टमाटर की खेती में Highly Hazardous Pesticides (HHPs) के बढ़ते इस्तेमाल को कम करने और किसानों के लिए सुरक्षित एवं प्रभावी Low-Risk Alternatives उपलब्ध कराने की दिशा में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और ब्रिटेन स्थित CABI (Centre for Agriculture and Bioscience International) ने संयुक्त पहल शुरू की है।
इसी क्रम में ICAR-National Research Institute for Integrated Pest Management (ICAR-NRIIPM), New Delhi और CABI, UK के बीच चलने वाले Collaborative Programme की शुरुआत के लिए 4 अगस्त को नई दिल्ली में उद्घाटन बैठक आयोजित की गई। कार्यक्रम का विषय “Identification and Testing the Efficacy of Low-Risk Alternatives to Highly Hazardous Pesticides (HHPs) in the Context of Integrated Pest Management (IPM) for Tomato Production in India” रखा गया है।
इस Collaborative Programme का मुख्य उद्देश्य ऐसे Pest Management Options की पहचान, वैज्ञानिक मूल्यांकन और खेत स्तर पर परीक्षण करना है, जो प्रभावी होने के साथ-साथ मानव स्वास्थ्य, पर्यावरण और कृषि पारिस्थितिकी के लिए अपेक्षाकृत कम जोखिम वाले हों।
Tomato Farming में Safe Pest Management क्यों जरूरी?
टमाटर भारत की प्रमुख Vegetable Crops में शामिल है। देश के लगभग सभी प्रमुख कृषि क्षेत्रों में इसकी खेती होती है और यह किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण Cash Crop भी है।
टमाटर की फसल पर कई प्रकार के Insect Pests and Diseases हमला करते हैं। इनमें फल एवं तना छेदक, सफेद मक्खी, थ्रिप्स, एफिड्स और अन्य कीट किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं। फसल को बचाने के लिए कई बार किसान Chemical Pesticides का बार-बार और आवश्यकता से अधिक इस्तेमाल कर देते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे मामलों में यदि Highly Hazardous Pesticides (HHPs) का इस्तेमाल किया जाता है तो इससे किसानों और खेतिहर श्रमिकों के स्वास्थ्य पर जोखिम बढ़ सकता है। कीटनाशकों के अनुचित या अत्यधिक उपयोग से पर्यावरण, Beneficial Insects और कृषि पारिस्थितिकी पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
टमाटर के मामले में यह चिंता और महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि इसका उपयोग कई बार Raw Consumption के रूप में भी किया जाता है। इसलिए Safe Crop Production और Responsible Pesticide Use पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
New Delhi में हुई ICAR-CABI की शुरुआती बैठक
ICAR और CABI के इस Collaborative Programme की शुरुआत के अवसर पर आयोजित बैठक की अध्यक्षता डॉ. पूनम जसरोतिया, Assistant Director General (PP & BS), ICAR ने की।
बैठक में डॉ. रमन थानागवेलु, निदेशक, ICAR-NRIIPM के साथ संस्थान की वैज्ञानिक डॉ. रेखा बालोदी और डॉ. मनोज चौधरी उपस्थित रहे।
CABI-India की ओर से डॉ. विनोद पंडित, Director, South Asia, CABI; डॉ. रुचि गुप्ता, Technical Pesticide Expert और डॉ. मंजू ठाकुर, Crop Health Advisor ने भाग लिया।
बैठक के दौरान परियोजना के विभिन्न Technical Components, Implementation Strategy, Field Trials, Stakeholder Engagement और भविष्य की गतिविधियों पर विस्तृत चर्चा की गई।
Low-Risk Pesticides की पहचान पर जोर
बैठक को संबोधित करते हुए डॉ. पूनम जसरोतिया ने टमाटर में Highly Hazardous Pesticides के विकल्प तलाशने की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में कई किसान खतरनाक कीटनाशकों का इस्तेमाल इसलिए भी करते हैं क्योंकि उन्हें इनके जोखिमों के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं होती या उन्हें Safer Alternatives की उपलब्धता की जानकारी सीमित होती है।
ऐसे में केवल किसानों को कीटनाशकों के इस्तेमाल से रोकना पर्याप्त नहीं होगा। इसके साथ प्रभावी, वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित और Low-Risk Chemical Alternatives उपलब्ध कराना भी जरूरी है।
इस परियोजना के माध्यम से ऐसे Label-Claimed, Effective and Low-Risk Pesticide Alternatives की पहचान एवं वैज्ञानिक पुष्टि की जाएगी, जिनका इस्तेमाल टमाटर की फसल में अत्यधिक खतरनाक कीटनाशकों की जगह किया जा सके।
वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध होने से किसानों, कृषि सलाहकारों और नीति निर्माताओं को Evidence-Based Decision Making में मदद मिलेगी।
