भारत में पैराक्वाट डाइक्लोराइड पर प्रस्तावित प्रतिबंध का असर देश के कृषि रसायन उद्योग पर एक जैसा नहीं होगा। बड़े और विविध कारोबार वाली कंपनियां जहां इस झटके को अपेक्षाकृत आसानी से संभाल सकती हैं, वहीं पैराक्वाट पर अधिक निर्भर छोटे मार्केटर, वितरक, आयातक और कुछ तकनीकी उत्पाद आपूर्तिकर्ताओं पर इसका ज्यादा दबाव पड़ सकता है।
केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने 13 जुलाई 2026 को पैराक्वाट डाइक्लोराइड से संबंधित 2026 का ड्राफ्ट निषेध आदेश जारी किया है। प्रस्तावित आदेश के तहत कीटनाशक अधिनियम, 1968 के तहत पैराक्वाट डाइक्लोराइड के आयात, निर्माण, बिक्री, परिवहन, वितरण और उपयोग पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है। इस कदम के पीछे मुख्य रूप से मानव स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं बताई गई हैं।
हालांकि अंतिम आदेश आने से पहले प्रस्ताव में बदलाव की संभावना बनी हुई है। प्रतिबंध लागू होने की तारीख, मौजूदा स्टॉक के निपटान के लिए मिलने वाला समय, निर्यात के लिए बनाए जाने वाले उत्पादों का प्रावधान और फॉर्मुलेशन से जुड़े नियम यह तय करेंगे कि इसका वास्तविक व्यावसायिक असर कितना व्यापक होगा।
करीब 1,500 करोड़ रुपये का है पैराक्वाट बाजार
उद्योग के अनुमान के अनुसार भारत में पैराक्वाट डाइक्लोराइड का बाजार करीब 15 अरब रुपये यानी लगभग 1,500 करोड़ रुपये का हो सकता है। अमेरिकी डॉलर में यह आंकड़ा लगभग 157 मिलियन डॉलर के बराबर बैठता है।
हालांकि किसी एक कंपनी पर पड़ने वाले वास्तविक वित्तीय प्रभाव का सटीक आकलन करना आसान नहीं है। इसकी बड़ी वजह यह है कि शेयर बाजार में सूचीबद्ध कृषि रसायन कंपनियां आम तौर पर अपनी आय को अलग-अलग सक्रिय रसायनों के आधार पर नहीं बतातीं। वे आमतौर पर कारोबार को हर्बीसाइड यानी खरपतवारनाशी, कीटनाशक और फफूंदनाशी जैसी व्यापक श्रेणियों में रिपोर्ट करती हैं।
इसलिए किसी कंपनी के कुल हर्बीसाइड कारोबार में पैराक्वाट की हिस्सेदारी कितनी है, इसका सार्वजनिक आंकड़ों से सटीक अनुमान लगाना मुश्किल होता है।
UPL पर हो सकता है बड़ा असर
देश की बड़ी कृषि रसायन कंपनियों में UPL को पैराक्वाट प्रतिबंध से अपेक्षाकृत बड़ा पूर्ण प्रभाव झेलना पड़ सकता है। इसका कारण कंपनी का बड़ा आकार और हर्बीसाइड कारोबार में उसकी मजबूत मौजूदगी है।
हालांकि UPL का कारोबार केवल पैराक्वाट तक सीमित नहीं है। कंपनी के पास कृषि रसायनों और अन्य कृषि उत्पादों का व्यापक पोर्टफोलियो है। इसलिए पैराक्वाट की बिक्री बंद होने से होने वाले नुकसान की भरपाई दूसरे उत्पादों से कुछ हद तक संभव हो सकती है।
इसी तरह Dhanuka Agritech भी पैराक्वाट कारोबार से जुड़ी प्रमुख कंपनियों में शामिल है। कंपनी पैराक्वाट को Ozone 24% SL ब्रांड के तहत बाजार में बेचती है। उसके पोर्टफोलियो में हर्बीसाइड का महत्वपूर्ण स्थान है, लेकिन कंपनी के पास कई अन्य फसल सुरक्षा उत्पाद भी हैं। ऐसे में पैराक्वाट पर प्रतिबंध का असर उसके पूरे कारोबार पर कितना पड़ेगा, यह अन्य उत्पादों की बिक्री और बाजार की स्थिति पर निर्भर करेगा।
