खाद किसानों के लिए खेती की सबसे जरूरी जरूरतों में शामिल है। यूरिया, डीएपी, एनपीके और अन्य उर्वरकों की समय पर उपलब्धता से फसल की लागत और उत्पादन दोनों प्रभावित होते हैं। लेकिन जब किसी इलाके में खाद की मांग बढ़ती है या आपूर्ति सीमित होती है, तब कालाबाजारी और अधिक कीमत वसूलने की शिकायतें सामने आने लगती हैं। इसका सीधा नुकसान किसानों को उठाना पड़ता है।
खाद की कालाबाजारी केवल अधिक कीमत वसूलने तक सीमित नहीं है। इसमें निर्धारित मात्रा से कम खाद देना, जबरन दूसरी कृषि सामग्री खरीदने के लिए मजबूर करना, बिना जरूरत दूसरे उत्पाद के साथ खाद देना, नकली या घटिया उर्वरक बेचना और सरकारी व्यवस्था से मिलने वाली खाद को अवैध तरीके से दूसरी जगह भेजना जैसी गड़बड़ियां भी शामिल हो सकती हैं।
खाद की कालाबाजारी कैसे होती है?
खाद की कालाबाजारी कई तरीकों से की जा सकती है। सबसे आम तरीका निर्धारित कीमत से अधिक पैसा लेना है। उदाहरण के लिए, अगर किसी उर्वरक की कीमत सरकार या कंपनी की ओर से निर्धारित है और दुकानदार किसान से उससे अधिक रकम मांगता है, तो किसान को सावधान होना चाहिए।
दूसरे मामलों में दुकानदार किसान को खाद देने से पहले किसी दूसरे उत्पाद को खरीदने के लिए मजबूर कर सकता है। इसे अक्सर टैगिंग या जबरन बिक्री के रूप में देखा जाता है। किसान को ऐसी स्थिति में यह समझना चाहिए कि केवल खाद खरीदने के लिए अनावश्यक उत्पाद खरीदना जरूरी नहीं है।
कुछ मामलों में खाद की उपलब्धता का फायदा उठाकर दुकानदार किसान से ज्यादा कीमत मांग सकते हैं। खासकर बुवाई के समय जब किसान को तत्काल खाद की जरूरत होती है, तब ऐसी शिकायतें बढ़ सकती हैं।
एक अन्य समस्या नकली या घटिया उर्वरक की हो सकती है। पैकेट देखने में असली जैसा लग सकता है, लेकिन उसकी गुणवत्ता संदिग्ध हो सकती है। इसलिए बिना बिल के खाद खरीदना किसान के लिए जोखिम भरा हो सकता है।
यूरिया के मामले में किसान ज्यादा सतर्क रहें
यूरिया की कीमत और बिक्री व्यवस्था सामान्य बाजार वाली खाद से अलग है। यूरिया किसानों को सरकार द्वारा निर्धारित अधिकतम खुदरा कीमत पर उपलब्ध कराया जाता है। इसलिए दुकानदार द्वारा मनमानी कीमत वसूलने पर किसान को बिल जरूर मांगना चाहिए।
किसान को खाद खरीदते समय पैकेट पर लिखी जानकारी, कंपनी का नाम, वजन, बैच नंबर और अन्य विवरण जरूर देखना चाहिए। पैकेट खुला हुआ हो या उसकी पैकिंग संदिग्ध लगे तो खरीदने से पहले सावधानी बरतना बेहतर है।
डीएपी और एनपीके खरीदते समय क्या देखें?