Integrated Pest Management बनेगा सुरक्षित खेती का आधार
इस संयुक्त कार्यक्रम में Integrated Pest Management (IPM) को मुख्य आधार बनाया गया है।
IPM ऐसी Sustainable Pest Management Strategy है जिसमें कीट नियंत्रण के लिए केवल रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भर रहने के बजाय कई अलग-अलग तरीकों का संयोजन किया जाता है।
इसमें Crop Monitoring, Pest Identification, Biological Control, Cultural Practices, Mechanical Methods और आवश्यकता के अनुसार कम जोखिम वाले रासायनिक कीटनाशकों का इस्तेमाल शामिल हो सकता है।
ICAR-NRIIPM के निदेशक डॉ. रमन थानागवेलु ने बताया कि टमाटर में कीट प्रबंधन के लिए IPM एक टिकाऊ दृष्टिकोण प्रदान करता है। इसका उद्देश्य गैर-रासायनिक उपायों को प्राथमिकता देते हुए जरूरत पड़ने पर कम जोखिम वाले रासायनिक विकल्पों का इस्तेमाल करना है।
उनके अनुसार, यदि IPM Modules को किसी क्षेत्र की विशिष्ट फसल, कीट और Agro-Ecological Conditions के अनुसार तैयार किया जाए तो कीटों को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है और Highly Hazardous Pesticides पर निर्भरता घटाई जा सकती है।
ICAR-NRIIPM ने Tomato के लिए विकसित किया IPM Module
बैठक के दौरान ICAR-NRIIPM के वैज्ञानिक डॉ. मनोज चौधरी और डॉ. रेखा बालोदी ने संस्थान द्वारा टमाटर के लिए विकसित Integrated Pest Management Module के बारे में जानकारी दी।
इस मॉड्यूल का उद्देश्य टमाटर में Pest Control को अधिक वैज्ञानिक, प्रभावी और टिकाऊ बनाना है।
परियोजना के तहत मौजूदा IPM Strategies का परीक्षण किया जाएगा और जरूरत के अनुसार उनमें सुधार एवं नए Low-Risk Pest Management Options को शामिल किया जा सकता है।
इससे अलग-अलग Agro-Climatic Zones में टमाटर किसानों के लिए ऐसे व्यावहारिक कीट प्रबंधन मॉडल विकसित करने में मदद मिल सकती है, जिन्हें खेत स्तर पर आसानी से अपनाया जा सके।
Field Trials में होगी Low-Risk Alternatives की जांच
परियोजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा Field Trials and Validation होगा। केवल प्रयोगशाला या नियंत्रित परिस्थितियों में किसी विकल्प के प्रभावी होने से वह किसान के खेत के लिए उपयोगी साबित नहीं हो जाता।
इसीलिए चयनित Pesticide Alternatives को वास्तविक कृषि परिस्थितियों में परीक्षण किया जाएगा। इनमें Pest Control Efficacy, Crop Safety, Practical Applicability और अन्य संबंधित पहलुओं का मूल्यांकन किया जाएगा।
विभिन्न Agro-Climatic Conditions में अंतर को देखते हुए अलग-अलग क्षेत्रों में परिणामों का अध्ययन महत्वपूर्ण होगा।
फील्ड स्तर से प्राप्त वैज्ञानिक आंकड़ों के आधार पर यह निर्धारित करने में मदद मिलेगी कि कौन-से विकल्प किसानों के लिए वास्तव में प्रभावी और व्यवहारिक हैं।
CABI के Global Experience का मिलेगा लाभ
CABI के दक्षिण एशिया निदेशक डॉ. विनोद पंडित ने संस्था की Sustainable Crop Production से संबंधित वैश्विक पहलों पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि ICAR और CABI के बीच यह सहयोग टमाटर में Safer Pest Management Strategies के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।
परियोजना से प्राप्त परिणामों का उपयोग केवल भारत तक सीमित नहीं रहने की संभावना है। यदि प्रभावी Low-Risk Alternatives और सफल IPM Models विकसित होते हैं, तो उन्हें अन्य Vegetable Production Systems में भी अपनाया जा सकता है।
इस तरह Tomato Farming में शुरू किया गया यह प्रयास भविष्य में अन्य सब्जी फसलों में Highly Hazardous Pesticides पर निर्भरता कम करने के लिए एक Replicable Model के रूप में काम कर सकता है।
Farmers की भागीदारी भी होगी अहम
किसी भी Pest Management Technology की सफलता के लिए किसानों की भागीदारी जरूरी है। खेत पर किसान ही कीटों की स्थिति, फसल की प्रतिक्रिया और तकनीक की व्यवहारिकता का सबसे महत्वपूर्ण आकलन कर सकता है।
इसीलिए परियोजना में Stakeholder Engagement को महत्वपूर्ण घटक बनाया गया है।
वैज्ञानिकों और किसानों के बीच संवाद से यह समझने में मदद मिलेगी कि किसान वर्तमान में किन Pest Problems का सामना कर रहे हैं, किस प्रकार के Pesticides का इस्तेमाल करते हैं और Safer Alternatives अपनाने में उनके सामने कौन-कौन सी बाधाएं हैं।
