देश में जैव विविधता संरक्षण को जमीनी स्तर पर और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत चंडीगढ़ में राज्य जैव विविधता बोर्डों (State Biodiversity Boards-SBBs) और केंद्र शासित प्रदेश जैव विविधता परिषदों (Union Territory Biodiversity Councils-UTBCs) की 16वीं राष्ट्रीय बैठक का शुभारंभ हुआ। राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (National Biodiversity Authority-NBA) द्वारा आयोजित यह दो दिवसीय राष्ट्रीय बैठक 6 और 7 सितंबर 2026 को आयोजित की जा रही है।
इस राष्ट्रीय बैठक में देशभर के State Biodiversity Boards और Union Territory Biodiversity Councils के अध्यक्षों एवं सदस्य सचिवों के अलावा वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, वैज्ञानिक, विशेषज्ञ और जैव विविधता संरक्षण से जुड़े प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। बैठक का मुख्य फोकस State and Local-Level Biodiversity Governance Framework को मजबूत करना और जैव विविधता संरक्षण से जुड़े कानूनों एवं नीतियों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच बेहतर समन्वय विकसित करना है।
बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि भारत की समृद्ध Biological Diversity को संरक्षित करने के लिए केवल आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों और संस्थागत व्यवस्थाओं पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। इसके साथ-साथ सदियों से स्थानीय समुदायों के पास मौजूद Traditional Ecological Knowledge, स्थानीय अनुभव और Community Participation को भी Conservation Strategy का हिस्सा बनाया जाना जरूरी है।
उद्घाटन सत्र में कई प्रमुख हस्तियां रहीं मौजूद
राष्ट्रीय बैठक के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक श्री गुलाब चंद कटारिया, केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव और हरियाणा सरकार के पर्यावरण, वन एवं वन्यजीव मंत्री श्री राव नरबीर सिंह ने की।
इस अवसर पर पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सचिव श्री तन्मय कुमार, वन महानिदेशक एवं विशेष सचिव श्री सुशील कुमार अवस्थी, मंत्रालय के अपर सचिव श्री आशुतोष अग्निहोत्री, राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री वीरेंद्र तिवारी सहित मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक, विशेषज्ञ और विभिन्न राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
बैठक में देश में Biodiversity Conservation की वर्तमान स्थिति, राज्यों और स्थानीय निकायों की भूमिका, Biodiversity Management Committees (BMCs), People’s Biodiversity Registers (PBRs), Access and Benefit Sharing (ABS), Traditional Knowledge और Sustainable Development जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया जा रहा है।
पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के मेल पर जोर
पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक श्री गुलाब चंद कटारिया ने अपने संबोधन में भारत की समृद्ध जैविक विरासत और पारंपरिक पर्यावरणीय मूल्यों का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि देश की Ecological Security का सीधा संबंध Food Security, Water Security, Livelihood और Sustainable Development से है। इसलिए जैव विविधता संरक्षण को केवल वन्यजीव संरक्षण तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए।
उन्होंने आधुनिक Conservation Approaches के साथ Traditional Knowledge और Community Participation को जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया।
राज्यपाल ने विशेष रूप से Wetlands, River Ecosystems और Agricultural Biodiversity के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि इन प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण पर्यावरणीय संतुलन के साथ-साथ स्थानीय समुदायों की आजीविका और खाद्य व्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण है।
उन्होंने Biodiversity Management Committees और People’s Biodiversity Registers को मजबूत करने की जरूरत पर भी बल दिया। साथ ही Biodiversity Institutions और Local Communities के बीच बेहतर Coordination विकसित करने का आह्वान किया।
