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Home कृषि समाचार

Panchagavya Farming: फसल में कब और कितना इस्तेमाल करें? जानें बनाने की विधि, मात्रा और फायदे

Panchagavya Farming: When and how much should be used on crops? Learn the preparation method, dosage, and benefits.

Fiza by Fiza
September 1, 2026
in कृषि समाचार
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Panchagavya Farming

Panchagavya Farming

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खेती में बेहतर उत्पादन के साथ मिट्टी की सेहत बनाए रखना किसानों के लिए बड़ी प्राथमिकता है। इसी वजह से जैविक और प्राकृतिक खेती की विधियों में किसानों की दिलचस्पी बढ़ रही है। ऐसी खेती में इस्तेमाल होने वाले पारंपरिक जैविक मिश्रणों में पंचगव्य (Panchagavya) का नाम प्रमुखता से लिया जाता है।

पंचगव्य मुख्य रूप से गाय से प्राप्त पांच पदार्थों के आधार पर तैयार किया जाने वाला मिश्रण है। इसका इस्तेमाल खेती में पौधों की वृद्धि और मिट्टी की जैविक गतिविधियों को सहारा देने के उद्देश्य से किया जाता है। इसे फसलों पर स्प्रे करने के साथ कुछ परिस्थितियों में सिंचाई के पानी के साथ भी इस्तेमाल किया जाता है।

लेकिन पंचगव्य का उपयोग करते समय सबसे महत्वपूर्ण सवाल है कि फसल में पंचगव्य कब और कितना इस्तेमाल करना चाहिए? सही मात्रा और सही समय का ध्यान न रखा जाए तो अपेक्षित लाभ नहीं मिल सकता। इस लेख में Panchagavya Farming से जुड़ी इन्हीं बातों को विस्तार से समझेंगे।

Panchagavya Farming क्या है?

पंचगव्य का अर्थ गाय से प्राप्त पांच प्रमुख पदार्थों से तैयार मिश्रण से है। परंपरागत रूप से इसमें गाय का गोबर, गोमूत्र, दूध, दही और घी शामिल होते हैं। खेती में इस्तेमाल होने वाले पंचगव्य के कई प्रचलित नुस्खों में इनके साथ गुड़, पका केला, नारियल पानी या अन्य सामग्री भी मिलाई जाती है।

इसे कुछ समय तक नियंत्रित तरीके से किण्वित यानी Ferment होने दिया जाता है। तैयार मिश्रण को पानी में उचित मात्रा में घोलकर फसल में इस्तेमाल किया जाता है।

पंचगव्य को सीधे बहुत अधिक मात्रा में पौधों पर डालना सही तरीका नहीं है। इसकी सांद्रता कम करने के लिए पानी में मिलाकर इस्तेमाल किया जाता है। यही वजह है कि Panchagavya dosage for crops को समझना बेहद जरूरी है।

पंचगव्य से खेती क्यों की जाती है?

पंचगव्य से खेती (Panchagavya Farming) का मुख्य उद्देश्य खेती में जैविक स्रोतों का इस्तेमाल बढ़ाना और पौधों तथा मिट्टी की प्राकृतिक प्रक्रियाओं को सहारा देना है। पंचगव्य में इस्तेमाल होने वाली जैविक सामग्री किण्वन की प्रक्रिया से गुजरती है। तैयार घोल को किसान फसल की बढ़वार के अलग-अलग चरणों में इस्तेमाल कर सकते हैं।पंचगव्य के उपयोग को प्राकृतिक खेती, जैविक खेती और कम बाहरी इनपुट वाली कृषि प्रणालियों से जोड़कर देखा जाता है।हालांकि इसे हर समस्या का एकमात्र समाधान नहीं मानना चाहिए। फसल का अच्छा उत्पादन मिट्टी की उर्वरता, सिंचाई, मौसम, पोषक तत्व प्रबंधन, बीज या किस्म, रोग-कीट प्रबंधन और खेती की दूसरी व्यवस्थाओं पर भी निर्भर करता है।

पंचगव्य में कौन-कौन सी चीजें होती हैं?

