भारत के Mechanised Fishing Sector में ईंधन की बढ़ती लागत और Greenhouse Gas Emissions को कम करने की चुनौती के बीच ICAR–Central Institute of Fisheries Technology (ICAR-CIFT), Kochi ने एक महत्वपूर्ण स्वदेशी तकनीक विकसित की है। संस्थान द्वारा विकसित CIFT-V Form Double Slotted Otter Board (CIFT-VSOB) समुद्री ट्रॉलिंग में Hydrodynamic Drag को कम करके ईंधन की खपत घटाने और Fishing Efficiency बढ़ाने की दिशा में उपयोगी साबित हो रहा है।
देश में Mechanised Fishing Operations की कुल लागत में Fuel का हिस्सा लगभग 50–60 प्रतिशत तक बताया जाता है। ऐसे में Fuel Efficiency में मामूली सुधार भी मछुआरों और Fishing Vessel Operators के लिए आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है।
ICAR-CIFT द्वारा विकसित CIFT-VSOB ने Research Trials और Commercial Fishing Conditions में औसतन 3 लीटर प्रति घंटे की Fuel Saving प्रदर्शित की है। इसके साथ ही इस तकनीक से Trawl Net के Mouth Opening में भी सुधार देखा गया, जिससे Catch Performance बेहतर होने की संभावना सामने आई है।
Mechanised Fishing में Fuel सबसे बड़ी लागतों में शामिल
भारत का समुद्री मत्स्य क्षेत्र लाखों लोगों की आजीविका से जुड़ा है। Mechanised Fishing Vessels, विशेषकर Trawlers, समुद्र में लंबी अवधि तक संचालन करते हैं और इनके Operating Cost में Diesel Fuel का महत्वपूर्ण योगदान होता है।
ईंधन की कीमतों में वृद्धि का सीधा असर Fishing Operations की Profitability पर पड़ता है। दूसरी ओर, Fossil Fuel आधारित Fishing Operations से Greenhouse Gas Emissions भी होते हैं।
इसलिए आज Fisheries Sector के सामने दोहरी चुनौती है—एक तरफ Fishermen की Operating Cost को कम करना और दूसरी तरफ Fishing को अधिक Environmentally Sustainable और Climate-Smart बनाना।
ICAR-CIFT ने इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए Trawling Equipment के Hydrodynamic Performance को बेहतर बनाने पर Research शुरू की।
Otter Board में सुधार से शुरू हुई Research
Trawl Fishing में Otter Boards का इस्तेमाल Trawl Net को पानी के अंदर फैलाकर रखने के लिए किया जाता है। Conventional Otter Boards पानी में चलते समय Hydrodynamic Drag उत्पन्न करते हैं।
यह Drag Trawler के Engine पर अतिरिक्त Load डालता है और परिणामस्वरूप अधिक Fuel Consumption हो सकता है।
ICAR-CIFT ने Conventional V-Form Otter Boards के Hydrodynamic Performance को बेहतर बनाने के उद्देश्य से अप्रैल 2020 में एक Institute Research Project शुरू किया।
यह Research ICAR-CIFT और M/s Garware Technical Fibres Ltd. के साथ पहले किए गए अध्ययनों पर आधारित थी। इन अध्ययनों में Slotted Otter Boards के Lift-to-Drag Ratio को बेहतर बनाने की संभावनाएं सामने आई थीं।
इन्हीं वैज्ञानिक निष्कर्षों को आगे बढ़ाते हुए ICAR-CIFT Scientists ने CIFT-VSOB विकसित किया।
क्या है CIFT-V Form Double Slotted Otter Board?
