देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, शिक्षा, खेल, नागरिक सुरक्षा, सेमीकंडक्टर निर्माण, परमाणु ऊर्जा और महिला सशक्तिकरण से जुड़े कई महत्वपूर्ण लक्ष्यों और पहलों की घोषणा की। प्रधानमंत्री के संबोधन में तकनीकी आत्मनिर्भरता से लेकर युवाओं के कौशल विकास और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने तक पर विशेष जोर रहा।
प्रधानमंत्री ने अगले एक वर्ष में एक करोड़ युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में प्रशिक्षित करने, विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग नेटवर्क तैयार करने, 5 से 15 वर्ष की आयु के बच्चों में खेल प्रतिभाओं की पहचान के लिए देशव्यापी टैलेंट हंट अभियान शुरू करने और आधुनिक चुनौतियों से निपटने के लिए एक मजबूत सिविल डिफेंस नेटवर्क विकसित करने की घोषणा की।
इसके अलावा भारत ने वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है। इस दशक के भीतर पांच नए परमाणु रिएक्टर शुरू करने की दिशा में भी आगे बढ़ने की बात कही गई। सेमीकंडक्टर क्षेत्र में पांच से आठ नए संयंत्र स्थापित करने तथा देश में छह करोड़ लखपति दीदियां बनाने का नया लक्ष्य भी प्रधानमंत्री ने सामने रखा।
एक साल में एक करोड़ युवाओं को AI की ट्रेनिंग
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तेजी से दुनिया की अर्थव्यवस्था, रोजगार और तकनीकी क्षेत्र को बदल रहा है। ऐसे समय में भारत के युवाओं को AI की क्षमताओं से लैस करना जरूरी है। इसी उद्देश्य से सरकार अगले एक वर्ष में एक करोड़ युवाओं को AI स्किलिंग प्रदान करने की दिशा में काम करेगी।
यह पहल युवाओं को भविष्य की तकनीकी जरूरतों के अनुरूप तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। AI का उपयोग कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, विनिर्माण, वित्त, परिवहन और विभिन्न सेवा क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में AI संबंधी कौशल रखने वाले युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
प्रधानमंत्री ने संकेत दिया कि भारत केवल AI का उपयोग करने वाला देश न बने, बल्कि इस तकनीक के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की क्षमता भी विकसित करे। इसके लिए बड़ी संख्या में युवाओं को प्रशिक्षण देना महत्वपूर्ण होगा।
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग नेटवर्क
प्रधानमंत्री ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए भी बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा कि गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर महंगी कोचिंग का आर्थिक बोझ पड़ता है। इस समस्या को देखते हुए देश में मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग का व्यापक नेटवर्क तैयार किया जाएगा।
इसके लिए डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, उपलब्ध प्रतिभाओं और शिक्षकों को एक मंच पर लाने की दिशा में काम किया जाएगा। इसका उद्देश्य देश के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण तैयारी की सुविधा उपलब्ध कराना है, ताकि आर्थिक स्थिति किसी प्रतिभाशाली विद्यार्थी की सफलता के रास्ते में बाधा न बने।
ऑनलाइन माध्यम से कोचिंग की सुविधा उपलब्ध होने से दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले विद्यार्थियों को भी विशेषज्ञ शिक्षकों और अध्ययन सामग्री तक पहुंच मिल सकती है। इससे शिक्षा के क्षेत्र में डिजिटल संसाधनों के उपयोग को और बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
5 से 15 वर्ष के बच्चों के लिए देशव्यापी खेल प्रतिभा खोज
प्रधानमंत्री ने खेल प्रतिभाओं की पहचान के लिए देशव्यापी टैलेंट हंट अभियान चलाने की घोषणा भी की। इसके तहत गांवों, शहरों और स्कूलों में 5 से 15 वर्ष की आयु के बच्चों के बीच खेल प्रतिभाओं की तलाश की जाएगी।
पहचान की गई प्रतिभाओं को विशेष प्रशिक्षण उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा, ताकि उन्हें भविष्य के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी के रूप में विकसित किया जा सके।
