राजस्थान सरकार ने किसानों को समय पर और उनकी वास्तविक जरूरत के अनुसार खाद उपलब्ध कराने के लिए ‘फर्टिलाइजर सेल फ्रेमवर्क’ यानी ‘Framework for Fertiliser Sale’ व्यवस्था का विस्तार शुरू कर दिया है। यह डिजिटल व्यवस्था पूरे राज्य में चरणबद्ध तरीके से लागू की जा रही है। सरकार का उद्देश्य खाद की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के साथ-साथ कालाबाजारी, जमाखोरी और अनियमित वितरण पर प्रभावी रोक लगाना है।
कृषि विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, नई डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से खाद की मांग, उपलब्धता और वितरण की पूरी प्रक्रिया पर नजर रखी जा सकेगी। इससे यह पता लगाना आसान होगा कि किस क्षेत्र में किसानों को कितनी खाद की जरूरत है और उसके मुकाबले कितना स्टॉक उपलब्ध है।
सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था से खाद की वास्तविक जरूरत और उपलब्ध स्टॉक के बीच बेहतर तालमेल बनाया जा सकेगा। साथ ही, किसानों को खाद लेने के लिए अनावश्यक रूप से कई जगह चक्कर लगाने की जरूरत कम होगी।
सिरोही और राजसमंद से शुरू हुआ पायलट प्रोजेक्ट
राजस्थान में इस डिजिटल खाद वितरण व्यवस्था को सबसे पहले सिरोही और राजसमंद जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू किया गया था। कृषि विभाग के अनुसार, इन दोनों जिलों में 25 जून से इस व्यवस्था पर काम शुरू हुआ और जुलाई में इसे सफलतापूर्वक लागू किया गया।
कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल के अनुसार, सिरोही और राजसमंद में अब तक 78 हजार से अधिक किसानों को 12 हजार मीट्रिक टन से ज्यादा खाद वितरित की जा चुकी है।
सरकार के अनुसार, पायलट प्रोजेक्ट से मिले परिणामों ने यह दिखाया है कि डिजिटल और किसान-केंद्रित खाद वितरण व्यवस्था को बड़े स्तर पर लागू किया जा सकता है।
इस व्यवस्था की मदद से खाद की मांग से लेकर उसकी उपलब्धता और किसान तक वितरण की पूरी प्रक्रिया की निगरानी संभव हुई है। इससे वास्तविक जरूरत वाले किसानों तक खाद पहुंचाने में मदद मिली है।
अब पांच और जिलों में लागू हुई व्यवस्था
सिरोही और राजसमंद में मिले सकारात्मक परिणामों के बाद राजस्थान सरकार ने इस डिजिटल व्यवस्था का विस्तार दूसरे जिलों में भी शुरू कर दिया है।
25 अगस्त से बूंदी, चित्तौड़गढ़, बांसवाड़ा, धौलपुर और चूरू जिलों में ‘Framework for Fertiliser Sale’ लागू किया गया है।
सरकार की योजना जल्द ही 12 अन्य जिलों में भी इस व्यवस्था को लागू करने की है। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से राजस्थान के सभी जिलों को इस डिजिटल खाद वितरण प्रणाली से जोड़ा जाएगा।
इसका मतलब है कि आने वाले समय में राज्य के अधिक से अधिक किसानों को खाद की बुकिंग और वितरण की डिजिटल सुविधा मिल सकेगी।
किसान अपनी जरूरत के अनुसार कर सकेंगे खाद की बुकिंग
नई व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि किसान अपनी जरूरत के अनुसार खाद की बुकिंग कर सकेंगे।
बुकिंग करने के बाद किसान को 48 घंटे के लिए वैध टोकन जारी किया जाएगा। इस टोकन के आधार पर किसान अपने नजदीकी अधिकृत खाद विक्रेता से खाद प्राप्त कर सकेगा।
इससे किसान को यह जानकारी पहले से मिल सकेगी कि उसे खाद कहां से प्राप्त करनी है और किस प्रक्रिया के तहत खाद दी जाएगी।
सरकार का मानना है कि इससे किसानों का समय और मेहनत दोनों बचेंगे।
48 घंटे में खाद नहीं ली तो करनी होगी दोबारा बुकिंग
डिजिटल व्यवस्था में किसानों के लिए 48 घंटे की समय सीमा तय की गई है। टोकन जारी होने के बाद किसान को निर्धारित समय के भीतर अधिकृत विक्रेता से खाद लेनी होगी।
अगर किसान 48 घंटे के भीतर खाद नहीं लेता है तो उसका टोकन प्रभावी नहीं रहेगा और उसे खाद प्राप्त करने के लिए दोबारा बुकिंग करनी होगी।
सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य उन किसानों को प्राथमिकता देना है जिन्हें वास्तव में उस समय खाद की जरूरत है।
इससे खाद की बुकिंग करने के बाद उसे समय पर नहीं लेने की स्थिति में स्टॉक लंबे समय तक किसी एक किसान के नाम पर रुका नहीं रहेगा।
कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने में मदद
राजस्थान सरकार इस डिजिटल व्यवस्था को खाद की कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में देख रही है।
