किसान उत्पादक संगठनों (Farmer Producer Organizations-FPOs) को अधिक प्रभावी, आर्थिक रूप से मजबूत और टिकाऊ बनाने की दिशा में तमिलनाडु में एक महत्वपूर्ण मंथन सत्र आयोजित किया गया। ICAR-National Research Centre for Banana (ICAR-NRCB), Tiruchirappalli की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में राज्य के विभिन्न हिस्सों से आए 62 FPOs के 135 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
कार्यक्रम का उद्देश्य तमिलनाडु में FPOs के Performance, Sustainability, Challenges and Future Prospects का आकलन करना और जमीनी स्तर पर सामने आ रही समस्याओं के व्यावहारिक समाधान तलाशना था।
यह पहल केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा गठित सात सदस्यीय समिति के माध्यम से की जा रही समीक्षा का हिस्सा है। समिति ने तमिलनाडु के FPOs के प्रतिनिधियों के साथ सीधे संवाद कर उनकी कार्यप्रणाली, आर्थिक स्थिति, बाजार संबंधों, संस्थागत चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं को समझने का प्रयास किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के संयुक्त सचिव (Marketing) चिन्मय पी. गोतमारे, IAS ने की, जबकि ICAR-NRCB के निदेशक डॉ. आर. सेल्वराजन ने सह-अध्यक्षता की।
किसानों की सामूहिक ताकत बढ़ाने में FPOs की अहम भूमिका
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में डॉ. आर. सेल्वराजन ने कहा कि FPOs किसानों की सामूहिक शक्ति को बढ़ाने और उन्हें बेहतर Market Access उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
उन्होंने बताया कि देश में लगभग 45,000 FPOs वर्तमान में काम कर रहे हैं। इनमें करीब 85 प्रतिशत FPOs Agriculture Sector से जुड़े हैं, जिनमें Field Crops और Horticultural Crops शामिल हैं। वहीं लगभग 15 प्रतिशत FPOs Livestock और अन्य Allied Sectors में कार्यरत हैं।
FPOs का उद्देश्य छोटे और सीमांत किसानों को एक सामूहिक संगठन के रूप में जोड़ना है, ताकि वे सामूहिक रूप से कृषि इनपुट खरीद सकें, उत्पादन का बेहतर प्रबंधन कर सकें, प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन कर सकें तथा अपने उत्पादों के लिए बेहतर बाजार तलाश सकें।
व्यक्तिगत किसान की तुलना में सामूहिक संगठन के माध्यम से किसानों की Bargaining Power बढ़ सकती है। इससे उत्पादन लागत कम करने और कृषि उत्पादों के लिए बेहतर मूल्य प्राप्त करने की संभावनाएं भी बढ़ती हैं।
FPO Leadership में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की जरूरत
डॉ. सेल्वराजन ने FPOs में Gender Participation से जुड़े आंकड़ों पर भी प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में लगभग 85 प्रतिशत FPOs पुरुष नेतृत्व वाले हैं, जबकि करीब 15 प्रतिशत FPOs का नेतृत्व महिलाएं कर रही हैं।
यह आंकड़ा FPO Governance में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की आवश्यकता की ओर भी संकेत करता है। महिला किसानों और महिला उद्यमियों को FPOs के नेतृत्व, निर्णय लेने की प्रक्रिया और Business Management में अधिक अवसर देकर संगठनों को अधिक समावेशी बनाया जा सकता है।
महिला-led FPOs ग्रामीण क्षेत्रों में महिला किसानों को बाजार, वित्त, प्रशिक्षण और Entrepreneurship से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
पांच साल बाद सिर्फ 4,009 FPOs लाभ में
FPOs की संख्या बढ़ने के बावजूद उनके दीर्घकालिक Financial Sustainability को लेकर कई चुनौतियां बनी हुई हैं।
डॉ. सेल्वराजन ने NAAS Policy Report का हवाला देते हुए बताया कि देश में स्थापित FPOs में से केवल 4,009 FPOs ही स्थापना के पांच साल बाद भी लाभ में बने रहे।
