Ranchi Student Protest: झारखंड की राजधानी रांची सोमवार, 10 अगस्त 2026 को बड़े छात्र आंदोलन की गवाह बनी। सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हजारों अभ्यर्थी JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारी झारखंड विधानसभा की ओर बढ़े तो कई स्थानों पर पुलिस की बैरिकेडिंग से उनका सामना हुआ। प्रदर्शनकारियों के बैरिकेड पार करने की कोशिश के बीच पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया।
इस आंदोलन के केंद्र में झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की भर्ती प्रक्रिया को लेकर अभ्यर्थियों की नाराजगी है। खासतौर पर JSSC की Combined Graduate Level यानी CGL परीक्षा को लेकर छात्रों की मांग और सरकार के रुख के बीच टकराव बना हुआ है। सरकार ने कुछ JPSC परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला किया है, लेकिन JSSC CGL को रद्द करने की मांग स्वीकार नहीं की गई। इसी वजह से आंदोलन फिलहाल थमता दिखाई नहीं दे रहा है।
क्यों सड़कों पर उतरे छात्र?
प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों का आरोप है कि राज्य की विभिन्न प्रतियोगी और भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताएं हुई हैं। वे परीक्षा और चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता तथा कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। 29 जुलाई को भी हजारों छात्र रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जुटे थे और वहां से अल्बर्ट एक्का चौक तक मार्च किया था। उस दौरान प्रदर्शनकारियों के हाथों में JPSC परीक्षा रद्द करने और JPSC-JSSC मामलों की CBI जांच जैसी मांगों वाली तख्तियां थीं।
यानी 10 अगस्त का विधानसभा मार्च अचानक शुरू हुआ प्रदर्शन नहीं है। पिछले कई दिनों से राजधानी में अभ्यर्थियों का आंदोलन जारी है। विधानसभा मार्च से एक दिन पहले आई रिपोर्ट के मुताबिक आंदोलन 16वें दिन में पहुंच चुका था। अभ्यर्थियों ने अपनी मांगें सरकार तक पहुंचाने के लिए विधानसभा की ओर मार्च का आह्वान किया था।
JSSC CGL पर क्यों मचा है घमासान?
आंदोलन में सबसे अहम मुद्दों में से एक JSSC CGL परीक्षा है। प्रदर्शनकारी इसके परिणाम और परीक्षा प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहे हैं और परीक्षा को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। सरकार ने हालांकि JSSC CGL परीक्षा को रद्द करने की मांग स्वीकार नहीं की है। रिपोर्ट के मुताबिक सरकार का कहना है कि परीक्षा अदालत की निगरानी में आयोजित हुई थी और चयनित अभ्यर्थियों में से कई नौकरी भी ज्वाइन कर चुके हैं। इसी आधार पर सरकार ने CGL परीक्षा रद्द करने की मांग को खारिज कर दिया।
छात्रों और सरकार के बीच विवाद का यह सबसे महत्वपूर्ण बिंदु बन गया है। एक तरफ आंदोलनकारी परीक्षा और परिणाम पर उठाए जा रहे सवालों का समाधान चाहते हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकार CGL को रद्द करने के पक्ष में नहीं है।
JPSC मामले में सरकार ने उठाया बड़ा कदम
आंदोलन के दबाव के बीच सरकार ने JPSC से जुड़ी कुछ मांगों पर कदम उठाया है। रिपोर्ट के अनुसार सरकार ने 14वीं JPSC परीक्षा के साथ JPSC Backlog 2023 और JPSC Backlog 2025 परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला किया। हालांकि JSSC CGL को लेकर सरकार का रुख अलग रहा।
इससे पहले JPSC ने जुलाई में झारखंड संयुक्त सिविल सेवा मुख्य लिखित परीक्षा सहित कई परीक्षाओं को स्थगित किया था। उस समय CID की कार्रवाई भी सामने आई थी और कथित परीक्षा अनियमितताओं से जुड़े मामले में पांच लोगों की गिरफ्तारी की खबर आई थी। इसके बाद भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता और निष्पक्षता का मुद्दा और बड़ा होता गया।
10 अगस्त को रांची में क्या हुआ?
अभ्यर्थियों ने 10 अगस्त को झारखंड विधानसभा की ओर मार्च करने का कार्यक्रम बनाया था। इसे देखते हुए रांची में सुरक्षा व्यवस्था पहले से कड़ी कर दी गई थी। विधानसभा के आसपास निषेधाज्ञा लगाई गई और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती की गई।
इसके बावजूद बड़ी संख्या में अभ्यर्थी प्रदर्शन में शामिल हुए और विधानसभा की ओर बढ़ने लगे। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बैरिकेड लगाए थे। प्रदर्शनकारी जब आगे बढ़े और बैरिकेड पार करने की कोशिश हुई तो स्थिति तनावपूर्ण हो गई। पुलिस ने भीड़ को रोकने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। इसके बाद भी प्रदर्शनकारियों का मार्च जारी रहने की खबर सामने आई।
न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक विधानसभा की ओर हुए मार्च में हजारों नौकरी अभ्यर्थी शामिल हुए। आंदोलन में JPSC-JSSC Reforms Manch से जुड़े प्रदर्शनकारी भी सक्रिय रहे।
कई दिनों से बन रहा था आंदोलन का माहौल
रांची में भर्ती परीक्षाओं को लेकर नाराजगी जुलाई के आखिरी दिनों से लगातार सार्वजनिक रूप से दिखाई दे रही है। 29 जुलाई को Joint Students Front के बैनर तले हजारों छात्र जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जमा हुए और अल्बर्ट एक्का चौक तक मार्च निकाला। उस प्रदर्शन में 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा रद्द करने, JPSC-JSSC से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच कराने और भर्ती प्रक्रिया में सुधार की मांग उठी थी।
30 जुलाई को AJSU की युवा और छात्र इकाइयों ने भी रांची में JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर मार्च किया। प्रदर्शनकारी जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से लोक भवन की तरफ बढ़े, लेकिन पुलिस ने उन्हें मुख्य द्वार से पहले रोक दिया था। इन प्रदर्शनों के बाद आंदोलन लगातार तेज होता गया और आखिरकार विधानसभा मार्च तक पहुंच गया।
छात्रों की प्रमुख मांगें क्या हैं?