प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से उन ओलंपिक खेलों पर ध्यान देने की आवश्यकता बताई, जिनमें भारत अभी पर्याप्त भागीदारी नहीं करता या जिनमें भारतीय खिलाड़ी क्वालीफाई करने में सफल नहीं हो पाते हैं। ऐसे खेलों में शुरुआती स्तर से प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें वैज्ञानिक एवं विशेषज्ञ प्रशिक्षण देने पर जोर दिया जाएगा।
इस पहल का उद्देश्य भारत में खेल प्रतिभाओं के विशाल आधार को व्यवस्थित तरीके से सामने लाना और भविष्य में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए मजबूत खिलाड़ी तैयार करना है।
आधुनिक चुनौतियों के लिए मजबूत सिविल डिफेंस नेटवर्क
प्रधानमंत्री ने बदलते सुरक्षा परिदृश्य को देखते हुए देश में एक सशक्त और जीवंत सिविल डिफेंस नेटवर्क विकसित करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में युद्ध की प्रकृति बदल रही है और खतरे केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रह गए हैं।
उन्होंने कहा कि रिफाइनरी, बैंकिंग क्षेत्र, डेटा सेंटर, कारखाने और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे भी आधुनिक चुनौतियों से प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में पिछली सदी के युद्धों को ध्यान में रखकर तैयार की गई नागरिक सुरक्षा व्यवस्थाओं को नए दौर की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करना जरूरी है।
इसके तहत नागरिकों को आधुनिक सुरक्षा प्रणालियों और आपात परिस्थितियों से निपटने के तरीकों के बारे में जागरूक किया जाएगा। साथ ही बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों को जोड़कर ऐसा सिविल डिफेंस बल तैयार करने की दिशा में काम किया जाएगा, जो आधुनिक चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हो।
सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर जोर
प्रधानमंत्री ने डिजिटल और तकनीकी दुनिया में सेमीकंडक्टर चिप्स की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत इस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
प्रधानमंत्री के अनुसार, देश में तीन सेमीकंडक्टर संयंत्रों में काम शुरू हो चुका है और इन संयंत्रों से उत्पादन का निर्यात भी शुरू हो गया है। आने वाले सात से आठ वर्षों में पांच से आठ और सेमीकंडक्टर संयंत्र स्थापित किए जाने की दिशा में आगे बढ़ने की बात कही गई।
सेमीकंडक्टर आज मोबाइल फोन, कंप्यूटर, ऑटोमोबाइल, रक्षा उपकरण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा सेंटर और विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की आधारभूत जरूरत है। इसलिए इस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता भारत की तकनीकी और रणनीतिक क्षमता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
प्रधानमंत्री ने सेमीकंडक्टर आत्मनिर्भरता को विकसित भारत के लक्ष्य से जोड़ते हुए कहा कि इस क्षेत्र में मजबूत क्षमता का निर्माण देश की तकनीकी अर्थव्यवस्था को नई गति दे सकता है।
2047 तक 100 GW परमाणु ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य
भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए प्रधानमंत्री ने परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में भी बड़ा लक्ष्य घोषित किया। उन्होंने कहा कि AI, चिप निर्माण और डेटा सेंटर जैसी आधुनिक तकनीकों के विस्तार के लिए बड़ी मात्रा में ऊर्जा की आवश्यकता होगी। ऐसे में देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना जरूरी है।
भारत ने 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है। इसके साथ ही इस दशक के भीतर पांच नए परमाणु रिएक्टर शुरू करने की दिशा में काम किया जाएगा।
