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Home ब्रेकिंग न्यूज़

Agniastra से फसल के कीटों पर नियंत्रण कैसे करें? जानें बनाने से लेकर इस्तेमाल तक की जरूरी जानकारी

How to control crop pests using Agniastra? Learn everything you need to know, from preparation to application.

Fiza by Fiza
September 2, 2026
in ब्रेकिंग न्यूज़
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Agniastra

Agniastra

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Agniastra: खेती में अच्छी पैदावार हासिल करने के लिए फसल को कीटों से सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है। माहू, थ्रिप्स, सफेद मक्खी, मिलीबग और विभिन्न प्रकार के रस चूसने वाले कीट फसलों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। कई बार इन कीटों की संख्या तेजी से बढ़ने पर किसान रासायनिक कीटनाशकों का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, प्राकृतिक और कम रसायन वाली खेती करने वाले किसानों के बीच पौधों से तैयार किए जाने वाले कुछ पारंपरिक घोल भी प्रचलित हैं। इन्हीं में से एक को अग्निअस्त्र (Agniastra) कहा जाता है।

अग्निअस्त्र का उपयोग मुख्य रूप से प्राकृतिक खेती में कीट प्रबंधन के लिए किया जाता है। इसे आम तौर पर नीम, लहसुन, तीखी मिर्च और गोमूत्र जैसे घटकों से तैयार किए जाने वाले वनस्पति-आधारित घोल के रूप में जाना जाता है। लेकिन इसका इस्तेमाल करते समय यह समझना जरूरी है कि हर फसल और हर कीट पर इसका असर एक जैसा होना जरूरी नहीं है। इसलिए कीट की सही पहचान, छोटे क्षेत्र में परीक्षण और स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह महत्वपूर्ण है।

इस लेख में समझते हैं कि अग्निअस्त्र से फसल के कीटों पर नियंत्रण कैसे करें (How to Control Crop Pests with Agniastra), इसका उपयोग किन परिस्थितियों में किया जाता है और बेहतर कीट प्रबंधन के लिए किसानों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

Agniastra क्या है?

अग्निअस्त्र प्राकृतिक खेती में इस्तेमाल किया जाने वाला एक पारंपरिक वनस्पति-आधारित कीट प्रबंधन घोल है। इसका उद्देश्य फसल में दिखाई देने वाले कुछ हानिकारक कीटों का प्रबंधन करना और रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम करने में मदद करना है।

इसके अलग-अलग स्थानीय नुस्खे देखने को मिलते हैं। सामान्य रूप से इसमें नीम की पत्तियां, तीखी मिर्च, लहसुन और गोमूत्र जैसे घटकों का उल्लेख किया जाता है। इनमें से कई पौधों में प्राकृतिक रूप से ऐसे यौगिक पाए जाते हैं जो कुछ कीटों को दूर रखने, उनके भोजन व्यवहार को प्रभावित करने या कीट प्रबंधन में सहायक भूमिका निभा सकते हैं।

हालांकि, अग्निअस्त्र को हर तरह के कीट के लिए निश्चित समाधान नहीं समझना चाहिए। इसका परिणाम फसल, कीट की प्रजाति, मौसम, घोल की सांद्रता और इस्तेमाल के तरीके जैसे कई कारकों पर निर्भर कर सकता है।

फसलों में कीट नियंत्रण क्यों जरूरी है?

फसल की बुवाई से लेकर कटाई तक अलग-अलग चरणों पर कीटों का हमला हो सकता है। कुछ कीट पत्तियों का रस चूसते हैं, कुछ पत्तियां खाते हैं और कुछ फूल, फल या पौधे के दूसरे हिस्सों को नुकसान पहुंचाते हैं।

उदाहरण के लिए, माहू और सफेद मक्खी जैसे रस चूसने वाले कीट पौधे की बढ़वार को प्रभावित कर सकते हैं। कुछ कीट पौधों में रोग फैलाने वाले वायरस के वाहक भी बन सकते हैं।