पारंपरिक पंचगव्य का आधार गाय से प्राप्त ये पांच पदार्थ होते हैं:

  1. गाय का ताजा गोबर
  2. गोमूत्र
  3. गाय का दूध
  4. दही
  5. घी

खेती के लिए तैयार किए जाने वाले अलग-अलग Panchagavya preparation method में इनके अलावा गुड़, केले, नारियल पानी आदि का उपयोग भी देखने को मिलता है। अलग-अलग क्षेत्रों और कृषि संस्थानों की विधियों में सामग्री और मात्रा में अंतर हो सकता है। इसलिए किसान अपने क्षेत्र के कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विशेषज्ञ द्वारा बताई गई प्रमाणित विधि को प्राथमिकता दे सकते हैं।

पंचगव्य बनाने की विधि | Panchagavya Preparation Method

पंचगव्य बनाने की विधि अलग-अलग जगहों पर थोड़ी अलग हो सकती है। सामान्य रूप से इसे तैयार करने में सबसे पहले गोबर और घी को अच्छी तरह मिलाया जाता है। इसके बाद मिश्रण को निर्धारित अवधि तक रखा जाता है और नियमित रूप से चलाया जाता है। आगे चलकर इसमें गोमूत्र और अन्य सामग्री मिलाई जाती है। फिर दूध, दही तथा विधि के अनुसार निर्धारित अन्य सामग्री शामिल की जाती है। पूरे मिश्रण को एक उपयुक्त पात्र में किण्वित होने के लिए रखा जाता है। इसे नियमित अंतराल पर चलाना जरूरी होता है, ताकि किण्वन समान रूप से हो सके। मिश्रण तैयार करते समय साफ पात्र और स्वच्छ सामग्री का इस्तेमाल करना चाहिए। पात्र को तेज धूप और बारिश से सुरक्षित स्थान पर रखना बेहतर होता है।

चूंकि पंचगव्य बनाने के कई अलग-अलग फॉर्मूले प्रचलित हैं, इसलिए सामग्री की सटीक मात्रा किसी विश्वसनीय कृषि संस्थान की अनुशंसा के अनुसार तय करना अधिक उचित है।

फसल में पंचगव्य का इस्तेमाल कैसे करें?

किसानों के बीच सबसे अधिक पूछा जाने वाला सवाल है, पंचगव्य का फसल में उपयोग कैसे करें?पंचगव्य का इस्तेमाल मुख्य रूप से पानी में घोलकर पत्तियों पर स्प्रे के रूप में किया जाता है। कुछ कृषि पद्धतियों में इसे सिंचाई के पानी के साथ देने का भी चलन है।

पत्तियों पर छिड़काव करते समय घोल को अच्छी तरह छान लेना चाहिए। ऐसा नहीं करने पर स्प्रे पंप की नोजल में ठोस कण फंस सकते हैं। घोल की सांद्रता का ध्यान रखना भी जरूरी है। ज्यादा सांद्र घोल बेहतर परिणाम देगा, ऐसा मानना सही नहीं है। अधिक मात्रा पौधे के लिए नुकसानदायक भी साबित हो सकती है।

Panchagavya Dosage for Crops: पंचगव्य की कितनी मात्रा रखें?

फसल में पंचगव्य की मात्रा उपयोग की विधि, फसल, उसकी अवस्था और स्थानीय कृषि अनुशंसाओं के अनुसार बदल सकती है। पत्तियों पर स्प्रे के लिए कई कृषि पद्धतियों में लगभग 3 प्रतिशत पंचगव्य घोल का इस्तेमाल किया जाता है। 3 प्रतिशत घोल का सरल अर्थ है कि लगभग 100 लीटर पानी में 3 लीटर पंचगव्य की सांद्रता रखी जाए। इसी अनुपात से छोटी मात्रा तैयार की जा सकती है। उदाहरण के लिए, 10 लीटर पानी के लिए लगभग 300 मिलीलीटर पंचगव्य 3 प्रतिशत सांद्रता के बराबर होगा। लेकिन इसे हर फसल के लिए निश्चित मात्रा न मानें। Panchagavya spray for plants की वास्तविक मात्रा फसल और स्थानीय अनुशंसा के अनुसार तय की जानी चाहिए। पहली बार इस्तेमाल करने वाले किसान पूरे खेत में एक साथ छिड़काव करने के बजाय सीमित हिस्से पर परीक्षण कर सकते हैं।

पंचगव्य का छिड़काव कब करें?

