भारत और नाइजीरिया ने महिला एवं बाल विकास के क्षेत्र में आपसी सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। नई दिल्ली में भारत की महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी और नाइजीरिया गणराज्य की महिला विषयों एवं सामाजिक विकास मंत्री महामहिम इमान सुलेमान-इब्राहिम (FSI) के बीच हुई उच्चस्तरीय बैठक में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण से लेकर वित्तीय समावेशन, देखभाल अर्थव्यवस्था, स्वच्छ ऊर्जा, सामाजिक सुरक्षा, बाल अधिकार, Child Protection और Digital Inclusion जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब भारत BRICS 2026 की अध्यक्षता कर रहा है और Global South के देशों के बीच सहयोग को नई दिशा देने पर जोर दिया जा रहा है। बैठक के दौरान दोनों देशों ने महिला एवं बाल विकास से जुड़े साझा मुद्दों पर अनुभवों और Best Practices को साझा करने तथा भविष्य में सहयोग के नए अवसर तलाशने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
भारत की ओर से बैठक की मेजबानी महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने की। नाइजीरियाई प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि BRICS 2026 के दौरान साझेदार देश के रूप में नाइजीरिया की भागीदारी Global South के साझा एजेंडे में अफ्रीका की एक महत्वपूर्ण आवाज को सामने लाती है।
उन्होंने कहा कि भारत और नाइजीरिया के बीच महिला एवं बाल विकास के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करना दोनों देशों की साझा प्राथमिकताओं का हिस्सा है।
Women-led Development पर भारत का जोर
बैठक में श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने भारत के Women-led Development के दृष्टिकोण पर विशेष रूप से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भारत में महिलाओं को केवल कल्याणकारी योजनाओं की लाभार्थी के रूप में देखने के बजाय उन्हें आर्थिक और सामाजिक विकास की सक्रिय भागीदार बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
महिलाओं के Economic Empowerment के लिए Self-Help Groups, महिला संगठनों, Entrepreneurship और Financial Inclusion जैसे माध्यमों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। महिला संगठनों की सामूहिक शक्ति का उपयोग करके महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ना, उन्हें वित्तीय सेवाओं तक पहुंच उपलब्ध कराना और उद्यमिता के लिए आवश्यक अवसर प्रदान करना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
भारत का अनुभव बताता है कि जब महिलाओं को संगठन, प्रशिक्षण, Finance और Market Linkage उपलब्ध होते हैं, तो वे न केवल अपने परिवार की आय बढ़ाती हैं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और समुदाय के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
बैठक में इसी मॉडल को अन्य देशों के साथ साझा करने और आपसी अनुभवों से सीखने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।
Financial Inclusion से आर्थिक आत्मनिर्भरता तक
बैठक का एक महत्वपूर्ण विषय Financial Inclusion रहा। महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए केवल रोजगार उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें Banking, Credit, Insurance, Savings और अन्य Financial Services तक आसान पहुंच देना भी जरूरी है।
महिलाओं को वित्तीय प्रणाली से जोड़ने से उनके लिए छोटे व्यवसाय शुरू करने, मौजूदा कारोबार को विस्तार देने और आर्थिक निर्णयों में अपनी भूमिका बढ़ाने के अवसर पैदा होते हैं।
श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने महिला संगठनों और Entrepreneurship को Financial Inclusion के साथ जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया। वहीं, नाइजीरियाई मंत्री ने भी भारत की उन पहलों में रुचि दिखाई जिनके माध्यम से महिला समूहों, Skill Development और महिला उद्यमिता को वित्तीय सहायता से जोड़ा जा रहा है।