कीटों का प्रकोप गंभीर होने पर उपज के साथ फसल की गुणवत्ता पर भी असर पड़ सकता है। इसलिए किसान को केवल कीट दिखाई देने के बाद नियंत्रण शुरू करने के बजाय नियमित निगरानी करनी चाहिए।

यही कारण है कि आधुनिक Integrated Pest Management (IPM) में निगरानी, जैविक नियंत्रण, खेत की स्वच्छता, प्रतिरोधी किस्में और जरूरत के अनुसार दूसरे उपायों को एक साथ अपनाने पर जोर दिया जाता है।

Agniastra में इस्तेमाल होने वाले घटकों की भूमिका

अग्निअस्त्र की अलग-अलग विधियों में सामग्री और मात्रा अलग हो सकती है। इसके बावजूद कुछ सामग्री का उल्लेख अक्सर किया जाता है।

1. नीम

नीम का कृषि में लंबे समय से इस्तेमाल होता आया है। नीम में पाए जाने वाले कुछ प्राकृतिक यौगिक विभिन्न कीटों के भोजन और वृद्धि व्यवहार को प्रभावित कर सकते हैं।

इसी वजह से नीम आधारित उत्पादों का उपयोग Natural Pest Control और Organic Pest Management में भी किया जाता है।

2. लहसुन

लहसुन अपनी तेज गंध और सल्फर युक्त प्राकृतिक यौगिकों के लिए जाना जाता है। पौधों पर आधारित पारंपरिक कीट प्रबंधन घोलों में इसका उपयोग काफी सामान्य है।

3. तीखी मिर्च

मिर्च में कैप्साइसिन जैसे प्राकृतिक यौगिक होते हैं। तीखी मिर्च का इस्तेमाल कुछ पारंपरिक वनस्पति स्प्रे में कीटों को दूर रखने वाले घटक के रूप में किया जाता है।

4. गोमूत्र

प्राकृतिक खेती की कुछ भारतीय पद्धतियों में गोमूत्र का इस्तेमाल विभिन्न घोलों के आधार के रूप में किया जाता है। अग्निअस्त्र की पारंपरिक विधियों में भी इसका उल्लेख मिलता है।

किसानों को ध्यान रखना चाहिए कि घर या खेत में बनाए गए मिश्रण की सांद्रता मानकीकृत नहीं होती। इसलिए सीधे पूरी फसल पर छिड़काव करने के बजाय छोटे हिस्से पर परीक्षण करना बेहतर रहता है।

अग्निअस्त्र किन कीटों के प्रबंधन में इस्तेमाल किया जाता है?

प्राकृतिक खेती करने वाले किसान अग्निअस्त्र जैसे वनस्पति घोलों का इस्तेमाल विशेष रूप से कुछ रस चूसने और पत्तियों को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों के प्रबंधन के उद्देश्य से करते हैं।

इसमें माहू यानी Aphids, थ्रिप्स (Thrips), सफेद मक्खी (Whitefly) और कुछ अन्य कीट शामिल हो सकते हैं। यहां यह ध्यान रखना जरूरी है कि खेत में दिखाई देने वाला प्रत्येक कीट हानिकारक नहीं होता। खेत में लेडीबर्ड बीटल, मकड़ी और कई परजीवी कीट जैसे प्राकृतिक मित्र भी मौजूद हो सकते हैं, जो हानिकारक कीटों की संख्या नियंत्रित करने में मदद करते हैं। इसलिए किसी भी स्प्रे से पहले Crop Pest Identification यानी फसल के कीट की सही पहचान बहुत महत्वपूर्ण है।

Agniastra तैयार करने का सामान्य तरीका

अग्निअस्त्र की विधि अलग-अलग प्राकृतिक खेती प्रणालियों और क्षेत्रों में अलग हो सकती है। आम तौर पर किसान नीम की पत्तियों, लहसुन और तीखी मिर्च जैसी वनस्पति सामग्री को कूटकर गोमूत्र के साथ मिलाते हैं। इसके बाद मिश्रण को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार तैयार किया जाता है और अच्छी तरह छान लिया जाता है, ताकि स्प्रे पंप की नोजल बंद न हो।

