खाद की बोरी खरीदते समय किसानों की नजर अक्सर उस पर लिखे 46-0-0, 18-46-0 या 10-26-26 जैसे नंबरों पर पड़ती है। लेकिन बहुत से किसान यह नहीं जानते कि इन तीन अंकों का वास्तविक मतलब क्या होता है। क्या ये खाद की ताकत बताते हैं या इसमें मौजूद पोषक तत्वों की मात्रा?
दरअसल, खाद की बोरी पर लिखे ये नंबर उर्वरक में मौजूद प्रमुख पोषक तत्वों की मात्रा को दर्शाते हैं। इसे समझना इसलिए जरूरी है क्योंकि हर फसल और मिट्टी को एक जैसे पोषक तत्वों की जरूरत नहीं होती।
NPK का मतलब क्या है?
NPK तीन प्रमुख पोषक तत्वों के शुरुआती अक्षर हैं।
N यानी Nitrogen यानी नाइट्रोजन। यह पौधे की हरी पत्तियों, तने और वनस्पतिक वृद्धि के लिए जरूरी है।
P यानी Phosphorus यानी फास्फोरस। यह जड़ों के विकास, फूल आने और पौधे के ऊर्जा चक्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
K यानी Potassium यानी पोटाश। यह पौधे की मजबूती, पानी के संतुलन और कई तरह के तनावों से निपटने में मदद करता है।
खाद की बोरी पर लिखे तीन नंबर इसी क्रम में N-P-K की मात्रा बताते हैं।
46-0-0 का क्या मतलब है?
46-0-0 का मतलब है कि इस उर्वरक में 46 प्रतिशत नाइट्रोजन है और फास्फोरस तथा पोटाश नहीं है।
यही वजह है कि 46-0-0 को नाइट्रोजन आधारित उर्वरक के रूप में समझा जाता है। यूरिया इसका सबसे आम उदाहरण है।
अगर किसी बोरी में 50 किलो यूरिया है, तो उसमें लगभग 23 किलो नाइट्रोजन होता है। बाकी हिस्सा अन्य रूप में मौजूद होता है।
नाइट्रोजन की कमी वाली फसल में यूरिया उपयोगी हो सकता है, लेकिन जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल नुकसान भी पहुंचा सकता है।
18-46-0 का क्या मतलब है?
अब बात करते हैं 18-46-0 की।
इसमें 18 प्रतिशत नाइट्रोजन और 46 प्रतिशत फास्फोरस होता है। इसमें पोटाश नहीं होता।
DAP यानी डाय-अमोनियम फॉस्फेट को आमतौर पर 18-46-0 ग्रेड के रूप में जाना जाता है।
इसका मतलब यह नहीं है कि 50 किलो की बोरी में 18 किलो नाइट्रोजन और 46 किलो फास्फोरस होता है। ये प्रतिशत भार के हिसाब से पोषक तत्वों की मात्रा को दर्शाते हैं।
यहां एक महत्वपूर्ण बात है कि उर्वरक के लेबल पर फास्फोरस को आम तौर पर P₂O₅ और पोटाश को K₂O के रूप में व्यक्त किया जाता है। इसलिए बोरी पर लिखे नंबरों को सीधे शुद्ध तत्व की मात्रा नहीं समझना चाहिए।
10-26-26 का क्या मतलब है?
10-26-26 का मतलब है कि उर्वरक में 10 प्रतिशत नाइट्रोजन, 26 प्रतिशत फास्फोरस और 26 प्रतिशत पोटाश है।
यानी यह तीन प्रमुख पोषक तत्वों वाला संतुलित ग्रेड है।
अगर 50 किलो की बोरी में 10-26-26 लिखा है, तो लेबल के अनुसार उसमें 5 किलो नाइट्रोजन, 13 किलो P₂O₅ और 13 किलो K₂O होगा।
इस तरह किसान यह समझ सकता है कि खाद के एक बैग से कौन-कौन से पोषक तत्व मिल रहे हैं।
क्या ज्यादा नंबर वाली खाद ज्यादा अच्छी होती है?
जरूरी नहीं।
किसी खाद पर नंबर ज्यादा लिखा होने का मतलब यह नहीं कि वह हर फसल के लिए बेहतर है। असली सवाल यह है कि आपकी मिट्टी और फसल को किस पोषक तत्व की कितनी जरूरत है।
अगर खेत में नाइट्रोजन पर्याप्त है, लेकिन फास्फोरस की कमी है, तो केवल ज्यादा नाइट्रोजन वाली खाद डालने से समस्या का समाधान नहीं होगा।
इसी तरह अगर मिट्टी में पोटाश की जरूरत है, तो केवल यूरिया या DAP पर निर्भर रहना सही रणनीति नहीं हो सकती।
मिट्टी की जांच क्यों जरूरी है?
खाद का सही चुनाव करने के लिए मिट्टी परीक्षण सबसे महत्वपूर्ण आधारों में से एक है।
मिट्टी की जांच से यह पता लगाने में मदद मिलती है कि खेत में कौन से पोषक तत्व कम या पर्याप्त मात्रा में हैं। इसके आधार पर किसान उर्वरक का सही ग्रेड और मात्रा चुन सकता है।
इससे खाद की लागत कम करने और पोषक तत्वों के संतुलित इस्तेमाल में भी मदद मिल सकती है।
खाद खरीदते समय बोरी पर क्या देखें?
खाद खरीदते समय केवल कीमत या ब्रांड देखकर फैसला न करें। बोरी पर उर्वरक का ग्रेड, पोषक तत्वों की मात्रा, वजन, निर्माता और अन्य जरूरी विवरण जरूर देखें।
किसान को अधिकृत विक्रेता से ही खाद खरीदनी चाहिए और खरीद का बिल जरूर लेना चाहिए।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि खाद का इस्तेमाल फसल की जरूरत, मिट्टी की स्थिति और कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार किया जाए।
आखिर में आसान भाषा में याद रखें—46-0-0 का मतलब मुख्य रूप से नाइट्रोजन, 18-46-0 में नाइट्रोजन और फास्फोरस, जबकि 10-26-26 में नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश तीनों की मौजूदगी है। इन नंबरों को समझकर किसान खाद खरीदने और उसके सही इस्तेमाल का बेहतर फैसला ले सकता है।

