नारियल की भूसी, जिसे कभी केवल कृषि और घरेलू उपयोग के बाद बचा हुआ अपशिष्ट माना जाता था, आज भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में Entrepreneurship, Employment और Sustainable Livelihood का महत्वपूर्ण आधार बन रही है। नारियल के छिलके से प्राप्त प्राकृतिक रेशा यानी Coir Fibre अब केवल रस्सी और चटाई बनाने तक सीमित नहीं है। Technology, Skill Development और Value Addition के जरिए इससे हस्तशिल्प, बागवानी उत्पाद, जैव-उर्वरक और आधुनिक Packaging Solutions जैसे अनेक उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं।
भारत के प्रमुख नारियल उत्पादक राज्यों में कॉयर उद्योग लंबे समय से ग्रामीण अर्थव्यवस्था का हिस्सा रहा है। लेकिन अब पारंपरिक कॉयर गतिविधियां तेजी से Modern Business Model का रूप ले रही हैं। इस बदलाव में ग्रामीण उद्यमियों, महिला कारीगरों, छोटे निर्माताओं और प्रशिक्षण संस्थानों की अहम भूमिका है। वहीं, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME Ministry), कॉयर बोर्ड और प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) जैसी सरकारी पहलें इस क्षेत्र को वित्तीय, तकनीकी और कौशल संबंधी सहायता उपलब्ध करा रही हैं।
कॉयर क्षेत्र की खासियत यह है कि इसमें स्थानीय स्तर पर उपलब्ध नारियल अपशिष्ट को उपयोगी और बाजार योग्य उत्पादों में बदला जा सकता है। इससे एक ओर Waste Utilization और Circular Economy को बढ़ावा मिलता है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण परिवारों के लिए Income Generation के नए रास्ते खुलते हैं।
कडियाम की अल्लम गौथमी ने कॉयर से खड़ा किया सफल व्यवसाय
आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले के कडियाम की अल्लम गौथमी की कहानी इस बदलाव का एक प्रभावशाली उदाहरण है। उन्होंने नारियल के रेशे और कॉयर अपशिष्ट को एक सफल उद्यम में बदलते हुए न केवल अपना व्यवसाय स्थापित किया, बल्कि बड़ी संख्या में महिलाओं को भी रोजगार और प्रशिक्षण से जोड़ने का काम किया।
गौथमी ने धवलेश्वरम स्थित Coir Board Training Centre से विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसके बाद वर्ष 2024-25 में उन्होंने लगभग 10 लाख रुपये की Project Cost से एडिगो कॉयर प्रोडक्ट्स की स्थापना की। इस उद्यम के लिए उन्हें 6.50 लाख रुपये का Bank Loan मिला और प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम यानी PMEGP के माध्यम से भी सहायता प्राप्त हुई।
आज उनकी इकाई में पर्यावरण-अनुकूल Door Mats, रस्सियां, सजावटी गुड़िया और विभिन्न प्रकार के Handicraft Products तैयार किए जा रहे हैं। इन उत्पादों में पारंपरिक कारीगरी के साथ आधुनिक बाजार की जरूरतों को भी ध्यान में रखा जा रहा है।
गौथमी के उद्यम ने लगभग 35 लाख रुपये का Annual Turnover हासिल किया है और करीब 10 लाख रुपये का लाभ अर्जित किया है। उनकी इकाई ने छह महिलाओं को प्रत्यक्ष रोजगार भी दिया है।
लेकिन इस उद्यम की सबसे बड़ी उपलब्धि केवल इसका कारोबार नहीं है। गौथमी ने करीब 120 महिलाओं को Coir Mat Weaving, Rope Making और Handicraft Production का प्रशिक्षण दिया है। इससे इन महिलाओं को स्थानीय स्तर पर अपनी आजीविका विकसित करने में मदद मिली है।
उनकी सफलता का असर आसपास के क्षेत्रों में भी देखने को मिला है। उनकी पहल से प्रेरित होकर लगभग पांच अतिरिक्त कॉयर इकाइयां स्थापित हुईं, जिन्हें PMEGP के माध्यम से सहायता प्राप्त हुई। इस तरह एक महिला उद्यमी की सफलता ने कई अन्य ग्रामीण परिवारों के लिए Business Opportunity पैदा की।