डीएपी और एनपीके जैसे उर्वरकों में भी किसान को पैकेट और बिल की जांच करनी चाहिए। खाद खरीदते समय किसान यह देखे कि पैकेट पर उर्वरक का ग्रेड, वजन, निर्माता या आयातक की जानकारी और अन्य आवश्यक विवरण स्पष्ट रूप से मौजूद हैं।
किसान को केवल दुकानदार की बात पर भरोसा करके खाद नहीं खरीदनी चाहिए। यदि दुकानदार किसी खाद को दूसरी खाद के नाम पर बेच रहा है या पैकेट पर लिखी जानकारी और बताई गई जानकारी में अंतर है, तो खरीद रोक देना बेहतर है।
कालाबाजारी से बचने के लिए बिल जरूर लें
खाद खरीदते समय बिल लेना किसान की सबसे बड़ी सुरक्षा में से एक है। बिल में खाद का नाम, मात्रा, कीमत और दुकान से संबंधित जानकारी दर्ज होती है।
बिना बिल खाद खरीदने पर बाद में शिकायत करना मुश्किल हो सकता है। इसलिए दुकानदार बिल देने से मना करे तो किसान को सावधान हो जाना चाहिए।
किसान को बिल की फोटो अपने मोबाइल में भी सुरक्षित रखनी चाहिए। इससे भविष्य में शिकायत करने की जरूरत पड़ने पर खरीद का प्रमाण उपलब्ध रहेगा।
जबरन दूसरी खाद या सामान लेने से बचें
कभी-कभी किसान को यह कहा जा सकता है कि खाद तभी मिलेगी जब वह कोई दूसरा कृषि उत्पाद भी खरीदे। ऐसी स्थिति में किसान को पहले यह समझना चाहिए कि क्या वह अतिरिक्त उत्पाद वास्तव में जरूरी है।
अगर किसान को लगता है कि खाद देने के बदले उस पर अनावश्यक सामान खरीदने का दबाव बनाया जा रहा है, तो वह संबंधित कृषि विभाग या स्थानीय प्रशासन को शिकायत कर सकता है।
दुकान और खाद की जानकारी जांचें
खाद खरीदते समय किसान को अधिकृत विक्रेता से खरीदारी करनी चाहिए। संदिग्ध व्यक्ति, बिना लाइसेंस की दुकान या खुले में रखी खाद से बचना बेहतर है।
किसान पैकेट की सील, वजन और पैकिंग भी देखे। पैकेट फटा हुआ हो, सील टूटी हो या उसमें छेड़छाड़ दिखाई दे तो उसे नहीं खरीदना चाहिए।
खाद की कालाबाजारी दिखे तो क्या करें?
अगर किसान को निर्धारित कीमत से अधिक पैसे मांगे जाने, खाद की जमाखोरी, जबरन बिक्री या संदिग्ध खाद बेचने की जानकारी मिलती है, तो वह स्थानीय कृषि विभाग के अधिकारियों को सूचना दे सकता है।
किसान जिला कृषि अधिकारी, उप कृषि निदेशक या संबंधित विभागीय अधिकारी से संपर्क कर सकता है। शिकायत करते समय दुकान का नाम, स्थान, तारीख, खाद का नाम, कीमत और उपलब्ध बिल जैसी जानकारी देना उपयोगी रहता है।
अगर संभव हो तो किसान दुकानदार द्वारा दी गई रसीद, खाद के पैकेट और कीमत से संबंधित जानकारी का फोटो भी सुरक्षित रख सकता है।
किसान अकेले नहीं, समूह में भी शिकायत कर सकते हैं
अगर किसी गांव या क्षेत्र में कई किसानों को एक जैसी समस्या आ रही है, तो किसान मिलकर संबंधित अधिकारियों को शिकायत कर सकते हैं। किसान उत्पादक संगठन, सहकारी समिति और स्थानीय किसान संगठनों की मदद भी ली जा सकती है।
सामूहिक शिकायत से अधिकारियों के लिए मामले की जांच करना आसान हो सकता है और कालाबाजारी पर कार्रवाई की संभावना बढ़ती है।
खाद खरीदते समय किसान इन बातों का रखें ध्यान
खाद खरीदते समय किसान को पांच प्रमुख बातों का ध्यान रखना चाहिए। पहली, अधिकृत विक्रेता से ही खाद खरीदें। दूसरी, पैकेट और खाद की पूरी जानकारी देखें। तीसरी, निर्धारित कीमत की जानकारी रखें। चौथी, हर खरीद पर बिल लें। पांचवीं, किसी भी तरह की गड़बड़ी होने पर शिकायत करने से पीछे न हटें।
इसके अलावा किसान को अपनी जरूरत के अनुसार ही खाद खरीदनी चाहिए। केवल इस डर से कि बाद में खाद नहीं मिलेगी, जरूरत से ज्यादा खाद खरीदना भी सही नहीं है।
जागरूक किसान ही रोक सकते हैं कालाबाजारी
खाद की कालाबाजारी को रोकने में सरकारी निगरानी के साथ किसानों की जागरूकता भी महत्वपूर्ण है। यदि किसान बिना बिल खाद खरीदना बंद कर दें, निर्धारित कीमत की जानकारी रखें और संदिग्ध बिक्री की शिकायत करें, तो अनियमितताओं पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है।
खाद किसान की जरूरत है, मजबूरी नहीं। इसलिए किसान को खाद खरीदते समय जल्दबाजी में कोई भी फैसला नहीं लेना चाहिए। सही जानकारी, बिल और अधिकृत विक्रेता से खरीदारी किसान को कालाबाजारी और ठगी दोनों से बचा सकती है।
अंत में किसानों के लिए सबसे जरूरी बात यही है कि खाद खरीदते समय कीमत, मात्रा, पैकेट और बिल—इन चार चीजों की जांच जरूर करें। अगर कुछ संदिग्ध लगे तो खाद खरीदने के बजाय संबंधित कृषि विभाग से जानकारी लेना बेहतर है।