अलग-अलग छात्र समूहों और प्रदर्शनों में उठी मांगों को देखें तो मुख्य मुद्दा भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता और पारदर्शिता है। अभ्यर्थी JPSC और JSSC से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच चाहते हैं। इसके साथ ही विवादित परीक्षाओं को लेकर कार्रवाई की मांग की जा रही है।
JSSC CGL के मामले में परीक्षा या परिणाम को रद्द करने की मांग आंदोलन का अहम हिस्सा है। वहीं JPSC से जुड़े प्रदर्शन में 14वीं JPSC परीक्षा को रद्द करने और कथित अनियमितताओं की जांच की मांग प्रमुख रही है। जुलाई के प्रदर्शन में CBI जांच की मांग भी स्पष्ट रूप से सामने आई थी।
सरकार और छात्रों के बीच कहां फंसा है मामला?
सरकार ने JPSC से जुड़ी कुछ परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लेकर आंदोलनकारियों की कुछ मांगों की दिशा में कदम जरूर बढ़ाया है, लेकिन JSSC CGL पर सहमति नहीं बन सकी है। यही कारण है कि सरकार की घोषणा के बाद भी आंदोलन खत्म नहीं हुआ। प्रदर्शनकारी CGL मामले में भी कार्रवाई चाहते हैं, जबकि सरकार ने इसे रद्द करने से इनकार किया है।
इससे साफ है कि विवाद अब सिर्फ एक परीक्षा की तारीख या परिणाम तक सीमित नहीं रह गया है। छात्र भर्ती संस्थाओं के कामकाज, परीक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और कथित अनियमितताओं पर जवाबदेही का सवाल उठा रहे हैं।
आंदोलन का राजनीतिक असर भी बढ़ा
JPSC-JSSC विवाद अब केवल छात्र आंदोलन तक सीमित नहीं रहा है। विपक्षी दलों और उनके छात्र-युवा संगठनों ने भी इस मुद्दे को उठाया है। जुलाई में BJP और भारतीय जनता युवा मोर्चा ने JPSC की परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर प्रदर्शन किया था। वहीं AJSU की छात्र और युवा इकाइयों ने भी मार्च निकाला। इस तरह भर्ती परीक्षा का विवाद राज्य की राजनीति में भी बड़ा मुद्दा बनता गया।
हालांकि आंदोलन का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष उन अभ्यर्थियों की चिंता है जो लंबे समय से सरकारी भर्ती परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। उनके लिए परीक्षा का स्थगित होना, परिणाम पर विवाद या भर्ती प्रक्रिया का लंबा खिंचना सीधे उनके करियर से जुड़ा मामला है।
रांची में सुरक्षा व्यवस्था क्यों बढ़ाई गई?
विधानसभा मार्च को देखते हुए प्रशासन पहले से सतर्क था। विधानसभा परिसर और आसपास के इलाकों में निषेधाज्ञा लागू की गई और अतिरिक्त सुरक्षा बल लगाए गए थे। प्रशासन की कोशिश थी कि प्रदर्शन विधानसभा परिसर तक न पहुंचे और कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो।
लेकिन प्रदर्शनकारियों की बड़ी संख्या और विधानसभा की ओर आगे बढ़ने की कोशिश के बाद कई जगह पुलिस और प्रदर्शनकारी आमने-सामने आ गए। बैरिकेड पार किए जाने के बाद वाटर कैनन के इस्तेमाल की तस्वीरें भी सामने आईं।
अब आगे क्या?
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि JSSC CGL को लेकर सरकार और आंदोलनकारी अभ्यर्थियों के बीच कोई सहमति बनती है या नहीं। JPSC से संबंधित कुछ परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय सरकार ने लिया है, लेकिन CGL पर उसका रुख स्पष्ट है। दूसरी ओर छात्र आंदोलन को आगे जारी रखने की बात कह रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच बातचीत महत्वपूर्ण हो सकती है। अगर आंदोलन जारी रहता है तो भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता, जांच और परीक्षा प्रणाली में सुधार का मुद्दा झारखंड की राजनीति और प्रशासन दोनों के लिए महत्वपूर्ण बना रह सकता है।
आखिर क्यों इतना बड़ा बन गया मामला?
झारखंड में सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले हजारों युवाओं के लिए प्रतियोगी परीक्षाएं उनके भविष्य से जुड़ी हैं। इसलिए परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठने के बाद मामला केवल एक परीक्षा के परिणाम तक सीमित नहीं रहता।
रांची की सड़कों पर दिखाई दे रहा आंदोलन इसी नाराजगी का नतीजा है। अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्हें निष्पक्ष और पारदर्शी भर्ती व्यवस्था चाहिए। सरकार ने कुछ मांगों पर कार्रवाई की है, लेकिन JSSC CGL पर दोनों पक्षों के बीच मतभेद बरकरार हैं।
अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार आंदोलनकारी छात्रों से आगे किस तरह बातचीत करती है और JPSC-JSSC भर्ती व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों का समाधान किस तरह निकाला जाता है।