CIFT-VSOB मूल रूप से Conventional V-Form Otter Board के Design को बनाए रखते हुए उसमें वैज्ञानिक तरीके से विकसित Hydrodynamic Slots को शामिल करता है।
इन Slots का प्रमुख उद्देश्य पानी को Otter Board के माध्यम से नियंत्रित तरीके से गुजरने देना और Hydrodynamic Drag को कम करना है।
इसका अर्थ यह है कि Trawler को Net को खींचने और Otter Boards को निर्धारित स्थिति में बनाए रखने के लिए अपेक्षाकृत कम Drag का सामना करना पड़ता है।
इससे Engine Load और Fuel Consumption को कम करने की संभावना पैदा होती है।
इस Technology की एक खास विशेषता यह है कि इसे पूरी तरह नए Fishing System के रूप में अपनाने की आवश्यकता नहीं है। यह मौजूदा Fishing Practices और Trawling Operations के साथ Compatible Replacement के रूप में विकसित की गई है।
मजबूत Steel से तैयार किए गए Otter Boards
CIFT-VSOB का प्रारंभिक निर्माण IS 2062 Grade-B Steel से किया गया।
इस Material का चयन Commercial Fishing Conditions को ध्यान में रखकर किया गया, जहां Fishing Equipment को लंबे समय तक समुद्री पानी, Mechanical Stress और लगातार संचालन का सामना करना पड़ता है।
CIFT-VSOB को Strength, Corrosion Resistance, Wear Resistance और Longer Operational Life जैसी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विकसित किया गया है।
ICAR-CIFT ने इसकी Durability और Maintenance Requirements को और बेहतर बनाने के लिए अब Stainless-Steel Versions विकसित करने की दिशा में भी काम शुरू किया है।
Stainless Steel Variants के आने से समुद्री वातावरण में Corrosion को कम करने और Equipment की Operational Life बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
प्रति घंटे 3 लीटर डीजल की औसत बचत
CIFT-VSOB की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसकी Fuel-Saving Potential है।
Research Trials में Conventional Non-Slotted V-Form Otter Boards की तुलना में CIFT-VSOB ने औसतन 3 लीटर Diesel per Hour of Trawling की बचत प्रदर्शित की।
यह आंकड़ा विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि Trawlers कई घंटों तक लगातार संचालन करते हैं।
यदि प्रति घंटे कुछ लीटर ईंधन की बचत भी लंबे Fishing Trip के दौरान होती है, तो कुल Fuel Consumption में उल्लेखनीय कमी आ सकती है।
Fuel Saving का सीधा प्रभाव Fishing Operations की Cost Efficiency पर पड़ता है। इससे Fishermen और Vessel Owners की Operating Cost को कम करने में सहायता मिल सकती है।
हालांकि वास्तविक बचत Trawler के Engine Capacity, Fishing Conditions, Net Design, Sea State, Trawling Speed और Operational Practices जैसे कई कारकों पर निर्भर कर सकती है।
Trawl-Mouth Opening में भी सुधार
CIFT-VSOB का लाभ केवल Fuel Saving तक सीमित नहीं रहा।
Trials में इस Technology के उपयोग से Greater Trawl-Mouth Opening भी दर्ज की गई।
Trawl Net का Mouth Opening Fishing Performance के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि Net जितना प्रभावी तरीके से खुला रहता है, उतने बड़े क्षेत्र में Fishing Operation किया जा सकता है।
CIFT-VSOB के बेहतर Hydrodynamic Performance से Net Opening में सुधार ने इसके Catch Performance को भी मजबूत किया।
इस प्रकार यह Technology एक साथ दो महत्वपूर्ण उद्देश्यों—Fuel Efficiency और Fishing Performance—को संबोधित करती है।
Sea Trials में वैज्ञानिक तरीके से हुआ परीक्षण
CIFT-VSOB की Performance को केवल Laboratory Conditions में नहीं बल्कि वास्तविक समुद्री परिस्थितियों में भी जांचा गया।
ICAR-CIFT के Research Vessel पर व्यापक Sea Trials आयोजित किए गए।
इन Trials में Fuel Consumption को मापने के लिए Fuel-Consumption Meters और Trawl Net के व्यवहार तथा Mouth Opening का आकलन करने के लिए Trawl Telemetry Sensors का उपयोग किया गया।
इस तरह वैज्ञानिकों ने Fuel Efficiency और Net-Mouth Opening दोनों का Quantitative Assessment किया।
लगभग एक वर्ष तक किए गए अध्ययन में औसतन 3 लीटर प्रति घंटे Fuel Saving के परिणाम की पुष्टि हुई।
इससे Technology की Practical Applicability को मजबूत आधार मिला।
Kerala और Karnataka के Commercial Trawlers में भी मिले सकारात्मक संकेत
Research Vessel पर परीक्षण के बाद CIFT-VSOB को Commercial Fishing Conditions में भी देखा गया।
विशेष रूप से Kerala और Karnataka में Commercial Fishing Vessels से प्राप्त Feedback में भी इसी प्रकार के Fuel-Saving Benefits की जानकारी मिली।