यह सहयोग दोनों देशों में ग्रामीण और निम्न आय वर्ग की महिलाओं के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है, जहां छोटे स्तर की आर्थिक गतिविधियां परिवार की आय का महत्वपूर्ण स्रोत बन सकती हैं।
नाइजीरिया ने भारत की Best Practices में दिखाई रुचि
नाइजीरिया की महिला विषयों और सामाजिक विकास मंत्री इमान सुलेमान-इब्राहिम ने अपने और अपने प्रतिनिधिमंडल के स्वागत के लिए भारत सरकार का आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि नाइजीरिया भारत के अनुभवों और Best Practices से सीखने के लिए उत्सुक है। विशेष रूप से महिला समूहों, Skill Development, Women Entrepreneurship Financing, Nutrition Support, Women-led Governance और Health Care Economy जैसे क्षेत्रों में भारत के अनुभवों को समझने में नाइजीरिया की रुचि दिखाई दी।
भारत और नाइजीरिया दोनों ही बड़े विकासशील देश हैं और दोनों के सामने महिलाओं और बच्चों के सामाजिक-आर्थिक विकास से जुड़ी कई समान चुनौतियां हैं। ऐसे में Policy Experience और Successful Models का आदान-प्रदान दोनों देशों के लिए उपयोगी हो सकता है।
महिला समूह बन सकते हैं आर्थिक बदलाव का माध्यम
बैठक में Women Economic Groups की भूमिका पर विशेष ध्यान दिया गया। महिला समूहों के माध्यम से महिलाओं को एक साथ लाकर उन्हें Training, Finance, Technology और Market Opportunities से जोड़ना आर्थिक बदलाव का प्रभावी माध्यम बन सकता है।
महिला समूहों के जरिए छोटे कारोबार, Food Processing, Handicrafts, Agriculture-based Activities, Retail, Services और अन्य स्थानीय व्यवसायों को बढ़ावा दिया जा सकता है।
ऐसे समूह महिलाओं को केवल रोजगार ही नहीं देते, बल्कि उन्हें Decision Making, Leadership और Community Participation के लिए भी सक्षम बनाते हैं।
भारत में महिला समूहों के अनुभवों से यह संकेत मिलता है कि सामूहिक प्रयास के जरिए महिलाएं छोटे स्तर की आर्थिक गतिविधियों को Sustainable Enterprise में बदल सकती हैं। नाइजीरिया के प्रतिनिधिमंडल ने भी इस क्षेत्र में भारत के अनुभवों से सीखने की इच्छा व्यक्त की।
Care Economy पर बढ़ता वैश्विक फोकस
दोनों मंत्रियों के बीच Care Economy भी चर्चा का प्रमुख विषय रहा। बच्चों, बुजुर्गों, दिव्यांगों और अन्य जरूरतमंद लोगों की देखभाल से जुड़े कार्य पारंपरिक रूप से परिवारों और विशेष रूप से महिलाओं द्वारा किए जाते रहे हैं।
लेकिन आधुनिक अर्थव्यवस्था में Care Work को एक महत्वपूर्ण Economic Sector के रूप में देखा जा रहा है। बेहतर Care Infrastructure, Trained Care Workers और Social Protection Systems महिलाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करने के साथ-साथ परिवारों को आवश्यक सेवाएं उपलब्ध करा सकते हैं।
बैठक में National Care Systems और Social Security के मुद्दों पर चर्चा इस बात का संकेत है कि भारत और नाइजीरिया दोनों Care Economy को सामाजिक विकास और रोजगार के व्यापक दृष्टिकोण से देख रहे हैं।
यदि Care Services को बेहतर Institutional Support, Training और Social Security के साथ जोड़ा जाए, तो इससे महिलाओं पर बिना भुगतान वाले Care Work का बोझ कम करने और उन्हें Labour Force में अधिक सक्रिय रूप से शामिल करने में मदद मिल सकती है।
Clean Energy और महिलाओं की भूमिका
बैठक में Clean Energy भी आपसी हित के क्षेत्र के रूप में सामने आया। ऊर्जा की उपलब्धता का सीधा प्रभाव परिवारों, महिलाओं और बच्चों के जीवन पर पड़ता है।
ग्रामीण और कम आय वाले समुदायों में Clean Energy Solutions को बढ़ावा देने से घरेलू कार्यों में लगने वाला समय और श्रम कम किया जा सकता है। इससे महिलाओं के लिए Education, Skill Development और Income-generating Activities में भाग लेने के अवसर बढ़ सकते हैं।