कॉयर पिथ से जैव-उर्वरक तक: सुरेंद्रन ने खोजा नया बाजार
कॉयर उद्योग में Value Addition का एक अन्य महत्वपूर्ण उदाहरण केरल के कोझिकोड के पी. सुरेंद्रन का है। उन्होंने नारियल के कॉयर अपशिष्ट यानी Coir Pith को Sustainable Agriculture से जोड़ते हुए एक नया व्यवसाय खड़ा किया।
सुरेंद्रन ने नवंबर 2024 में कोझिकोड में संपूर्ण प्लस एग्रो फर्टिलाइजर एंटरप्राइजेज (SAFE) की स्थापना की। इस उद्यम के लिए उन्हें कन्नूर स्थित कॉयर बोर्ड और कलावूर स्थित Central Coir Research Institute (CCRI) से Training और Technical Support मिला।
प्रशिक्षण एवं तकनीकी मार्गदर्शन के बाद उन्होंने Environment-Friendly Coir Pith Bio-Fertilizer का उत्पादन शुरू किया। कॉयर पिथ आधारित उत्पाद मिट्टी की गुणवत्ता, Soil Fertility और Moisture Retention क्षमता को बेहतर बनाने में उपयोगी माने जाते हैं। इस तरह नारियल प्रसंस्करण से निकलने वाले अपशिष्ट को कृषि के लिए उपयोगी Input में बदला जा रहा है।
सिर्फ एक वर्ष के भीतर सुरेंद्रन के व्यवसाय ने 500 से अधिक Customers का आधार तैयार किया। उनकी इकाई ने 20 टन से अधिक जैव-उर्वरक की बिक्री की और करीब 13 लाख रुपये का कारोबार किया। वित्त वर्ष 2024-25 में इस इकाई को लगभग 4 लाख रुपये का लाभ हुआ।
इस उद्यम में पांच कामगार कार्यरत हैं, जिनमें दो महिलाएं शामिल हैं। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा हुए हैं।
सुरेंद्रन की सफलता यह दिखाती है कि Research, Technology और Entrepreneurship के संयोजन से ऐसे Agricultural Waste को भी आर्थिक अवसर में बदला जा सकता है, जिसका पारंपरिक रूप से सीमित मूल्य माना जाता था।
भारत दुनिया का सबसे बड़ा कॉयर उत्पादक
कॉयर भारत के सबसे पुराने Natural Fibres में से एक है। देश में संगठित कॉयर उत्पादन की शुरुआत वर्ष 1859 में केरल के अलाप्पुझा में पहली कॉयर फैक्ट्री की स्थापना के साथ हुई थी। इसके बाद धीरे-धीरे कॉयर उद्योग देश के अन्य प्रमुख नारियल उत्पादक क्षेत्रों तक फैलता गया।
आज भारत दुनिया का सबसे बड़ा कॉयर उत्पादक देश है और Global Coir Fibre Production में इसकी हिस्सेदारी 80 प्रतिशत से अधिक बताई जाती है। यह क्षेत्र विशेष रूप से ग्रामीण और तटीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है।
कॉयर उद्योग की एक बड़ी विशेषता इसका Women Workforce से मजबूत जुड़ाव है। रेशा निकालने और उसकी कताई जैसे कार्यों में लगे लोगों में लगभग 80 प्रतिशत महिलाएं हैं। इसलिए कॉयर सिर्फ एक Fibre Industry नहीं, बल्कि लाखों लोगों की ग्रामीण आजीविका से जुड़ा हुआ क्षेत्र है।
इस Value Chain में Coconut Farmers, Workers, Women Artisans, Cooperatives, Entrepreneurs, Manufacturers और Exporters सभी शामिल हैं। यानी नारियल की खेती से लेकर तैयार उत्पाद की बिक्री और Export तक एक विस्तृत आर्थिक श्रृंखला विकसित होती है।
कच्चे रेशे से High-Value Products तक का सफर
कॉयर की संभावनाएं केवल कच्चे Fibre तक सीमित नहीं हैं। सही Processing, Design और Innovation के जरिए इससे कई प्रकार के High-Value Products तैयार किए जा सकते हैं।
इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- चटाइयां और Door Mats
- रस्सियां और Coir Yarn
- Brushes तथा घरेलू उपयोग के उत्पाद
- Decorative Items और Handicrafts
