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Home कृषि समाचार

Chana Farming: कम पानी में बढ़िया कमाई का मौका! जानें चना की बुवाई से लेकर कीट की दवा और सरकारी सब्सिडी तक पूरी जानकारी

Chana Farming: An opportunity for excellent earnings with low water usage! Get complete information—from sowing and pest control to government subsidies.

Fiza by Fiza
August 8, 2026
in कृषि समाचार
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Chana Farming

Chana Farming

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भारत में चना रबी सीजन की सबसे महत्वपूर्ण दलहनी फसलों में से एक है। देश के लाखों किसान हर साल इसकी खेती करते हैं। कम पानी में अच्छी फसल देने की क्षमता और बाजार में लगातार मांग के कारण Chana Farming किसानों के लिए कमाई का अच्छा विकल्प बन सकती है। चने से दाल, बेसन, भुना चना और कई तरह के खाद्य उत्पाद बनाए जाते हैं।

अगर किसान सही मिट्टी का चुनाव करें, समय पर बुवाई करें और फसल को कीट तथा रोगों से सुरक्षित रखें तो Chickpea Farming से बेहतर उत्पादन हासिल किया जा सकता है। हालांकि चना की उपज मौसम, किस्म, मिट्टी और खेती की तकनीक पर निर्भर करती है।

चना की खेती के लिए कौन सी मिट्टी सबसे अच्छी है?

Gram Cultivation में खेत का चुनाव बेहद महत्वपूर्ण है। चना ऐसी मिट्टी में अच्छा उत्पादन देता है जहां पानी की निकासी सही हो। दोमट और मध्यम प्रकार की मिट्टी इसकी खेती के लिए अच्छी मानी जाती है। खेत में ज्यादा समय तक पानी जमा रहने से चने की जड़ों को नुकसान हो सकता है और कई रोगों का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए भारी जलभराव वाली जमीन पर चना लगाने से बचना चाहिए।

किसानों को Chana Farming शुरू करने से पहले मिट्टी की जांच भी करानी चाहिए। Soil Test से पता चलता है कि खेत में कौन से पोषक तत्वों की कमी है। इसकी मदद से किसान जरूरत के हिसाब से खाद और उर्वरक का इस्तेमाल कर सकते हैं।

भारत के किन राज्यों में होती है चना की खेती?

भारत दुनिया के प्रमुख चना उत्पादक देशों में शामिल है। देश के कई राज्यों में बड़े स्तर पर Chickpea Farming की जाती है। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, गुजरात और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में चना महत्वपूर्ण रबी फसल है। इसके अलावा बिहार, हरियाणा, पंजाब और देश के दूसरे हिस्सों में भी किसानों द्वारा चना उगाया जाता है। हालांकि हर राज्य की जलवायु और मिट्टी एक जैसी नहीं होती। इसलिए Gram Cultivation के लिए किसानों को अपने जिले के अनुसार उचित किस्म का चुनाव करना चाहिए।

चना की बुवाई का सही समय क्या है?

चना मुख्य रूप से रबी सीजन में बोया जाता है। सामान्य परिस्थितियों में अक्टूबर से नवंबर के बीच चना की बुवाई करना बेहतर माना जाता है। सही समय पर की गई बुवाई से पौधों को अनुकूल तापमान मिलता है और फसल का विकास बेहतर तरीके से होता है। बहुत देर से बुवाई करने पर फसल के दाना बनने के समय तापमान बढ़ सकता है, जिससे उत्पादन प्रभावित होने का खतरा रहता है।

हालांकि Chana Farming के लिए बुवाई की कोई एक तारीख पूरे देश में लागू नहीं होती। किसानों को अपने क्षेत्र के मौसम, सिंचाई की उपलब्धता, मिट्टी में नमी और चुनी गई किस्म को ध्यान में रखते हुए बुवाई करनी चाहिए।

स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र यानी KVK या कृषि विभाग से जिले के अनुसार सही बुवाई समय की जानकारी लेना बेहतर रहता है।

चना की बुवाई कैसे करें?

