जलवायु परिवर्तन (Climate Change) और मौसम की बढ़ती अनिश्चितता अब कृषि क्षेत्र के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। तापमान में उतार-चढ़ाव, वर्षा के बदलते पैटर्न, सूखा, बाढ़ और अन्य Extreme Weather Events का सीधा असर किसानों की फसल और आय पर पड़ सकता है। विशेष रूप से केले जैसी महत्वपूर्ण बागवानी फसल में बदलती जलवायु परिस्थितियां उत्पादन, गुणवत्ता और रोग प्रबंधन को प्रभावित कर सकती हैं।
इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए भाकृअनुप–राष्ट्रीय केला अनुसंधान केन्द्र (ICAR-National Research Centre for Banana), तिरुचिरापल्ली ने अपने 33वें स्थापना दिवस और किसान मेले का आयोजन किया। कार्यक्रम का मुख्य विषय “केला-आधारित फसल प्रणाली में Super El Niño: शमन” रहा। इसमें वैज्ञानिकों, किसानों, उद्यमियों, निर्यातकों, किसान संगठनों और अन्य हितधारकों ने Climate-Resilient Banana Farming तथा बदलती जलवायु से उत्पन्न चुनौतियों पर चर्चा की।
कार्यक्रम में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि किसानों को मौसम पर नियंत्रण नहीं है, लेकिन Soil Health, Crop Selection, Quality Planting Material, Water Management और Crop Diversification जैसे क्षेत्रों में वैज्ञानिक प्रबंधन के माध्यम से जलवायु जोखिमों को कम किया जा सकता है।
Soil, Plant और Atmosphere हैं कृषि उत्पादन के प्रमुख आधार
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. के. बालचंद्र हेब्बार, निदेशक, भाकृअनुप–केन्द्रीय रोपण फसल अनुसंधान संस्थान, कासरगोड ने कृषि उत्पादन को प्रभावित करने वाले तीन प्रमुख घटकों—Soil, Plant और Atmosphere—को रेखांकित किया।
उन्होंने बताया कि किसानों का वायुमंडलीय परिस्थितियों और बड़े स्तर पर Climate Conditions पर नियंत्रण सीमित होता है। हालांकि किसान उन कारकों को बेहतर ढंग से प्रबंधित कर सकते हैं, जिन पर उनका नियंत्रण है।
इनमें खेत की Soil Health, उपयुक्त Crop Selection और गुणवत्तापूर्ण Planting Material महत्वपूर्ण हैं। स्वस्थ मिट्टी और गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री से फसल की उत्पादन क्षमता को बेहतर बनाया जा सकता है तथा कुछ उत्पादन जोखिमों को कम किया जा सकता है।
उन्होंने बारहमासी फसलों में केवल Monocropping पर निर्भर रहने के बजाय Intercropping System अपनाने की वकालत की। उनके अनुसार, अंतरवर्ती फसल प्रणाली खेत में अनुकूल Microclimate तैयार करने में मदद कर सकती है और मौसम में होने वाले बदलावों के प्रतिकूल प्रभाव को कम करने में उपयोगी हो सकती है।
किसानों को मिली दो नई Banana Varieties की सौगात
अपने अध्यक्षीय संबोधन में ICAR-NRCB के निदेशक डॉ. आर. सेल्वराजन ने संस्थान की हालिया उपलब्धियों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने Variety Development, Crop Protection, Mechanization, Genetic Resource Conservation और Export Promotion के क्षेत्र में किए गए कार्यों को रेखांकित किया।
कार्यक्रम की प्रमुख उपलब्धियों में केले की दो नई किस्मों—कावेरी थंगम (Kaveri Thangam) और कावेरी नादन (Kaveri Nadan)—को जारी किया जाना रहा।
इन दोनों किस्मों को किसानों के लिए नए उत्पादन विकल्पों के रूप में देखा जा रहा है। संस्थान के अनुसार, दोनों किस्मों की Planting Material तमिलनाडु और अन्य प्रमुख Banana Producing States के 126 किसानों को पहले ही वितरित की जा चुकी है।
इससे इन किस्मों का Farm-Level Evaluation और किसानों के खेतों में इनके प्रदर्शन का अवसर मिला है।
Kaveri Thangam में अधिक Pro-Vitamin A
कावेरी थंगम एक Premium Quality Banana Variety है, जो अपनी विशिष्ट सुगंध और उपभोक्ताओं के बीच बेहतर स्वीकार्यता के लिए जानी जाती है।
इस किस्म के पीले गूदे में Pro-Vitamin A की मात्रा उल्लेखनीय रूप से अधिक बताई गई है। संस्थान के अनुसार, ताजे गूदे में लगभग 1,090 माइक्रोग्राम/100 ग्राम Pro-Vitamin A पाया जाता है।
यह मात्रा पारंपरिक किस्मों की तुलना में लगभग दस गुना अधिक बताई गई है। पोषण संबंधी यह विशेषता कावेरी थंगम को एक संभावनाशील किस्म बनाती है और भविष्य में Nutrition-Oriented Horticulture तथा Value-Based Banana Production के लिए इसका महत्व बढ़ सकता है।
