एल नीनो के प्रभाव से बारिश की कमी और जल संसाधनों पर बढ़ते दबाव के बावजूद आंध्र प्रदेश की अर्थव्यवस्था ने चालू वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में मजबूत प्रदर्शन किया है। राज्य ने दूसरी तिमाही में 10.7 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि दर दर्ज की है। इस दौरान कृषि क्षेत्र सबसे आगे रहा, जिसने 13.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। वहीं औद्योगिक क्षेत्र में 10.6 प्रतिशत और सेवा क्षेत्र में 9.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
राज्य की आर्थिक प्रगति को लेकर जुलाई 2026 की मासिक आर्थिक रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है। योजना विभाग के अधिकारियों ने मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के समक्ष कैंप कार्यालय में जुलाई 2026 की आर्थिक रिपोर्ट प्रस्तुत की। रिपोर्ट में कृषि, उद्योग, सेवा, पशुपालन, निर्यात, निवेश और राजस्व सहित विभिन्न क्षेत्रों में राज्य की आर्थिक स्थिति का विस्तृत आकलन किया गया।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि एल नीनो जैसी प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद राज्य की आर्थिक विकास दर को बनाए रखने के लिए व्यापक और परिणाम आधारित योजनाएं तैयार की जाएं। उन्होंने राज्य की अर्थव्यवस्था को 15 प्रतिशत विकास दर तक पहुंचाने के लक्ष्य पर विशेष जोर दिया।
दो वर्षों से राष्ट्रीय औसत से बेहतर प्रदर्शन
आंध्र प्रदेश लगातार आर्थिक विकास के मामले में बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले दो वर्षों से राज्य की आर्थिक विकास दर राष्ट्रीय विकास दर से अधिक रही है। राज्य की वास्तविक सकल राज्य घरेलू उत्पाद यानी रियल GSDP वृद्धि दर 2023-24 में 6.5 प्रतिशत थी, जो 2025-26 में बढ़कर 9.9 प्रतिशत हो गई।
यह वृद्धि राज्य की अर्थव्यवस्था में कृषि, उद्योग और सेवा क्षेत्रों के बेहतर प्रदर्शन को दर्शाती है। दूसरी तिमाही में इन तीनों प्रमुख क्षेत्रों में दर्ज वृद्धि ने राज्य की समग्र आर्थिक गतिविधियों को मजबूत आधार प्रदान किया।
विशेष रूप से कृषि क्षेत्र का प्रदर्शन महत्वपूर्ण रहा है, क्योंकि एल नीनो के प्रभाव के चलते राज्य के कई हिस्सों में बारिश की स्थिति प्रभावित हुई है। इसके बावजूद कृषि क्षेत्र में 13.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज होना राज्य के कृषि उत्पादन और संबंधित गतिविधियों के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
कृषि क्षेत्र ने सबसे ज्यादा 13.5% की वृद्धि दर्ज की
दूसरी तिमाही में कृषि क्षेत्र ने सभी प्रमुख क्षेत्रों में सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर 13.5 प्रतिशत रही। आंध्र प्रदेश की अर्थव्यवस्था में कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए यह वृद्धि राज्य के लिए विशेष महत्व रखती है।
राज्य में कृषि उत्पादन के साथ-साथ पशुपालन और अन्य संबद्ध गतिविधियां भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में योगदान दे रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार पशुपालन क्षेत्र में मांस उत्पादन में 9.6 प्रतिशत और अंडा उत्पादन में 5.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
मुख्यमंत्री ने कृषि क्षेत्र के लिए भविष्य की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए आकस्मिक योजनाएं तैयार करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने पानी की उपलब्धता, कृषि उत्पादों में मूल्य संवर्धन और अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं को ध्यान में रखकर ऐसी रणनीति तैयार करने के निर्देश दिए, जिससे प्रतिकूल मौसम की स्थिति में भी कृषि उत्पादन और किसानों की आय पर नकारात्मक प्रभाव कम किया जा सके।
उद्योग और सेवा क्षेत्र का भी मजबूत प्रदर्शन
आंध्र प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्र ने दूसरी तिमाही में 10.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। निवेश और बड़े औद्योगिक प्रोजेक्टों की ग्राउंडिंग में हुई वृद्धि को राज्य के औद्योगिक विस्तार के लिए सकारात्मक माना जा रहा है।
वहीं सेवा क्षेत्र ने भी 9.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। आईटी, परिवहन और व्यापार जैसे क्षेत्रों में मजबूत गतिविधियों ने सेवा क्षेत्र की वृद्धि को गति दी। राज्य में तकनीक आधारित सेवाओं और व्यापारिक गतिविधियों के विस्तार से आर्थिक गतिविधियों में तेजी आई है।