खाद की उपलब्धता, बुकिंग और वितरण का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने से यह पता लगाया जा सकेगा कि किस किसान ने कितनी खाद बुक की और उसे कितनी मात्रा में खाद मिली।
इसी तरह अधिकृत विक्रेता के स्तर पर भी खाद के वितरण की जानकारी दर्ज होगी। इससे अनियमित वितरण की पहचान करने में मदद मिल सकती है।
अगर किसी क्षेत्र में उपलब्ध स्टॉक की तुलना में वितरण में असामान्य अंतर दिखाई देता है तो अधिकारी उसकी जांच कर सकते हैं।
मांग और उपलब्ध स्टॉक का बनेगा बेहतर तालमेल
कृषि विभाग के अनुसार, नई तकनीक का एक महत्वपूर्ण फायदा यह है कि खाद की वास्तविक मांग और उपलब्ध स्टॉक की लगातार निगरानी की जा सकेगी।
किसानों की बुकिंग के आंकड़ों से अधिकारियों को यह जानकारी मिलेगी कि किसी जिले या क्षेत्र में किस प्रकार के उर्वरक की कितनी मांग है।
इसके आधार पर उपलब्ध स्टॉक का बेहतर प्रबंधन किया जा सकता है। जरूरत अधिक होने पर संबंधित क्षेत्र में खाद की आपूर्ति बढ़ाने की योजना बनाई जा सकती है।
इससे उन परिस्थितियों को कम करने में मदद मिल सकती है जब किसी जगह खाद का स्टॉक उपलब्ध होने के बावजूद दूसरी जगह किसानों को खाद के लिए परेशानी उठानी पड़ती है।
किसानों को मिलेगा खाद लेने का स्पष्ट रास्ता
कई बार किसानों को यह जानकारी नहीं होती कि उनके क्षेत्र में खाद किस विक्रेता के पास उपलब्ध है या उसे लेने के लिए कौन सी प्रक्रिया अपनानी है। इससे किसानों को कई दुकानों और केंद्रों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
नई डिजिटल व्यवस्था में किसान को यह जानकारी उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है कि खाद कहां से और किस प्रक्रिया के तहत प्राप्त की जा सकती है।
इससे किसान को खाद के लिए लगने वाला अतिरिक्त समय और मेहनत कम हो सकती है।
राज्य सरकार को मिला आर्थिक प्रोत्साहन
डिजिटल खाद वितरण व्यवस्था लागू करने के लिए राजस्थान को आर्थिक प्रोत्साहन भी मिला है।
सरकार के अनुसार, सिरोही और राजसमंद में व्यवस्था लागू करने के लिए करीब 175 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन प्राप्त हुआ है।
वहीं, राज्यभर में इस व्यवस्था को लागू करने के बाद करीब 675 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन मिलने की बात कही गई है।
सरकार के लिए यह व्यवस्था खाद वितरण को डिजिटल बनाने के साथ-साथ कृषि क्षेत्र में तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा देने का भी हिस्सा है।
किसानों के लिए क्या बदलेगा?
नई व्यवस्था के पूरी तरह लागू होने के बाद किसानों के लिए खाद प्राप्त करने की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक व्यवस्थित हो सकती है।
किसान अपनी जरूरत के अनुसार खाद बुक कर सकेगा, उसे निर्धारित अवधि के लिए टोकन मिलेगा और अधिकृत विक्रेता से खाद प्राप्त करने की जानकारी उपलब्ध होगी।
वहीं, सरकार के पास खाद की मांग और वितरण का डिजिटल रिकॉर्ड रहेगा। इससे अधिकारियों को यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि किस क्षेत्र में खाद की मांग अधिक है और कहां अतिरिक्त स्टॉक उपलब्ध है।
हालांकि, इस व्यवस्था की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि डिजिटल बुकिंग, भूमि और किसान संबंधी जानकारी तथा स्थानीय स्तर पर खाद की उपलब्धता कितनी प्रभावी तरीके से आपस में जुड़ती है।
सभी जिलों को जोड़ने की तैयारी
राजस्थान सरकार अब इस व्यवस्था को पूरे राज्य में लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। सिरोही और राजसमंद के पायलट प्रोजेक्ट के बाद पांच नए जिलों में इसे लागू किया जा चुका है और 12 अन्य जिलों को जल्द जोड़े जाने की योजना है।
इसके बाद राज्य के सभी जिलों को चरणबद्ध तरीके से ‘Framework for Fertiliser Sale’ से जोड़ा जाएगा।
अगर यह व्यवस्था प्रभावी तरीके से लागू होती है तो राजस्थान में खाद वितरण प्रणाली अधिक पारदर्शी हो सकती है। किसानों को जरूरत के अनुसार खाद की बुकिंग, नजदीकी अधिकृत विक्रेता से खाद लेने और वितरण की डिजिटल जानकारी मिलने से उनकी परेशानी कम होने की उम्मीद है।
वहीं, सरकार को खाद की मांग, उपलब्धता और वितरण पर लगातार नजर रखने में मदद मिलेगी। इससे कालाबाजारी, जमाखोरी और अनियमित वितरण को नियंत्रित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