Rallis और Coromandel पर अपेक्षाकृत सीमित असर
Rallis India और Coromandel International जैसी कंपनियों पर पैराक्वाट प्रतिबंध का समूह स्तर पर प्रभाव अपेक्षाकृत कम रहने की संभावना है। इसकी वजह इन कंपनियों के कारोबार का अधिक विविध होना है।
विशेष रूप से Coromandel International का बड़ा कारोबार उर्वरकों और अन्य कृषि इनपुट से जुड़ा है। इसलिए पैराक्वाट की बिक्री में कमी उसके कुल कारोबार का सीमित हिस्सा प्रभावित कर सकती है।
इससे स्पष्ट होता है कि एक ही प्रतिबंध का असर कंपनियों पर उनकी उत्पाद संरचना और कारोबार में पैराक्वाट की हिस्सेदारी के आधार पर अलग-अलग हो सकता है।
Crystal Crop Protection के लिए ज्यादा सीधी चुनौती
पैराक्वाट पर अधिक सीधा व्यावसायिक दबाव उन कंपनियों पर पड़ सकता है जिनका इस उत्पाद से जुड़ाव अपेक्षाकृत अधिक है। Crystal Crop Protection इसका एक उदाहरण है।
कंपनी ने 2023 में Syngenta से भारत में Gramoxone के ट्रेडमार्क अधिकार हासिल किए थे। Gramoxone भारतीय बाजार में पैराक्वाट के सबसे पहचाने जाने वाले ब्रांडों में से एक है। इसलिए यदि व्यापक प्रतिबंध लागू होता है, तो ऐसे ब्रांड और उनसे जुड़ी बिक्री पर सीधा प्रभाव पड़ सकता है।
हालांकि अंतिम नुकसान इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार मौजूदा स्टॉक, बिक्री और वितरण के लिए कितना संक्रमणकाल देती है।
चीन से आयात पर भी पड़ेगा असर
पैराक्वाट प्रतिबंध का प्रभाव केवल भारतीय कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा। इसका असर अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला पर भी पड़ सकता है। भारत पैराक्वाट की आपूर्ति के लिए आयात पर काफी निर्भर है और व्यापार आंकड़ों के अनुसार चीन तथा ताइवान भारत को पैराक्वाट की आपूर्ति के प्रमुख स्रोतों में शामिल हैं।
भारतीय कंपनियां मुख्य रूप से फॉर्मुलेशन, ब्रांडिंग, पैकेजिंग और वितरण का काम करती हैं, जबकि तकनीकी ग्रेड सक्रिय रसायन का एक बड़ा हिस्सा विदेशी निर्माताओं से आता है।
यदि भारत में पूर्ण प्रतिबंध लागू होता है तो चीन के तकनीकी उत्पाद निर्माताओं और भारत को पैराक्वाट निर्यात करने वाले अन्य आपूर्तिकर्ताओं को भी अपने कारोबार पर असर का सामना करना पड़ सकता है।
हालांकि चीनी कंपनियों पर प्रभाव की वास्तविक मात्रा अंतिम भारतीय नियमों, प्रतिबंध के दायरे, संक्रमण अवधि और किसी संभावित छूट पर निर्भर करेगी।
मौजूदा स्टॉक बन सकता है बड़ी समस्या
प्रस्तावित प्रतिबंध के बीच भारतीय आयातकों और वितरकों के सामने सबसे बड़ी व्यावसायिक चुनौतियों में से एक मौजूदा स्टॉक हो सकता है।
बताया गया है कि नियामकीय कार्रवाई की संभावना के बीच बाजार में कुछ कंपनियों द्वारा पैराक्वाट की खरीद बढ़ाई गई। इसका अर्थ यह हो सकता है कि आयातकों, वितरकों या मार्केटिंग कंपनियों के पास अपेक्षाकृत ज्यादा स्टॉक मौजूद हो।
यदि अंतिम प्रतिबंध लागू होने के बाद कंपनियों को इस स्टॉक को बेचने या कानूनी रूप से निपटाने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिला, तो यह माल उनके लिए वित्तीय देनदारी बन सकता है।