Kaveri Nadan से अधिक Yield की उम्मीद
दूसरी नई किस्म कावेरी नादन (Kaveri Nadan) पाचा नादन प्रकार की अधिक उपज देने वाली किस्म है।
संस्थान के अनुसार, इसकी Yield लगभग 100 प्रतिशत अधिक है। अधिक Productivity किसानों के लिए प्रति इकाई क्षेत्र अधिक उत्पादन का अवसर उपलब्ध करा सकती है।
यदि बेहतर उत्पादन के साथ उचित Market Linkage, Quality Management और Post-Harvest Management को जोड़ा जाए तो ऐसी किस्में किसानों की Farm Income बढ़ाने में उपयोगी हो सकती हैं।
Genetic Diversity के संरक्षण पर ICAR-NRCB का जोर
Climate Change के दौर में फसलों की Genetic Diversity को सुरक्षित रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है। भविष्य में बदलती जलवायु, नई बीमारियों और अन्य उत्पादन चुनौतियों से निपटने के लिए विविध Genetic Resources उपयोगी आधार उपलब्ध करा सकते हैं।
ICAR-NRCB ने 33 नए Banana Germplasm Accessions तथा Musa की पांच प्रजातियों के Collection और Conservation की जानकारी दी।
Germplasm Conservation के माध्यम से केले की विभिन्न आनुवंशिक विशेषताओं को संरक्षित किया जा सकता है। भविष्य में इन Genetic Resources का उपयोग नई किस्मों और Climate-Resilient Banana Varieties के विकास में किया जा सकता है।
Fusarium Wilt Management पर विशेष ध्यान
केला उत्पादन के सामने Climate Risk के अलावा Plant Diseases भी एक महत्वपूर्ण चुनौती हैं। इनमें Fusarium Wilt प्रमुख रोगों में शामिल है, जिसके प्रभाव को कम करने के लिए Integrated Disease Management की आवश्यकता होती है।
ICAR-NRCB के अनुसार, मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में 17 स्थानों और महाराष्ट्र के जलगांव के दसनूर में चार स्थानों पर Integrated Fusarium Wilt Management लागू किया जा रहा है।
यह पहल किसानों को रोग की समस्या से निपटने के लिए वैज्ञानिक प्रबंधन पद्धतियों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
किसानों के लिए स्वस्थ Planting Material, खेत की स्वच्छता, वैज्ञानिक Crop Management और समय पर Disease Monitoring जैसी व्यवस्थाएं Banana Disease Management को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
Russia Export के लिए बढ़ाई जा रही संभावनाएं
भारतीय केले के लिए Domestic Market के साथ International Market में भी संभावनाएं मौजूद हैं। Export Market तक पहुंच किसानों और Banana Value Chain से जुड़े उद्यमियों के लिए अतिरिक्त आर्थिक अवसर पैदा कर सकती है।
कार्यक्रम में बताया गया कि ICAR-NRCB और APEDA टीम ने रूस को Banana Export को सुगम बनाने के लिए जलगांव में उपलब्ध सुविधाओं का निरीक्षण किया है।
इसके साथ ही तमिलनाडु से Cochin Port के माध्यम से Russia को Banana Export करने की संभावनाओं का भी अध्ययन किया जा रहा है।
Export को बढ़ावा देने के लिए Quality Standards, Grading, Packaging, Post-Harvest Handling, Cold Chain और Logistics जैसी व्यवस्थाओं का महत्व बढ़ जाता है। इन क्षेत्रों में सुधार होने से Banana Export Value Chain को मजबूती मिल सकती है।
Banana Stem से भी बन सकती है अतिरिक्त आय
केले की खेती में Fruit Harvesting के बाद खेत में बड़ी मात्रा में Banana Stem यानी केले का तना बचता है। यदि इसका उचित उपयोग नहीं किया जाए तो यह Agricultural Waste के रूप में रह जाता है।
ICAR-NRCB ने इसी Agricultural Waste को Value Addition से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण तकनीकी पहल की है।
कार्यक्रम में Central-Core Banana Stem Juice Extraction Machine को प्रमुख तकनीकी उपलब्धियों में शामिल किया गया। यह तकनीक गन्ने का रस निकालने वाली मशीन की तर्ज पर विकसित की गई है।
इस मशीन के माध्यम से केले के तने से रस निकाला जा सकता है। इससे Self Help Groups (SHGs), Women Entrepreneurs, Street Vendors और Small Rural Enterprises के लिए नए Business Opportunities विकसित हो सकते हैं।
यह पहल Waste-to-Value और Circular Agriculture की अवधारणा से भी जुड़ती है, जहां खेती से निकलने वाले अवशेषों को अतिरिक्त आय के स्रोत में बदलने का प्रयास किया जाता है।