यह आंकड़ा बताता है कि FPO बनाना और उसका पंजीकरण कराना ही पर्याप्त नहीं है। किसी संगठन को लंबे समय तक सफल बनाए रखने के लिए मजबूत Business Model, Professional Management, Working Capital, Market Linkages और Capacity Building जरूरी हैं।
FPOs को किसानों के समूह से एक प्रभावी Farmer-Owned Business Enterprise में बदलने के लिए लगातार प्रशिक्षण और संस्थागत सहायता की आवश्यकता होती है।
Training और Capital की कमी बड़ी चुनौती
FPOs की दीर्घकालिक सफलता में Capacity Building की महत्वपूर्ण भूमिका है। बैठक में सामने आया कि कई FPOs को पर्याप्त प्रशिक्षण और व्यावसायिक कौशल की कमी का सामना करना पड़ रहा है।
FPOs के निदेशक मंडल और कर्मचारियों को Business Planning, Financial Management, Marketing, Branding, Value Addition, Digital Platforms और Compliance जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है।
इसके साथ ही पर्याप्त Working Capital और Access to Finance का अभाव भी FPOs के लिए बड़ी चुनौती है।
कई FPOs के पास उत्पादन और किसानों का नेटवर्क तो होता है, लेकिन वे बड़े स्तर पर खरीद, भंडारण, प्रसंस्करण या बाजार विस्तार के लिए आवश्यक पूंजी नहीं जुटा पाते।
Marketing Network मजबूत करना जरूरी
बैठक में कमजोर Marketing Linkages को भी FPOs की Sustainability में एक बड़ी बाधा बताया गया।
यदि किसान संगठन केवल अपने सदस्यों से कृषि उपज एकत्र करने तक सीमित रह जाते हैं और उन्हें बेहतर बाजार उपलब्ध नहीं होता, तो किसानों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता।
FPOs को Direct Market Linkages, Institutional Buyers, Retail Chains, Food Processing Companies, Exporters और Digital Marketplaces से जोड़ना उनकी आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
इससे किसानों को बिचौलियों पर निर्भरता कम करने और अपनी उपज का अधिक हिस्सा स्वयं प्राप्त करने में मदद मिल सकती है।
सरकारी योजनाओं से बढ़ सकती है किसानों की आय
कार्यक्रम में Agri Innovate India Limited (ICAR) के निदेशक जी.के. नागराज ने केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का प्रभावी उपयोग कर किसानों द्वारा अपनी आय और आजीविका में सुधार किए जाने के उदाहरण साझा किए।
उन्होंने वाराणसी के किसानों के अनुभव का उल्लेख करते हुए बताया कि किसानों ने PM-KISAN Samman Nidhi, राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं और बाजरा के लिए Minimum Support Price (MSP) जैसी पहलों का लाभ उठाकर अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया।
इससे यह संकेत मिलता है कि FPOs यदि विभिन्न सरकारी योजनाओं को अपने सदस्यों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाएं और उनका सामूहिक उपयोग करें, तो किसानों के लिए Income Enhancement के अतिरिक्त अवसर पैदा किए जा सकते हैं।
FPOs सरकारी योजनाओं और किसानों के बीच एक प्रभावी Institutional Link के रूप में भी काम कर सकते हैं।
तमिलनाडु में NABARD की महत्वपूर्ण भूमिका
बैठक में NABARD की ओर से FPOs को दिए जा रहे Credit और Institutional Support की भूमिका पर भी चर्चा हुई।
बताया गया कि तमिलनाडु में NABARD के सहयोग से लगभग 400 FPOs स्थापित किए गए हैं। इनमें से करीब 250 FPOs सफलतापूर्वक काम कर रहे हैं।
NABARD द्वारा वित्तीय सहायता, संस्थागत मार्गदर्शन और विभिन्न Capacity Building Initiatives के माध्यम से FPOs को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।
राज्य में FPOs की संख्या और किसानों की भागीदारी बढ़ने के साथ ऐसे संस्थागत समर्थन की आवश्यकता और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।
10 लाख किसान FPOs से जुड़े