स्वच्छ ऊर्जा को Women Empowerment के साथ जोड़ना Sustainable Development के व्यापक लक्ष्यों को हासिल करने में भी मदद कर सकता है।
भारत और नाइजीरिया भविष्य में इस क्षेत्र में अपने अनुभवों, Technology Solutions और Policy Approaches को साझा कर सकते हैं।
Social Security को मजबूत करने पर जोर
महिला एवं बाल विकास से जुड़े मुद्दों में Social Protection की भूमिका भी अहम है। आर्थिक या सामाजिक रूप से कमजोर परिवारों में महिलाओं और बच्चों को सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध होने से उनकी Vulnerability कम की जा सकती है।
बैठक में Social Security Systems पर चर्चा का उद्देश्य ऐसी व्यवस्थाओं के अनुभव साझा करना था जो जरूरतमंद परिवारों तक सहायता पहुंचाने में प्रभावी साबित हो सकती हैं।
महिलाओं की Financial Independence, बच्चों की सुरक्षा और परिवारों की सामाजिक स्थिरता एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। इसलिए महिला और बाल विकास नीतियों को अलग-अलग देखने के बजाय Integrated Approach अपनाना महत्वपूर्ण है।
Child Rights और Protection पर विशेष चर्चा
बैठक का दूसरा महत्वपूर्ण आयाम Child Rights और Child Protection रहा। श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने कठिन परिस्थितियों में बच्चों के संरक्षण और सहायता के लिए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की प्रमुख पहलों पर प्रकाश डाला।
बच्चों की सुरक्षा के लिए केवल कानून और संस्थागत व्यवस्था ही पर्याप्त नहीं है। उन्हें सुरक्षित वातावरण, Nutrition, Education, Health Care और Digital Safety भी उपलब्ध कराना आवश्यक है।
बदलते Digital Environment में बच्चों की Online Safety भी एक बड़ी चुनौती बन रही है। इंटरनेट और Digital Platforms के बढ़ते इस्तेमाल के साथ बच्चों को Cyber Risks, Online Abuse और अन्य डिजिटल खतरों से सुरक्षित रखना जरूरी हो गया है।
इसी संदर्भ में बैठक में Digital Safety और Digital Inclusion दोनों पर चर्चा हुई।
Digital Inclusion: नई अर्थव्यवस्था में महिलाओं और बच्चों की भागीदारी
Digital Technology अब शिक्षा, वित्तीय सेवाओं, रोजगार, स्वास्थ्य और सरकारी योजनाओं तक पहुंच का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुकी है। ऐसे में महिलाओं और बच्चों को Digital Ecosystem से जोड़ना विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
महिलाओं के लिए Digital Financial Services, Online Learning, Digital Entrepreneurship और E-Commerce जैसे क्षेत्र नए अवसर पैदा कर सकते हैं। वहीं बच्चों के लिए Digital Education और Online Resources सीखने के नए रास्ते खोल सकते हैं।
लेकिन Digital Inclusion के साथ Digital Safety सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है। इसलिए दोनों देशों के लिए यह क्षेत्र Policy Cooperation और Knowledge Exchange का महत्वपूर्ण विषय बन सकता है।
Nutrition और Health Care Economy भी सहयोग के संभावित क्षेत्र
नाइजीरियाई मंत्री ने भारत की Nutrition Support और Health Care Economy से जुड़ी पहलों में भी रुचि दिखाई। महिलाओं और बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य और पोषण का सीधा संबंध Human Capital Development से है।
विशेष रूप से बच्चों के शुरुआती वर्षों में Nutrition और Health Care पर निवेश उनके भविष्य के विकास के लिए महत्वपूर्ण होता है। इसी तरह महिलाओं का स्वास्थ्य परिवार और समुदाय के सामाजिक-आर्थिक विकास को प्रभावित करता है।
Health Care Economy में रोजगार, प्रशिक्षण और Service Delivery के अवसर भी तेजी से बढ़ रहे हैं। दोनों देशों के बीच इस क्षेत्र में अनुभव साझा करने से Policy और Programme Design को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