क्योंकि अलग-अलग स्रोतों में सामग्री की मात्रा, मिश्रण की अवधि और घोल को पतला करने की दर में अंतर पाया जा सकता है, किसान अपने क्षेत्र के कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), कृषि विश्वविद्यालय या कृषि विभाग से अनुशंसित विधि और मात्रा की पुष्टि करें। यह सावधानी खास तौर पर जरूरी है क्योंकि बहुत अधिक सांद्रता वाला कोई भी वनस्पति घोल कोमल पत्तियों को नुकसान पहुंचा सकता है।

फसल पर अग्निअस्त्र का इस्तेमाल कैसे करें?

How to use Agniastra for crop pest control का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा सही समय और सही तरीके से इसका प्रयोग करना है। सबसे पहले खेत की नियमित निगरानी करें। पत्तियों के ऊपरी और निचले हिस्से, नई कोपलों तथा फूलों के आसपास कीटों की उपस्थिति देखें।

यदि कीट दिखाई देते हैं, तो उनकी पहचान करें। इसके बाद स्थानीय कृषि विशेषज्ञ द्वारा सुझाई गई उपयुक्त सांद्रता के अनुसार घोल तैयार करें। पूरे खेत पर पहली बार इस्तेमाल करने से पहले कुछ पौधों पर इसका परीक्षण किया जा सकता है। यदि एक-दो दिन में पत्तियों पर जलने, धब्बे या मुरझाने जैसे नुकसान के लक्षण नहीं दिखते, तभी बड़े क्षेत्र में इस्तेमाल करने पर विचार करें। स्प्रे करते समय पत्तियों की निचली सतह तक घोल पहुंचना महत्वपूर्ण हो सकता है क्योंकि सफेद मक्खी, माहू और दूसरे कई छोटे कीट पत्तियों के नीचे पाए जाते हैं।

अग्निअस्त्र के छिड़काव का सही समय

किसी भी कृषि स्प्रे का समय उसके परिणाम को प्रभावित कर सकता है। बहुत तेज धूप और अधिक गर्मी के दौरान स्प्रे करने से बचना बेहतर होता है। सुबह या शाम के अपेक्षाकृत ठंडे समय में छिड़काव करना सामान्यतः बेहतर माना जाता है। बारिश से ठीक पहले स्प्रे करने से भी बचना चाहिए क्योंकि बारिश घोल को पौधों से धो सकती है। तेज हवा में छिड़काव करने से स्प्रे निर्धारित पौधों तक पहुंचने के बजाय इधर-उधर फैल सकता है।

इसी तरह फूल आने के दौरान मधुमक्खियों और दूसरे परागणकर्ताओं की सक्रियता को ध्यान में रखना चाहिए। प्राकृतिक सामग्री से बना होने का अर्थ यह नहीं है कि कोई भी घोल सभी लाभकारी जीवों के लिए पूरी तरह सुरक्षित होगा।

किन फसलों में अग्निअस्त्र का उपयोग किया जा सकता है?

प्राकृतिक खेती में अग्निअस्त्र जैसे botanical preparations का प्रयोग विभिन्न प्रकार की फसलों में किया जाता है। इनमें सब्जियां, दलहन, तिलहन और कुछ अनाज वाली फसलें शामिल हो सकती हैं। टमाटर, मिर्च, बैंगन, भिंडी जैसी सब्जियों में रस चूसने वाले कीट किसानों के लिए बड़ी समस्या बन सकते हैं। इसी तरह कपास जैसी फसल में भी सफेद मक्खी, माहू और दूसरे कीटों की निगरानी जरूरी होती है। लेकिन अलग-अलग फसलों की पत्तियों की संवेदनशीलता अलग होती है। इसलिए एक फसल पर सुरक्षित रहने वाला घोल दूसरी फसल पर उसी सांद्रता में सुरक्षित हो, यह जरूरी नहीं है। यही कारण है कि Agniastra spray for plants and crops का उपयोग करते समय स्थानीय फसल-विशिष्ट सलाह लेना महत्वपूर्ण है।