तमिलनाडु में वर्तमान में लगभग 10 लाख किसान FPOs से जुड़े हुए हैं। इतनी बड़ी किसान आबादी को संगठित बाजार व्यवस्था से जोड़ने की क्षमता FPOs में मौजूद है।
बैठक में यह भी बताया गया कि कृषि क्षेत्र में अनुमानित ₹44,000 करोड़ का मूल्य वर्तमान में Intermediaries यानी बिचौलियों के माध्यम से बनाए गए Value Chain में चला जाता है।
यदि FPOs को मजबूत Market Linkages और Processing Infrastructure उपलब्ध कराया जाए, तो किसान कृषि मूल्य श्रृंखला में अधिक हिस्सेदारी हासिल कर सकते हैं।
इसके लिए FPOs को केवल उत्पादन और संग्रहण तक सीमित रखने के बजाय Aggregation, Processing, Packaging, Branding, Logistics और Direct Marketing जैसी गतिविधियों में आगे बढ़ाना जरूरी होगा।
तमिलनाडु के FPOs का कारोबार करीब ₹2,200 करोड़
राज्य में FPOs का कुल वार्षिक कारोबार लगभग ₹2,200 करोड़ बताया गया।
हालांकि राज्य में लगभग 10 लाख किसानों की FPOs से भागीदारी को देखते हुए इस कारोबार को और बढ़ाने की पर्याप्त संभावनाएं मौजूद हैं।
यदि FPOs को बेहतर Business Infrastructure, Credit Facilities, Professional Management और Market Access उपलब्ध कराया जाए तो वे अपने कारोबार को कई गुना बढ़ा सकते हैं।
कृषि उपज के साथ-साथ Value-Added Products पर ध्यान देकर FPOs अतिरिक्त आय के स्रोत भी विकसित कर सकते हैं।
FPO प्रतिनिधियों ने बताईं जमीनी समस्याएं
मंथन सत्र के दौरान FPO प्रतिनिधियों ने अपनी वास्तविक समस्याओं और संचालन संबंधी चुनौतियों को समिति के सामने रखा।
प्रतिनिधियों ने Equity Grants समय पर जारी करने की मांग की। इसके अलावा FPOs के CEO के वेतन के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का मुद्दा भी उठाया गया।
FPOs ने ROC Audit Provisions में राहत देने की मांग की, ताकि छोटे किसान संगठनों पर अनुपालन का अत्यधिक बोझ न पड़े।
प्रतिनिधियों ने NAFED द्वारा सीधे कृषि उपज खरीदने, Infrastructure Support और Agricultural Input Support बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
इसके अलावा FPOs को मजबूत करने और FPO Programme के प्रभावी Implementation के लिए एक Dedicated Governance Mechanism की मांग भी सामने रखी गई।
CEO और Professional Management पर जोर
FPOs के सफल संचालन में Chief Executive Officer यानी CEO की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। एक सक्षम CEO किसानों से उपज जुटाने, बाजार तलाशने, खरीदारों से समझौते करने, वित्तीय प्रबंधन और संगठन के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
लेकिन कई छोटे FPOs के लिए CEO को पर्याप्त वेतन देना मुश्किल होता है। ऐसे में शुरुआती वर्षों में सरकार या संबंधित संस्थानों की ओर से CEO Remuneration Support मिलने से FPOs की Professional Management क्षमता मजबूत की जा सकती है।
इसके साथ ही Board of Directors और FPO members के लिए Business Management और Corporate Governance से जुड़े प्रशिक्षण भी जरूरी हैं।
Equity Grant से मजबूत हो सकता है FPO का आधार
FPOs को Equity Grant उपलब्ध कराने का उद्देश्य उनके Capital Base को मजबूत करना है। यदि Equity Support समय पर मिले तो संगठन अपने कारोबार को बढ़ाने, कृषि इनपुट खरीदने, Infrastructure विकसित करने और Working Capital की जरूरत पूरी करने में इसका उपयोग कर सकते हैं।
इसलिए FPO प्रतिनिधियों द्वारा Equity Grant की समय पर रिलीज की मांग को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
Direct Procurement से किसानों को मिल सकता है बेहतर बाजार
NAFED जैसी संस्थाओं द्वारा FPOs से Direct Procurement बढ़ाने की मांग भी किसानों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।