Commercial Trawlers में Technology का प्रदर्शन महत्वपूर्ण है क्योंकि Research Vessel की तुलना में वास्तविक Commercial Operations में Fishing Pattern, Load, Sea Conditions और Operating Hours अलग-अलग हो सकते हैं।
इन परिस्थितियों में भी सकारात्मक परिणाम मिलने से CIFT-VSOB के Commercial Adoption की संभावना मजबूत हुई।
स्थानीय स्तर पर बन सकता है, इसलिए लागत भी नियंत्रित
CIFT-VSOB को Fishermen के लिए एक Practical और Accessible Technology के रूप में विकसित किया गया है।
यह Technology मौजूदा Fishing Practices के साथ Compatible है और Local Workshops के माध्यम से भी उपलब्ध कराई जा सकती है।
इसके एक Pair की लागत लगभग ₹30,000 से ₹50,000 के बीच बताई गई है। कीमत मुख्य रूप से Otter Board के Size और Weight पर निर्भर करती है।
प्रत्येक Board का वजन Trawler की Engine Capacity के अनुसार लगभग 80 से 160 किलोग्राम के बीच हो सकता है।
इससे अलग-अलग Engine Capacity वाले Trawlers के लिए आवश्यकता के अनुसार Otter Board तैयार किए जा सकते हैं।
PMMSY के माध्यम से Commercial Adoption को बढ़ावा
Research Results से उत्साहित होकर ICAR-CIFT ने इस Technology को बड़े स्तर पर पहुंचाने के लिए Pradhan Mantri Matsya Sampada Yojana (PMMSY) के अंतर्गत वित्तीय सहयोग प्राप्त किया।
यह सहायता National Fisheries Development Board (NFDB) के माध्यम से मिली।
इसके तहत अप्रैल 2023 से एक Funded Project शुरू किया गया, जिसका उद्देश्य विभिन्न राज्यों में CIFT-VSOB के बारे में Awareness, Technology Dissemination और Commercial Adoption को बढ़ावा देना था।
इससे Research Laboratory से निकलकर Technology को वास्तविक Fishing Community तक पहुंचाने की प्रक्रिया को गति मिली।
महाराष्ट्र में 20 जोड़ी CIFT-VSOB की खरीद
CIFT-VSOB को लेकर Fishermen और Fisheries Stakeholders से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलने के बाद इसका Institutional Adoption भी देखने को मिला।
Maharashtra Fisheries Department ने अपने Fishing Community के लिए 20 Pairs CIFT-VSOB की खरीद की।
इसके अलावा देश के अन्य हिस्सों में भी Commercial Trawlers द्वारा इस Technology को अपनाए जाने के उदाहरण सामने आए हैं।
यह संकेत देता है कि Fuel-Efficient Fishing Equipment को लेकर Fishermen और Fisheries Departments की रुचि बढ़ रही है।
भारत के 32,000 Trawlers में बड़ा असर संभव
भारत में लगभग 32,000 Trawlers होने का अनुमान इस Technology के संभावित प्रभाव को काफी बड़ा बनाता है।
उपलब्ध आकलन के अनुसार यदि देश के लगभग 50 प्रतिशत Trawler Fleet द्वारा CIFT-VSOB को अपनाया जाता है, तो लगभग 9 million litres यानी 90 लाख लीटर Diesel की बचत संभव हो सकती है।
इसके साथ ही लगभग 18 million kg यानी 1.8 करोड़ किलोग्राम CO₂ Emissions में कमी का अनुमान लगाया गया है।
इस आंकड़े से स्पष्ट होता है कि CIFT-VSOB केवल Fishermen की Fuel Cost कम करने वाली Technology नहीं है, बल्कि Fisheries Sector के Carbon Footprint को कम करने में भी योगदान दे सकती है।
Climate-Smart Fishing की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
दुनिया भर में Fisheries Sector को अधिक Sustainable और Climate-Resilient बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
Fishing Operations में Fuel Consumption कम करना Climate-Smart Fishing का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है।
CIFT-VSOB इसी दिशा में एक Indigenous Innovation के रूप में सामने आया है।
कम Fuel Consumption का अर्थ केवल कम खर्च नहीं है, बल्कि प्रति Fishing Hour Fossil Fuel Use और उससे जुड़े Emissions में कमी भी है।
इसलिए इस Technology को Energy-Efficient Fishing, Green Fisheries और Climate-Smart Marine Fisheries के व्यापक लक्ष्य से जोड़कर देखा जा सकता है।
Blue Economy के लिए भी उपयोगी Innovation
भारत सरकार समुद्री संसाधनों और Fisheries Sector को देश की Blue Economy का महत्वपूर्ण हिस्सा मानती है।
Marine Fisheries में Productivity बढ़ाने के साथ-साथ Fishing Operations को Cost-Efficient और Environmentally Responsible बनाना भी आवश्यक है।
CIFT-VSOB जैसे Indigenous Technologies Blue Economy को Sustainable बनाने में योगदान कर सकते हैं।
यदि Fishermen को Fuel-Efficient Equipment, बेहतर Fishing Technology और Scientific Advisory उपलब्ध होती है, तो Fishing Sector की Economic Viability को मजबूत करने के साथ Environmental Sustainability में भी सुधार किया जा सकता है।