राज्यों को नए Biodiversity Governance Framework के अनुरूप नियम बनाने होंगे
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि भारत की पर्यावरण संरक्षण की परंपरा वैज्ञानिक क्षमता के साथ-साथ सामुदायिक ज्ञान और स्थानीय अनुभवों पर भी आधारित है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू की गई कई पर्यावरणीय पहलों का उल्लेख किया। इनमें Mission LiFE, एक पेड़ मां के नाम, Amrit Sarovar और Green Credit Programme जैसी पहलें शामिल हैं।
केंद्रीय मंत्री ने Biological Diversity Act, 2002 का उल्लेख करते हुए कहा कि Biological Diversity (Amendment) Act, 2023 और Biological Diversity Rules, 2024 के माध्यम से देश के Biodiversity Governance Framework को अधिक मजबूत और सुव्यवस्थित किया गया है।
उन्होंने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आग्रह किया कि वे अपने Rules, Institutional Mechanisms और Implementation Procedures को संशोधित राष्ट्रीय Biodiversity Governance Framework के अनुरूप बनाएं।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राष्ट्रीय स्तर पर बनाई गई नीतियों और कानूनों का प्रभाव वास्तविक रूप से State, District, Panchayat और Local Community स्तर तक पहुंचे।
27.6 लाख से अधिक Biodiversity Management Committees को प्रभावी बनाने पर जोर
बैठक में Ground-Level Implementation को विशेष महत्व दिया गया। श्री भूपेंद्र यादव ने 27.6 लाख से अधिक Biodiversity Management Committees को सक्रिय और प्रभावी बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
Biodiversity Management Committees स्थानीय स्तर पर जैव विविधता संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। स्थानीय क्षेत्र में पाए जाने वाले Plants, Animals, Medicinal Plants, Agricultural Biodiversity और अन्य Biological Resources की जानकारी जुटाने और उनके संरक्षण में इन समितियों की भूमिका महत्वपूर्ण है।
हालांकि केवल समितियों का गठन पर्याप्त नहीं है। उन्हें पर्याप्त Training, Capacity Building, Technical Support और Institutional Coordination उपलब्ध कराना भी जरूरी है।
इसी दिशा में राष्ट्रीय बैठक को एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में देखा जा रहा है, जहां विभिन्न राज्य अपने अनुभव, Best Practices, Innovations और Implementation Challenges साझा कर रहे हैं।
People’s Biodiversity Registers को बनाया जाएगा Dynamic Planning Tool
केंद्रीय मंत्री ने People’s Biodiversity Registers (PBRs) की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने कहा कि PBRs को केवल स्थानीय जैव विविधता की जानकारी दर्ज करने वाले दस्तावेज के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इन्हें Dynamic Local Planning Tools के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।
इन Registers में किसी क्षेत्र की स्थानीय Biodiversity के साथ-साथ उससे संबंधित Traditional Knowledge की जानकारी भी शामिल हो सकती है।
यदि इस जानकारी का उपयोग Local Planning में किया जाए, तो यह Sustainable Development Planning को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है। उदाहरण के लिए किसी गांव या स्थानीय निकाय के क्षेत्र में मौजूद Wetlands, Native Plant Species, Traditional Crops, Medicinal Plants और अन्य Natural Resources की जानकारी भविष्य की विकास योजनाओं में उपयोगी हो सकती है।
इस तरह PBRs स्थानीय स्तर पर Biodiversity Conservation और Sustainable Development के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी बन सकते हैं।
Access and Benefit Sharing से समुदायों को मिलेगा लाभ
बैठक में Access and Benefit Sharing (ABS) व्यवस्था पर भी विशेष चर्चा हुई।
श्री भूपेंद्र यादव ने बताया कि राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ने ABS Fund के तहत 200 करोड़ रुपये से अधिक की राशि किसानों, स्थानीय समुदायों, Biodiversity Management Committees, State Biodiversity Boards, Union Territory Biodiversity Councils और Research Institutions के साथ साझा की है।