पंचगव्य का छिड़काव कब करें यह सवाल मात्रा जितना ही महत्वपूर्ण है।फसल के शुरुआती विकास के बाद पौधे जब सक्रिय बढ़वार की अवस्था में पहुंच जाते हैं, तब आवश्यकता और अनुशंसा के अनुसार पंचगव्य स्प्रे किया जा सकता है।

इसके बाद फसल के विकास के अलग-अलग चरणों में इसका इस्तेमाल किया जाता है। कुछ फसलों में फूल आने से पहले या फल बनने की अवस्था के आसपास भी पंचगव्य का प्रयोग किया जाता है।

फसल की अवस्था के अलावा दिन का समय भी ध्यान में रखना चाहिए। बहुत तेज धूप और अत्यधिक गर्मी में पत्तियों पर किसी भी प्रकार का स्प्रे करने से बचना बेहतर है।

सुबह या शाम का समय आम तौर पर छिड़काव के लिए अधिक उपयुक्त रहता है। बारिश की संभावना होने पर भी स्प्रे टाल देना चाहिए, क्योंकि बारिश से घोल पत्तियों से धुल सकता है।

पंचगव्य का स्प्रे कितने दिनों के अंतराल पर करें?

इसका कोई एक अंतराल सभी फसलों के लिए सही नहीं होता। विभिन्न अनुशंसाओं में फसल और उसकी अवस्था के अनुसार अंतर पाया जाता है। कई खेती प्रणालियों में पंचगव्य का इस्तेमाल लगभग 10 से 15 दिनों के अंतराल पर किया जाता है, लेकिन इसे सामान्य संदर्भ के रूप में ही समझना चाहिए। किसान को अपनी फसल की स्थिति, मौसम और स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह के आधार पर छिड़काव का अंतराल निर्धारित करना चाहिए। अनावश्यक रूप से बार-बार स्प्रे करने से खेती की लागत और श्रम बढ़ सकता है।

सब्जियों में पंचगव्य का उपयोग कैसे करें?

टमाटर, बैंगन, मिर्च, भिंडी और अन्य सब्जी फसलों में भी किसान पंचगव्य का इस्तेमाल करते हैं। सब्जियों में Panchagavya Farming अपनाते समय पौधे की अवस्था का ध्यान रखना चाहिए। पौधों की शुरुआती बढ़वार, फूल आने और फल बनने जैसी अवस्थाओं में स्थानीय सिफारिशों के अनुसार स्प्रे की योजना बनाई जा सकती है।

फल या सब्जी की कटाई के आसपास किसी भी जैविक घोल का इस्तेमाल करते समय स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना जरूरी है। खाने योग्य हिस्सों को इस्तेमाल से पहले अच्छी तरह धोना चाहिए। अगर किसी विशेष सब्जी में पहली बार पंचगव्य का उपयोग किया जा रहा है, तो सीमित पौधों पर परीक्षण करना बेहतर रहता है।

धान और गेहूं में पंचगव्य का इस्तेमाल

अनाज वाली फसलों में भी पंचगव्य के इस्तेमाल को लेकर किसानों की रुचि रहती है। धान और गेहूं जैसी फसलों में इसका उपयोग पौधों की बढ़वार के दौरान स्थानीय अनुशंसाओं के आधार पर किया जा सकता है।इन फसलों में बड़े क्षेत्र पर छिड़काव करना पड़ता है, इसलिए घोल की सही सांद्रता और प्रति एकड़ पानी की मात्रा महत्वपूर्ण हो जाती है। किसान केवल पंचगव्य पर निर्भर रहने के बजाय मिट्टी परीक्षण और फसल की पोषण आवश्यकता के आधार पर पूरा पोषक तत्व प्रबंधन करें।