Research से Field Adoption तक की सफल यात्रा
CIFT-VSOB की कहानी इस बात का उदाहरण है कि किस प्रकार Scientific Research से Practical Field Technology विकसित की जा सकती है।
अप्रैल 2020 में शुरू हुई Research ने Hydrodynamic Design को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया।
इसके बाद Long-Term Sea Trials, Fuel Measurement, Trawl Telemetry और Commercial Fishing Feedback के आधार पर Technology की Performance को Validate किया गया।
फिर PMMSY और NFDB के सहयोग से Awareness और Dissemination Programme शुरू हुआ।
महाराष्ट्र में Fisheries Department द्वारा 20 Pairs की खरीद और अन्य राज्यों में Commercial Trawlers द्वारा Adoption ने इसे Laboratory Innovation से Field-Level Solution में बदलने की दिशा में आगे बढ़ाया।
Stainless-Steel Version से बढ़ सकती है Durability
ICAR-CIFT अब CIFT-VSOB के Stainless-Steel Versions विकसित करने पर भी काम कर रहा है।
समुद्री वातावरण में Corrosion एक महत्वपूर्ण चुनौती है। इसलिए अधिक Corrosion-Resistant Material का उपयोग Equipment की Service Life बढ़ाने और Maintenance Requirements कम करने में सहायक हो सकता है।
यदि Stainless-Steel Version Commercial Conditions में सफल रहता है, तो लंबे समय में Fishermen के लिए Maintenance Cost और Equipment Replacement की जरूरत को कम करने में मदद मिल सकती है।
किसानों की तरह मछुआरों के लिए भी Technology Adoption जरूरी
भारत के Fisheries Sector में लाखों परिवार प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मत्स्य गतिविधियों से जुड़े हैं।
Fishing Operations में Technology Adoption को केवल Production बढ़ाने के नजरिए से नहीं बल्कि Income Security, Cost Reduction और Resource Efficiency के नजरिए से भी देखना जरूरी है।
CIFT-VSOB का उदाहरण दिखाता है कि Fishing Equipment के एक महत्वपूर्ण Component में वैज्ञानिक सुधार से Fuel Cost और Fishing Performance दोनों पर असर पड़ सकता है।
ऐसी Technologies का व्यापक Adoption तभी संभव होगा जब Fishermen को Demonstration, Technical Training, Local Manufacturing Support और Institutional Assistance उपलब्ध हो।
भविष्य में व्यापक Adoption की संभावना
CIFT-VSOB ने Research और Commercial Trials में उत्साहजनक परिणाम दिए हैं। अब इसके व्यापक Adoption के लिए लगातार Demonstration, Fishermen Awareness और State Fisheries Departments के सहयोग की आवश्यकता होगी।
अलग-अलग राज्यों में Trawler Designs और Fishing Conditions अलग हो सकती हैं। इसलिए Local Conditions के अनुसार Technology Performance का निरंतर Evaluation महत्वपूर्ण रहेगा।
इसके साथ ही Stainless-Steel Variants, Manufacturing Capacity और Local Workshop Network को मजबूत करना भी जरूरी होगा।
निष्कर्ष: कम ईंधन, कम उत्सर्जन और अधिक टिकाऊ मत्स्य क्षेत्र
ICAR-CIFT-VSOB भारत के Mechanised Fishing Sector के लिए एक महत्वपूर्ण Indigenous Innovation के रूप में सामने आया है।
Conventional V-Form Otter Board की सरलता और Practicality को बनाए रखते हुए Hydrodynamic Slots को शामिल करने वाली यह Technology Drag को कम करने और Fuel Efficiency बढ़ाने पर केंद्रित है।
Research और Commercial Trials में इसके उपयोग से औसतन 3 लीटर प्रति घंटे Trawling Fuel Saving दर्ज की गई है। साथ ही बेहतर Trawl-Mouth Opening और Catch Performance ने इसके संभावित Commercial Benefits को और मजबूत किया है।
लगभग ₹30,000–₹50,000 प्रति Pair की लागत और Local Workshops में निर्माण की उपलब्धता इसे मौजूदा Fishing Systems के लिए एक अपेक्षाकृत Practical Replacement बनाती है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत के लगभग 32,000 Trawlers में यदि 50 प्रतिशत Fleet इस Technology को अपनाता है, तो अनुमानित रूप से 90 लाख लीटर Diesel और लगभग 1.8 करोड़ किलोग्राम CO₂ Emissions की बचत हो सकती है।
इस तरह CIFT-VSOB मछुआरों की Operating Cost कम करने के साथ Energy-Efficient Fishing, Climate-Smart Fisheries, Sustainable Marine Fisheries और India’s Blue Economy को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।
Research से Commercial Adoption तक की इसकी यात्रा यह भी दिखाती है कि जब Indian Scientific Institutions, Fisheries Departments, Industry और Fishing Community एक साथ काम करते हैं, तो देश की वास्तविक समस्याओं के लिए स्थानीय और व्यावहारिक समाधान विकसित किए जा सकते हैं।

