देश में मधुमक्खी पालन को वैज्ञानिक और संगठित रूप देने के साथ-साथ शहद उत्पादन बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन एवं शहद मिशन (NBHM) लागू कर रही है। इस मिशन के तहत शहद की गुणवत्ता जांच, प्रसंस्करण, भंडारण, ब्रांडिंग और पैकेजिंग से लेकर गुणवत्तापूर्ण रानी मधुमक्खियों के उत्पादन तक कई स्तरों पर काम किया जा रहा है।
कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने लोकसभा में श्री बाबू राम निषाद, डॉ. अनिल सुखदेवराव बोंडे सहित अन्य सदस्यों के सवाल के लिखित जवाब में यह जानकारी दी।
वैज्ञानिक मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देना मिशन का उद्देश्य
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड के माध्यम से केंद्रीय क्षेत्र योजना राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन एवं शहद मिशन को लागू कर रहा है।
मिशन का प्रमुख उद्देश्य देश में मधुमक्खी पालन उद्योग का समग्र विकास करना और वैज्ञानिक मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देना है। इसके साथ ही शहद और अन्य मधुमक्खी उत्पादों का उत्पादन बढ़ाने, रोजगार एवं आय के नए अवसर पैदा करने और कृषि तथा गैर-कृषि परिवारों को आजीविका सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।
सरकार मधुमक्खी पालन के जरिए महिलाओं के सशक्तिकरण को भी बढ़ावा दे रही है। इसके अलावा सामूहिक दृष्टिकोण के माध्यम से संस्थागत ढांचा विकसित कर मधुमक्खी पालकों को मजबूत करने तथा कृषि और बागवानी उत्पादन बढ़ाने का भी लक्ष्य रखा गया है।
मधुमक्खी पालकों को परियोजना आधारित वित्तीय सहायता
राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन एवं शहद मिशन के तहत विभिन्न गतिविधियों के लिए पात्र कार्यान्वयन एजेंसियों को परियोजना आधारित वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
इन परियोजनाओं को केंद्रीय और राज्य नोडल एजेंसियों के माध्यम से आगे बढ़ाया जाता है। सहायता के दायरे में एकीकृत मधुमक्खी पालन विकास केंद्रों की स्थापना, शहद परीक्षण प्रयोगशालाएं, मधुमक्खी रोग निदान प्रयोगशालाएं और गुणवत्तापूर्ण न्यूक्लियस स्टॉक विकास केंद्र शामिल हैं।
इसके साथ ही मधुमक्खी पालकों के लिए क्षमता निर्माण, नई तकनीकों का प्रदर्शन और मधुमक्खी पालन के माध्यम से महिलाओं के सशक्तिकरण जैसी गतिविधियों को भी समर्थन दिया जा रहा है।
शहद की गुणवत्ता और ब्रांडिंग पर विशेष जोर
मिशन केवल शहद उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि शहद की गुणवत्ता, प्रसंस्करण, विपणन और ब्रांडिंग को भी मजबूत करने पर जोर देता है।
इसके तहत शहद में मिलावट की जांच और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए देश में अब तक 7 विश्वस्तरीय शहद परीक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित की जा चुकी हैं।
इसके अलावा 66 मिनी शहद परीक्षण प्रयोगशालाएं भी स्थापित की गई हैं। इससे स्थानीय स्तर पर शहद की गुणवत्ता जांच की सुविधा बढ़ी है और मधुमक्खी पालकों तथा शहद उत्पादकों को बेहतर गुणवत्ता नियंत्रण में मदद मिल रही है।
83 शहद प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित
सरकार के अनुसार, मिशन के तहत अब तक 83 शहद प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना की जा चुकी है।
इसके अलावा 90 शहद संग्रहण, ब्रांडिंग एवं पैकेजिंग इकाइयां भी स्थापित की गई हैं। इन सुविधाओं का उद्देश्य शहद के बेहतर संग्रहण, प्रसंस्करण और बाजार तक पहुंच को मजबूत करना है।
बेहतर भंडारण और पैकेजिंग व्यवस्था से शहद की गुणवत्ता बनाए रखने के साथ-साथ उत्पाद को बाजार में बेहतर तरीके से प्रस्तुत करने में भी मदद मिलती है।
81 न्यूक्लियस स्टॉक विकास केंद्रों को सहायता
वैज्ञानिक मधुमक्खी पालन के लिए स्वस्थ और गुणवत्तापूर्ण मधुमक्खी कॉलोनियां बेहद महत्वपूर्ण हैं। इसे ध्यान में रखते हुए सरकार ने गुणवत्तापूर्ण न्यूक्लियस स्टॉक विकास के लिए 81 केंद्रों को सहायता प्रदान की है।
इन केंद्रों का उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण रानी मधुमक्खियों का उत्पादन और मधुमक्खी कॉलोनियों का विस्तार करना है। इससे मधुमक्खी पालकों को बेहतर गुणवत्ता वाली मधुमक्खियों की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
11 वर्षों में शहद उत्पादन लगभग दोगुना
सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश में शहद उत्पादन में पिछले एक दशक से अधिक समय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
बागवानी फसल सांख्यिकी के द्वितीय अग्रिम अनुमान, 2025-26 के अनुसार, भारत में शहद का उत्पादन वर्ष 2014-15 में 80,530 मीट्रिक टन था, जो बढ़कर वर्ष 2025-26 में 1,51,690 मीट्रिक टन हो गया है।
यानी करीब 11 वर्षों की अवधि में शहद उत्पादन में 71,160 मीट्रिक टन की बढ़ोतरी हुई है। उत्पादन में यह वृद्धि देश में मधुमक्खी पालन क्षेत्र के विस्तार और वैज्ञानिक तकनीकों के बढ़ते इस्तेमाल को दर्शाती है।
मधुमक्खी पालन से कृषि उत्पादकता बढ़ाने पर भी जोर
मधुमक्खियां केवल शहद उत्पादन का साधन नहीं हैं, बल्कि फसलों के परागण (Pollination) में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसलिए वैज्ञानिक मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने से शहद उत्पादन के साथ कृषि और बागवानी फसलों की उत्पादकता में भी लाभ मिलने की संभावना है।
राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन एवं शहद मिशन के तहत सरकार राज्य सरकारों, कार्यान्वयन एजेंसियों और विभिन्न हितधारक संगठनों के प्रयासों को परियोजना आधारित सहायता प्रदान कर रही है।
इसका उद्देश्य मधुमक्खी पालन को अधिक वैज्ञानिक, संगठित और लाभकारी बनाना है, ताकि किसानों और मधुमक्खी पालकों के लिए आय और रोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकें।
शहद उत्पादन से लेकर बाजार तक पूरी वैल्यू चेन मजबूत करने की कोशिश
राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन एवं शहद मिशन के तहत सरकार उत्पादन के साथ-साथ पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करने पर ध्यान दे रही है। इसमें वैज्ञानिक मधुमक्खी पालन, गुणवत्तापूर्ण मधुमक्खी कॉलोनियां, रोग निदान, शहद की गुणवत्ता जांच, प्रसंस्करण, भंडारण, ब्रांडिंग और पैकेजिंग को शामिल किया गया है।
इसके अलावा विपणन, मूल्य संवर्धन तथा अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों को भी सहायता दी जा रही है। इससे देश में मधुमक्खी पालन को एक संगठित कृषि-आधारित व्यवसाय के रूप में विकसित करने और किसानों की आय के अतिरिक्त स्रोत तैयार करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
