियान चलाया। इस अभियान के दौरान नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर 7 उर्वरक एवं कीटनाशक विक्रेताओं के विरुद्ध कार्रवाई की गई। विभाग ने स्पष्ट किया है कि कृषि आदानों की गुणवत्ता और उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए जिलेभर में निरीक्षण अभियान आगे भी जारी रहेगा। अधिकारियों ने किसानों से अपील की है कि वे केवल लाइसेंसधारी और अधिकृत विक्रेताओं से ही उर्वरक एवं कीटनाशक खरीदें तथा खरीदारी के समय पक्का बिल अवश्य लें।
मोतिहारी में जांच अभियान में सामने आई उर्वरक गड़बड़ी
कृषि विभाग की टीम ने मोतिहारी जिले के विभिन्न प्रखंडों में उर्वरक और कीटनाशक दुकानों का औचक निरीक्षण किया। जांच के दौरान कई दुकानों पर आवश्यक दस्तावेजों की कमी, स्टॉक रजिस्टर में गड़बड़ी, मूल्य सूची प्रदर्शित न करना तथा लाइसेंस संबंधी नियमों का पालन न करने जैसी अनियमितताएं सामने आईं।
अधिकारियों ने बताया कि जिन दुकानों में नियमों का उल्लंघन पाया गया, उनके खिलाफ उर्वरक नियंत्रण आदेश (FCO) और कीटनाशक अधिनियम के तहत कार्रवाई शुरू की गई है। कुछ मामलों में कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं, जबकि गंभीर मामलों में लाइसेंस निलंबन या रद्द करने की प्रक्रिया भी अपनाई जा सकती है।
मोतीहारी के किसानों के हितों की सुरक्षा प्राथमिकता
कृषि विभाग का कहना है कि नकली, मिलावटी या मानक से कम गुणवत्ता वाले उर्वरक एवं कीटनाशकों की बिक्री किसानों के लिए आर्थिक नुकसान के साथ-साथ फसलों की उत्पादकता पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालती है। ऐसे उत्पादों के उपयोग से फसल रोगों का नियंत्रण नहीं हो पाता और मिट्टी की उर्वरता भी प्रभावित हो सकती है।
इसी कारण विभाग समय-समय पर निरीक्षण अभियान चलाकर यह सुनिश्चित करता है कि किसानों को प्रमाणित और गुणवत्तापूर्ण कृषि आदान उपलब्ध हों।
लाइसेंसधारी विक्रेताओं से ही उर्वरक खरीदने की सलाह
जिला कृषि अधिकारियों ने किसानों से आग्रह किया है कि वे केवल पंजीकृत एवं लाइसेंसधारी विक्रेताओं से ही उर्वरक और कीटनाशक खरीदें। किसी भी अनधिकृत विक्रेता से खरीदे गए उत्पाद की गुणवत्ता की गारंटी नहीं होती और शिकायत की स्थिति में कार्रवाई करना भी कठिन हो जाता है।
अधिकारियों ने किसानों को निम्नलिखित सावधानियां बरतने की सलाह दी—
- केवल लाइसेंसधारी दुकान से ही उर्वरक और कीटनाशक खरीदें।
- खरीद के समय पक्का बिल या रसीद अवश्य लें।
- पैकेट पर बैच नंबर, निर्माण तिथि, समाप्ति तिथि और निर्माता का नाम जांचें।
- सीलबंद और मानक पैकिंग वाले उत्पाद ही खरीदें।
- संदिग्ध गुणवत्ता वाले उत्पाद की सूचना तुरंत कृषि विभाग को दें।
खरीफ सीजन में बढ़ी निगरानी
खरीफ मौसम में धान, मक्का, दलहन और तिलहन जैसी फसलों की बुवाई के कारण उर्वरकों और कीटनाशकों की मांग बढ़ जाती है। इसी समय नकली या अवैध उत्पादों की बिक्री की आशंका भी अधिक रहती है। इसे देखते हुए बिहार कृषि विभाग ने निरीक्षण अभियान तेज कर दिया है।
राज्य सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को समय पर पर्याप्त मात्रा में गुणवत्तापूर्ण कृषि आदान उपलब्ध हों और किसी प्रकार की कालाबाजारी या जमाखोरी न हो।
गुणवत्ता जांच के लिए नमूने भी लिए जा रहे
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों द्वारा विभिन्न दुकानों से उर्वरकों और कीटनाशकों के नमूने भी लिए जा रहे हैं। इन नमूनों को अधिकृत प्रयोगशालाओं में जांच के लिए भेजा जाएगा। यदि किसी उत्पाद की गुणवत्ता निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाई जाती है, तो संबंधित निर्माता और विक्रेता के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
कृषि विभाग की सख्त चेतावनी
विभाग ने सभी उर्वरक एवं कीटनाशक विक्रेताओं को निर्देश दिया है कि वे स्टॉक रजिस्टर नियमित रूप से अपडेट रखें, निर्धारित मूल्य सूची प्रदर्शित करें और लाइसेंस संबंधी सभी नियमों का पालन करें। नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ भविष्य में भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
किसानों से सहयोग की अपील
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि यदि किसी दुकान पर अधिक कीमत वसूली जा रही हो, नकली उत्पाद बेचे जा रहे हों या बिना बिल के बिक्री की जा रही हो, तो इसकी सूचना तुरंत जिला कृषि कार्यालय या संबंधित अधिकारियों को दें। किसानों की शिकायतों के आधार पर भी विशेष जांच अभियान चलाए जाएंगे।
निष्कर्ष
मोतिहारी में 7 उर्वरक एवं कीटनाशक विक्रेताओं पर की गई कार्रवाई यह दर्शाती है कि बिहार सरकार किसानों को गुणवत्तापूर्ण कृषि आदान उपलब्ध कराने के लिए गंभीर है। निरीक्षण अभियान का उद्देश्य केवल नियमों का पालन कराना नहीं, बल्कि किसानों को नकली और घटिया उत्पादों से बचाना भी है। यदि किसान लाइसेंसधारी विक्रेताओं से खरीदारी करें, बिल सुरक्षित रखें और किसी भी गड़बड़ी की सूचना समय पर दें, तो कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता और गुणवत्ता दोनों को मजबूत किया जा सकता है।