Chickpea Farming में अच्छी पैदावार के लिए अच्छी गुणवत्ता वाला प्रमाणित बीज इस्तेमाल करना जरूरी है। खराब या रोगग्रस्त बीज का इस्तेमाल करने से अंकुरण कमजोर हो सकता है और बीमारी का खतरा बढ़ सकता है। चने की बुवाई कतारों में करना बेहतर माना जाता है। सामान्य तौर पर कतारों के बीच उचित दूरी रखी जाती है, ताकि पौधों को बढ़ने के लिए पर्याप्त जगह मिले और किसान खेत में आसानी से दूसरे कृषि कार्य कर सकें। बीज की मात्रा चने की किस्म और दाने के आकार के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। देसी चना और काबुली चना के लिए एक ही बीज दर उपयुक्त नहीं होती। इसलिए Gram Cultivation में बीज खरीदते समय पैकेट पर दिए गए निर्देश देखें और स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह लें।

चना की बुवाई से पहले बीज उपचार क्यों जरूरी है?

चना की फसल में कई रोग बीज और मिट्टी के माध्यम से फैल सकते हैं। इनमें उकठा रोग यानी विल्ट और जड़ से संबंधित रोग किसानों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए Chana Farming में बुवाई से पहले उचित बीज उपचार करना फायदेमंद माना जाता है। जैविक बीज उपचार में राइजोबियम कल्चर और जरूरत के अनुसार ट्राइकोडर्मा जैसे जैव एजेंट का उपयोग कृषि विशेषज्ञ की सलाह पर किया जा सकता है।

बीज उपचार के लिए किसी भी रासायनिक या जैविक उत्पाद की मात्रा अपनी तरफ से तय नहीं करें। स्थानीय कृषि विभाग द्वारा वर्तमान में अनुशंसित उत्पाद और उसके लेबल पर दिए गए निर्देशों का पालन करें।

चना की खेती में खाद और उर्वरक

कई किसान यह मान लेते हैं कि दलहनी फसल होने के कारण चने को खाद या पोषक तत्वों की जरूरत नहीं होती। यह सही नहीं है। Chickpea Farming में पौधों के बेहतर विकास के लिए मिट्टी में पर्याप्त पोषक तत्व होना जरूरी है। खेत में कितना नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश या दूसरे पोषक तत्व डालने हैं, इसका सही निर्णय मिट्टी जांच के आधार पर करना चाहिए।

संतुलित खाद और उर्वरक के इस्तेमाल से खेती की लागत को नियंत्रित करने में भी मदद मिलती है। बिना जरूरत अधिक मात्रा में उर्वरक डालने से खर्च बढ़ सकता है और फसल पर नकारात्मक असर भी पड़ सकता है। इसलिए Gram Cultivation में Soil Health Card या मिट्टी जांच रिपोर्ट को ध्यान में रखना फायदेमंद है।

चना की फसल में कितनी सिंचाई करें?

चना कम पानी की आवश्यकता वाली फसलों में माना जाता है। कई इलाकों में किसान मिट्टी में उपलब्ध नमी के आधार पर भी इसकी खेती करते हैं।इसका मतलब यह नहीं है कि पौधे को कभी पानी की आवश्यकता नहीं होगी। सिंचित क्षेत्र में जरूरत के अनुसार पानी देना पड़ सकता है। Chana Farming में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि खेत में पानी जमा नहीं होना चाहिए। अधिक सिंचाई से जड़ संबंधी रोगों का खतरा बढ़ सकता है। सिंचाई करने से पहले मिट्टी की नमी जरूर जांचें। मौसम, मिट्टी और फसल की स्थिति देखकर पानी दें।

चना में कौन सा कीट सबसे ज्यादा नुकसान करता है?

चना की फसल में फली छेदक कीट, जिसे Helicoverpa armigera कहा जाता है, प्रमुख हानिकारक कीटों में शामिल है।इसकी इल्ली फलियों को नुकसान पहुंचाती है। अगर समय पर नियंत्रण नहीं किया जाए तो इसका सीधा असर चने के उत्पादन पर पड़ सकता है। इसलिए Chickpea Farming में फूल और फलियां बनने की अवस्था में खेत की लगातार निगरानी करना जरूरी है। किसान फेरोमोन ट्रैप की मदद से भी फली छेदक की स्थिति की निगरानी कर सकते हैं। इससे शुरुआती स्तर पर कीट की मौजूदगी का पता लगाने में मदद मिल सकती है।

चना में कीट लगने पर कौन सी दवा इस्तेमाल करें?