फलों के पौधों में Panchagavya Spray

आम, अमरूद, नींबू, अनार, पपीता और केले जैसी बागवानी फसलों में भी Panchagavya spray for plants का प्रयोग किया जाता है। बागवानी में पौधों की उम्र, आकार और विकास अवस्था के अनुसार छिड़काव की जरूरत बदल सकती है।

छोटे पौधों और पूरी तरह विकसित पेड़ों के लिए एक जैसी स्प्रे मात्रा रखना व्यावहारिक नहीं है। इसलिए बागवानी फसलों में स्थानीय कृषि या उद्यान विशेषज्ञ की सलाह विशेष रूप से उपयोगी रहती है।

पंचगव्य के फायदे | Panchagavya Benefits in Agriculture

Panchagavya benefits in agriculture को लेकर किसानों और जैविक खेती करने वालों में काफी रुचि है।

पंचगव्य का इस्तेमाल मुख्य रूप से पौधों की वृद्धि और जैविक खेती की प्रक्रियाओं को सहारा देने के लिए किया जाता है। इसके संभावित उपयोगों में पौधों की बढ़वार को समर्थन देना, जैविक इनपुट के उपयोग को बढ़ावा देना और मिट्टी की जैविक गतिविधियों के अनुकूल वातावरण बनाने में योगदान शामिल है।

इसके परिणाम हर खेत में एक जैसे नहीं होंगे। मिट्टी, फसल, जलवायु, पंचगव्य बनाने की विधि और उपयोग की मात्रा के कारण परिणाम बदल सकते हैं।

इसलिए उत्पादन में किसी निश्चित प्रतिशत की वृद्धि का दावा करने के बजाय किसान अपने खेत में नियंत्रित परीक्षण करके परिणाम की तुलना कर सकते हैं।

मिट्टी के लिए पंचगव्य कितना उपयोगी है?

जैविक खेती में मिट्टी को केवल पौधे को खड़ा रखने का माध्यम नहीं माना जाता। मिट्टी में कई प्रकार के सूक्ष्मजीव और जैविक प्रक्रियाएं सक्रिय रहती हैं।जैविक सामग्री से तैयार इनपुट इन प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकते हैं। इसी कारण Organic farming with Panchagavya में मिट्टी की जैविक स्थिति पर भी ध्यान दिया जाता है। हालांकि मिट्टी में जैविक कार्बन और पोषक तत्वों की कमी को पूरा करने के लिए केवल पंचगव्य पर्याप्त हो, यह जरूरी नहीं है। कम्पोस्ट, गोबर की अच्छी तरह सड़ी खाद, हरी खाद, फसल अवशेष और मिट्टी परीक्षण आधारित पोषण प्रबंधन को भी खेती की योजना में शामिल करना चाहिए।

क्या पंचगव्य रासायनिक खाद का विकल्प है?

यह एक महत्वपूर्ण सवाल है। पंचगव्य को हर परिस्थिति में रासायनिक उर्वरकों का सीधा और पूर्ण विकल्प मानना उचित नहीं है।फसल को नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश और कई सूक्ष्म पोषक तत्वों की निश्चित आवश्यकता होती है। मिट्टी में इनकी उपलब्धता कम होने पर फसल का उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इसलिए किसान को अपनी खेती की पद्धति के अनुसार संतुलित पोषण योजना बनानी चाहिए।

यदि कोई किसान पूरी तरह जैविक खेती करना चाहता है तो उसे पंचगव्य के साथ कम्पोस्ट, वर्मी कम्पोस्ट, हरी खाद और अन्य अनुमोदित जैविक पोषण स्रोतों की भी आवश्यकता पड़ सकती है।

पंचगव्य इस्तेमाल करते समय कौन सी गलतियां न करें?