अग्निअस्त्र इस्तेमाल करने के संभावित फायदे

अग्निअस्त्र जैसे पौधों पर आधारित घोल प्राकृतिक खेती की रणनीति का हिस्सा बन सकते हैं। इनका एक प्रमुख उद्देश्य किसानों को स्थानीय रूप से उपलब्ध सामग्री का उपयोग करके कीट प्रबंधन का विकल्प देना है। इसके अलावा, ऐसे उपाय रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम करने वाली व्यापक रणनीति में सहायक हो सकते हैं।

लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि अग्निअस्त्र हमेशा रासायनिक या पंजीकृत जैविक कीटनाशक का पूर्ण विकल्प होगा। गंभीर प्रकोप की स्थिति में केवल एक घरेलू घोल पर निर्भर रहना फसल के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

अग्निअस्त्र इस्तेमाल करते समय क्या सावधानियां रखें?

प्राकृतिक घोल होने के बावजूद अग्निअस्त्र का इस्तेमाल सावधानी से करना चाहिए। मिर्च, लहसुन और दूसरे घटक आंखों तथा त्वचा में जलन पैदा कर सकते हैं। इसे तैयार करते और छिड़कते समय आंखों और त्वचा को सीधे संपर्क से बचाना चाहिए। बच्चों और पशुओं की पहुंच से मिश्रण को दूर रखना चाहिए। छिड़काव के दौरान हवा की दिशा पर ध्यान दें और स्प्रे को अपने चेहरे की ओर आने से बचाएं। घोल को बिना जांचे अधिक सांद्रता में इस्तेमाल न करें। पहले कुछ पौधों पर Patch Test करना समझदारी है। इसके अलावा किसी दूसरे कीटनाशक, फफूंदनाशक या खाद के साथ अग्निअस्त्र मिलाने से पहले compatibility की जानकारी जरूर लें।

केवल अग्निअस्त्र पर निर्भर न रहें

बेहतर Crop Pest Management के लिए एक से अधिक तरीकों का इस्तेमाल करना सबसे उपयोगी रणनीति होती है। फसल की नियमित निगरानी करें। संक्रमित पौधों या बहुत अधिक प्रभावित हिस्सों को आवश्यकता के अनुसार हटाएं। खरपतवार प्रबंधन और खेत की स्वच्छता पर ध्यान दें। Yellow Sticky Traps या Blue Sticky Traps जैसे उपकरण कुछ उड़ने वाले कीटों की निगरानी में उपयोगी हो सकते हैं। खेत में मौजूद लाभकारी कीटों को पहचानना और उन्हें सुरक्षित रखना भी जरूरी है। इसी दृष्टिकोण को Integrated Pest Management (IPM) कहा जाता है।

IPM में किसान पहले समस्या की पहचान करता है, फिर कीट की संख्या और नुकसान का आकलन करता है और उसके बाद सबसे कम जोखिम वाले प्रभावी नियंत्रण उपाय का चयन करता है।

कीट नियंत्रण में नीम की भूमिका

अग्निअस्त्र में नीम महत्वपूर्ण वनस्पति सामग्री मानी जाती है। नीम आधारित कई उत्पाद कृषि में कीट प्रबंधन के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। नीम के सक्रिय घटकों में Azadirachtin काफी जाना जाता है। यह कुछ कीटों में feeding deterrent और growth-regulating प्रभाव दिखा सकता है।

हालांकि खेत में तैयार नीम मिश्रण और बाजार में मिलने वाले मानकीकृत नीम आधारित उत्पाद में बड़ा अंतर हो सकता है। व्यावसायिक उत्पादों में सक्रिय तत्व की मात्रा निर्धारित होती है, जबकि घर पर तैयार घोल में इसकी मात्रा बदल सकती है। इसलिए दोनों को बिल्कुल समान नहीं समझना चाहिए।

अग्निअस्त्र का असर कम दिखाई दे तो क्या करें?

