किसानों के हित में कृषि योजनाओं को गति देने और राज्यों में कृषि क्षेत्र के विकास को मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार ने राजस्थान और तेलंगाना के लिए बड़ी वित्तीय स्वीकृतियां जारी की हैं। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (PM RKVY) और कृषोन्नति योजना (KY) के तहत दोनों राज्यों के लिए कुल 605.71 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की है। इसमें राजस्थान को 340.59 करोड़ रुपये और तेलंगाना को 265.12 करोड़ रुपये मिलेंगे।
यह वित्तीय स्वीकृति दोनों राज्यों में कृषि योजनाओं की प्रगति, अब तक किए गए खर्च और किसानों के हित में प्रस्तावित गतिविधियों की समीक्षा के बाद दी गई है। केंद्र सरकार का उद्देश्य इन योजनाओं के माध्यम से कृषि क्षेत्र में निवेश बढ़ाने, उत्पादन एवं उत्पादकता में सुधार करने, कृषि अवसंरचना को मजबूत करने और किसानों तक सरकारी योजनाओं का लाभ तेजी से पहुंचाना है।
केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने राजस्थान और तेलंगाना के कृषि मंत्रियों के साथ वर्चुअल बैठक में दोनों राज्यों की कृषि योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने तेलंगाना में फॉर्मर आईडी और उर्वरक वितरण के नए मॉडल की सराहना की, जबकि राजस्थान में किसानों को समय पर ऋण उपलब्ध कराने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) की स्थिति पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई।
राजस्थान को 340.59 करोड़ रुपये की मंजूरी
राजस्थान के लिए केंद्र सरकार ने PM RKVY और कृषोन्नति योजना के तहत कुल 340.59 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है। इसमें 216.12 करोड़ रुपये PM RKVY मद में और 124.47 करोड़ रुपये कृषोन्नति योजना के तहत जारी किए जाएंगे।
राजस्थान के लिए 20 अप्रैल 2026 को आयोजित परियोजना अनुमोदन समिति (PAC) की बैठक में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कुल 849.37 करोड़ रुपये की वार्षिक कार्ययोजना को मंजूरी दी गई थी। इस कार्ययोजना में केंद्र सरकार की हिस्सेदारी 509.62 करोड़ रुपये निर्धारित की गई थी।
इसके बाद 4 मई 2026 को राजस्थान को पहली मदर सैंक्शन के रूप में 216.13 करोड़ रुपये जारी किए गए थे। राज्य सरकार ने अब तक इसमें से 164.39 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। यह पहली मदर सैंक्शन का लगभग 76.06 प्रतिशत है।
व्यय की प्रगति और योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति की समीक्षा के बाद केंद्र सरकार ने राजस्थान के लिए अगली वित्तीय स्वीकृति जारी की है। इससे राज्य में कृषि विकास से संबंधित विभिन्न गतिविधियों को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
तेलंगाना को मिलेंगे 265.12 करोड़ रुपये
तेलंगाना के लिए भी केंद्र सरकार ने कृषि योजनाओं के तहत 265.12 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति दी है। इसमें 157.66 करोड़ रुपये PM RKVY के तहत और 107.46 करोड़ रुपये कृषोन्नति योजना के तहत जारी किए जाएंगे।
तेलंगाना के लिए 27 अप्रैल 2026 को आयोजित PAC बैठक में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 651.06 करोड़ रुपये की वार्षिक कार्ययोजना को मंजूरी दी गई थी। इसमें केंद्र सरकार की हिस्सेदारी 390.63 करोड़ रुपये थी।
12 मई 2026 को राज्य को पहली मदर सैंक्शन के रूप में 157.65 करोड़ रुपये जारी किए गए थे। राज्य द्वारा अब तक 96.05 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं, जो पहली मदर सैंक्शन का लगभग 60.93 प्रतिशत है।
व्यय की स्थिति और योजनाओं के क्रियान्वयन की प्रगति को देखते हुए अब तेलंगाना के लिए 265.12 करोड़ रुपये की अतिरिक्त वित्तीय स्वीकृति दी गई है।
फॉर्मर आईडी मॉडल की केंद्रीय मंत्री ने की सराहना