प्रधानमंत्री ने परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में हुई प्रगति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत ने इस वर्ष फास्ट ब्रीडर परमाणु तकनीक के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। यह उपलब्धि परमाणु ईंधन के क्षेत्र में देश की आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
छह करोड़ लखपति दीदियां बनाने का नया लक्ष्य
प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक शक्ति और महिला नेतृत्व वाले विकास को भी प्रमुखता दी। उन्होंने कहा कि देश में तीन करोड़ लखपति दीदियां बनाने का पिछला लक्ष्य पार किया जा चुका है। अब सरकार ने इस लक्ष्य को आगे बढ़ाते हुए छह करोड़ लखपति दीदियां बनाने का नया लक्ष्य रखा है।
लखपति दीदी पहल का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों और विभिन्न आर्थिक गतिविधियों के माध्यम से आय बढ़ाने के अवसर उपलब्ध कराना है। महिलाओं की आय में वृद्धि से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ-साथ ग्रामीण बाजार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिलती है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि अतिरिक्त तीन करोड़ लखपति दीदियों के निर्माण से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बड़ा परिवर्तन लाया जा सकता है। महिला उद्यमिता, स्वयं सहायता समूहों, कृषि आधारित गतिविधियों, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण और अन्य ग्रामीण व्यवसायों के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में यह लक्ष्य महत्वपूर्ण हो सकता है।
तकनीक से आत्मनिर्भरता तक, व्यापक विकास का रोडमैप
प्रधानमंत्री की स्वतंत्रता दिवस घोषणाओं में एक ओर जहां भविष्य की तकनीकों के लिए युवाओं को तैयार करने पर जोर दिखाई दिया, वहीं दूसरी ओर शिक्षा, खेल, नागरिक सुरक्षा, ऊर्जा और महिला सशक्तिकरण को भी विकास के व्यापक एजेंडे से जोड़ा गया।
एक करोड़ युवाओं की AI स्किलिंग से भारत के युवा कार्यबल को भविष्य की तकनीकी अर्थव्यवस्था के लिए तैयार करने का लक्ष्य है। मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग से शिक्षा के अवसरों में आर्थिक असमानता को कम करने का प्रयास किया जाएगा। खेल प्रतिभा खोज अभियान के माध्यम से छोटी उम्र में प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए तैयार करने पर जोर होगा।
इसी तरह सेमीकंडक्टर निर्माण में आत्मनिर्भरता और परमाणु ऊर्जा क्षमता में विस्तार भारत की तकनीकी एवं ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। वहीं छह करोड़ लखपति दीदियों का लक्ष्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भूमिका को और मजबूत करने की कोशिश है।
विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में नई प्राथमिकताएं
प्रधानमंत्री के संबोधन में घोषित ये लक्ष्य आने वाले वर्षों में भारत की विकास प्राथमिकताओं की व्यापक तस्वीर प्रस्तुत करते हैं। सरकार का जोर नई तकनीकों को अपनाने के साथ-साथ देश में आवश्यक तकनीकी और औद्योगिक क्षमता विकसित करने पर है।
AI, सेमीकंडक्टर और परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता के साथ शिक्षा, खेल और महिला सशक्तिकरण को आगे बढ़ाने की कोशिश देश के मानव संसाधन और आर्थिक आधार को मजबूत कर सकती है।
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री द्वारा की गई घोषणाओं में युवाओं को नए कौशल देने, बच्चों की प्रतिभा को शुरुआती स्तर पर पहचानने, विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने, नागरिक सुरक्षा को आधुनिक बनाने और ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने पर विशेष जोर रहा।
इन पहलों और लक्ष्यों का प्रभाव आने वाले वर्षों में देश के रोजगार, शिक्षा, तकनीक, खेल, ऊर्जा, विनिर्माण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों में देखने को मिल सकता है। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन के माध्यम से आत्मनिर्भर, तकनीकी रूप से सक्षम और विकसित भारत के निर्माण की दिशा में कई महत्वपूर्ण प्राथमिकताएं सामने रखीं।

