राजस्थान में खरीफ फसलों के लिए खाद की उपलब्धता को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि राज्य के किसानों को जरूरत के समय खाद नहीं मिल पा रही है। पार्टी का कहना है कि कई किसानों को खाद लेने के लिए घंटों लाइन में खड़ा होना पड़ रहा है। वहीं, राजस्थान सरकार का दावा है कि राज्य में खरीफ फसलों के लिए खाद की कोई कमी नहीं है और किसानों की जरूरत के अनुसार लगातार आपूर्ति की जा रही है।
राज्य सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, राजस्थान में अब तक कुल 13.12 लाख मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध कराया जा चुका है। इसमें केंद्र सरकार की ओर से खरीफ सीजन के लिए शुरुआती तौर पर आवंटित 9.28 लाख मीट्रिक टन यूरिया भी शामिल है। कृषि एवं उद्यानिकी विभाग की प्रमुख सचिव मंजू राजपाल के अनुसार, वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद राजस्थान को उसके शुरुआती आवंटन की तुलना में करीब 141 प्रतिशत तक यूरिया उपलब्ध कराया गया है।
सरकार का कहना है कि राज्य में खाद की उपलब्धता को लगातार बनाए रखने के लिए केंद्र और राज्य स्तर पर निगरानी की जा रही है।
राजस्थान में 13.12 लाख टन यूरिया उपलब्ध
कृषि एवं उद्यानिकी विभाग की प्रमुख सचिव मंजू राजपाल के अनुसार, खरीफ सीजन के दौरान राजस्थान के लिए केंद्र सरकार ने शुरुआत में 9.28 लाख मीट्रिक टन यूरिया आवंटित किया था। इसके मुकाबले अब तक राज्य में कुल 13.12 लाख मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध कराया जा चुका है।
सरकार के मुताबिक यह मात्रा शुरुआती आवंटन का करीब 141 प्रतिशत है। सरकार का कहना है कि इससे यह स्पष्ट होता है कि राज्य में यूरिया की उपलब्धता को प्राथमिकता दी जा रही है।
मध्य अगस्त तक राजस्थान में करीब 2.59 लाख मीट्रिक टन यूरिया का स्टॉक उपलब्ध था। सरकार के अनुसार, उर्वरकों की आपूर्ति लगातार जारी है और केंद्र सरकार राज्यों को हर महीने उनकी जरूरत के अनुसार उर्वरक आवंटित करती है।
DAP की मांग से कम हुई उपलब्धता
राजस्थान में DAP यानी डाय-अमोनियम फॉस्फेट को लेकर भी आंकड़े सामने आए हैं। सरकार के अनुसार, अप्रैल से अगस्त के बीच राज्य में 3.80 लाख मीट्रिक टन DAP की मांग थी। इसके मुकाबले अब तक 3.41 लाख मीट्रिक टन DAP उपलब्ध कराया गया है। इसमें 1 अप्रैल को उपलब्ध स्टॉक भी शामिल है।
इस तरह सरकारी आंकड़ों के अनुसार, DAP की उपलब्धता राज्य की निर्धारित मांग से कम रही है। हालांकि, सरकार का कहना है कि आयातित DAP की आपूर्ति में आई बाधाओं के बावजूद किसानों के लिए दूसरे फॉस्फेटिक उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई।
सरकार ने किसानों की जरूरत पूरी करने के लिए NPK और SSP की उपलब्धता बढ़ाने का भी दावा किया है।
NPK और SSP से पूरी की जा रही जरूरत
राज्य सरकार के अनुसार, अब तक राजस्थान में 1.71 लाख मीट्रिक टन NPK और 3.76 लाख मीट्रिक टन सिंगल सुपर फॉस्फेट यानी SSP उपलब्ध कराया गया है।
सरकार का दावा है कि DAP समेत इन फॉस्फेटिक उर्वरकों को मिलाकर कुल 7.88 लाख मीट्रिक टन फॉस्फेटिक खाद किसानों के लिए उपलब्ध कराई गई है।
सरकार के अनुसार, इसका उद्देश्य DAP की आयात संबंधी दिक्कतों के बीच किसानों को वैकल्पिक उर्वरक उपलब्ध कराना है, ताकि खरीफ फसलों की पोषण संबंधी जरूरत प्रभावित न हो।
मध्य अगस्त में राज्य में 2.59 लाख मीट्रिक टन यूरिया, 67 हजार मीट्रिक टन DAP, 79 हजार मीट्रिक टन NPK और 1.69 लाख मीट्रिक टन SSP का स्टॉक बताया गया।
कांग्रेस का आरोप- किसानों को नहीं मिल रही खाद
दूसरी ओर, कांग्रेस ने सरकार के इन आंकड़ों पर सवाल उठाए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने आरोप लगाया है कि किसानों को फसल बचाने के लिए जरूरी खाद भी समय पर नहीं मिल पा रही है।
गहलोत के अनुसार, कई किसान DAP की कुछ बोरियां लेने के लिए भी सुबह से लंबी कतारों में खड़े होने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि कागजों में पर्याप्त स्टॉक होने के बावजूद जमीन पर किसानों को खाद के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है।
कांग्रेस का आरोप है कि यह समस्या राज्य के कई हिस्सों में दिखाई दे रही है। पार्टी का कहना है कि केवल सरकारी रिकॉर्ड में खाद का स्टॉक दिखाने से किसानों की समस्या का समाधान नहीं होता। खाद को समय पर और सही मात्रा में किसान तक पहुंचाना भी उतना ही जरूरी है।
किसानों के सामने सबसे बड़ी समस्या वितरण की
राजस्थान में खाद की उपलब्धता को लेकर सामने आ रहे सरकारी आंकड़े और विपक्ष के आरोप एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा करते हैं। वह सवाल है कि राज्य में खाद का पर्याप्त स्टॉक होने के बावजूद कुछ किसानों को खाद के लिए परेशानी क्यों हो रही है?