यदि FPOs के माध्यम से सीधे कृषि उपज की खरीद होती है तो किसानों को बड़े खरीदारों तक पहुंच मिल सकती है। इससे Market Transparency बढ़ने और किसानों की Bargaining Power मजबूत होने की संभावना है।
FPOs को सरकारी खरीद, Institutional Procurement और Private Sector Buyers से जोड़ना उनके कारोबार को स्थायी आधार देने में मदद कर सकता है।
FPOs के लिए नई रणनीति की जरूरत
कार्यक्रम से यह स्पष्ट हुआ कि देश में FPOs की संख्या बढ़ने के बावजूद उनकी Long-Term Sustainability सुनिश्चित करना अभी भी बड़ी चुनौती है।
FPOs को केवल पंजीकृत संस्थाओं की संख्या के आधार पर नहीं, बल्कि उनके Turnover, Profitability, Farmer Membership, Market Linkages, Value Addition और Farmer Income Impact के आधार पर भी आंका जाना चाहिए।
भविष्य की रणनीति में ऐसे FPOs पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होगी जो स्थानीय कृषि उत्पादों को Processing, Branding और Value Addition के माध्यम से बड़े बाजारों तक पहुंचा सकते हैं।
Brainstorming Session से सामने आए समाधान
तिरुचिरापल्ली में आयोजित इस Brainstorming Session ने FPOs से सीधे संवाद कर उनकी वास्तविक स्थिति समझने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया।
बैठक में सरकारी अधिकारियों, ICAR वैज्ञानिकों, FPO प्रतिनिधियों और अन्य Stakeholders के बीच संवाद से कई महत्वपूर्ण मुद्दे सामने आए।
इनमें Financial Viability, Institutional Capacity, Market Linkages, Access to Credit, Professional Management, Infrastructure, Governance और Policy Support प्रमुख रहे।
इन मुद्दों के आधार पर भविष्य में FPO Programme को अधिक प्रभावी बनाने के लिए व्यावहारिक उपाय सुझाए जा सकते हैं।
किसानों को मजबूत बाजार संगठन देने की दिशा में कदम
FPOs छोटे और सीमांत किसानों को सामूहिक रूप से आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकते हैं। यदि किसानों को एक संगठन के माध्यम से बेहतर Input Procurement, Technology, Credit, Storage, Processing और Market Access मिले तो उनकी उत्पादन क्षमता और आय दोनों में सुधार हो सकता है।
तमिलनाडु में लगभग 10 लाख किसानों का FPOs से जुड़ना इस मॉडल की बड़ी संभावनाओं को दर्शाता है।
हालांकि, इन संगठनों को लंबे समय तक सफल बनाने के लिए Government Support के साथ-साथ मजबूत Business Planning और Professional Management की जरूरत होगी।
FPOs को किसान संगठन से सफल Business Enterprise बनाने की चुनौती
ICAR-NRCB में आयोजित इस मंथन सत्र ने यह स्पष्ट किया कि FPOs के सामने केवल वित्तीय चुनौतियां ही नहीं हैं, बल्कि Governance, Marketing, Capacity Building और Institutional Support से जुड़े मुद्दे भी हैं।
यदि Equity Grant समय पर मिले, CEO और Professional Staff के लिए पर्याप्त सहायता हो, Market Linkages मजबूत किए जाएं, NAFED जैसी संस्थाओं के माध्यम से Direct Procurement बढ़े और FPOs को बेहतर Infrastructure तथा Input Support मिले, तो इन संगठनों की आर्थिक क्षमता को काफी बढ़ाया जा सकता है।
तमिलनाडु के FPOs से जुड़े लगभग 10 लाख किसानों और करीब ₹2,200 करोड़ के मौजूदा कारोबार को देखते हुए भविष्य में इस क्षेत्र में बड़े विस्तार की संभावनाएं हैं।
कुल मिलाकर, तिरुचिरापल्ली का यह FPO Brainstorming Session किसान उत्पादक संगठनों की जमीनी चुनौतियों को नीति निर्माताओं तक पहुंचाने और उनके लिए व्यावहारिक समाधान तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकता है। मजबूत FPOs न केवल किसानों की Collective Bargaining Power बढ़ा सकते हैं, बल्कि कृषि मूल्य श्रृंखला में किसानों की हिस्सेदारी बढ़ाकर उनकी आय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे सकते हैं।

