भाकृअनुप–राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रबंधन अकादमी (भाकृअनुप–नार्म), हैदराबाद में 8 से 11 अगस्त 2026 तक पूर्व-अनुसंधान सलाहकार समिति (Pre-RAC) की चार दिवसीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में अकादमी के अनुसंधान कार्यक्रमों, प्राथमिकताओं और भविष्य की दिशा पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक की अध्यक्षता भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के पूर्व सचिव तथा अनुसंधान सलाहकार समिति (RAC) के अध्यक्ष डॉ. देवेश चतुर्वेदी, आईएएस ने की।
बैठक का उद्देश्य अकादमी के अनुसंधान एवं क्षमता निर्माण कार्यक्रमों की प्रासंगिकता और प्रभाव को और मजबूत करने के लिए रणनीतिक दिशा तय करना रहा। चार दिवसीय विचार-विमर्श के दौरान अनुसंधान कार्यक्रमों की प्राथमिकताओं के साथ-साथ कृषि अनुसंधान एवं विकास में अकादमी की भूमिका को अधिक प्रभावी बनाने के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई।
बैठक का शुभारंभ 8 अगस्त को अनुसंधान प्रणाली प्रबंधन (RSS) प्रभाग के प्रमुख एवं आरएसएस के सदस्य सचिव डॉ. वी. रामासुब्रमणियन के स्वागत संबोधन से हुआ। इसके बाद भाकृअनुप–नार्म के निदेशक डॉ. रमन मीनाक्षी सुंदरम ने अकादमी की विभिन्न गतिविधियों और अनुसंधान पहलों का विस्तृत अवलोकन प्रस्तुत किया। उन्होंने अकादमी द्वारा संचालित अनुसंधान और क्षमता निर्माण संबंधी गतिविधियों तथा उनके उद्देश्यों की जानकारी बैठक में साझा की।
केंद्रीय क्षेत्र की योजनाओं के प्रभाव का अध्ययन जरूरी
बैठक के समापन अवसर पर RAC अध्यक्ष डॉ. देवेश चतुर्वेदी ने भाकृअनुप–नार्म द्वारा केंद्रीय क्षेत्र की योजनाओं (Central Sector Schemes) पर प्रभाव अध्ययन (Impact Studies) किए जाने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे अध्ययन अकादमी की अनुसंधान क्षमताओं को सामने लाने के साथ-साथ कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय में उसके योगदान को और मजबूत करने में मददगार साबित होंगे।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि योजनाओं के प्रभाव का व्यवस्थित अध्ययन न केवल उनके परिणामों को समझने में सहायता करता है, बल्कि अनुसंधान संस्थानों की भूमिका और उनके योगदान को प्रमाणित करने के लिए भी महत्वपूर्ण है। इस दिशा में प्रभाव अध्ययन अकादमी के अनुसंधान कार्यों को अधिक उपयोगी और परिणाम आधारित बनाने में योगदान कर सकते हैं।
सोशल मीडिया और डिजिटल तकनीक पर वैज्ञानिकों को प्रशिक्षण
डॉ. चतुर्वेदी ने किसानों तक कृषि संबंधी ज्ञान को व्यापक और अधिक प्रभावी तरीके से पहुंचाने के लिए वैज्ञानिकों के प्रशिक्षण पर भी जोर दिया। उन्होंने सोशल मीडिया और डिजिटल प्रौद्योगिकियों के इस्तेमाल से संबंधित प्रशिक्षण कार्यक्रमों को मजबूत करने की आवश्यकता बताई।
कृषि क्षेत्र में वैज्ञानिक जानकारी और अनुसंधान के परिणामों को किसानों तक पहुंचाने में डिजिटल माध्यमों की भूमिका महत्वपूर्ण होती जा रही है। ऐसे में वैज्ञानिकों को आधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया के प्रभावी इस्तेमाल के लिए प्रशिक्षित करने से कृषि ज्ञान के प्रसार को अधिक व्यापक बनाया जा सकता है।
मंत्रालय और राज्य कृषि विश्वविद्यालयों के अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण बढ़ाने की सलाह
बैठक में अकादमी को कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय तथा राज्य कृषि विश्वविद्यालयों (SAUs) के अधिकारियों के लिए अपने प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों का विस्तार करने की सलाह भी दी गई।
डॉ. चतुर्वेदी ने कहा कि इन प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों को संबंधित अधिकारियों की उभरती आवश्यकताओं और जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जाना चाहिए। इससे प्रशिक्षण कार्यक्रमों की उपयोगिता बढ़ाने और कृषि क्षेत्र में काम कर रहे अधिकारियों की क्षमता को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
अनुसंधान और क्षमता निर्माण को मिलेगी रणनीतिक दिशा
चार दिवसीय पूर्व-आरएसी बैठक के दौरान हुए विचार-विमर्श से भाकृअनुप–नार्म की अनुसंधान, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण पहलों को आगे मजबूत करने के लिए रणनीतिक दिशा मिलने की उम्मीद है। बैठक में अकादमी के अनुसंधान कार्यक्रमों की प्रासंगिकता और उनके प्रभाव को बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया।
बैठक में सामने आए सुझावों के आधार पर अकादमी के अनुसंधान एवं क्षमता निर्माण कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी, जरूरत आधारित और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में आगे काम किए जाने की उम्मीद है। साथ ही, कृषि अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्र में भाकृअनुप–नार्म के योगदान को और मजबूत करने पर जोर रहेगा।
इस बैठक ने यह भी रेखांकित किया कि कृषि क्षेत्र में अनुसंधान के साथ-साथ ज्ञान प्रसार, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण को समान महत्व देना आवश्यक है। किसानों तक वैज्ञानिक जानकारी पहुंचाने से लेकर मंत्रालयों और राज्य कृषि विश्वविद्यालयों के अधिकारियों की क्षमताओं को मजबूत करने तक, अकादमी की भूमिका को व्यापक बनाने की दिशा में बैठक में महत्वपूर्ण सुझाव सामने आए।
पूर्व-आरएसी बैठक के दौरान हुए विचार-विमर्श से भाकृअनुप–नार्म के आगामी अनुसंधान, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों को नई रणनीतिक दिशा मिलने की उम्मीद है, जिससे कृषि अनुसंधान एवं विकास में अकादमी के प्रभाव को और बढ़ाया जा सकेगा।