किसानों के लिए केवल यह जरूरी नहीं है कि राज्य में कितनी खाद उपलब्ध है। उनके लिए यह ज्यादा महत्वपूर्ण है कि उनके नजदीकी सहकारी समिति, अधिकृत विक्रेता या वितरण केंद्र पर खाद समय पर उपलब्ध हो।
खरीफ सीजन में धान, बाजरा, मक्का, कपास, मूंगफली और अन्य फसलों के लिए किसानों को अलग-अलग समय पर उर्वरकों की जरूरत पड़ती है। अगर खाद की आपूर्ति में देरी होती है तो फसल की बढ़वार और उत्पादन पर असर पड़ सकता है।
विशेष रूप से DAP की जरूरत फसल की शुरुआती अवस्था में अधिक महत्वपूर्ण होती है। इसलिए किसानों के लिए इसकी उपलब्धता समय पर होना जरूरी है।
केंद्र से हर महीने होता है खाद का आवंटन
राजस्थान सरकार के अनुसार, केंद्र सरकार राज्यों को हर महीने उर्वरकों का आवंटन करती है। इसके आधार पर राज्य में खाद की आपूर्ति और वितरण किया जाता है।
सरकार का कहना है कि वैश्विक स्तर पर उर्वरकों की आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियों के बावजूद राजस्थान को पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
DAP की अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति में परेशानी के कारण राज्य में NPK और SSP जैसे वैकल्पिक फॉस्फेटिक उर्वरकों की उपलब्धता पर भी जोर दिया गया है।
स्टॉक और किसान की जरूरत के बीच अंतर खत्म करना जरूरी
राजस्थान में खाद को लेकर सामने आया विवाद केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं है। इसका सीधा संबंध किसानों की फसल और उनकी आय से है। अगर किसान को खाद समय पर नहीं मिलती है तो उसका असर उत्पादन लागत और पैदावार दोनों पर पड़ सकता है।
सरकार के आंकड़े बताते हैं कि राज्य में बड़ी मात्रा में खाद उपलब्ध है। दूसरी तरफ, कांग्रेस और किसानों की ओर से वितरण में परेशानी की बात कही जा रही है। ऐसे में सबसे जरूरी है कि सरकार स्टॉक की उपलब्धता के साथ-साथ जिला, ब्लॉक और गांव स्तर पर वितरण व्यवस्था की भी नियमित निगरानी करे।
अगर किसी जिले में खाद का स्टॉक उपलब्ध है लेकिन किसान तक नहीं पहुंच रहा है, तो वहां वितरण व्यवस्था में सुधार की जरूरत है।
आगे क्या होगा?
राजस्थान में खरीफ सीजन के दौरान खाद की मांग बनी रहने की संभावना है। ऐसे में आने वाले दिनों में यूरिया, DAP, NPK और SSP की आपूर्ति पर नजर रखना जरूरी होगा।
सरकार का दावा है कि राज्य में खाद की कमी नहीं है और आपूर्ति लगातार जारी है। वहीं कांग्रेस सरकार से वितरण व्यवस्था को तत्काल बेहतर करने की मांग कर रही है।
किसानों के लिए सबसे अहम बात यह है कि खाद उन्हें सही समय पर, निर्धारित कीमत पर और पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हो। राजस्थान में उपलब्ध खाद के आंकड़े भले ही पर्याप्त स्टॉक की तस्वीर दिखाते हों, लेकिन असली स्थिति का आकलन तभी होगा जब किसान को अपने नजदीकी केंद्र पर बिना लंबी परेशानी के जरूरत के अनुसार खाद मिल सके।
इसलिए आने वाले दिनों में राजस्थान सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल खाद का स्टॉक बनाए रखना नहीं, बल्कि स्टॉक से किसान तक खाद पहुंचाने की व्यवस्था को मजबूत करना होगी।