बैठक के दौरान केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने तेलंगाना में किसानों की पहचान और सरकारी सेवाओं को अधिक प्रभावी तरीके से उपलब्ध कराने के लिए अपनाए जा रहे फॉर्मर आईडी मॉडल की विशेष रूप से सराहना की।
फॉर्मर आईडी का उद्देश्य किसानों से संबंधित जानकारी को एक व्यवस्थित डिजिटल पहचान से जोड़ना है, ताकि कृषि क्षेत्र से जुड़ी सरकारी सेवाओं और योजनाओं को अधिक लक्षित एवं पारदर्शी तरीके से लागू किया जा सके।
श्री चौहान ने तेलंगाना के कृषि मंत्री श्री तुम्मला नागेश्वर राव को इस पहल के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की डिजिटल व्यवस्था किसानों तक सरकारी सेवाओं की पहुंच को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है।
कृषि क्षेत्र में डिजिटल तकनीक का महत्व लगातार बढ़ रहा है। किसानों की पहचान, भूमि संबंधी जानकारी, फसल संबंधी डेटा और सरकारी योजनाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने से योजनाओं के क्रियान्वयन और निगरानी को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
उर्वरक वितरण मॉडल को भी मिली तारीफ
तेलंगाना में अपनाए जा रहे उर्वरक वितरण के नए मॉडल की भी केंद्रीय कृषि मंत्री ने सराहना की। किसानों को समय पर और उचित मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराना कृषि उत्पादन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
उर्वरकों की उपलब्धता और वितरण को बेहतर बनाने से किसानों को बुवाई के महत्वपूर्ण समय पर इनपुट प्राप्त करने में सहायता मिल सकती है। साथ ही डिजिटल और व्यवस्थित वितरण प्रणाली से उर्वरकों की उपलब्धता की निगरानी और वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता को मजबूत किया जा सकता है।
केंद्र सरकार लगातार इस बात पर जोर दे रही है कि किसानों को आवश्यक कृषि इनपुट समय पर उपलब्ध हों और सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचे। ऐसे में तेलंगाना का मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी उपयोगी उदाहरण बन सकता है।
दलहन और तिलहन मिशन पर भी जोर
समीक्षा के दौरान तेलंगाना में तिलहन एवं दलहन मिशनों के तहत खर्च की प्रगति को लेकर भी चर्चा हुई। केंद्रीय मंत्री ने पाया कि इन क्षेत्रों में व्यय अपेक्षाकृत पीछे चल रहा है।
उन्होंने राज्य सरकार को इन योजनाओं के क्रियान्वयन और व्यय की नियमित निगरानी करने की आवश्यकता पर जोर दिया। तिलहन और दलहन उत्पादन को बढ़ावा देना देश की कृषि अर्थव्यवस्था के साथ-साथ खाद्य एवं पोषण सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है।
भारत में खाद्य तेलों और दालों की मांग को पूरा करने के लिए घरेलू उत्पादन बढ़ाने की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही है। ऐसे में किसानों को बेहतर तकनीक, गुणवत्तापूर्ण बीज, सिंचाई, उचित कृषि सलाह और बाजार समर्थन उपलब्ध कराकर तिलहन एवं दलहन की खेती को प्रोत्साहित किया जा सकता है।
राजस्थान में KCC की स्थिति पर विशेष ध्यान
राजस्थान के संबंध में केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) की स्थिति पर विशेष ध्यान देने को कहा।
किसान क्रेडिट कार्ड किसानों को कृषि कार्यों के लिए समय पर संस्थागत ऋण उपलब्ध कराने का महत्वपूर्ण माध्यम है। खेती की लागत, बीज, उर्वरक, कीटनाशक, सिंचाई और अन्य कृषि जरूरतों के लिए किसानों को कार्यशील पूंजी की आवश्यकता होती है। ऐसे में आसान और समयबद्ध ऋण सुविधा किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
केंद्रीय मंत्री ने राज्य सरकार से यह सुनिश्चित करने को कहा कि पात्र किसानों को KCC की सुविधा आसानी से उपलब्ध हो और उन्हें कृषि कार्यों के लिए आवश्यक ऋण सहायता समय पर मिल सके।
योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर सरकार का जोर
कृषि मंत्री ने कहा कि वित्तीय स्वीकृतियों का उद्देश्य केवल राज्यों को धन उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि कृषि योजनाओं का समयबद्ध और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है।