यदि इस्तेमाल के बाद भी कीटों की संख्या बढ़ रही है, तो सबसे पहले कीट की पहचान दोबारा जांचें। यह भी देखें कि कीट वास्तव में फसल को आर्थिक स्तर पर नुकसान पहुंचा रहा है या केवल कुछ पौधों तक सीमित है। इसके बाद स्थानीय कृषि विशेषज्ञ या कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क किया जा सकता है। वे फसल, कीट और प्रकोप के स्तर के आधार पर उचित Pest Management Strategy बता सकते हैं।

गंभीर प्रकोप में संबंधित फसल और कीट के लिए अधिकृत जैविक या रासायनिक कीटनाशक की आवश्यकता पड़ सकती है। ऐसे उत्पादों का उपयोग हमेशा लेबल पर दी गई मात्रा, सुरक्षा अवधि और कृषि विभाग की सिफारिश के अनुसार ही करना चाहिए।

प्राकृतिक खेती में अग्निअस्त्र की भूमिका

Agniastra in Natural Farming को अकेले इस्तेमाल किए जाने वाले समाधान की बजाय एक व्यापक प्राकृतिक कीट प्रबंधन प्रणाली का हिस्सा समझना ज्यादा उचित है। स्वस्थ मिट्टी, उचित फसल चक्र, संतुलित पोषण, समय पर सिंचाई, खेत की स्वच्छता और लाभकारी जीवों का संरक्षण भी कीटों के प्रभाव को कम करने में योगदान देते हैं।

किसान यदि शुरुआत से खेत की निगरानी करता है, तो कीट की संख्या बहुत अधिक होने से पहले समस्या को पहचान सकता है। शुरुआती अवस्था में प्रबंधन आमतौर पर अधिक आसान होता है।

फसल की नियमित निगरानी कैसे करें?

हर कुछ दिनों के अंतराल पर खेत के अलग-अलग हिस्सों से पौधों का निरीक्षण करें। केवल खेत के किनारे देखकर फैसला न लें। कुछ पौधों की नई पत्तियां, पुरानी पत्तियां, तना, फूल और फल ध्यान से देखें। पत्तियों के नीचे की सतह जरूर जांचें।

साथ ही लाभकारी कीटों की संख्या भी देखें। यदि प्राकृतिक शत्रु पर्याप्त संख्या में मौजूद हैं, तो वे हानिकारक कीटों को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इस तरह का नियमित Crop Monitoring किसान को सही समय पर सही फैसला लेने में मदद करता है।

क्या अग्निअस्त्र पूरी तरह Organic Pesticide है?

अग्निअस्त्र को आमतौर पर प्राकृतिक खेती में इस्तेमाल होने वाले botanical preparation के रूप में बताया जाता है। लेकिन “Organic” शब्द का इस्तेमाल प्रमाणित जैविक खेती में विशेष नियमों के अंतर्गत हो सकता है।

यदि किसान प्रमाणित जैविक उत्पादन कर रहा है, तो उसे अपनी certification agency या संबंधित मानक के अनुसार यह जांचना चाहिए कि कौन-से inputs इस्तेमाल करने की अनुमति है।

सिर्फ किसी सामग्री के प्राकृतिक स्रोत से आने का मतलब यह नहीं है कि वह हर organic certification standard के तहत अपने-आप स्वीकृत हो जाती है।

Agniastra और Integrated Pest Management को साथ कैसे अपनाएं?

बेहतर परिणाम के लिए अग्निअस्त्र को Integrated Pest Management रणनीति के एक हिस्से के रूप में देखा जा सकता है।उदाहरण के तौर पर किसान पहले खेत की निगरानी करे, कीट की पहचान करे और उसके प्राकृतिक शत्रुओं को देखे। आवश्यकता होने पर traps और दूसरे mechanical या biological उपाय अपनाए जा सकते हैं।

इसके बाद परिस्थितियों के अनुसार उपयुक्त botanical spray का चयन किया जा सकता है। यदि समस्या नियंत्रण से बाहर जा रही हो, तो कृषि विशेषज्ञ की सलाह से संबंधित फसल के लिए पंजीकृत और अनुशंसित उपाय अपनाया जा सकता है।इससे अनावश्यक  से बचने और फसल सुरक्षा को बेहतर तरीके से प्रबंधित करने में मदद मिल सकती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. अग्निअस्त्र क्या है?

