सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में देशभक्ति, राष्ट्रप्रेम और राष्ट्र निर्माण के संकल्प के साथ 80वां स्वतंत्रता दिवस हर्षोल्लास एवं गरिमापूर्ण वातावरण में मनाया गया। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम में कुलपति डॉ. त्रिवेणी दत्त ने ध्वजारोहण किया। ध्वजारोहण के बाद उपस्थित शिक्षकों, अधिकारियों, कर्मचारियों एवं छात्र-छात्राओं ने राष्ट्रगान के माध्यम से देश के प्रति अपनी निष्ठा और सम्मान व्यक्त किया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर में उत्साह और देशभक्ति का माहौल देखने को मिला। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षक, वैज्ञानिक, कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान देश की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले वीर शहीदों और स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धापूर्वक नमन किया गया।
स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों का भारत बनाना हमारी जिम्मेदारी
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कुलपति डॉ. त्रिवेणी दत्त ने कहा कि भारत को स्वतंत्र कराने के लिए हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने जिस साहस, त्याग और संघर्ष का परिचय दिया, वह आज भी प्रत्येक भारतीय के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों ने जिस भारत का सपना देखा था, उसे साकार करना ही उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन का इतिहास हमें यह सिखाता है कि बड़े लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए साहस, धैर्य, अनुशासन और त्याग की आवश्यकता होती है। हमारे वीर स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने व्यक्तिगत हितों और जीवन की चिंता किए बिना देश को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उनके संघर्ष और बलिदान के कारण ही आज हम स्वतंत्र वातावरण में अपने विचार व्यक्त करने, शिक्षा प्राप्त करने और देश के विकास में योगदान देने के लिए सक्षम हैं।
कुलपति ने कहा कि आजादी प्राप्त करना जितना महत्वपूर्ण था, उतना ही महत्वपूर्ण उसकी रक्षा करना और देश को निरंतर विकास के मार्ग पर आगे बढ़ाना है। वर्तमान समय में भारत के सामने विकास, समृद्धि, तकनीकी प्रगति, शिक्षा, रोजगार और आत्मनिर्भरता सहित अनेक नई चुनौतियां हैं। इन चुनौतियों का सामना ईमानदारी, मेहनत, अनुशासन और राष्ट्रीय एकता की भावना के साथ किया जाना चाहिए।
स्वतंत्रता अधिकारों के साथ जिम्मेदारियों का भी प्रतीक
डॉ. त्रिवेणी दत्त ने कहा कि स्वतंत्रता केवल अधिकारों का नाम नहीं है, बल्कि यह नागरिकों को अनेक जिम्मेदारियां भी प्रदान करती है। प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह देश की एकता और अखंडता को मजबूत करने में अपनी भूमिका निभाए। संविधान और कानून का सम्मान करना तथा समाज में भाईचारे, सद्भाव और समानता की भावना को बढ़ावा देना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि देश की प्रगति केवल सरकार या किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं है। राष्ट्र निर्माण एक सामूहिक प्रक्रिया है, जिसमें समाज के प्रत्येक वर्ग की भूमिका महत्वपूर्ण है। शिक्षण संस्थान इस दिशा में विशेष योगदान दे सकते हैं, क्योंकि विश्वविद्यालय केवल डिग्री प्रदान करने वाले संस्थान नहीं हैं, बल्कि वे देश के भविष्य के नागरिकों और नेतृत्वकर्ताओं को तैयार करने के प्रमुख केंद्र हैं।
कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ-साथ राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों को भी समझना चाहिए। विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, अनुशासन, नवाचार, सामाजिक जिम्मेदारी और देशभक्ति की भावना विकसित करना समय की आवश्यकता है।
विज्ञान, तकनीक और शिक्षा से आगे बढ़ रहा भारत
कुलपति डॉ. त्रिवेणी दत्त ने कहा कि आज भारत विज्ञान, तकनीक, शिक्षा और अर्थव्यवस्था सहित विभिन्न क्षेत्रों में निरंतर प्रगति कर रहा है। देश आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है और वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बना रहा है।
उन्होंने कहा कि कृषि विश्वविद्यालयों की भूमिका इस विकास यात्रा में अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत की अर्थव्यवस्था और ग्रामीण जीवन में कृषि का महत्वपूर्ण स्थान है। ऐसे में कृषि शिक्षा, अनुसंधान और प्रसार के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने, कृषि को आधुनिक बनाने तथा बदलते जलवायु एवं बाजार की चुनौतियों का सामना करने के लिए नई तकनीकों को विकसित और किसानों तक पहुंचाना आवश्यक है।
उन्होंने विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों और शिक्षकों से आह्वान किया कि वे अनुसंधान को खेत और किसान से जोड़ने की दिशा में निरंतर कार्य करें। कृषि क्षेत्र में नई तकनीकों, आधुनिक कृषि पद्धतियों, उन्नत किस्मों, संसाधन संरक्षण, प्राकृतिक एवं टिकाऊ कृषि तथा कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालय की भूमिका महत्वपूर्ण है।
राष्ट्र निर्माण में शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका
कुलपति ने शिक्षकों, अधिकारियों और कर्मचारियों से कहा कि वे शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर गुणवत्ता सुधार के लिए कार्य करें। उन्होंने नई शिक्षा नीति, 2025 के उद्देश्यों एवं प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू करने तथा निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सामूहिक प्रयास करने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करना आवश्यक है। विद्यार्थियों को केवल पारंपरिक ज्ञान तक सीमित रखने के बजाय उन्हें कौशल, नवाचार, अनुसंधान, तकनीकी ज्ञान और व्यावहारिक अनुभव से जोड़ना चाहिए। कृषि शिक्षा के क्षेत्र में यह और भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि किसानों और कृषि क्षेत्र की आवश्यकताएं लगातार बदल रही हैं।
उन्होंने विश्वविद्यालय परिवार से आह्वान किया कि सभी लोग मिलकर संस्थान की शैक्षणिक एवं अनुसंधान गतिविधियों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए कार्य करें। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की उपलब्धियां तभी सार्थक होंगी, जब उनका लाभ समाज और विशेष रूप से किसानों तक पहुंचे।
आत्मनिर्भर और समृद्ध भारत के निर्माण का संकल्प
कुलपति ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सभी से अपील की कि वे अपने कार्यों और जिम्मेदारियों के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का संकल्प लें। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति अपने क्षेत्र में ईमानदारी और पूरी निष्ठा के साथ कार्य करके देश की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।
उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता ऐसे भारत के निर्माण की है जो मजबूत, समृद्ध, आत्मनिर्भर और विश्व पटल पर गौरव के साथ अपना स्थान बनाए। इसके लिए शिक्षा, अनुसंधान, तकनीक, कृषि, उद्योग और सामाजिक विकास के सभी क्षेत्रों में मिलकर काम करना होगा।
उन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले वीर शहीदों को नमन करते हुए कहा कि उनके बलिदान को हमेशा याद रखना और उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।
विश्वविद्यालय परिवार की रही सहभागिता
स्वतंत्रता दिवस समारोह में विश्वविद्यालय के वित्त नियंत्रक पंकज चतुर्वेदी, रजिस्ट्रार डॉ. वीपी सिंह सहित बड़ी संख्या में वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षक, वैज्ञानिक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में डॉ. कमल खिलाड़ी, डॉ. सत्येन्द्र खारी, डॉ. आर.एस. सेंगर, डॉ. रामजी सिंह, डॉ. बिजेन्द्र सिंह, डॉ. जयवीर यादव, डॉ. राजीव सिंह, डॉ. पंकज कुमार, डॉ. लोकेश गंगवार, डॉ. पी.के. सिंह, डॉ. हरिओम कटियार, डॉ. अशोक यादव, डॉ. नीलेश, डॉ. यू.पी. शाही, डॉ. डी.के. सिंह, डॉ. रश्मि और डॉ. अर्चना आर्या सहित विश्वविद्यालय के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।
इसके अलावा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की। विद्यार्थियों में स्वतंत्रता दिवस को लेकर विशेष उत्साह दिखाई दिया। विश्वविद्यालय परिसर में तिरंगे के प्रति सम्मान और देशभक्ति की भावना पूरे कार्यक्रम के दौरान दिखाई दी।
युवाओं से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान
स्वतंत्रता दिवस समारोह का एक महत्वपूर्ण संदेश युवाओं के लिए भी रहा। भारत की युवा आबादी देश की सबसे बड़ी शक्तियों में से एक है। कृषि विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों में अध्ययनरत विद्यार्थी भविष्य में वैज्ञानिक, कृषि विशेषज्ञ, उद्यमी, प्रशासक और समाज के विभिन्न क्षेत्रों में नेतृत्वकर्ता के रूप में अपनी भूमिका निभाएंगे।
ऐसे में युवाओं में राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना बेहद जरूरी है। विद्यार्थियों को अपनी शिक्षा और प्रतिभा का उपयोग देश की समस्याओं के समाधान के लिए करना चाहिए। कृषि क्षेत्र में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए किसानों की समस्याओं को समझना और उनके समाधान के लिए तकनीकी एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना राष्ट्र सेवा का महत्वपूर्ण माध्यम हो सकता है।
कुलपति का संदेश भी इसी व्यापक भावना पर केंद्रित रहा कि प्रत्येक व्यक्ति अपने दायित्व को ईमानदारी से निभाए और देश को आगे बढ़ाने में अपना योगदान दे।
मिष्ठान वितरण के साथ हुआ कार्यक्रम का समापन
स्वतंत्रता दिवस समारोह के अंत में उपस्थित सभी लोगों के बीच मिष्ठान का वितरण किया गया। इसके साथ ही कार्यक्रम का समापन हुआ। पूरे आयोजन में विश्वविद्यालय परिवार ने देश के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए एक मजबूत, समृद्ध, आत्मनिर्भर और विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने का संकल्प लिया।
सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में आयोजित यह स्वतंत्रता दिवस समारोह केवल राष्ट्रीय पर्व के उत्सव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने विश्वविद्यालय परिवार को अपने कर्तव्यों, जिम्मेदारियों और राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका पर चिंतन करने का अवसर भी दिया। वीर स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग को याद करते हुए विश्वविद्यालय परिवार ने शिक्षा, अनुसंधान, कृषि विकास और सामाजिक जिम्मेदारी के माध्यम से देश की प्रगति में निरंतर योगदान देने का संदेश दिया।