How to use Panchagavya in farming समझने के साथ यह जानना भी जरूरी है कि इसके इस्तेमाल में किन गलतियों से बचना चाहिए। सबसे सामान्य गलती बहुत गाढ़ा घोल इस्तेमाल करना है। अधिक मात्रा हमेशा अधिक फायदा नहीं देती। दूसरी गलती बिना छाने घोल को स्प्रे पंप में भरना है। इससे नोजल जाम हो सकती है। तेज दोपहर की धूप में स्प्रे करना भी उचित नहीं है। इसी तरह बारिश से ठीक पहले छिड़काव करने पर घोल बह सकता है। किसानों को बहुत पुराना, खराब गंध या असामान्य स्थिति वाला मिश्रण बिना जांच के इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। तैयारी और भंडारण के दौरान स्वच्छता का ध्यान रखना जरूरी है।

पंचगव्य का घोल बनाते समय इन बातों का रखें ध्यान

पंचगव्य तैयार करने और इस्तेमाल करने के दौरान कुछ सावधानियां उपयोगी हैं। साफ पानी का इस्तेमाल करें और स्प्रे से पहले मिश्रण को अच्छी तरह छानें। निर्धारित सांद्रता से बहुत अधिक मात्रा न मिलाएं। पहली बार प्रयोग करते समय छोटे हिस्से पर परीक्षण करें।पंचगव्य को रासायनिक कीटनाशक, फफूंदनाशक या अन्य कृषि रसायनों के साथ अपनी तरफ से मिलाकर स्प्रे न करें। अलग-अलग उत्पादों की अनुकूलता अलग हो सकती है।

यदि किसी फसल में पहले से रोग या पोषक तत्व की गंभीर कमी दिखाई दे रही है, तो केवल पंचगव्य के भरोसे समस्या का इलाज करने के बजाय सही पहचान और कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।

Panchagavya Farming में मौसम का महत्व

मौसम किसी भी Foliar Spray यानी पत्तियों पर किए जाने वाले छिड़काव के परिणाम को प्रभावित कर सकता है।बहुत तेज हवा में स्प्रे करने से घोल पौधों तक समान रूप से नहीं पहुंचता। तेज धूप में पानी जल्दी सूख सकता है और बारिश स्प्रे को धो सकती है।इसलिए शांत मौसम में सुबह या शाम का समय चुनना अधिक व्यावहारिक है।मौसम को ध्यान में रखकर किया गया Panchagavya spray for plants घोल की बर्बादी को कम करने में भी मदद कर सकता है।

पंचगव्य से खेती करने वाले किसान रिकॉर्ड जरूर रखें

अगर आप जानना चाहते हैं कि आपके खेत में पंचगव्य वास्तव में कितना उपयोगी साबित हो रहा है, तो रिकॉर्ड रखना बहुत अच्छा तरीका है।खेत के एक हिस्से में निर्धारित मात्रा में पंचगव्य इस्तेमाल करें और संभव हो तो एक समान छोटा हिस्सा तुलना के लिए रखें। दोनों हिस्सों में पौधों की वृद्धि, फूल, फल, उत्पादन, लागत और फसल की गुणवत्ता से संबंधित जानकारी नोट करें।

इससे आपको अपने खेत की परिस्थितियों में Panchagavya benefits in agriculture को समझने में मदद मिलेगी।

कई सीजन का रिकॉर्ड एक सीजन के अनुभव से अधिक उपयोगी हो सकता है।

पंचगव्य से खेती की लागत कैसे कम की जा सकती है?

यदि किसान के पास जरूरी सामग्री स्थानीय स्तर पर उपलब्ध है, तो खेत पर जैविक इनपुट तैयार करना कुछ परिस्थितियों में बाजार से खरीदे जाने वाले इनपुट पर निर्भरता घटा सकता है। लेकिन लागत की सही तुलना करते समय केवल सामग्री का खर्च नहीं देखना चाहिए। पंचगव्य तैयार करने में लगने वाला श्रम, समय, पात्र, छिड़काव और भंडारण की लागत भी शामिल करनी चाहिए।

यदि किसान व्यवस्थित रिकॉर्ड रखता है तो वह यह समझ सकता है कि Panchagavya Farming उसके खेत में आर्थिक रूप से फायदेमंद है या नहीं।

पंचगव्य के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले सवाल | FAQs

1. पंचगव्य क्या है?