फली छेदक दिखाई देते ही बिना जांच के कोई भी कीटनाशक छिड़कना सही नहीं है। पहले यह पता लगाना जरूरी है कि खेत में कीट का प्रकोप कितना है। फली छेदक के प्रबंधन में कृषि सिफारिशों में Emamectin Benzoate 5% SG जैसे पंजीकृत कीटनाशकों का इस्तेमाल परिस्थितियों के अनुसार किया जाता रहा है। लेकिन किसान ध्यान रखें कि कीटनाशकों का पंजीकरण और सरकारी सिफारिश समय के साथ बदल सकती है।

इसलिए Gram Cultivation में किसी भी दवा का छिड़काव करने से पहले नजदीकी कृषि अधिकारी या KVK से यह जरूर जांच लें कि वह दवा चना की फसल और संबंधित कीट के लिए वर्तमान में पंजीकृत है या नहीं। दवा की मात्रा, पानी की मात्रा, छिड़काव का समय और कटाई से पहले प्रतीक्षा अवधि के लिए उत्पाद के लेबल का पालन करना जरूरी है। एक ही कीटनाशक का लगातार इस्तेमाल करने से भी बचना चाहिए।

चना की फसल में कौन से रोग लगते हैं?

चना में उकठा रोग यानी Fusarium Wilt किसानों के लिए एक बड़ी समस्या हो सकता है। इसके अलावा जड़ सड़न जैसी बीमारियां भी फसल को नुकसान पहुंचा सकती हैं। Chana Farming में बीमारी से बचाव के लिए स्वस्थ और प्रमाणित बीज का इस्तेमाल करें। जरूरत के अनुसार बीज उपचार करें और खेत में पानी जमा न होने दें। रोग प्रतिरोधी किस्मों को प्राथमिकता देना भी फायदेमंद हो सकता है। यदि पौधों में बीमारी के लक्षण दिखाई दें तो बिना पहचान के Fungicide का छिड़काव न करें।पहले कृषि विशेषज्ञ से रोग की सही पहचान कराएं और उसके बाद उपचार करें।

चना की उन्नत किस्म कैसे चुनें?

चना की कई देसी और काबुली किस्में उपलब्ध हैं। लेकिन किसी दूसरे राज्य में अच्छा प्रदर्शन करने वाली किस्म आपके जिले के लिए भी सही हो, यह जरूरी नहीं है।Chickpea Farming में किस्म चुनते समय क्षेत्र की जलवायु, मिट्टी, सिंचाई सुविधा, बुवाई का समय और बाजार की मांग को ध्यान में रखना चाहिए।

उदाहरण के तौर पर ICAR-IARI द्वारा विकसित पूसा JG 16 को सूखा सहन करने वाली चना किस्म के रूप में विकसित किया गया है और इसे देश के कुछ मध्य क्षेत्रीय इलाकों के लिए उपयोगी बताया गया है।

इसका मतलब यह नहीं है कि किसान पूरे देश में केवल इसी किस्म को लगाएं। Gram Cultivation में अपने जिले के लिए अधिसूचित या कृषि विश्वविद्यालय द्वारा अनुशंसित किस्म लेना ज्यादा सुरक्षित विकल्प है।

क्या चना की खेती पर सरकारी सब्सिडी मिलती है?

चना दलहनी फसल है और सरकार अलग-अलग योजनाओं के माध्यम से दलहन उत्पादन बढ़ाने पर काम करती है। इसके तहत किसानों को कुछ राज्यों में बीज, कृषि उपकरण, फसल प्रदर्शन, जैविक कीट नियंत्रण या अन्य कृषि इनपुट पर आर्थिक सहायता मिल सकती है।

लेकिन Chana Farming Subsidy की राशि पूरे देश में एक समान नहीं होती। केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के नियम अलग-अलग हो सकते हैं और इनमें समय-समय पर बदलाव भी होता रहता है। इसलिए किसान अपने राज्य के कृषि विभाग की आधिकारिक वेबसाइट, जिला कृषि कार्यालय या कृषि विज्ञान केंद्र से वर्तमान योजना की जानकारी प्राप्त करें।