ABS का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि Biological Resources और उनसे जुड़े Traditional Knowledge के उपयोग से उत्पन्न लाभ संबंधित स्थानीय समुदायों तक भी पहुंचे।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ABS केवल आर्थिक व्यवस्था नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य Biodiversity Conservation और Sustainable Livelihoods में योगदान देना भी है।
यदि स्थानीय समुदायों को जैव संसाधनों के संरक्षण से वास्तविक आर्थिक और सामाजिक लाभ मिलता है, तो इससे Conservation Efforts में उनकी भागीदारी और मजबूत हो सकती है।
कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण की पिछले एक वर्ष की उपलब्धियों से संबंधित दस्तावेज भी जारी किए गए। इनमें ABS Scheme और Stakeholders के बीच निधियों के वितरण से संबंधित जानकारी शामिल है।
Biodiversity और Climate Change के बीच गहरा संबंध
बैठक में Biodiversity Conservation और Climate Change के बीच संबंधों को भी प्रमुखता से सामने रखा गया।
जलवायु परिवर्तन के कारण तापमान, वर्षा के पैटर्न, जल उपलब्धता और प्राकृतिक आवासों में बदलाव हो रहा है। इसका प्रभाव Plants, Animals, Insects, Birds और Agricultural Ecosystems पर पड़ सकता है।
ऐसे में Biodiversity Conservation को Climate Action के साथ जोड़ना जरूरी हो जाता है।
श्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि भारत ने Biodiversity Conservation से जुड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। उन्होंने ‘Whole of Government’ और ‘Whole of Society’ Approach की आवश्यकता पर जोर दिया।
इसका अर्थ है कि Biodiversity Conservation केवल Environment Ministry की जिम्मेदारी न होकर सरकार के विभिन्न विभागों, राज्य सरकारों, स्थानीय निकायों, वैज्ञानिक संस्थानों, किसानों, आदिवासी समुदायों और आम नागरिकों की साझा जिम्मेदारी बने।
National Biodiversity Strategy and Action Plan 2024-2030 पर जोर
केंद्रीय मंत्री ने भारत की अद्यतन National Biodiversity Strategy and Action Plan (NBSAP) 2024-2030 का भी उल्लेख किया।
यह रणनीति Kunming-Montreal Global Biodiversity Framework (KMGBF) के अनुरूप तैयार की गई है।
इसके तहत Ecosystem Restoration, Species Conservation, Habitat Conservation, Agricultural Biodiversity और Climate-Resilient Landscapes जैसे क्षेत्रों में measurable outcomes प्राप्त करने पर जोर दिया गया है।
भारत जैसे विशाल और जैव-विविधता से समृद्ध देश के लिए यह जरूरी है कि Biodiversity Conservation के परिणामों को केवल नीतिगत दस्तावेजों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उन्हें जमीन पर मापने योग्य परिणामों में बदला जाए।
इसके लिए State Biodiversity Boards, Local Bodies और Biodiversity Management Committees के बीच मजबूत coordination की आवश्यकता होगी।
30-by-30 Global Conservation Target में राज्यों की भूमिका
श्री यादव ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को वैश्विक 30-by-30 Conservation Target में योगदान देने के लिए भी प्रोत्साहित किया।
इस वैश्विक लक्ष्य का उद्देश्य प्राकृतिक क्षेत्रों और जैव विविधता के संरक्षण के लिए व्यापक स्तर पर Protected and Conserved Areas को बढ़ावा देना है।
भारत के विभिन्न राज्यों में Forests, Wetlands, Rivers, Grasslands, Agricultural Landscapes और Coastal Ecosystems जैव विविधता के महत्वपूर्ण केंद्र हैं। इसलिए देश के Global Biodiversity Conservation Goals को पूरा करने में राज्यों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी।
हरियाणा ने भी साझा किए Conservation Efforts
हरियाणा सरकार के पर्यावरण, वन एवं वन्यजीव मंत्री श्री राव नरबीर सिंह ने राज्य में Conservation और Ecological Restoration की दिशा में किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला।
उन्होंने State और Local-Level Biodiversity Management को मजबूत करने की आवश्यकता बताई।
उन्होंने स्थानीय जैव विविधता के संरक्षण में Biodiversity Management Committees की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए इन समितियों और Local Communities की Training तथा Capacity Building बढ़ाने पर जोर दिया।
हरियाणा जैसे तेजी से शहरीकरण और औद्योगिक विकास वाले राज्य में स्थानीय Biodiversity को सुरक्षित रखने के लिए Wetlands, Forest Patches, Agricultural Landscapes और अन्य प्राकृतिक क्षेत्रों का संरक्षण महत्वपूर्ण है।