निर्यात के मोर्चे पर भी राज्य ने सकारात्मक प्रदर्शन किया। सामान्य निर्यात में 10.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई और निर्यात का मूल्य बढ़कर 16,322 करोड़ रुपये पहुंच गया। वहीं एसटीपीआई निर्यात में 32.2 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।
कमर्शियल वाहनों के पंजीकरण में 51.6% उछाल
राज्य की आर्थिक गतिविधियों में तेजी का असर परिवहन क्षेत्र पर भी दिखाई दिया। रिपोर्ट के अनुसार, वाणिज्यिक वाहनों के पंजीकरण में 51.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह वृद्धि व्यापारिक गतिविधियों, परिवहन और औद्योगिक गतिविधियों में बढ़ती मांग का संकेत देती है।
राज्य सरकार द्वारा विभिन्न विभागों में तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा देने का भी आर्थिक गतिविधियों पर सकारात्मक असर देखने को मिला है। विशेष रूप से कर संग्रह व्यवस्था में तकनीक के बेहतर इस्तेमाल से राजस्व संग्रह में वृद्धि दर्ज की गई।
GST संग्रह बढ़कर 13,282 करोड़ रुपये
राज्य सरकार की तकनीकी पहल का प्रभाव वस्तु एवं सेवा कर यानी GST संग्रह पर भी दिखाई दिया। रिपोर्ट के अनुसार GST संग्रह में 21 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई और यह बढ़कर 13,282 करोड़ रुपये हो गया।
सरकार का मानना है कि विभागीय स्तर पर तकनीक के प्रभावी इस्तेमाल, बेहतर निगरानी और संसाधनों के उचित प्रबंधन से राजस्व संग्रह तथा प्रशासनिक प्रदर्शन को और बेहतर बनाया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वाणिज्यिक कर विभाग की तर्ज पर अन्य सरकारी विभागों में भी तकनीक के इस्तेमाल को प्रभावी बनाया जाए। उन्होंने कहा कि तकनीकी एकीकरण का उद्देश्य केवल प्रक्रियाओं को डिजिटल बनाना नहीं, बल्कि बेहतर प्रदर्शन और निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति सुनिश्चित करना होना चाहिए।
2.88 लाख करोड़ रुपये की मेगा परियोजनाएं धरातल पर
आंध्र प्रदेश में निवेश के मोर्चे पर भी सकारात्मक स्थिति सामने आई है। राज्य में 2.88 लाख करोड़ रुपये की मेगा परियोजनाओं की ग्राउंडिंग दर्ज की गई, जिसमें 75.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
इसी तरह सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम यानी MSME क्षेत्र में करीब 60,000 करोड़ रुपये के निवेश दर्ज किए गए। इस क्षेत्र में निवेश की वृद्धि दर 73.6 प्रतिशत रही।
MSME क्षेत्र को रोजगार सृजन, स्थानीय उद्योगों के विकास और ग्रामीण तथा अर्ध-शहरी अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में इस क्षेत्र में निवेश बढ़ना राज्य की आर्थिक गतिविधियों के विस्तार का महत्वपूर्ण संकेत है।
एल नीनो के बीच जल संकट बड़ी चुनौती
मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि एल नीनो के कारण उत्पन्न परिस्थितियों को आर्थिक विकास के रास्ते में बाधा नहीं बनने दिया जाए। उन्होंने कहा कि राज्य में बारिश की कमी के कारण जल उपलब्धता पर दबाव बढ़ रहा है।
कृष्णा नदी में पानी की आवक पर्याप्त नहीं होने के कारण श्रीशैलम और नागार्जुन सागर जैसी प्रमुख परियोजनाएं अभी पूरी तरह जलाशय स्तर तक नहीं पहुंची हैं। ऐसी परिस्थितियों में कृषि और अन्य आर्थिक गतिविधियों के लिए जल प्रबंधन अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि कृष्णा डेल्टा की जरूरतों को पूरा करने के लिए गोदावरी नदी के बाढ़ के पानी को डायवर्ट किया गया है। उन्होंने भूजल स्तर में गिरावट का भी उल्लेख किया और अधिकारियों को विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि उपलब्ध जल संसाधनों का वैज्ञानिक और प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित किया जाना चाहिए, ताकि जल संकट का असर राज्य के आर्थिक उत्पादन पर न पड़े।
हर विभाग को तय करने होंगे मापनीय लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने सभी सरकारी विभागों को संसाधनों के प्रभावी प्रबंधन और अधिकतम संभव लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए ठोस योजनाएं तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि योजनाएं केवल कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उनके परिणाम स्पष्ट रूप से मापे जा सकें।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि प्रत्येक योजना का अंतिम उद्देश्य राज्य की आर्थिक विकास दर को बढ़ाने में योगदान देना होना चाहिए। इसके लिए विभागों को स्पष्ट लक्ष्य, समयसीमा और परिणाम आधारित निगरानी व्यवस्था विकसित करनी होगी।