- Gardening एवं Horticulture Products
- Coir Pith आधारित Bio-Fertilizers
- Environment-Friendly Packaging Solutions
- विभिन्न Industrial Applications
बढ़ती Environmental Awareness के कारण Natural और Biodegradable Products की मांग में भी नए अवसर बन रहे हैं। Plastic के विकल्प तलाशने वाले उद्योगों के लिए कॉयर जैसे प्राकृतिक Fibre भविष्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
यही कारण है कि अब कॉयर को केवल Traditional Craft के नजरिए से नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे Green Economy और Sustainable Manufacturing से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
कॉयर बोर्ड दे रहा Training से Market तक सहायता
कॉयर क्षेत्र को बढ़ावा देने में Coir Board की महत्वपूर्ण भूमिका है। यह MSME Ministry के अधीन एक Statutory Body है, जो कॉयर क्षेत्र के विकास के लिए Skill Development, Technology, Research, Market Promotion, Export Promotion और Welfare से जुड़ी गतिविधियों पर काम करता है।
कॉयर विकास योजना यानी Coir Vikas Yojana (CVY) के तहत Technology and Research, Skill Development, Women Training, Domestic एवं International Market Promotion, Industry Development तथा Worker Welfare जैसे क्षेत्रों में सहायता दी जाती है।
इसका उद्देश्य कॉयर क्षेत्र से जुड़े लोगों को नए Skills उपलब्ध कराना, आधुनिक Technology अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना, Product Quality में सुधार करना और उन्हें बड़े Markets से जोड़ना है।
प्रशिक्षण के माध्यम से ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को Fibre Extraction, Spinning, Mat Making, Handicraft और अन्य उत्पादन तकनीकों की जानकारी दी जाती है। इससे पारंपरिक Knowledge को आधुनिक Production Methods से जोड़ा जा रहा है।
Market Linkage से बढ़ सकता है ग्रामीण कारोबार
किसी भी ग्रामीण उद्योग की सफलता केवल Product बनाने पर निर्भर नहीं करती। उसके लिए Market Access, Branding, Packaging और Customer Reach भी जरूरी हैं। कॉयर क्षेत्र में इस आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए प्रदर्शनियों, मेलों, Showrooms और Export Promotion Activities के जरिए उत्पादकों को बाजार से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
इन गतिविधियों के माध्यम से छोटे उद्यमियों को अपने Products प्रदर्शित करने, नए Buyers से संपर्क करने और Domestic तथा International Markets तक पहुंच बनाने का अवसर मिलता है।
यदि छोटे कॉयर Entrepreneurs Digital Marketing, E-Commerce और Social Media जैसे आधुनिक माध्यमों का प्रभावी उपयोग करें, तो वे स्थानीय बाजार से आगे बढ़कर देश के दूसरे हिस्सों और Global Market तक पहुंच बना सकते हैं।
Innovation से बदल रही कॉयर की पहचान
कॉयर क्षेत्र में Innovation अब नए स्तर पर पहुंच रहा है। केंद्रीय कॉयर अनुसंधान संस्थान ने HDPE Plastic Cups के विकल्प के रूप में Environment-Friendly Coir Rail Wheel Axle Packaging Cups विकसित किए हैं।
यह Innovation इस बात का उदाहरण है कि प्राकृतिक कॉयर Fibre का उपयोग पारंपरिक चटाई और रस्सी से आगे बढ़कर आधुनिक Industrial Packaging में भी किया जा सकता है।
इस तरह के उत्पाद Sustainable Manufacturing को बढ़ावा देते हैं और Plastic-Based Materials पर निर्भरता कम करने की दिशा में संभावनाएं पैदा करते हैं।