योजनाओं में आवेदन करने के लिए आधार कार्ड, बैंक खाता, भूमि से जुड़े दस्तावेज और किसान पंजीकरण जैसी जानकारी मांगी जा सकती है। जरूरी दस्तावेज योजना और राज्य के अनुसार अलग हो सकते हैं।

चना की बेहतर पैदावार के लिए किसान इन बातों का रखें ध्यान

Chickpea Farming से अच्छा उत्पादन लेने के लिए केवल बुवाई करना पर्याप्त नहीं है। किसान को पूरे फसल चक्र के दौरान खेत की निगरानी करनी चाहिए। प्रमाणित बीज का इस्तेमाल करें, अपने क्षेत्र के अनुसार सही समय पर बुवाई करें, बीज उपचार करें और खेत में जल निकासी की व्यवस्था अच्छी रखें। मिट्टी जांच के आधार पर संतुलित खाद और उर्वरक दें। फूल और फलियां बनने के दौरान फली छेदक पर विशेष नजर रखें। आवश्यकता होने पर Integrated Pest Management यानी IPM तकनीक अपनाएं। किसी भी बीमारी या कीट के लिए बिना पहचान किए दवाओं का मिश्रण बनाकर छिड़काव न करें। इससे खेती की लागत बढ़ने के साथ फसल को नुकसान होने का खतरा भी रहता है।

किसानों के लिए जरूरी सलाह

भारत में Chana Farming, Chickpea Farming और Gram Cultivation रबी सीजन की महत्वपूर्ण खेती गतिविधियों में शामिल हैं। सही समय पर बुवाई, बेहतर बीज, उचित जल निकासी और समय पर कीट-रोग प्रबंधन से किसान चना उत्पादन को बेहतर बना सकते हैं।

सामान्य तौर पर अक्टूबर से नवंबर के बीच चना बोया जाता है, लेकिन स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार समय में अंतर हो सकता है। किसानों को अपने जिले के कृषि विभाग की सलाह को प्राथमिकता देनी चाहिए।

फली छेदक चने के प्रमुख कीटों में शामिल है। इसके लिए फेरोमोन ट्रैप और अन्य IPM उपायों के साथ जरूरत पड़ने पर पंजीकृत कीटनाशक का इस्तेमाल किया जा सकता है।

सरकारी योजनाओं के तहत दलहन उत्पादक किसानों को अलग-अलग प्रकार की सहायता भी मिल सकती है। इसके लिए किसान अपने राज्य की वर्तमान योजनाओं की जानकारी जरूर जांचें। सही योजना, समय पर बुवाई और वैज्ञानिक तरीके अपनाकर किसान चने की खेती में होने वाले नुकसान को कम कर बेहतर उत्पादन हासिल कर सकते हैं।

FAQ: चना की खेती से जुड़े प्रमुख सवाल

चना की बुवाई कब होती है?
सामान्य तौर पर चना की बुवाई अक्टूबर से नवंबर के बीच की जाती है। क्षेत्र और मौसम के अनुसार सही समय अलग हो सकता है।

चना की खेती के लिए कौन सी मिट्टी अच्छी है?
अच्छी जल निकासी वाली दोमट से मध्यम मिट्टी चना उत्पादन के लिए बेहतर मानी जाती है।

चना में सबसे खतरनाक कीट कौन सा है?
फली छेदक यानी Helicoverpa armigera चने के प्रमुख हानिकारक कीटों में शामिल है।

चना के फली छेदक के लिए कौन सी दवा इस्तेमाल करें?
कृषि सिफारिशों में Emamectin Benzoate 5% SG जैसे पंजीकृत उत्पादों का इस्तेमाल किया जाता रहा है। लेकिन किसान वर्तमान स्थानीय सिफारिश की पुष्टि करने के बाद ही किसी कीटनाशक का इस्तेमाल करें।

क्या Chana Farming पर सब्सिडी मिलती है?
केंद्र और राज्य सरकार की अलग-अलग कृषि योजनाओं के तहत दलहन किसानों को बीज, उपकरण और अन्य कृषि इनपुट पर सहायता मिल सकती है। राशि और पात्रता राज्य तथा योजना के अनुसार अलग होती है।

चना किस मौसम की फसल है?
चना मुख्य रूप से रबी सीजन की दलहनी फसल है।

 

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