मुख्यमंत्री ने उपलब्ध आंकड़ों का व्यापक विश्लेषण करने और जहां भी कमियां सामने आएं, वहां तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए।
आम आदमी पर अतिरिक्त महंगाई का बोझ न पड़े
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि राज्य की आर्थिक नीतियों और विकास योजनाओं का अतिरिक्त बोझ आम आदमी पर नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने इस मुद्दे की समीक्षा के लिए एक समिति गठित करने का सुझाव दिया।
उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास के साथ यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि आम नागरिकों को अनावश्यक मूल्य वृद्धि का सामना न करना पड़े। सरकार की योजनाओं का लाभ समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंचना चाहिए और आर्थिक विकास का असर लोगों के जीवन स्तर में सुधार के रूप में दिखाई देना चाहिए।
कृषि उत्पादों में मूल्य संवर्धन पर जोर
मुख्यमंत्री ने कृषि और अन्य उत्पादों में वैल्यू एडिशन को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। केवल कच्चे कृषि उत्पादों का उत्पादन बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके प्रसंस्करण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बाजार से बेहतर जुड़ाव के जरिए किसानों और राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए अधिक मूल्य पैदा किया जा सकता है।
उन्होंने कृषि क्षेत्र के लिए आकस्मिक योजना तैयार करने के निर्देश दिए, जिसमें पानी की उपलब्धता, उत्पादन, मूल्य संवर्धन और बाजार से जुड़े पहलुओं को शामिल किया जाए।
इसके साथ ही उन्होंने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में राज्य के निर्यात पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़ने देने के लिए भी आवश्यक कदम उठाने को कहा। वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए गुणवत्ता, उत्पादन क्षमता और निर्यात व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया गया।
जिलों और मंडलों तक होगी आर्थिक प्रगति की निगरानी
मुख्यमंत्री ने राज्य की आर्थिक विकास योजनाओं की निगरानी को जमीनी स्तर तक ले जाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों से जिला, विधानसभा क्षेत्र और मंडल स्तर पर नियमित रिपोर्ट तैयार करने को कहा।
उनका मानना है कि स्थानीय स्तर पर आंकड़ों और प्रगति की निगरानी से यह पता लगाना आसान होगा कि कौन-से क्षेत्र निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप प्रदर्शन कर रहे हैं और कहां सुधार की जरूरत है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि राज्य के 15 प्रतिशत आर्थिक विकास दर के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सभी विभागों को समन्वित तरीके से काम करना होगा। इसके लिए जल संसाधन, कृषि, उद्योग, सेवा, निवेश, निर्यात और राजस्व जैसे सभी क्षेत्रों को एक साझा विकास रणनीति के तहत आगे बढ़ाना होगा।
बैठक में वित्त एवं योजना विभाग के प्रधान सचिव पीयूष कुमार, योजना विभाग के कार्यकारी निदेशक वी.आर. अलपार्थी, मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारी राजामौली और प्रद्युम्न, योजना विभाग की विशेष सचिव डॉ. शांति प्रिया पांडे तथा अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी निदेशालय के निदेशक बी. गोपाल सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
कुल मिलाकर, एल नीनो के कारण जल संकट और बारिश की कमी जैसी चुनौतियों के बीच आंध्र प्रदेश की दूसरी तिमाही में 10.7 प्रतिशत आर्थिक वृद्धि राज्य की अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाती है। कृषि क्षेत्र की 13.5 प्रतिशत वृद्धि, औद्योगिक और सेवा क्षेत्रों का बेहतर प्रदर्शन, निवेश में तेजी, निर्यात वृद्धि और राजस्व संग्रह में सुधार ने राज्य को मजबूत आधार दिया है। अब मुख्यमंत्री द्वारा 15 प्रतिशत विकास दर का लक्ष्य निर्धारित किए जाने के बाद सरकार के सामने चुनौती इन सकारात्मक संकेतकों को निरंतर बनाए रखने और जलवायु तथा जल संकट जैसी चुनौतियों के बीच विकास की रफ्तार को और तेज करने की है।