Agriculture Biodiversity पर भी रहेगा विशेष फोकस
राष्ट्रीय बैठक का एक महत्वपूर्ण पहलू Agricultural Biodiversity भी है।
भारत की पारंपरिक कृषि व्यवस्था में हजारों स्थानीय Crop Varieties, Indigenous Seeds और Traditional Farming Practices का उपयोग होता रहा है। ये स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल होने के कारण Climate Resilience में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
स्थानीय बीजों और पारंपरिक फसलों का संरक्षण किसानों की Seed Sovereignty और Agricultural Sustainability के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है।
People’s Biodiversity Registers में Agricultural Biodiversity से संबंधित जानकारी को दर्ज करने से स्थानीय स्तर पर Traditional Crops और Indigenous Resources के संरक्षण में मदद मिल सकती है।
इससे Biodiversity Conservation को किसानों की आजीविका और Sustainable Agriculture के साथ जोड़ने की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।
दो दिवसीय बैठक में सामने आएंगे राज्यों के अनुभव और चुनौतियां
6 और 7 सितंबर को आयोजित यह राष्ट्रीय बैठक विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एक साझा मंच उपलब्ध करा रही है।
यहां State Biodiversity Boards और UT Biodiversity Councils अपने अनुभव, Innovations और Implementation Challenges साझा कर रहे हैं।
बैठक से उम्मीद है कि Biodiversity Governance से जुड़े Institutional Mechanisms को मजबूत करने, BMCs के कामकाज में सुधार करने, PBRs की Quality और Utility बढ़ाने तथा Capacity Building को मजबूत करने के लिए व्यावहारिक उपाय सामने आएंगे।
साथ ही राज्यों और स्थानीय निकायों के बीच बेहतर Coordination विकसित करने और Biodiversity Laws तथा Policies के प्रभावी Implementation के लिए भी दिशा तय हो सकती है।
जैव विविधता संरक्षण में Community Participation होगी निर्णायक
भारत की Biodiversity केवल Forests और Protected Areas तक सीमित नहीं है। गांवों, खेतों, तालाबों, नदियों, Wetlands और ग्रामीण Landscapes में भी जैव विविधता का विशाल भंडार मौजूद है।
इसलिए Conservation का सबसे प्रभावी मॉडल वही होगा जिसमें Local Communities को केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि Active Conservation Partners बनाया जाए।
किसानों के Traditional Knowledge, Indigenous Seeds, Local Crops, Medicinal Plants और Natural Resource Management Practices को वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ जोड़ने से एक मजबूत और अधिक Sustainable Conservation Model तैयार किया जा सकता है।
चंडीगढ़ में आयोजित 16वीं राष्ट्रीय बैठक इसी व्यापक सोच को आगे बढ़ाने का प्रयास है। बैठक में जिस तरह Traditional Knowledge, Community Participation, Biodiversity Governance, Sustainable Development, Agricultural Biodiversity और Climate Resilience को एक-दूसरे से जोड़कर देखा गया है, वह भारत की भविष्य की Biodiversity Strategy के लिए महत्वपूर्ण संकेत देता है।
चंडीगढ़ में आयोजित State Biodiversity Boards और Union Territory Biodiversity Councils की 16वीं राष्ट्रीय बैठक ने यह स्पष्ट किया है कि भारत में Biodiversity Conservation अब केवल वन एवं वन्यजीव संरक्षण तक सीमित विषय नहीं रह गया है। इसे Agriculture, Livelihood, Food Security, Water Security, Climate Action और Sustainable Development से जोड़कर देखने की जरूरत है।
केंद्र सरकार द्वारा संशोधित Biodiversity Governance Framework के अनुरूप राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अपने Rules, Institutional Mechanisms और Implementation Systems को मजबूत करना होगा।
वहीं, स्थानीय स्तर पर Biodiversity Management Committees और People’s Biodiversity Registers को प्रभावी बनाना इस पूरी व्यवस्था की सफलता के लिए महत्वपूर्ण होगा।
यदि Traditional Knowledge को Modern Science, Community Participation को Institutional Support और Biodiversity Conservation को Sustainable Livelihoods से जोड़ा जाता है, तो भारत अपनी जैविक विरासत को सुरक्षित रखने के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए अधिक Climate-Resilient और Sustainable Future तैयार कर सकता है।