PM RKVY और कृषोन्नति योजना के माध्यम से कृषि क्षेत्र में विभिन्न विकास गतिविधियों को सहायता प्रदान की जाती है। राज्यों की जरूरतों और उनकी वार्षिक कार्ययोजनाओं के आधार पर वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाती है।
श्री चौहान ने अधिकारियों और राज्य सरकारों से योजनाओं के क्रियान्वयन में गति लाने तथा स्वीकृत राशि का प्रभावी उपयोग करने पर जोर दिया। उनका कहना है कि केंद्र से मिलने वाली वित्तीय सहायता का वास्तविक लाभ तभी सुनिश्चित होगा जब योजनाओं को जमीन पर समयबद्ध तरीके से लागू किया जाए।
कृषि अवसंरचना को मिलेगा बढ़ावा
राजस्थान और तेलंगाना को जारी की गई वित्तीय सहायता से दोनों राज्यों में कृषि क्षेत्र से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है। इनमें कृषि अवसंरचना को मजबूत करने, उत्पादन क्षमता बढ़ाने, किसानों को कृषि इनपुट उपलब्ध कराने और कृषि विकास से जुड़ी गतिविधियों को आगे बढ़ाने में सहायता मिल सकती है।
कृषि क्षेत्र में केवल उत्पादन बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है। बेहतर भंडारण, सिंचाई, तकनीक, प्रसंस्करण, बाजार संपर्क और किसानों को वित्तीय सहायता जैसी सुविधाओं को भी मजबूत करना आवश्यक है। इसी व्यापक दृष्टिकोण के साथ केंद्र और राज्य सरकारें कृषि विकास योजनाओं को लागू कर रही हैं।
केंद्र-राज्य सहयोग से किसानों को लाभ पहुंचाने का प्रयास
वर्चुअल बैठक में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण सचिव श्री अतीश चंद्रा सहित केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। राजस्थान और तेलंगाना के वरिष्ठ कृषि अधिकारी भी बैठक में वर्चुअली शामिल हुए।
इससे स्पष्ट है कि केंद्र सरकार कृषि योजनाओं की प्रगति की नियमित समीक्षा के साथ-साथ राज्यों के साथ समन्वय को भी प्राथमिकता दे रही है। राज्यों की वास्तविक जरूरतों, खर्च की स्थिति और योजनाओं के प्रदर्शन के आधार पर आगे की वित्तीय सहायता तय की जा रही है।
केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में केंद्र सरकार किसानों के हित में राज्यों को हरसंभव सहयोग उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय से कृषि योजनाओं का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से किसानों तक पहुंचाया जा सकता है।
किसानों तक तेजी से पहुंचेगा योजनाओं का लाभ
राजस्थान और तेलंगाना के लिए जारी कुल 605.71 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब दोनों राज्यों में खरीफ कृषि गतिविधियां तेजी से चल रही हैं। वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता से स्वीकृत कृषि योजनाओं के क्रियान्वयन को गति मिलने की उम्मीद है।
केंद्र सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि योजनाओं के लिए स्वीकृत धनराशि समय पर राज्यों तक पहुंचे और उसका उपयोग किसानों की वास्तविक जरूरतों को पूरा करने में किया जाए।
राजस्थान में KCC की पहुंच और तेलंगाना में फॉर्मर आईडी तथा उर्वरक वितरण जैसे मॉडल पर विशेष जोर यह संकेत देता है कि सरकार कृषि विकास में वित्तीय सहायता के साथ-साथ डिजिटल तकनीक, पारदर्शिता और किसान-केंद्रित सेवाओं को भी समान महत्व दे रही है।
कुल मिलाकर, राजस्थान और तेलंगाना के लिए PM RKVY और कृषोन्नति योजना के तहत जारी यह वित्तीय स्वीकृति दोनों राज्यों के कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण अवसर लेकर आई है। इससे कृषि विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आने, कृषि अवसंरचना को मजबूती मिलने और किसानों तक सरकारी सहायता एवं सेवाओं की पहुंच बेहतर होने की उम्मीद है। केंद्र सरकार का फोकस अब केवल योजनाओं की घोषणा तक सीमित नहीं, बल्कि उनके समयबद्ध क्रियान्वयन, प्रभावी निगरानी और किसानों तक वास्तविक लाभ पहुंचाने पर है।