अग्निअस्त्र प्राकृतिक खेती में इस्तेमाल किया जाने वाला वनस्पति आधारित कीट प्रबंधन घोल है। इसकी पारंपरिक विधियों में नीम, लहसुन, मिर्च और गोमूत्र जैसी सामग्री का उपयोग किया जाता है।

2. क्या अग्निअस्त्र सभी कीटों को खत्म कर देता है?

नहीं। इसका असर कीट, फसल, मौसम, सांद्रता और उपयोग की विधि के अनुसार अलग हो सकता है। इसे सभी कीटों के लिए निश्चित उपचार नहीं मानना चाहिए।

3. Agniastra का इस्तेमाल कब करना चाहिए?

फसल की निगरानी में संबंधित हानिकारक कीट दिखाई देने पर और उनकी सही पहचान करने के बाद इसका उपयोग करने पर विचार किया जा सकता है। इस्तेमाल से पहले स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।

4. क्या अग्निअस्त्र का इस्तेमाल सब्जियों पर किया जा सकता है?

प्राकृतिक खेती में ऐसे botanical preparations का इस्तेमाल विभिन्न सब्जी फसलों में किया जाता है। हालांकि फसल की संवेदनशीलता अलग-अलग होने के कारण पहले छोटे हिस्से पर परीक्षण करना चाहिए।

5. क्या अग्निअस्त्र रासायनिक कीटनाशक का विकल्प है?

हर परिस्थिति में नहीं। कम या शुरुआती कीट प्रकोप में botanical pest management उपयोगी हो सकता है, लेकिन गंभीर संक्रमण में कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार दूसरे प्रमाणित उपायों की आवश्यकता हो सकती है।

6. अग्निअस्त्र के छिड़काव के बाद भी कीट कम न हों तो क्या करें?

कीट की पहचान और प्रकोप का स्तर दोबारा जांचें। लगातार नुकसान होने पर कृषि विज्ञान केंद्र, कृषि विश्वविद्यालय या स्थानीय कृषि विभाग से सलाह लें।

अग्निअस्त्र से फसल के कीटों पर नियंत्रण (Crop Pest Control with Agniastra) प्राकृतिक खेती में अपनाए जाने वाले पारंपरिक कीट प्रबंधन उपायों में से एक है। नीम, लहसुन और मिर्च जैसी वनस्पति सामग्री के कारण इसका उपयोग कुछ किसानों द्वारा माहू, सफेद मक्खी, थ्रिप्स और दूसरे हानिकारक कीटों के प्रबंधन के उद्देश्य से किया जाता है।

हालांकि सफल कीट प्रबंधन के लिए केवल किसी एक स्प्रे पर निर्भर रहना उचित नहीं है। खेत की नियमित निगरानी, कीट की सही पहचान, लाभकारी जीवों का संरक्षण, खेत की स्वच्छता और जरूरत के अनुसार उपयुक्त जैविक या अन्य पंजीकृत उपाय अपनाना अधिक प्रभावी रणनीति है।

अग्निअस्त्र या किसी दूसरे botanical spray का पहली बार इस्तेमाल करते समय छोटे क्षेत्र पर परीक्षण करें और फसल-विशिष्ट मात्रा तथा उपयोग विधि के लिए कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विशेषज्ञ की सलाह लें। इस तरह प्राकृतिक उपायों को Integrated Pest Management (IPM) के साथ जोड़कर किसान अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से फसल में कीट प्रबंधन कर सकते हैं।

Tags: Agniastra for Crop Pest ControlAgniastra in Natural FarmingAgniastra Uses in AgricultureBotanical Pest ControlNatural Farming Pest ManagementNatural Pest Control in FarmingOrganic Pest Management
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