Women-led Governance को बढ़ावा देने की जरूरत
बैठक में Women-led Governance भी चर्चा के प्रमुख विषयों में शामिल रहा। महिलाओं की राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी को मजबूत करना Inclusive Development का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
जब महिलाएं Policy Making और Governance में सक्रिय भूमिका निभाती हैं, तो समाज के विभिन्न वर्गों से जुड़े मुद्दों को निर्णय प्रक्रिया में बेहतर प्रतिनिधित्व मिल सकता है।
भारत और नाइजीरिया दोनों देशों में महिलाओं की Leadership और Public Participation बढ़ाने के लिए किए जा रहे प्रयासों और अनुभवों को साझा करना भविष्य में सहयोग का एक महत्वपूर्ण आधार बन सकता है।
भारत-नाइजीरिया संबंधों को नई दिशा देने की संभावना
भारत और नाइजीरिया के संबंध केवल राजनीतिक और आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच शिक्षा, स्वास्थ्य, विकास, Technology और People-to-People Relations जैसे अनेक क्षेत्रों में भी संपर्क हैं।
महिला एवं बाल विकास जैसे सामाजिक क्षेत्र में सहयोग इन संबंधों को एक नई दिशा दे सकता है। विशेष रूप से Global South के देशों के बीच अनुभव साझा करने से समान विकास चुनौतियों के लिए स्थानीय और व्यावहारिक समाधान तलाशने में मदद मिल सकती है।
बैठक के दौरान दोनों मंत्रियों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि Women Economic Groups, Clean Energy, Social Security, Care Economy, Child Rights, Child Protection और Digital Inclusion जैसे क्षेत्रों में दोनों देश मिलकर काम कर सकते हैं।
दोनों पक्षों ने उम्मीद जताई कि यह बैठक भारत और नाइजीरिया के बीच लंबे समय से चले आ रहे संबंधों को और मजबूत करने में योगदान देगी।
महिला और बाल विकास के साझा एजेंडे को मिल सकती है नई गति
भारत और नाइजीरिया की इस बैठक का महत्व केवल एक उच्चस्तरीय Diplomatic Meeting तक सीमित नहीं है। यह ऐसे समय में हुई है जब विश्व के विकासशील देश महिलाओं और बच्चों को विकास की मुख्यधारा में शामिल करने के लिए नए Models और Partnerships तलाश रहे हैं।
महिला आर्थिक समूहों को मजबूत करना, Entrepreneurship को Finance से जोड़ना, Clean Energy को ग्रामीण जीवन से जोड़ना, Care Economy को Institutional Support देना और बच्चों के लिए मजबूत Protection Systems विकसित करना—ये सभी मुद्दे आने वाले समय में Global Development Agenda के महत्वपूर्ण हिस्से रहेंगे।
भारत का Women-led Development का अनुभव और नाइजीरिया की अपनी सामाजिक एवं आर्थिक प्राथमिकताएं एक-दूसरे से सीखने के लिए व्यापक अवसर उपलब्ध कराती हैं।
यदि दोनों देश Policy Dialogue, Technical Cooperation, Skill Development, Research और Best Practice Sharing को आगे बढ़ाते हैं, तो इसका लाभ लाखों महिलाओं और बच्चों तक पहुंच सकता है।
कुल मिलाकर, नई दिल्ली में हुई भारत-नाइजीरिया की यह बैठक महिला सशक्तिकरण, सामाजिक सुरक्षा और बाल संरक्षण को केंद्र में रखकर Global South Cooperation को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखी जा सकती है। आर्थिक अवसरों से लेकर Digital Inclusion तक और Clean Energy से लेकर Care Economy तक, दोनों देशों ने ऐसे क्षेत्रों की पहचान की है जहां सहयोग भविष्य में ठोस परिणाम दे सकता है।
महिलाओं को विकास की active participants और leaders बनाना तथा बच्चों के लिए सुरक्षित, स्वस्थ और समावेशी वातावरण तैयार करना दोनों देशों के साझा विकास लक्ष्यों को नई गति दे सकता है। यही साझी प्रतिबद्धता भारत-नाइजीरिया संबंधों को सामाजिक विकास के क्षेत्र में और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार बन सकती है।