Super El Niño से कृषि के सामने चुनौती
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने Super El Niño और Climate Variability के कृषि पर संभावित प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की।
Super El Niño एक प्राकृतिक Climate Phenomenon है, जो Pacific Ocean की परिस्थितियों में होने वाले बदलावों से जुड़ा है। इसके प्रभाव के कारण अलग-अलग क्षेत्रों में मौसम के पैटर्न में बदलाव हो सकते हैं और कुछ स्थानों पर Flood तथा Drought जैसी Extreme Weather Conditions देखने को मिल सकती हैं।
कृषि में ऐसी परिस्थितियां किसानों के लिए चुनौतीपूर्ण होती हैं क्योंकि Crop Growth सीधे Temperature, Rainfall, Soil Moisture और Water Availability से प्रभावित होती है।
ऐसे में किसानों के लिए Climate Adaptation और Risk Management को खेती का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाना जरूरी हो जाता है।
Mulching और Weed Mat से Moisture Conservation
विशेषज्ञों ने किसानों को Mulching और Weed Mat जैसी Moisture Conservation Techniques अपनाने की सलाह दी।
Mulching से मिट्टी की सतह से नमी के नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है। इससे खेत में Soil Moisture को अपेक्षाकृत लंबे समय तक बनाए रखने में सहायता मिलती है।
इसी प्रकार Weed Mat का उपयोग खरपतवार नियंत्रण के साथ-साथ मिट्टी में नमी संरक्षण के लिए किया जा सकता है।
Climate-Smart Agriculture में Water Management और Moisture Conservation की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहां वर्षा का वितरण अनिश्चित हो सकता है, खेत में उपलब्ध पानी का बेहतर उपयोग किसानों के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है।
Intercropping से कम हो सकता है Climate Risk
कार्यक्रम में बारहमासी फसलों में Intercropping को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया।
Banana-Based Cropping System में उपयुक्त अंतरवर्ती फसलों को शामिल करने से किसान केवल एक फसल पर निर्भर नहीं रहते। इससे Crop Diversification को बढ़ावा मिल सकता है और खेत की भूमि का बेहतर उपयोग संभव हो सकता है।
इसके अलावा अलग-अलग पौधों की उपस्थिति से खेत की Microclimate Conditions में भी बदलाव आ सकता है। यही कारण है कि Climate-Resilient Farming Systems विकसित करने में Intercropping को एक महत्वपूर्ण रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
16 Awards से किसानों और उद्यमियों का सम्मान
किसान मेले के दौरान कृषि क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले हितधारकों को सम्मानित किया गया। कुल 16 Awards प्रदान किए गए।
इनमें Best Banana Farmer, Best Banana Conservator, Best Woman Entrepreneur, Best KVK, Best Entrepreneur, Best Banana Exporter और Best Tissue Culture Production Unit जैसे पुरस्कार शामिल रहे।
इसके अलावा तमिलनाडु के Tribal Welfare Directorate के निदेशक थिरु एस. अन्नादुरई को जनजातीय समुदायों के कल्याण में योगदान के लिए Appreciation Award प्रदान किया गया।
इससे Banana Sector में किसानों, Entrepreneurs, Exporters, KVKs और Tissue Culture Units के योगदान को पहचान मिली।
1,000 से अधिक Farmers और Stakeholders की भागीदारी
33वें स्थापना दिवस एवं Farmer Meet में लगभग 1,000 Farmers और Stakeholders ने भाग लिया।
कार्यक्रम में सेनासंजहना FPO, मैसूर; CIAE, कोयंबटूर; और भारती किसान संगम, सोलावंदन सहित विभिन्न Farmer Organizations ने भागीदारी की।
इसके अलावा 32 से अधिक Exhibition Stalls लगाए गए, जहां Banana Farming, Agricultural Technology, Farm Innovations और Allied Agricultural Activities से संबंधित तकनीकों और उत्पादों को प्रदर्शित किया गया।
ऐसे Farmer Events किसानों को वैज्ञानिकों, तकनीकी विशेषज्ञों और उद्यमियों से सीधे संवाद का अवसर देते हैं। इससे किसानों को नई Technologies और Farming Practices को समझने में सहायता मिलती है।
Super El Niño और Fusarium Wilt पर Panel Discussions
कार्यक्रम में दो महत्वपूर्ण विषयों पर Panel Discussions भी आयोजित की गईं।