पंचगव्य गाय से प्राप्त गोबर, गोमूत्र, दूध, दही और घी पर आधारित एक पारंपरिक मिश्रण है। खेती में इस्तेमाल होने वाले कई नुस्खों में कुछ अतिरिक्त जैविक सामग्री भी मिलाई जाती है।

2. पंचगव्य का फसल में उपयोग कैसे करें?

आमतौर पर इसे पानी में निर्धारित मात्रा में मिलाकर पत्तियों पर स्प्रे किया जाता है। कुछ कृषि पद्धतियों में सिंचाई के पानी के साथ भी इसका इस्तेमाल होता है।

3. Panchagavya dosage for crops कितना होना चाहिए?

पत्तियों पर स्प्रे के लिए लगभग 3 प्रतिशत घोल का उपयोग कई प्रचलित कृषि अनुशंसाओं में देखने को मिलता है। फसल और क्षेत्र के अनुसार वास्तविक मात्रा अलग हो सकती है, इसलिए स्थानीय कृषि सलाह को प्राथमिकता दें।

4. 10 लीटर पानी में पंचगव्य कितना डालें?

यदि 3 प्रतिशत घोल तैयार करना हो तो 10 लीटर पानी के अनुपात में लगभग 300 मिलीलीटर पंचगव्य रखा जाता है। किसी विशेष फसल में इस्तेमाल से पहले उसकी अनुशंसित सांद्रता जरूर जांचें।

5. पंचगव्य का छिड़काव कब करें?

आमतौर पर सुबह या शाम के समय छिड़काव करना बेहतर होता है। तेज धूप, तेज हवा और बारिश की संभावना में स्प्रे करने से बचें।

6. पंचगव्य कितने दिन के अंतराल पर डालना चाहिए?

कुछ खेती प्रणालियों में 10 से 15 दिनों का अंतर रखा जाता है। सही अंतराल फसल, मौसम और उसकी विकास अवस्था पर निर्भर करता है।

7. क्या पंचगव्य सभी फसलों में इस्तेमाल किया जा सकता है?

इसका प्रयोग विभिन्न अनाज, सब्जी और बागवानी फसलों में किया जाता है, लेकिन मात्रा और इस्तेमाल का समय अलग-अलग हो सकता है।

8. क्या पंचगव्य से रासायनिक खाद पूरी तरह बंद कर सकते हैं?

सिर्फ पंचगव्य को हर परिस्थिति में संपूर्ण पोषण का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। फसल का पोषण प्रबंधन मिट्टी परीक्षण, फसल की जरूरत और अपनाई जा रही कृषि प्रणाली के आधार पर होना चाहिए।

पंचगव्य से खेती (Panchagavya Farming) जैविक और प्राकृतिक खेती में इस्तेमाल की जाने वाली एक पारंपरिक पद्धति है। किसान इसका उपयोग पौधों की वृद्धि और खेती में जैविक इनपुट के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के उद्देश्य से करते हैं।

इसके बेहतर इस्तेमाल के लिए तीन बातों का विशेष ध्यान रखना जरूरी है: सही तरीके से तैयार किया गया पंचगव्य, फसल के अनुसार उचित सांद्रता और सही समय पर छिड़काव।

कई प्रचलित अनुशंसाओं में पत्तियों पर स्प्रे के लिए लगभग 3 प्रतिशत घोल का उल्लेख मिलता है, लेकिन Panchagavya dosage for crops हर स्थिति में एक जैसा नहीं माना जाना चाहिए। फसल, मौसम, मिट्टी और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार मात्रा में बदलाव हो सकता है।

इसलिए How to use Panchagavya in farming का सबसे सुरक्षित तरीका है कि किसान स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र, कृषि विश्वविद्यालय या कृषि विशेषज्ञ की फसल-विशिष्ट अनुशंसा को प्राथमिकता दें और पहली बार इस्तेमाल करते समय छोटे क्षेत्र पर परीक्षण करें। इस तरह पंचगव्य को कम्पोस्ट, मिट्टी परीक्षण, संतुलित पोषण, सही सिंचाई और उचित फसल प्रबंधन के साथ जोड़कर एक व्यवस्थित कृषि योजना का हिस्सा बनाया जा सकता है।

 

Tags: Panchagavya Farming
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