इससे विकसित किए जाने वाले IPM Module को वास्तविक किसान जरूरतों के अनुरूप बनाने में मदद मिल सकती है।
Safe Food Production की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
Highly Hazardous Pesticides के उपयोग को कम करना केवल किसान स्वास्थ्य का विषय नहीं है। इसका सीधा संबंध Food Safety, Environmental Health और Consumer Safety से भी है।
टमाटर जैसी सब्जियों में कीटनाशकों के विवेकपूर्ण उपयोग से Pesticide Residue Risk को कम करने में मदद मिल सकती है। वहीं खेतों में लाभकारी कीटों और अन्य जीवों की रक्षा करके कृषि पारिस्थितिकी को भी बेहतर बनाए रखा जा सकता है।
Integrated Pest Management इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है क्योंकि इसका उद्देश्य कीटों को पूरी तरह समाप्त करना नहीं, बल्कि उन्हें Economic Threshold Level से नीचे रखते हुए फसल को सुरक्षित रखना है।
Project में तय होगी स्पष्ट Implementation Strategy
बैठक के दौरान परियोजना के Technical Components और Implementation Strategy को प्रस्तुत किया गया। वैज्ञानिकों ने परियोजना के विभिन्न मॉड्यूल, Methodology, Field Validation, Stakeholder Engagement और Implementation Roadmap पर विस्तार से चर्चा की।
बैठक में भविष्य की गतिविधियों, Timelines और दोनों संस्थानों की Collaborative Responsibilities को लेकर भी चर्चा हुई।
इससे परियोजना के लिए एक व्यवस्थित कार्ययोजना तैयार करने और निर्धारित लक्ष्यों को समय पर हासिल करने की दिशा में आधार तैयार हुआ।
Tomato Farmers के लिए क्या बदल सकता है?
यदि परियोजना के तहत प्रभावी Low-Risk Pesticide Alternatives की पहचान और सफल परीक्षण होता है, तो भविष्य में टमाटर किसानों को Highly Hazardous Pesticides पर कम निर्भर रहने का विकल्प मिल सकता है।
इससे संभावित रूप से तीन स्तरों पर लाभ हो सकते हैं—
पहला, किसानों और खेतिहर श्रमिकों का अत्यधिक खतरनाक रसायनों के संपर्क में आना कम हो सकता है।
दूसरा, Pest Management अधिक Sustainable बन सकता है और Beneficial Insects एवं कृषि पारिस्थितिकी पर दबाव कम किया जा सकता है।
तीसरा, Safe and Sustainable Crop Production के माध्यम से उपभोक्ताओं के लिए भी बेहतर गुणवत्ता वाले कृषि उत्पाद उपलब्ध कराने की दिशा में मदद मिल सकती है।
हालांकि इन लाभों को हासिल करने के लिए किसानों को केवल विकल्प उपलब्ध कराना ही पर्याप्त नहीं होगा। उन्हें सही समय पर सही तकनीक, प्रशिक्षण और Scientific Advisory Services भी उपलब्ध करानी होंगी।
Vegetable Production में Sustainable Agriculture को बढ़ावा
टमाटर से शुरू होने वाली यह पहल व्यापक रूप से Sustainable Agriculture और Sustainable Vegetable Production को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण हो सकती है।
सब्जियों में कीट और रोग प्रबंधन अक्सर Production Cost और Crop Quality दोनों को प्रभावित करता है। ऐसे में वैज्ञानिक IPM Modules किसानों को कम लागत, बेहतर Pest Control और सुरक्षित उत्पादन की दिशा में मदद कर सकते हैं।
ICAR और CABI की यह साझेदारी Scientific Research, Field Validation और Farmer Participation को एक साथ जोड़ती है। यही इस कार्यक्रम की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता है।
Safer Alternatives के जरिए Sustainable Tomato Farming की ओर कदम
नई दिल्ली में आयोजित यह Inception Meeting टमाटर उत्पादन में Highly Hazardous Pesticides के विकल्प तलाशने की दिशा में औपचारिक शुरुआत है। परियोजना के तहत Low-Risk Alternatives की पहचान, उनका Scientific Evaluation और Field-Level Testing किया जाएगा।
ICAR-NRIIPM की IPM विशेषज्ञता और CABI के Global Experience को एक साथ लाने से ऐसे समाधान विकसित होने की उम्मीद है जो भारतीय किसानों की जरूरतों के अनुरूप हों और भविष्य में अन्य देशों एवं फसलों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकें।
कुल मिलाकर, यह पहल Farmer Health, Food Safety, Environmental Protection और Sustainable Agriculture—इन चारों लक्ष्यों को एक साथ साधने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यदि वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित Low-Risk Alternatives किसानों तक प्रभावी तरीके से पहुंचते हैं, तो Tomato Farming में Highly Hazardous Pesticides पर निर्भरता कम करने की दिशा में बड़ा बदलाव संभव है।