पहली चर्चा का विषय था—“चावल, केला, गन्ना और नारियल की खेती में Super El Niño – चुनौतियां और शमन रणनीतियां”।
इसमें अलग-अलग Cropping Systems पर Climate Variability के प्रभाव और संभावित Mitigation Strategies पर चर्चा हुई।
दूसरी Panel Discussion “केले की खेती में Fusarium Wilt Management” विषय पर आयोजित की गई। इसमें Banana Disease Management से जुड़े वैज्ञानिक पहलुओं और किसानों के लिए उपयोगी रणनीतियों पर विचार-विमर्श हुआ।
इन चर्चाओं का उद्देश्य Farmers, Scientists, Entrepreneurs और अन्य Stakeholders के बीच Knowledge Sharing को बढ़ावा देना रहा।
Climate-Resilient Banana Farming की ओर बढ़ता कदम
ICAR-NRCB का 33वां Foundation Day और Farmer Meet बदलती जलवायु परिस्थितियों के बीच Banana Farming के भविष्य को लेकर महत्वपूर्ण संदेश देता है।
आज किसानों के सामने केवल अधिक उत्पादन करने की चुनौती नहीं है, बल्कि Climate Risk, Water Scarcity, Plant Diseases, Market Access और Production Cost जैसी कई चुनौतियां एक साथ मौजूद हैं।
ऐसे में Climate-Resilient Banana Farming के लिए एक Integrated Approach आवश्यक है। इसमें बेहतर Banana Varieties, Quality Planting Material, Soil Health Management, Intercropping, Moisture Conservation, Integrated Disease Management, Mechanization, Value Addition और Export Promotion जैसे कई पहलुओं को एक साथ जोड़ना होगा।
कावेरी थंगम और कावेरी नादन जैसी नई Banana Varieties किसानों को नए उत्पादन विकल्प दे सकती हैं। वहीं Germplasm Conservation भविष्य की Breeding और Variety Development के लिए महत्वपूर्ण आधार तैयार कर रहा है।
Fusarium Wilt Management से Crop Protection को मजबूती मिल सकती है, जबकि Mulching और Weed Mat जैसी तकनीकें Moisture Conservation में उपयोगी हो सकती हैं।
दूसरी ओर, Banana Stem Juice Extraction Machine जैसी Technology खेती के Waste को Value-Added Product में बदलकर Rural Entrepreneurship और Women Entrepreneurship के लिए अवसर पैदा कर सकती है।
किसानों की आय और टिकाऊ खेती पर फोकस
Banana Sector को मजबूत करने के लिए उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ Value Addition, Processing, Export और Market Linkage पर भी ध्यान देना जरूरी है।
यदि किसान केवल फल बेचने के बजाय Banana Stem और अन्य By-products से जुड़े उद्यम विकसित करते हैं, तो खेती से प्राप्त कुल आर्थिक मूल्य को बढ़ाया जा सकता है।
इसी तरह International Market में Export Opportunities बढ़ने से Banana Supply Chain में किसानों, FPOs, Entrepreneurs, Exporters और अन्य Stakeholders की भूमिका मजबूत हो सकती है।
जलवायु परिवर्तन के दौर में Sustainable Agriculture और Climate-Smart Agriculture को अपनाना आने वाले समय की आवश्यकता है। किसान जितनी जल्दी अपने खेतों में Climate Adaptation Strategies को शामिल करेंगे, उतना ही बेहतर तरीके से वे मौसम की अनिश्चितता से जुड़े जोखिमों का सामना कर सकेंगे।
ICAR-NRCB का 33वां स्थापना दिवस और किसान मेला केले की खेती को नई तकनीक, नई किस्मों और Climate-Resilient Agriculture से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया है।
Super El Niño, Climate Change और Extreme Weather Events जैसी चुनौतियों के बीच किसानों को वैज्ञानिक Crop Management, Intercropping, Moisture Conservation और Integrated Disease Management को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
नई Kaveri Thangam और Kaveri Nadan Banana Varieties, Genetic Resource Conservation, Fusarium Wilt Management, Banana Stem Juice Extraction Technology और Russia Export की संभावनाएं Banana Sector के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण पहल हैं।
किसानों, वैज्ञानिकों, FPOs, Entrepreneurs और Exporters के बीच मजबूत सहयोग से भारत में एक ऐसी Climate-Resilient and Sustainable Banana Production System विकसित की जा सकती है, जो न केवल उत्पादन और गुणवत्ता को बनाए रखे, बल्कि किसानों की आय, ग्रामीण रोजगार और कृषि उद्यमिता को भी नई गति दे।