विशेष रूप से छोटे वितरकों और ऐसे कारोबारियों के लिए यह समस्या ज्यादा गंभीर हो सकती है, जिनके कुल कारोबार में पैराक्वाट का हिस्सा बड़ा है।
निर्यात कारोबार भी हो सकता है प्रभावित
प्रस्तावित निर्माण प्रतिबंध का एक और महत्वपूर्ण पहलू निर्यात से जुड़ा है। भारत में कुछ कंपनियां ऐसे कृषि रसायनों के फॉर्मुलेशन का निर्माण करती हैं जिन्हें विदेशी बाजारों में निर्यात किया जाता है।
यदि अंतिम आदेश में निर्यात के लिए पैराक्वाट के निर्माण की अनुमति नहीं दी गई, तो ऐसी कंपनियों के कारोबार पर भी असर पड़ सकता है। दूसरी ओर यदि सरकार निर्यात-उन्मुख उत्पादन के लिए अलग प्रावधान करती है तो नुकसान सीमित किया जा सकता है।
इसलिए अंतिम अधिसूचना में निर्यात के लिए स्पष्ट नियम उद्योग के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगे।
1,503 लाइसेंस का मतलब 1,503 निर्माता नहीं
सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश में लगभग 1,503 इकाइयों के पास पैराक्वाट से जुड़े लाइसेंस हैं। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि भारत में 1,503 स्वतंत्र कंपनियां पैराक्वाट का तकनीकी उत्पादन करती हैं।
भारत की कीटनाशक लाइसेंस व्यवस्था में कई प्रकार की गतिविधियां शामिल होती हैं। इनमें तकनीकी ग्रेड का निर्माण, फॉर्मुलेशन, री-पैकिंग, री-लेबलिंग और अन्य हैंडलिंग गतिविधियां शामिल हो सकती हैं।
इसलिए वास्तविक रूप से पैराक्वाट के तकनीकी पदार्थ का निर्माण करने वाली कंपनियों की संख्या 1,503 लाइसेंस धारकों की संख्या से काफी कम हो सकती है। बड़ी संख्या में इकाइयां फॉर्मुलेशन, पैकेजिंग, मार्केटिंग या वितरण जैसी गतिविधियों से जुड़ी हो सकती हैं।
अंतिम आदेश से तय होगी तस्वीर
पैराक्वाट डाइक्लोराइड पर प्रस्तावित प्रतिबंध का वास्तविक असर अंतिम सरकारी आदेश के बाद ही स्पष्ट होगा। खास तौर पर यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रतिबंध कब से प्रभावी होगा, कंपनियों को संक्रमण अवधि कितनी मिलेगी, मौजूदा स्टॉक बेचने की अनुमति होगी या नहीं और निर्यात के लिए क्या नियम बनाए जाएंगे।
बड़ी और विविध कृषि रसायन कंपनियों के लिए पैराक्वाट उनके व्यापक उत्पाद पोर्टफोलियो का केवल एक हिस्सा है। इसलिए वे दूसरे उत्पादों के माध्यम से संभावित नुकसान को काफी हद तक संभाल सकती हैं।
इसके विपरीत पैराक्वाट पर ज्यादा निर्भर छोटे मार्केटर, आयातक, वितरक और तकनीकी उत्पाद आपूर्तिकर्ताओं के सामने अधिक गंभीर व्यावसायिक चुनौती खड़ी हो सकती है।
इस प्रकार पैराक्वाट पर प्रस्तावित प्रतिबंध का असर केवल किसानों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले एक खरपतवारनाशी की बिक्री तक सीमित नहीं रहेगा। इसका प्रभाव आयातकों, फॉर्मुलेटर्स, ब्रांड मालिकों, वितरकों और विदेशी तकनीकी उत्पाद निर्माताओं तक फैली पूरी आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ सकता है। अंतिम नियामकीय निर्णय यह तय करेगा कि इस बदलाव का असर कितना व्यापक और कितना गहरा होता है।

